30 दिसंबर, 2017 को कोलकाता में अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन्स ऑफ इंडियन ओरिजिन (एएपीआई) द्वारा आयोजित 11वें ग्लोबल हेल्थकेयर समिट-2017 में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

Kolkata | दिसम्बर 30, 2017

"अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडियन ओरिजिन (एएपीआई) द्वारा आयोजित 11वीं वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल शिखर सम्मेलन -2017 के समापन सत्र में भाग लेने पर मुझे प्रसन्नता हो रही है।

मैं यह जानकर प्रसन्न हूं कि भारत के लिए एएपीआई का मिशन भारत के सभी लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा सुलभ और किफायती बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। यह वास्तव में एक प्रशंसनीय उद्देश्य है क्योंकि विशेष रूप से भारत जैसे विशाल विकासशील देश में मध्य वर्ग और निम्न मध्य वर्ग की एक बड़ी आबादी के लिए सुलभता और किफायती उपलब्धता, दोनों की आवश्यकता है।

मित्रों, मुझे विश्वास है कि आप सभी यह जानते होंगे कि आधुनिक जीवन शैली और तनाव से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर रोग हो रहे हैं। वास्तविक चिंता इस बात की है कि अनुद्योगशील जीवन शैली, अनुचित आहार आदतों और नौकरी से संबंधित तनाव सहित विभिन्न प्रकार के कारकों के कारण युवा इन बीमारियों का शिकार अधिक हो रहे हैं।

सामान्य जनसंख्या में मधुमेह की घटनाएं बढ़ रही हैं जो कि भारत के समक्ष मौजूद प्रमुख चुनौतियों में से एक है। इस प्रवृत्ति को रोकने की आवश्यकता है। इस वर्ष के शुरूआती अध्ययन में कहा गया है कि अधिक विकसित राज्यों के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले निम्न सामाजिक-आर्थिक समूहों में मधुमेह की बीमारी आम हो रही है। यह चिंता की बात है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार, दुनिया में 415 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित हैं और 2015 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 69.1 मिलियन लोग इससे प्रभावित हैं।

एक अन्य अध्ययन में यह उल्लेख किया गया है कि पिछले 26 वर्षों में आय में वृद्धि के कारण भारत में संक्रमणीय रोगों के स्थान पर गैर-संचारी रोगों के मामले अधिक हो गए हैं। 1990 में संक्रमित, मातृ, नवजात और पोषण संबंधी रोगों की वजह से 53.6 प्रतिशत मृत्यु के मुकाबले, 2016 में गैर-संक्रमणीय बीमारियों जैसे हृदय रोगों और फेंफड़ो संबंधी गंभीर अवरोधक रोगों के कारण अधिक मौतें (61.8 प्रतिशत) हुईं।

मैंने इन अध्ययनों को केवल इसलिए उद्धृत किया है ताकि लोगों को, विशेष रूप से युवाओं को अनुद्यमशील जीवनशैली के खतरों और जंक फूड खाने जैसी अस्वास्थ्यकर भोजन संबंधी आदतों को रोकने के लिए लोगों के बीच अधिक जागरूकता पैदा करने की जरूरत पर ध्यान दिला सकूं।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि भारत के लिए एएपीआई का मिशन "भारत के सभी लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा सुलभ और किफायती बनाने" में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। भारतीय जनता के लिए स्वास्थ्य देखभाल सस्ती बनाना सबसे जरूरी है और इस पर दो राय नहीं हो सकतीं। एएपीआई जैसे निकायों को दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, में टेलीमेडिसिन के उपयोग को बढ़ावा देने में मदद करनी चाहिए। टेलिमेडिसिन को रेडियोलॉजी, कार्डियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, डरमेटोलॉजी और कुछ अन्य क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श के लिए अस्पतालों में अनावश्यक यात्राओं को कम करने और लंबी दूरी की यात्रा से बचने में मदद करेगा।

टेलीमेडिसिन कुछ हद तक चिकित्सकों और विशेषज्ञों की कमी - जैसी देश की प्रमुख समस्याओं में से एक पर काबू पाने में भी मदद करेगा।

मित्रो, जब भारत आर्थिक रूप से प्रगति कर रहा है और लोगों की आय में सुधार हो रहा है, आम आदमी परिवार में चिकित्सा आपातकाल के दौरान चिकित्सा बिल को पूरा करने में असमर्थ है। स्वास्थ्य बीमा काफी कम होने और अधिकांश भारतीय आबादी द्वारा स्वास्थ्य आपातकाल में निजी अस्पतालों से अपनी जेब से धन खर्च करके चिकित्सा उपचार को प्राथमिकता देने से यह समस्या और बढ़ जाती है। भारत के लिए किसी तरह का स्वास्थ्य संबंधी राजस्व मॉडल खोजने का समय आ गया है जो वास्तव में सस्ता हो या मध्यम वर्गों और गरीब वर्गों पर कोई वित्तीय बोझ नहीं डालता हो।

शिशु मृत्यु दर, जच्चा मृत्यु दर को कम करना, मातृ स्वास्थ्य में सुधार करना, भारतीय महिलाओं के बीच अल्परक्तता की समस्या का मुकाबला करना और स्वच्छता में सुधार करना कुछ प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं हैं जिन्हें युद्ध स्तर पर हल करना होगा। स्वास्थ्य सेवा को सस्ती बनाने के लिए चिकित्सा उपकरणों की लागतों को कम करना एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है, और सभी हितधारकों को इसे देखना चाहिए।

सीएमई, सेमिनार और कार्यशालाओं के संचालन के अलावा, एएपीआई को देश के प्रत्येक जिले में एक अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा की स्थापना करने में विभिन्न सरकारों और अन्य निजी संगठनों के साथ सहयोग करने पर विचार करना चाहिए जहां सस्ता उपचार प्रदान किया जाए।

धन्यवाद और जय हिंद! ”