जीवन परिचय

C. P. Radhakrishnan
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श्री चंद्रपुरम पोन्नुसामी (सी.पी.) राधाकृष्णन ने 12 सितंबर 2025 को भारत के उपराष्ट्रपति के पद पर कार्यभार संभाला।

भारत के उपराष्ट्रपति के पद पर नियुक्‍त होने के पहले श्री राधाकृष्णन एक साल से थोड़ा अधिक समय तक के लिए महाराष्ट्र के राज्‍यपाल रहे।  

महाराष्ट्र के राज्यपाल नियुक्त होने से पहले, श्री राधाकृष्णन लगभग डेढ़ साल तक झारखंड के राज्यपाल रहे। इस दौरान, उन्होंने कुछ समय के लिए तेलंगाना के राज्यपाल और पुदुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला।

चार दशक से अधिक समय के अनुभव के साथ, श्री राधाकृष्णन तमिलनाडु की राजनीति और सार्वजनिक जीवन में एक सम्मानित नाम हैं।

श्री राधाकृष्णन का जन्‍म 4 मई 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में हुआ था। इन्‍होंने व्यवसाय प्रशासन (बिजनेस एडमिनिस्‍ट्रेशन) में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

अपने सार्वजनिक जीवन की शुरूआत आरएसएस स्‍वयंसेवक के रूप में करते हुए वर्ष 1974 में वे भारतीय जनसंघ के प्रदेश कार्यकारिणी समिति के सदस्य चुने गए। 

सार्वजनिक जीवन की शुरूआत करने से पहले श्री राधाकृष्णन ने लंबे अरसे तक एक सफल वस्त्र निर्यातक के रूप में काम किया।

वर्ष 1996 में, श्री राधाकृष्णन को तमिलनाडु में भाजपा का सचिव नियुक्त किया गया। उन्हें पहली बार 1998 में कोयंबटूर निर्वाचन क्षेत्र से लोक सभा के लिए चुना गया था। वर्ष 1999 में उन्हें दुबारा लोक सभा के लिए चुना गया।

सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, वे वस्‍त्र संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान की। वे सरकारी उपक्रमों (PSUs) संबंधी संसदीय समिति और वित्त संबंधी परामर्शदात्री समिति के भी सदस्य रहे थे।

वह शेयर बाजार घोटाले की जांच कर रही संसदीय विशेष समिति के भी सदस्य रहे ।

वर्ष 2004 में, श्री राधाकृष्णन ने संसदीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया।

वे ताइवान भेजे जाने हेतु प्रथम संसदीय प्रतिनिधिमंडल के भी सदस्य रहे। वर्ष 2004 और 2007 के बीच, श्री राधाकृष्णन तमिलनाडु के लिए भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष के रूप में कार्यरत रहे। इस पद पर रहते हुए उन्‍होंने 19,000 किलोमीटर दूरी की 'रथ यात्रा' निकाली जो 93 दिनों तक चली।

यह 'रथ यात्रा' उन्‍होंने अपनी मांगो को उजागर करने के लिए निकाली थी, जिनमें सभी भारतीय नदियों को एक साथ जोड़ना, आतंकवाद मिटाना, एक समान नागरिक संहिता लागू करना, अस्पृश्यता को समाप्त करना और मादक पदार्थों की समस्या से निपटने जैसी मांगे शामिल थीं। उन्होंने विभिन्न कारणों के लिए दो और पदयात्राओं का नेतृत्व भी किया।

वर्ष 2016 में, श्री राधाकृष्णन को कॉयर बोर्ड, कोच्चि का अध्‍यक्ष बनाया गया और इस पद पर वे चार साल तक रहे। इस दौरान, उनके नेतृत्व में भारत से कयर निर्यात अपने सर्वकालिक उच्‍च स्तर रु. 2532 करोड़ तक पहुँच गया। वे वर्ष 2020 से 2022 तक केरल के लिए भारतीय जनता पार्टी के अखिल भारतीय प्रभारी रहे।

दिनांक 18 फरवरी, 2023 को श्री राधाकृष्णन को झारखंड राज्‍य का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

इस पद का कार्य करते हुए अपने पहले चार महीनों में, उन्होंने झारखंड के सभी 24 जिलों को दौरा किया, नागरिकों और जिला अधिकारियों के सीधे साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने तेलंगाना के राज्यपाल और पुदुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला।

महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद से, श्री राधाकृष्णन महाराष्ट्र के हर कोने में गए। वे जनता के प्रतिनिधियों, अधिकारियों, व्यवसायी नेताओं के साथ बातचीत करने के साथ साथ समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से मुलाकात की।

राज्यपाल पद पर रहते हुए उन्‍होंने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और इसकी पहुँच बढ़ाने में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने जनजातीय लोगों के कल्याण के क्षेत्र में कई कदम उठाए, विशेष रूप से उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। राज्यपाल ने राज्‍य द्वारा वित्‍तपोषित  महाराष्ट्र की 29 विश्‍वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ 'स्कूल कनेक्ट' कार्यक्रम की प्रगति पर ध्यान दिया ताकि जनजातीय समुदाय की लड़कियों और लड़कों को उच्च शिक्षा प्राप्‍त करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

श्री राधाकृष्णन को खेल-कूद में विशेष रूचि थी। वे अपने कॉलेज में टेबल टेनिस के चैंपियन रहे और इसके साथ ही लंबी दूरी के धावक भी थे। उन्हें क्रिकेट और वॉलीबॉल खेलना भी पसंद था।

श्री राधाकृष्णन ने कई देशों की यात्राएं की जिसमें से अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, पुर्तगाल, नॉर्वे, डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड, बेल्जियम, नीदरलैंड, तुर्की, चीन, मलेशिया, सिंगापुर, ताइवान, थाईलैंड, मिस्र, यूएई, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और जापान शामिल है।