विकसित भारत के निर्माण की राह

नई दिल्ली
मई 26, 2026

विकसित भारत के निर्माण की राह


सीपी राधाकृष्णन

निरंतर विकास का युग बनाने के लिए सरकार और जनता, दोनों का साझा उत्साह ही देश की प्रगति का कारण है

          जब मैं तिरुप्पुर के स्कूल में पढ़ता था, तब मेरे मन में अक्सर ये सवाल उठते थे कि भारत अपनी महानता कब वापस पाएगा? हमारे गरीब और वंचित भाई - बहनों को सम्मानजनक जीवन कब मिलेगा? मुझे खुशी है कि किशोरावस्था में मेरे मन में जो विचार थे, वे अब साकार हो रहे हैं। मैं अक्सर खुद को स्वामी विवेकानंद के इन शब्दों की याद दिलाता था, 'उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको।' स्वामीजी के ये उद्‌गार हर व्यक्ति में देशभक्ति और समर्पण की भावना जगाने की अपार शक्ति रखते हैं। मेरा हमेशा यह विश्वास रहा कि जब भारत अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ेगा, तब वह पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करने वाला राष्ट्र बनकर उभरेगा। अब हमें अपनी आंखों के सामने तिरुवल्लुवर के इन शब्दों की सच्चाई देखने का अवसर मिल रहा है 'जो अपने संकल्प में अडिग रहते हैं, वे ठीक वही हासिल करते हैं, जिसकी उन्होंने कल्पना की होती है।' पिछले एक दशक में मुझे यह देखकर खुशी होती है कि हमारा देश जबरदस्त ऊर्जा और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।


       आज जब पूरी दुनिया आर्थिक मंदी और अनिश्चितताओं से जूझ रही है, तब भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती और तेजी से आगे बढ़ रही है। इस दौर को निरंतर विकास का युग बनाने के लिए सरकार और जनता दोनों का साझा उत्साह ही इस प्रगति का कारण है। एक समय कमजोर अर्थव्यवस्था माने जाने वाला हमारा देश आज चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही तीसरी बड़ी आर्थिकी बनने की दिशा में अग्रसर है। हमारा आर्थिक विकास समावेशी रहा है। पिछले एक दशक में लगभग 25 करोड़ भारतवासी अत्यधिक गरीबी से बाहर निकलकर सम्मानपूर्ण जीवन जीने में सक्षम हुए हैं। अब तक भारत में गरीब और बेघर लोगों के लिए लगभग चार करोड़ पक्के घर बनाए जा चुके हैं। 12 करोड़ से अधिक लोगों को पाइप से पीने के पानी का कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को खाद्यान्न मुफ्त दिया जा रहा है, जिस पर 2.3 लाख करोड़ रुपये का खर्च किया जा रहा है। मैंने गांवों में लोगों को इलाज की सुविधा न मिलने के कारण परेशान होते देखा है। उनके परिवारों की पीड़ा देखकर मुझे दुख होता था। आज देश इस संकल्प के साथ आयुष्मान भारत योजना चला रहा है कि स्वास्थ्य सेवाएं हर व्यक्ति तक पहुंचें। इसी का परिणाम है कि अब 44 करोड़ से अधिक लोगों को पीएम आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिल रहा है। केवल पिछले एक वर्ष में ही 2.5 करोड़ लोगों ने इस योजना के अंतर्गत मुफ्त इलाज प्राप्त किया है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। तीन करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी बनकर अपना जीवन संवार चुकी हैं। महिलाओं के दैनिक जीवन को आसान बनाने और उनके स्वास्थ्य की चिंता करते हुए लगभग दो करोड़ नए एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद और राज्य विधानसभाओं में आधी आबादी की भागीदारी को और सशक्त बनाएगा ।


प्री-मैट्रिक और पोस्ट- मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं तथा एकलव्य माडल आवासीय विद्यालयों ने क्रमशः अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को बहुत लाभ पहुंचाया है। युवा शक्ति के लिए पिछले दस वर्षों में ही 13 नए आइआइटी स्थापित किए गए हैं। आइआइएम की संख्या 13 से बढ़कर 21 हो गई है। एम्स की संख्या सात से बढ़कर 23 हो चुकी है। मेडिकल कालेजों की संख्या भी बढ़कर 823 हो गई है। यह गर्व की बात है कि मेडिकल छात्रों के लिए सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,29,603 हो गई है। हम विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारतीय रेलवे का लगभग 99 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है। वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों की संख्या बढ़ रही है। हवाई अड्‌डों की संख्या भी 74 से बढ़कर 163 हो गई है और उड़ान योजना के तहत आम लोगों के लिए हवाई यात्रा सुलभ हुई है। नए पंबन ब्रिज से लेकर चिनाब ब्रिज हो या बोगीबील पुल, भारत अब आधुनिक बुनियादी ढांचे के नए आयाम स्थापित कर रहा है। जो सीमावर्ती गांव कभी भारत के अंतिम गांव माने जाते थे, वे अब देश के प्रथम गांव बन चुके हैं और वाइब्रेंट विलेज स्कीम के माध्यम से उनका विकास किया जा रहा है।


    चंद्रयान-3 की सफल लॉचिंग ने भारत को उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान के नए युग में पहुंचा दिया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआइ के क्षेत्र में वैश्विक कंपनियां भारत को अपना केंद्र बना रही हैं, जिससे निवेश में कई गुना वृद्धि हुई है। भारत अब सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के लिए एक माडल बनकर उभर रहा है। मोबाइल फोन उत्पादन में भी हमने विश्व में दूसरा स्थान हासिल किया है। जो भारत कभी मोबाइल फोन आयात करता था, वही आज 300 करोड़ डालर के मोबाइल फोन निर्यात करने वाला देश बन चुका है। ये सभी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव बनेंगी। कई दशकों तक देश ने केवल आतंकवाद ही नहीं, बल्कि उग्रवाद और वामपंथी चरमपंथ जैसी चुनौतियों का भी सामना किया है। साहसिक नीतिगत फैसलों और कानून के सख्त पालन के माध्यम से आज देश में शांति स्थापित हुई है और इन क्षेत्रों में विकास के द्वार खुले हैं।


    हमने यह लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2047 तक यानी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक, भारत एक अग्रणी वैश्विक शक्ति बने और दुनिया का मार्गदर्शन करने की स्थिति में पहुंचे। कठिन परिश्रम का यह दौर ही अमृतकाल है। जिस प्रकार स्वतंत्रता सेनानियों के हृदय में आजादी की प्यास थी, उसी तरह आज के युवाओं के मन में राष्ट्र विकास का संकल्प होना चाहिए। इस अमृतकाल में यदि युवाओं के विचार और प्रयास देशभक्ति, उच्च आदर्शों और श्रेष्ठ चरित्र के साथ आगे बढ़ेंगे, तब हम 2047 में एक विकसित भारत का सपना साकार होते देख सकेंगे।

 

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