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    उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने केरल कौमुदी के 115वें स्थापना दिवस समारोह की गरिमा बढ़ाई

    प्रकाशित तिथि : अगस्त 30, 2026
    Vice President Shri C. P. Radhakrishnan graced the 115th Anniversary Celebrations of Kerala Kaumudi at Alappuzha on 30.08.2026

    उपराष्ट्रपति ने कहा- केरल कौमुदी के 115 वर्ष विश्वास, साहस और विचारों की शक्ति का प्रमाण हैं

    उपराष्ट्रपति ने एआई युग में विश्वसनीय, रचनात्मक और जिम्मेदार पत्रकारिता का आह्वान किया

    उपराष्ट्रपति ने कहा- पत्रकारिता का उद्देश्य नागरिकों को सूचित करना, प्रेरित करना और सशक्त बनाना है

    जनता का विश्वास किसी भी समाचार पत्र की सबसे बड़ी संपत्ति है

    उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज अलप्पुझा में केरल कौमुदी के 115वीं वर्षगांठ समारोह की गरिमा बढ़ाई। उपराष्‍ट्रपति ने इस अवसर पर 115 वर्षों के इस सफर को विश्वास, साहस और विचारों की स्थायी शक्ति का प्रमाण बताया।

    श्री सी.वी. कुन्हीरामन द्वारा 1911 में स्थापित केरल कौमुदी की विरासत को याद करते हुए, उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि इस समाचार पत्र ने सामाजिक जागृति और वंचित और शोषित लोगों की आवाज उठाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    केरलम के लोगों को उनके राज्य का नाम बदलने पर बधाई देते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने याद दिलाया कि जब 12 अगस्त, 2026 को विधेयक पारित हुआ था, तब वे राज्यसभा की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सदस्यों की खुशी एक ऐतिहासिक त्रुटि के सुधार को दर्शाती है।

    श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि आदि शंकराचार्य का एकता का संदेश, श्री नारायण गुरु का समानता का संदेश और मन्नथु पद्मनाभन का शिक्षा में योगदान भारत के लिए केरलम के महान योगदानों में शामिल है।

    उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि पत्रकारिता भले ही प्रिंट मीडिया से टेलीविजन, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ चुकी हो, लेकिन विश्वसनीय जानकारी और पत्रकारिता के नैतिक मूल्य सर्वोपरि बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाचार पत्र की सबसे बड़ी संपत्ति जनता का विश्वास है, जो सटीकता, निष्पक्षता, स्वतंत्रता और जवाबदेही के माध्यम से अर्जित किया जाता है।

    रचनात्मक पत्रकारिता का आह्वान करते हुए, श्री सीपी राधाकृष्णन ने मीडिया से नवाचार, वैज्ञानिक उपलब्धियों, करुणा, सामुदायिक सेवा और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन को उजागर करने का आग्रह किया। इसका उद्देश्‍य समाज को शिक्षित और नागरिकों को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करना है।

    उपराष्‍ट्रपति ने विकास और पर्यावरण सम्‍बंधी चिंताओं के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने वास्तविक समस्याओं का समाधान व्यावहारिक उपायों के माध्यम से करने और हर मुद्दे का राजनीतिकरण करके या विकास का अंधाधुंध विरोध न करने पर बल दिया। नदियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समय पर और उचित उपायों के माध्यम से उनकी गहराई और स्वास्थ्य को बनाए रखा जाना चाहिए।

    उन्होंने आशा व्यक्त की कि केरल कौमुदी पत्रकारिता की नींव के रूप में सत्य, विश्वसनीयता और जनविश्वास को बनाए रखना जारी रखेगा और मलयालम पत्रकारिता की एक सशक्त आवाज बनी रहेगा।

    इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने केरल कौमुदी उत्कृष्टता पुरस्कार भी प्रदान किए।

    केरल के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, केरल सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री रोजी एम. जॉन, अलप्पुझा विधायक श्री एडी थॉमस, चथन्नूर विधायक श्री बीबी गोपकुमार, केरल कौमुदी के मुख्य संपादक श्री दीपू रवि, श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव श्री वेल्लापल्ली नटेसन और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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