8 अक्टूबर, 2019 को नई दिल्ली में रामलीला दशहरा समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | अक्टूबर 8, 2019

मुझे यहां श्री धर्मिक लीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला दशहरा समारोह में आकर प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है।

मैं पूरे देश में बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाये जाने वाले दशहरे के रंगारंग त्यौहार के शुभ अवसर पर देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं ।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, आज के ही दिन भगवान राम ने राक्षस राजा रावण को परास्त किया था। यह भी माना जाता है कि आज ही के दिन देवी दुर्गा ने दुनिया को राक्षस महिषासुर से मुक्ति दिलायी थी।

आप जिस भी महाकाव्य में विश्वास करते हों, यह स्पष्ट है कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत और पाप पर नेकी और सद्गुणों की विजय का प्रतीक है।

यह त्यौहार हम सभी को अटल प्रतिबद्धता के साथ सच्चाई के मार्ग पर अग्रसर होने का स्मरण कराता है। आज जब हम रावण के पुतलों को जलाएंगे, आइए हम इसके साथ ही हमारे भीतर सुषुप्त सभी राक्षसी प्रवृत्तियों को जलाएं।

मेरे लिए, दशहरा शाश्वत मानवीय मूल्यों और नैतिकता का उत्सव है। यह "अधर्म" पर "धर्म" की जीत का उत्सव है।

राम को "धर्म", अथवा न्यायसंगत व्यवहार का अवतार माना जाता है।

भगवान राम का राज्य कई मायनों में एक आदर्श राज्य था।

महात्मा गांधी, जिनकी 150 वीं जयंती इस वर्ष दुनिया भर में मनाई जा रही है, का सपना था कि भारत राम राज्य के लिए लक्ष्य निर्धारित करे।

1929 में 'यंग इंडिया' में लिखते हुए, गांधीजी ने कहा था: "चाहे मेरी कल्पना के राम कभी इस धरती पर रहे हों, या नहीं, रामायण का प्राचीन आदर्श निस्संदेह सच्चे लोकतंत्रों में से एक है, जिसमें गरीब भी लंबी और महंगी प्रक्रिया के बिना शीघ्रता से न्याय मिलने के प्रति आश्वस्त होता था। ”

न्याय, सुशासन और लोगों के कल्याण के लिए वही दृढ़ संकल्प हमें एक राष्ट्र के रूप में हमारी यात्रा के लिए प्रेरित करे और सभी मोर्चों पर तेजी से प्रगति करने में हमारी मदद करे।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

त्यौहार हमारे देश की मिली जुली संस्कृति और समृद्ध विरासत और इसकी परंपराओं को दर्शाते हैं। वे खुशी का प्रसार करते हैं और एकता को बढ़ावा देने के साथ ही मनुष्यों और प्रकृति के घनिष्ठ संबंध को सुदृढ़ करते हैं।

भारत की रामलीला एक लोक परंपरा है जिसे यूनेस्को ने विश्व की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के एक भाग के रूप में मान्यता दी है।

प्राचीन काल से, भगवान राम की गौरवशाली कहानियाँ समूचे दक्षिण पूर्व एशिया में फैली हुई हैं।

निस्संदेह, रामायण संपूर्ण मानवता की विरासत है। हमें इस अमर महाकाव्य के प्रति अपनी समझ को परिरक्षित करने, उसका प्रचार-प्रसार करने और गहरा करने के लिए सर्वोत्तम प्रयास करने चाहिए।

रामायण ने भारतीय चेतना पर गहरी छाप छोड़ी है। देशभर में लोग राम को अपनाते हैं। वे राम कथा से करीब से जुड़े हुए हैं और उसके साथ अपनी पहचान बनाते हैं।" और यह परंपरा अभी भी जीवित है और अनवरत है।

आज, जब हम बुराई के विनाश के प्रतीक रावण के पुतले को जलाने के लिए यहां इकट्ठा हुए हैं, आइये थोडा रुक कर यह सोचे कि रामायण के बुनियादी मूल्य क्या हैं।

रामायण महाकाव्य हमें दुनिया, समाज और परिवार के प्रति हमारे कर्तव्य की याद दिलाता है। रामायण मनुष्य के रिश्ते को एक दूसरे के साथ और धरती माँ, प्रकृति, पक्षियों और जानवरों के साथ परिभाषित करती है।

इस संदेश की विश्व शांति और समृद्धि के लिए विकट चुनौतियों के वर्तमान वैश्विक संदर्भ में नई प्रासंगिकता है।

हम राम के जीवन से सीख लेने और एक साथ रहने की कला को परिपूर्ण करने तथा शांति और समावेशी विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का बेहतर प्रयास करेंगे।

मैं एक बार फिर दशहरे के उत्सव के अवसर पर आप सभी को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। मैं कामना करता हूँ कि यह त्यौहार हमारे देश और दुनिया के लिए खुशी, शांति और समृद्धि लाए।

धन्यवाद!

जय हिन्द!