4 अक्तूबर, 2017 को शार, श्रीहरिकोटा में विश्व अंतरिक्ष सप्ताह समारोह के उद्घाटन के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का अभिभाषण

आन्ध्र प्रदेश | अक्टूबर 4, 2017

इसरो के अध्यक्ष श्री किरण कुमार, विशिष्ट वैज्ञानिकगण, भाइयो और बहनो!

जब मैं श्रीहरिकोटा के इस व्यस्त अंतरिक्ष पत्तन पर उतरता हूं, तो मेरा हृदय गर्व से भर जाता है। जब देश अंतरिक्ष की खोज में नई ऊंचाइयों को पाने के लिए अग्रसर हो रहा है, यह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की दक्षता का प्रतीक है। यह अनेक दूरदर्शी व्यक्तियों, हजारों अभियंताओं और वैज्ञानिकों, जिन्होंने इसे संभव किया और जो सपने देखते हैं और उन सपने को साकार करते हैं, के प्रयासों का जीवन्त स्मारक है।

वस्तुत: यहां आकर मुझे दोगुनी खुशी हो रही है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात यह रॉकेट प्रक्षेपण स्थल मेरे गृह जिले नैल्लोर में अवस्थित है।

यहां आते समय मैं यह सोच रहा था कि ब्रह्मांड विज्ञान, ब्रह्मांड के सृजन, सूर्य, चन्द्रमा, तारों, आकाशगंगाओं और ग्रहों ने किस प्रकार अनंत काल से मनुष्य को आकर्षित किया है।

वस्तुत: समय और अंतरिक्ष, ब्रह्मांड विज्ञान, ब्रह्मांड के सृजन की अवधारणा भारतीयों के लिए नयी नहीं हैं। सुविख्यात खगोलविद कार्ल सगऩ ने यह बताया कि हिंदू धर्म एकमात्र ऐसा धर्म है जिसमें समय के पैमाने नि:संदेह संयोगवश आधुनिक वैज्ञानिक ब्रह्मांड विज्ञान के अनुरूप हैं। सगन ने कहा कि "इसके चक्र सामान्य दिन और रात से लेकर ब्रह्मा के दिन और रात तक जो 8.64 खरब वर्ष लंबा है, घूमते हैं। यह अंतराल पृथ्वी या सूर्य की आयु से भी लंबा और महाविस्फोट के समय से लगभग आधा समय है।" भारत और अन्य देशों के अनेक अन्य विद्वानों और वैज्ञानिकों ने प्राचीन भारत में विज्ञान की भूमिका का अध्ययन किया।

गणित के फ्रांसीसी इतिहासकार जॉर्ज इफराह, जो 'यूनिवर्सल हिस्ट्री ऑफ नम्बर्स' पुस्तक के लेखक हैं, ने कहा था: "भारतीयों ने हमेशा गणनाओं और संख्याओं के अध्ययन के प्रति ऐसी असाधारण रुचि, सहजता और अधिकार दिखाया है जैसा इतिहास में किसी अन्य सभ्यता ने नहीं दिखाया। यहां तक कि भारतीय संस्कृति, संख्या विज्ञान को अपनी कलाओं में सर्वश्रेष्ठ कला मानती थी। यूरोप के निवासियों से एक हजार वर्ष पूर्व भारतीय जानते थे कि शून्य और अनंत परस्पर विपरीत अवधारणाएं हैं।"

1963 में थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लाँच स्टेशन (टीईआरएलएस) से पहले ध्वनि रॉकेट के प्रक्षेपण और 1975 में प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट के प्रक्षेपण के नन्हें कदमों से लेकर आज तक भारत ने अत्यधिक प्रगति की है और आज प्रो. विक्रम साराभाई, प्रो . सतीश धवन और पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे दूरदर्शी व्यक्तियों के योगदान के कारण भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहे अग्रणी देशों में से एक देश के रूप में उभरा है। 104 उपग्रहों को एक ही बार में अपने कक्ष में स्थापित करके और इससे पूर्व इस वर्ष 3136 किग्रा वजन वाले सबसे भारी भारतीय उपग्रह जीसैट - 19 को अपने कक्ष में स्थापित करके भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों ने न केवल देश को गौरवान्वित किया है, बल्कि विश्व ने भी इन उपलब्धियों को संज्ञान में लिया है। यह केवल प्रौद्योगिकीय विकास की बात ही नहीं है, बल्कि विकसित देशों के ऐसे मिशनों की तुलना में अत्यधिक कम कीमत पर एक के बाद एक प्रक्षेपण को सफलतापूर्वक पूरा किए जाने से प्रत्येक भारतीय गौरवान्वित हुआ है। इसरो द्वारा पूरे किए गए मिशनों में 28 देशों के 209 विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित किए गए थे।

इसरो के वैज्ञानिकों ने अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह की कक्षा में अंतरिक्ष यान स्थापित कर एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जोकि अन्य देशों के वैज्ञानिक नहीं कर पाए हैं - यह वास्तव में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है! कम लागत के संबंध में न केवल मेरे मन में बल्कि प्रत्येक भारतीय के मन में जो बात आती है, वह है प्रतिष्ठित मंगल ऑर्बिटर मिशन, जिससे भारत अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों की तुलना में कमतर लागत पर लाल ग्रह तक पहुंचा है। पहले ही प्रयास में ऐसी सफलता सचमुच एक अद्वितीय उपलब्धि है। मैं इस ऐतिहासिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आप सबके द्वारा किए गए समर्पित प्रयासों की सराहना करता हूं। मुझे हार्दिक प्रसन्नता है कि इस मिशन को सफल बनाने वाले आपके अध्यक्ष श्री ए.एस. किरण कुमार और आपके निदेशक श्री पी. कुन्हीकृष्णन आज आपके साथ हैं जो आपको इससे भी अधिक ऊंचाईयों तक ले जाएंगे और राष्ट्र के लिए अधिकाधिक उपलब्धियां हासिल करेंगे। कुछ दिन पहले ही मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) ने तीन वर्ष पूरे किये हैं।

चन्द्रयान 1 द्वारा चन्द्रमा पर जल की खोज दूसरी गौरवपूर्ण उपलब्धि है।

आज, तकली के आकार के द्वीप में स्थित यह अंतरिक्ष पत्तन विश्व के सर्वाधिक व्यस्त उपग्रह प्रक्षेपण केन्द्रों में से एक है और यह भारत के 'वसुधैव कुटुम्बकम' के दर्शन के प्रतीक के रूप में वैश्विक जरूरतों को पूरा कर रहा है। 'इसरो' के सभी क्रियाकलाप सामाजिक अनुप्रयोजनों के इर्द-गिर्द बुने गए हैं। आज 'इसरो' विश्व के सर्वाधिक प्रतिष्ठित और अग्रणी अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक है और यह छात्रों तथा युवा और उभरते वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का एक बहुत बड़ा स्रोत है।

संप्रेषण से लेकर मौसम संबंधी भविष्यवाणी, टेलीमेडिसीन और आपदा संबंधी चेतावनी जैसे कार्यों के लिए 'इसरो' के प्रयासों ने संचार और पृथ्वी के पर्यवेक्षण संबंधी हमारी अधिकांश आवश्यकताओं को पूरा करने में हमारे देश को आत्मनिर्भर बनाया है और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद की है। मैं जानता हूं कि जब ओडिशा के तट पर फाइलोन और हुदहुद जैसे तूफान आए थे, तो 'इसरो' के उपग्रहों द्वारा की गई मौसम संबंधी भविष्यवाणियों के परिणामस्वरूप अनेक जानें बचाई जा सकी थीं। हाल ही में वर्धा में आए तूफान के दौरान समय पर की गई सटीक भविष्यवाणी के लिए भी 'इसरो' के योगदान की सराहना की गई थी।

यह भारत का सौभाग्य है कि देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने डा. विक्रम साराभाई के कुशल नेतृत्व में उड़ान भरी। पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने अपनी आत्मकथा 'विंग्स ऑफ फायर' में कहा है "मैं प्रो. साराभाई को विचार और उदाहरण दोनों के माध्यम से अपने दल में नेतृत्व के गुण सृजित करने तथा प्रेरित करने में भारतीय विज्ञान का महात्मा गांधी मानता हूं।" मुझे प्रसन्नता है कि आप अभी भी उनकी महान दृष्टि के ध्वजावाहक बने हुए हैं और नई ऊंचाईयों की खोज करने के लिए विकसित प्रौद्योगिकी का प्रयोग करने तथा अंतत: आम आदमी को लाभ पहुंचाने, जो विज्ञान से संबंधित किसी भी क्रियाकलाप के मूल उद्देश्य होने चाहिए, भारत किसी भी अन्य देश से पीछे नहीं है। आपमें से कुछ को डा. कलाम, जिन्होंने भारत के प्रथम उपग्रह प्रक्षेपण यान, एसएलवी-3 की सफलता के लिए एकाग्रचित्त होकर कार्य किया और प्रो. सतीश धवन तथा अन्य वैज्ञानिकों, जिन्होंने अपने प्रबंधन और नेतृत्वशैली से अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत को तेज रफ्तार से आगे बढ़ने में अत्यधिक योगदान दिया है, के साथ कार्य करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ होगा।

जीएसएलवी-एफ09 द्वारा जीसैट-9 नामक एक समर्पित उपग्रह के प्रक्षेपण द्वारा दक्षिण एशियाई देशों को सहायता प्रदान करना इसरो की एक अन्य सराहनीय उपलब्धि है। मुझे प्रसन्नता है कि इसरो ने पहले ही प्रयास में भारी लिफ्ट प्रक्षेपक जीएसएलवी एमके 3 जैसा सफल मिशन पूरा किया। हम क्रायोजेनिक और नियंत्रित प्रौद्योगिकी संपन्न राष्ट्रों की अनन्य सूची में भी शामिल हैं। विगत वर्षों में इस संगठन द्वारा मिल-जुल कर किए गए उल्लेखनीय कार्य और उपलब्धियां अन्य विभागों और संस्थानों के लिए एक आदर्श हैं। मुझे बताया गया है कि विश्व को यह दिखाने के बाद कि कम-से-कम लागत में उत्कृष्टता कैसे हासिल की जा सकती है, आप शीघ्र ही वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए लैंडर और रोवर समेत चन्द्रमा पर दूसरे मिशन की योजना बना रहे हैं। मुझे यह भी जानकारी मिली है कि आदित्य मिशन जैसे मिशन के साथ आप सूर्य तक भी पहुंचने की योजना बना रहे हैं और आप मानव अंतरिक्ष कार्य क्रम के लिए प्रौद्योगिकी भी विकसित कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम में आने से पहले मैने भविष्य की चुनौतीपूर्ण मांगों को पूरा करने हेतु 'शार' में निर्मित की जा रही बड़ी-बड़ी संस्थापनाओं का भी दौरा किया। वहां मैं दो माह की अल्प अवधि में तीन विभिन्न प्रक्षेपण यानों के प्रक्षेपण में किए गए समर्पित और अथक प्रयासों को समझ पाया। मैं इसके लिए पूरे हृदय से आप सभी की सराहना करता हूं। मैं माननीय प्रधानमंत्री के साथ इस स्थान के पूर्व भ्रमण को याद करता हूं जब श्री कुन्हीकृष्णन ने परियोजना निदेशक के रूप में हमारे पीएसएलवी-सी23 द्वारा फ्रांसीसी उपग्रह स्पॉट-7 मिशन के ब्यौरे समझाए थे। अब जब वह निदेशक हैं, मैं यह देख सकता हूं कि इसरो के अध्यक्ष के मार्गदर्शन में भावी जरूरतों को पूरा करने हेतु 'शार' में व्यापक अवसंरचनात्मक विकास हो रहा है।

मुझे जानकारी दी गई है कि जब एक बार द्वितीय यान निर्माण भवन, जो वर्तमान भवन से तीन गुना बड़ा है, को तैयार कर लिया जाएगा और अन्य सुविधाओं को बढ़ाने का काम पूरा कर लिया जाएगा, तो प्रति वर्ष प्रक्षेपण की संख्या दुगुने से अधिक हो जाएगी जिससे अंतरिक्ष प्रक्षेपण में आत्मनिर्भरता आएगी। मैं एक बार पुन: इसरो द्वारा हासिल विभिन्न लक्ष्यों हेतु विगत वर्षों में आपके कौशल, ज्ञान, समर्पण और निष्ठा के लिए आप सभी की प्रंशसा करता हूं।

मुझे बताया गया है कि विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के दौरान क्विज और निबंध प्रतियोगिताएं, प्रदर्शनी और स्कूली विद्यार्थियों के लिए भ्रमण का प्रबंध जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसे कार्यक्रम युवाओं में अंतरिक्ष संबंधी क्रियाकलापों के प्रति जागरूकता बढ़ाएंगे और उन्हें प्रेरणा देंगे। मैं युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और आकर्षित करने हेतु इस राज्य और पड़ोसी राज्यों के कोने-कोने तक पहुंचने के लिए आपके द्वारा उठाए जा रहे कदमों की भी सराहना करता हूं।

आज, मैं विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के इस एक सप्ताह लंबे समारोह के उद्घाटन हेतु श्रीहरिकोटा में आपके बीच आकर प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूं। मुझे इसरो के अध्यक्ष श्री किरण कुमार जो इस महान संगठन को सराहनीय ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं, की उपस्थिति से भी प्रसन्नता हो रही है। आपके भावी प्रयासों में सफलता हेतु मेरी शुभकामनाएं।

जय हिन्द।