6 अक्तूबर, 2017 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में रक्षा अवसंरचना आयोजना और प्रबंध परिषद, रेल मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय तथा नीति आयोग द्वारा आयोजित रेलवे और मेट्रो परियोजनाओं 2017 में प्रौद्योगिकीय प्रगति के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के

नई दिल्ली | अक्टूबर 6, 2017

रेलवे और मेट्रो में प्रौद्योगिकीय प्रगति पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में इस महती सभा को संबोधित करते हुए मैं हर्ष का अनुभव कर रहा हूं।

भारतीय रेलवे विशुद्ध रूप से 1853 में एक औपनिवेशिक परियोजना के रूप में अपने सूत्रपात से लेकर आज दुनिया में सबसे बड़े रेल नेटवर्क तथा भारत की प्रगति और विकास की गाथा के एक महत्वपूर्ण आर्थिक संवाहक के रूप में उभरा है। ऐसा अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में भारतीय रेल विश्व में तीसरी सबसे बड़ी रेलवे प्रणाली होगी जो वैश्विक बाजार का 10 प्रतिशत हिस्सा होगा।

अपने व्यापक नेटवर्क से भारतीय रेलवे अल्प और लंबी दूरी वाली दोनों प्रकार की यात्रा करने वाले निम्न, मध्यम और उच्च मध्यम वर्गों की आवश्यकताओं को पूरा करता है। यह सबसे बड़े सरकारी नियोक्ताओं में से भी एक है तथा अग्रवर्ती और पश्चवर्ती संपर्कों के माध्यम से अनौपचारिक रोजगार सृजित करता है।

रेल इतिहासकार और पत्रकार क्रिश्चियन वोल्मर ने एक लेख में रेलवे द्वारा निभाई गई परिवर्तनकारी भूमिका को सारगर्भित रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा: "भारत के अलावा कहीं भी रेलवे राष्ट्र की छवि से इतने अमिट रूप से जुड़ा हुआ नहीं है। जिस प्रकार से पृथ्वी पर भारत जितनी व्यापक सांस्कृतिक, जातीय और नस्लीय मिश्रण वाला कोई देश नहीं है, उसी तरह ही ऐसी अन्य कोई रेलवे व्यवस्था भी नहीं है जिसने ऐसी बुनियादी भूमिका निभाई है और अभी भी महत्वपूर्ण ढंग से निभा रही है।"

भारतीय रेलवे अपने सिग्नलिंग और दूरसंचार नेटवर्क सहित लगभग 8,000 रेलवे स्टेशनों और 100,000 पुलों को शामिल करते हुए 64,000 किलोमीटर के व्यापक रेलपथ के नेटवर्क के माध्यम से इस विशाल देश को जोड़ता है। यह प्रतिदिन लगभग दो करोड़ या 20 मिलियन यात्रियों को परिवहन सेवाएं प्रदान करता है। प्रतिदिन 20,000 रेलगाड़ियां भारत के कोने-कोने को पार करती हैं और एक वर्ष में लगभग 700 करोड़ (7 बिलियन) लोगों को सेवाएं प्रदान करती है और 1000 लाख मी. टन (अरब टन) से अधिक माल का परिवहन करती हैं।

अगले कुछ सालों में यात्रियों की संख्या तीस लाख तक पहुंचने और निकट भविष्य में प्रतिदिन माल के परिवहन की मांग चार लाख टन तक पंहुचने का अनुमान है, इसके लिए रेलवे बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए तैयार है।

मुझे बताया गया है कि अगले पांच सालों में रेलवे में विभिन्न परियोजनाओं पर 8 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई गई है।

भारत में तीव्र गति से होने वाले शहरीकरण से अपेक्षाकृत अधिक तेज गति से आवाजाही और स्थायी विकास सुनिश्चित करने के लिए कुशल और कम लागत वाली परिवहन व्यवस्था की आवश्यकता महत्वपूर्ण है।

शहरों में परिवहन की बढ़ती मांग को पूरा करने के एक हिस्से के रूप में, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु, कोच्चि, लखनऊ और मुंबई में पहले से ही चल रही मेट्रो के अलावा कई नई मेट्रो रेल परियोजनाएं निष्पादन के विभिन्न चरणों में हैं। अन्यई स्थानों में अहमदाबाद, हैदराबाद, नागपुर, नोएडा, नवी मुंबई और पुणे में मेट्रो का निर्माण हो रहा है। कई अन्य परियोजनाएं विचाराधीन और योजनाधीन हैं। जब विभिन्न मेट्रो चालू हो जाएंगी तो अंतर-शहरी गतिशीलता में कई गुना बढ़ोतरी हो जाएगी।

मैं यह भी समझता हूं कि पारगमन उन्मुखी विकास (ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट) जैसी नई अवधारणाओं का प्रयास किया जा रहा है, जिससे मेट्रो स्टेशनों के आसपास रहने वाले लोगों के जीवन में बड़े पैमाने पर सुधार होगा।

अत: मित्रो, भारतीय रेलवे को इस बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए बहुत सावधानीपूर्वक योजना बनानी होगी। इसे वर्तमान में दुनिया भर में उपलब्ध प्रौद्योगिकियों और नवाचारी प्रणालियों का अध्ययन करना होगा। इसे भविष्योन्मुखी और दक्ष बनना होगा और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाना होगा जिससे हमारे देश की प्रेरणादायक जनसंख्या को सेवा प्रदान की जा सके। इस पृष्ठभूमि में, यह सम्मेलन अत्यंत सामयिक है।

मुझे खुशी है कि यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन उन प्रौद्योगिकियों की मेजबानी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जो न केवल सेवाओं को सुधारने बल्कि यात्रियों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

विश्व में आई सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति, जिसके लिए भारत भी प्रमुख योगदानकर्ता रहा है, से सिग्नलिंग, संचार और सुरक्षा की दक्षता में सुधार होगा और सुपरिचित परिवहन प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में मदद मिलेगी।

मुझे खुशी है कि 'मैग्लेव', जिसे चुंबकीय उत्तोलन रेलगाड़ी भी कहा जाता है, के आविष्कारक हमारे बीच उपस्थित हैं। मैग्लेव रेलगाड़ियां तीव्र गति वाली रेलगाड़ियां हैं। मैग्लेव रेलगाड़ियां चुंबकीय प्रतिकर्षण के बुनियादी सिद्धांत का उपयोग करते हुए एक निर्देशित मार्ग पर तैरती हैं। यह तकनीक वस्तुत: हाई स्पीड रेलवे की तकनीक से स्पष्ट तौर पर आगे है। हाल ही में हमने उच्च गति 'बुलेट ट्रेन' चलाने के लिए जापान के साथ करार किया है।

मुझे खुशी है कि आम आदमी के कल्याण के लिए प्रौद्योगिकी का दोहन किया जा रहा है। भारतीय लोकाचार में हम मानते हैं कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के माध्यम हैं और हम "बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय" की बात करते हैं, जिसका अर्थ है कि हमारा लक्ष्य बड़े पैमाने पर मानवता की भलाई करना इस ग्रह की संपूर्ण आबादी की खुशी का ध्यान रखना भी है। हम यह भी मानते हैं कि यदि हम मुक्त रूप से नए विचारों और अवधारणाओं को अपनाएं, चाहे वे देश के भीतर से उपजें या विदेश में, तो हम इसे संभव कर सकते हैं।

भारत के प्राचीन दूरदर्शियों ने इस संवेदी दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति की थी, जब उन्होंने कहा था: "आ नो भद्रा: कृतवो यंतु विश्वत:" (हमें सभी दिशाओं से उत्तम विचार मिलते रहें)। हमें ज्ञान और विवेक के इस साझे भंडार में योगदान देते रहना जारी रखना चाहिए।

यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा में सुधार लाने और उनके अनुभवों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी एक संभावित सहायक भी है। मुझे उम्मीद है कि इस सम्मेलन में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से इस संबंध में तैयार की गई कुछ नई जानकारियां उपलब्ध होंगी।

हमारी रेल प्रणाली के प्रबंधकों को अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन करने के लिए हर अवसर का उपयोग करना चाहिए। यहां तक कि संसार की सबसे अच्छी प्रणाली को भी निरंतर सीखना और कार्य को अलग ढंग से करना पड़ता है ताकि जनता की सेवा बेहतर तरीके से की जा सके।

मुझे विश्वास है कि लगभग आठ लाख करोड़ के योजनाबद्ध निवेश से, रेल अवसंरचना में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति से तथा जीएसटी के कार्यान्वयन से भारतीय रेलवे को विशेष रूप से आने वाले वर्षों में लंबी दूरी के परिवहन में लाभ होगा। प्रबंधकीय उत्कृष्टता और प्रौद्योगिकी मिलकर एक नए पथ का निर्माण कर सकते हैं।

मैं आज इस अवसर पर यहां एकत्रित हुए सभी विशेषज्ञों का स्वागत करता हूं, आयोजकों को बधाई देता हूं और सम्मेलन की शानदार सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

मुझे आशा है कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं और विचार-विमर्श से कई आधुनिक रेल प्रणालियों के निर्माण के लिए एक ऐसा द्रुतगामी दृष्टिकोण निकलेगा जिससे भारत और शेष विश्व की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

मैं अपनी बात इस उत्कट इच्छा और ऋग्वेद के 10वें मंडल की ऋचा से समाप्त करना चाहूंगा जिसमें इस बात पर बल दिया गया है कि हमें इस ज्ञान यज्ञ - सतत आधार पर विचारों के मंथन और रचनात्मक विचारों को साझा करना - को इस साझा उद्देश्य - हम सभी की इच्छा प्रत्येक के लिए खुशहाल विश्व का सृजन लगातार किस प्रकार जारी रखा जाए :

“समानी व आकूतिः समानी हृदयानि व:।
समानमस्तु वो मनो यथा वः ससुहासति।।"

"हमारे इरादे और आकांक्षाएं एकसमान हों, ताकि एक साझा उद्देश्य हम सभी को एकजुट कर सके"।

जय हिन्द।