भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने 26 अक्टूबर 2025 को सेशेल्स में भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया ।

सेशेल्‍स | अक्टूबर 26, 2025

भारतीय प्रवासी समुदाय के सम्मानित सदस्यों,
भारत के मित्रगण,
देवियों और सज्जनों,

नमस्‍कार! नमस्ते! वनक्कम! केम छो! नमस्कारम!


मेरे लिए मनोरम सेशेल्स गणराज्य में विशेषकर नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के रूप में महामहिम डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के शपथ ग्रहण समारोह के अवसर पर उपस्थित होना अत्यंत हर्ष और सम्मान की बात है। मैं आप सभी को भारत की जनता और भारत सरकार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ।


मैं इस अवसर पर आप सभी को दीपावली और गुजराती नव वर्ष  ‘बेस्टु वर्ष’ की हार्दिक शुभकामनायें भी देता हूँ, जिनका उत्सव हमने पिछले सप्ताह बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया। मैं कामना करता हॅूं कि दीपों का यह पर्व आपके और सेशेल्स में रहने वाले आपके परिवारों के लिए हर्ष, समृद्धि और सौभाग्य लेकर आए।


आज, मुझे भारतीय समुदाय के लोगों से मिलकर खास तौर पर बहुत खुशी हो रही है क्योंकि आपकी यहाँ मौजूदगी हमारे दोनों देशों के बीच की गहरी दोस्ती की जीती-जागती मिसाल है।आपके योगदानों ने न केवल सेशेल्स के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन को समृद्ध बनाया है, बल्कि व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्रों में भारत–सेशेल्स साझेदारी को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


मैं इस अवसर पर सेशेल्स को चुनावी प्रक्रिया के सफल और शांतिपूर्ण समापन के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। आज सेशेल्स में लोकतंत्र के उत्सव का भी का दिन है और विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश तथा ‘लोकतंत्र की जननी’ भारत को इस अवसर का सहभागी बनने पर गर्व है।


भारत और सेशेल्स के बीच के संबंध ऐतिहासिक हैं। सन् 1770 में सेशेल्स में बसने वाले शुरूआती निवासियों में से पाँच भारतीय भी शामिल थे। पिछले 250 वर्षों के उतार-चढ़ाव भरे दौर में भारत और सेशेल्स का रिश्ता बहुत गहरा है। हम न केवल हिंद महासागर की लहरों से जुड़े हैं, बल्कि हमारा इतिहास भी एक जैसा रहा है और हम दोनों ने उपनिवेशवाद के मुश्किल दौर के साझा अनुभवों को जीया है।


हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध यहाँ बसे भारतीय प्रवासी समुदाय की उपस्थिति तथा लोकतंत्र और बहुलतावाद की हमारी साझा भावना से और अधिक सशक्त एवं सजीव बने हैं।


मुझे यह कहना होगा कि लगभग 120,000 की जनसंख्या होते हुए भी सेशेल्स विविधता वाला एक अद्भूत देश है। भारत के विभिन्न हिस्सों से आए हुए भारतीय प्रवासी समुदाय सेशेल्स की सामाजिक संरचना में भारत की विविधता के रंग और इसकी महक को बखूबी समाहित किया है।


आपमें से कोई गुजरात से है, कोई तमिलनाडु से, तो कोई पंजाब से। कुछ लोग यूपी या बिहार के हैं, और कुछ पारसी, मलयाली या देश के अलग-अलग कोनों से आए हैं। यह समृद्ध विविधता ही हमारी शक्ति है और वह अटूट सूत्र है जो हमें एक संगठित, जीवंत और प्रगतिशील सभ्यता के रूप में पिरोता है। यही हमारी सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय अस्मिता का मुख्य आधार है।


हमारे द्विपक्षीय संबंध पुराने हैं, समय के साथ और मजबूत हुए हैं और बहुआयामी भी हैं। हिंद महासागर का जल  ऐतिहासिक रूप से दोनों राष्‍ट्रों और उनकी जनता के लिए समृद्धि और खुशहाली का स्‍त्रोत रहा है।


भारत अपनी समृद्ध सभ्यतागत विरासत के साथ लंबे समय से हिंद महासागर क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र रहा है। भारत के पश्चिमी और दक्षिणी तटों पर स्थित बंदरगाहों ने यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के साथ रेशम, मसालों और बहुमूल्य रत्नों के व्यापार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सदियों से हिंद महासागर की मानसूनी हवायें केवल वस्तुओं का ही नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति के बीजों का भी आदान-प्रदान दूरस्थ साम्राज्यों के बीच करती रही हैं।


हिंद महासागर क्षेत्र में, प्रधानमंत्री मोदी का 'महासागर' (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए परस्पर और समग्र उन्नति का दृष्टिकोण) एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद महासागर के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सेशेल्स, भारत का विज़न ‘महासागर’ का एक महत्त्वपूर्ण साझेदार है और वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के हमारे सामूहिक प्रयासों में एक प्रमुख सहयोगी के रूप में जुड़ा हुआ है।


वर्तमान में भारत के लगभग 95% माल व्यापार (आयतन के आधार पर) और 80% तेल व्यापार हिंद महासागर  के जरिए होता है जिससे ये समुद्री मार्ग हमारे 1.4 अरब नागरिकों की समृद्धि और कल्याण के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाते हैं।इस महासागर के विस्तृत क्षेत्र में फैले हुए सेशेल्स जैसे द्वीपीय राष्ट्र की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रगति के लिए इन समुन्‍द्री जलों की महत्ता को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते हैं।


साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र को मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और समुद्री डकैती जैसी अवैध गतिविधियों से गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो हमारे नागरिकों की सुरक्षा और हमारे देशों की प्रगति दोनों के लिए खतरा उत्पन्न करती हैं। इसलिए भारत और सेशेल्स के लिए एक खुला, स्थिर और सुरक्षित हिंद महासागर क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य रूप से मिलकर कार्य करें।


मुंबई और सेशेल्स के बीच सीधी हवाई संपर्क सुविधा ने हमारे दोनों देशों की जनता को और निकट लाने के साथ-साथ व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खोले हैं। इन सभी क्षेत्रों में हमारे देशों के बीच सहयोग की असीम संभावनायें निहित हैं, जो न केवल हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सशक्त एवं गहन बनायेंगी, बल्कि हमारी जनता की सुरक्षा, समृद्धि और कल्याण को भी नई दिशा प्रदान करेंगी।


सेशेल्स सरकार और वहाँ की जनता की प्राथमिकताओं के अनुरूप, सेशेल्स के विकासात्मक आकांक्षाओं को सहयोग और समर्थन देने के प्रति भारत पूर्णतः प्रतिबद्ध है।


आज प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के संकल्प के साथ प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत तीव्र गति से प्रगति कर रहा है और आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हो चुका है। आने वाले कुछ वर्षों में भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की पूर्ण संभावना है।


भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) पहल ने न केवल सरकार और नागरिकों के बीच संवाद के स्वरूप को पूरी तरह रूपांतरित कर दिया है बल्कि नागरिकों और व्यवसायों के बीच लेन-देन का तरीका भी मूलभूत रूप से बदल गया है। विश्व के कुल डिजिटल वित्तीय लेन-देन का लगभग 50% भाग आज भारत में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के माध्यम से संपन्न होता है।


भारत का व्यापक अवसंरचना अभियान अपने पूर्ण गति पर है — सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे और जहाज़ निर्माण जैसे क्षेत्रों में अनेक प्रमुख परियोजनायें प्रगति पर हैं। केवल इस वित्तीय वर्ष में ही इन पहलों के लिए 125 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है। इस वर्ष विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 171 करोड़ लोगों को अत्यंत गरीबी रेखा से ऊपर उठाने में सफलता प्राप्त की है। वर्तमान में, भारत की केवल 2.3% जनसंख्या ही अत्यधिक गरीबी की श्रेणी में है।


बहुपक्षीय स्तर पर, वर्ष 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता के दौरान भारत ने हरित विकास और डिजिटल शासन जैसी वैश्विक प्राथमिकताओं पर सहमति बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, साथ ही, भारत ने वैश्विक दक्षिण देशों की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं पर विशेष जोर दिया है। भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के आँकड़े को पार कर चुका है, और आगामी वर्षों में इसके और अधिक बढ़ने की पूर्ण संभावना है।


हाल के वर्षों में भारत ने कैरेबियन, प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्रों के लघु द्वीपीय विकासशील देशों (एसआईडीएस) के साथ अपने सहयोग को और सुदृढ़ किया है। स्वास्थ्य, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, समुद्री संरक्षण, अक्षय ऊर्जा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में की गई पहलों के माध्यम से यह सहयोग सतत विकास और समावेशी साझेदारी के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


पिछले कुछ वर्षों में सेशेल्स ने अपने विकास और प्रगति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। अफ्रीका में आपकी प्रति व्यक्ति जीडीपी सबसे अधिक है। महामारी की चुनौतियों के बाद आपने अपने पर्यटन और मत्स्य उद्योगों को पुनर्जीवित किया है। आपने अपने बाह्य ऋण को सराहनीय रूप से नियंत्रित करते हुए आर्थिक विकास को स्थिरता प्रदान की है, जो प्रशंसनीय है। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में, आपकी दृढ़ता और उद्यमशीलता को भारत प्रशंसा और सम्मान की दृष्टि से देखता है और इसे हम इस क्षेत्र में स्थिरता और शक्ति का एक प्रमुख स्तंभ मानते हैं।


और सेशेल्स में भारतीय प्रवासी समुदाय इस दृढ़ता और स्थिरता का एक महत्त्वपूर्ण आधार स्तंभ है। आपकी लगन, परिश्रम, अनुशासन और विविधता हम सभी के लिए गर्व का विषय है।


सेशेल्स के राष्ट्र-निर्माण में आपका योगदान अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है। इस संदर्भ में, मैं सेशेल्स के निर्माण और सेवा क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय श्रमिकों और पेशेवरों के मौन किंतु निरंतर योगदान की भी सराहना करना चाहूँगा। उनका सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।


भारतीय प्रवासी समुदाय द्वारा निभाए जा रहे सांस्कृतिक और व्यावसायिक संबंध न केवल भारत–सेशेल्स साझेदारी को सशक्त बनाते हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि में भी महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। हम प्रवासी समुदाय को एक सशक्त सेतु के रूप में देखते हैं और उनके साथ मिलकर व्यापार, व्यवसाय तथा सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की आकांक्षा रखते हैं।


सन् 1901 में महात्मा गांधी ने ‘सेशेल्स’ में भारतीय प्रवासी समुदाय की कठिन परिस्थितियों में भी अटूट परिश्रमशीलता और दृढ़ संकल्प की भावना की सराहना की थी। मेरी जानकारी में यह भी लाया गया है कि सेशेल्स से दो प्रवासियों ने भारतीय सम्मान पुरस्कार प्राप्त किए हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में ऐसे और भी अनेक गौरवशाली नाम सेशेल्स से सामने आयेंगे।


नव-निर्वाचित राष्ट्रपति और सरकार के शपथ ग्रहण जैसे इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए मेरी उपस्थिति, सेशेल्स की सरकार और जनता के प्रति भारत के अटूट समर्थन और सद्भावना का प्रतीक है। यह अवसर हमारे साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के उत्सव का है — साथ ही, यह हमारे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक और सुदृढ़ साझेदारी को पुनः पुष्ट करने का भी समय है।


यह अवसर हमारे पारंपरिक सहयोग क्षेत्रों, जैसे समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य, अक्षय ऊर्जा, शिक्षा, व्यापार और संस्कृति, में द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहराई और सुदृढ़ता प्रदान करने का है।


साथ ही, यह समय नई संभावनाओं के आयामों को एक साथ तलाशने का भी है जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, फिनटेक, जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण, आपदा जोखिम प्रबंधन और नीली अर्थव्यवस्था, इन क्षेत्रों में संयुक्त सहयोग से हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हमारी साझेदारी गतिशील, दूरदर्शी और समकालीन अवसरों व चुनौतियों के प्रति उत्तरदायी बनी रहे।


दस वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ऐतिहासिक हिंद महासागर दौरे की शुरुआत यहीं, सेशेल्स से की थी। यह भारत के किसी प्रधानमंत्री की 34 वर्षों के अंतराल के बाद इस घनिष्ठ समुद्री पड़ोसी और साझेदार देश की पहली यात्रा थी।


अंत में, मैं प्रधानमंत्री मोदी के उन प्रेरणादायक शब्दों को स्मरण करना चाहूँगा। उन्‍होंने कहा है कि  "हम दो देशों के बीच एक असीम समंदर है, पर यह समंदर हमें बांटता नहीं, बल्कि हमें आपस में जोड़ता है, हमारे संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है।


भारत सेशेल्स के साथ मिलकर हमारी साझेदारी में एक नया अध्याय लिखने की ओर अग्रसर है। मैं आप सभी को और आपके परिवारों को आने वाले वर्षों में बेहतर स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ।


भारत–सेशेल्स साझेदारी अमर रहे!


धन्यवाद!