30 अप्रैल, 2021 को नई दिल्ली में 29वें युद्धवीर स्मारक पुरस्कार समारोह के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | अप्रैल 30, 2021

“मैं 29वें युद्धवीर स्मृति पुरस्कार समारोह में वर्चुअल रूप में भाग लेकर और डॉ. एविटा फर्नांडीज़ को पुरस्कार प्रदान करके बहुत प्रसन्न हूँ। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करने के लिए मैं उन्हें बधाई देता हूँ जो उन्हें महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में उनकी अनेक वर्षों की समर्पित सेवा के लिए प्रदान किया गया है।

व्यक्तियों को पुरस्कार और सम्मान प्रदान करने से न केवल पुरस्कार प्राप्त करने वाले नई ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रोत्साहित होते हैं बल्कि दूसरे लोग भी उनका अनुकरण करने के लिए प्रेरित होते हैं। व्यक्तियों को उनके नेक कार्यों के मान्यता देना और उन्हें पुरस्कृत करना हमारी संस्कृति में अंतर्निहित है और यह हमारे लोकाचार का स्वाभाविक भाग है।

स्वर्गीय श्री युद्धवीरजी, जिनके नाम पर यह पुरस्कार दिया जाता है, बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे स्वतन्त्रता सेनानी, समाजसेवी और प्रतिष्ठित पत्रकार थे जिनमें सभी गुण एकसाथ समाहित थे। सबसे पहले, वे एक नेक व्यक्ति थे जो वास्तव में अनुकरणीय व्यक्ति थे। मुझे बताया गया है कि युद्धवीरजी ने अपने छात्रजीवन में ही स्वतन्त्रता आंदोलन में भाग लिया था और इसलिए वे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाये। वे कई बार जेल गए और ब्रिटिश राज में प्रताड़ना सही।

मुझे खुशी है कि उनके असाधारण जीवन और उपलब्धियों को याद करने के लिए एक फाउंडेशन की स्थापना की गई है। सच्चाई और ईमानदारी के प्रणेता के रूप में युद्धवीर जी ने नीतिपूर्ण पत्रकारिता की। उन्होंने पहले उर्दू में और बाद में 1950 में हिन्दी भाषा में 'मिलाप डेली' की शुरुआत की। समय के साथ उन्होंने ईमानदार और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से अपने पाठकों का भरोसा और विश्वास जीत लिया था। उनके सतत प्रयासों के कारण ही आज 'हिन्दी मिलाप' एक प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में उभरा है जो नैतिक और निष्पक्ष रिपोर्टिंग का पर्याय बन गया है। यह हैदराबाद और दक्षिणी भारत के हिन्दी भाषी पाठकों का अभिन्न अंग बन गया है। मुझे यह बताया गया है कि उन्होंने भारत की छवि को बेहतर बनाने की दृष्टि से 1972 में लंदन में 'मिलाप' के उर्दू और अंग्रेजी संस्करणों की भी शुरुआत भी की है।

आज की पुरस्कार पाने वाली डॉ. एविटा फर्नांडीज़ को महिला स्वास्थ्य और प्रजनन के क्षेत्र में अग्रणी कार्य करने के लिए जाना जाता है। वे महिला सशक्तिकरण और सामान्य प्रसव की प्रबल समर्थक हैं। उनके दृष्टिकोण की विशिष्टता जो उनके मरीजों के प्रति उनकी वास्तविक चिंता को प्रदर्शित करती है वह यह है कि डॉ. एविटा प्रसव से संबंधित मुद्दों पर महिलाओं को अपनी पसंद चुनने की अनुमति देने में विश्वास रखती हैं। यह उनका दृढ विश्वास है कि शिशु को जन्म देने की प्रक्रिया में महिलाओं की पसंद होनी चाहिए और उन्हें जानकारी पूर्ण चुनाव करना चाहिए।

तथ्यस यह महिला सशक्तिकरण पर उनके फोकस का स्पष्ट उदाहरण है कि फर्नांडीज़ अस्पताल में 84 प्रतिशत महिला कर्मचारी हैं। मुझे बताया गया है कि डॉ एविटा यह सुनिश्चित करती हैं कि उनकी सभी पाँचों अस्पतालों जिनमें प्रति वर्ष लगभग 10,000 शिशु जन्म लेते हैं, में महिला-केन्द्रित देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है। यह स्वयं में स्वास्थ्य देखभाल संचालनों के स्तर को दर्शाता है जिनकी वे सक्रियता से निगरानी करती हैं।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि डॉ. एविटा प्रसव को महिलाओं के लिए प्राकृतिक और सकारात्मक अनुभव बनाने के लिए हर संभव प्रयास करती हैं, सामान्य प्रसव को प्रोत्साहित करती हैं और सीजेरियन प्रसव को कम करती हैं। मुझे यह बताया गया है कि तेलंगाना सरकार और फर्नांडीज़ अस्पताल यूनिसेफ के साथ मिलकर सिजेरियन प्रसव को कम करने और जन अस्पतालों में सामान्य प्रसव की संख्या बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। यह वास्तव में प्रशंसनीय लक्ष्य है तथा और अधिक निजी अस्पतालों को सिजेरियन प्रसव कम करने की इस मुहिम से जुड़ना चाहिए।

डॉ. एविटा की मिडवाइफ का राष्ट्रीय संवर्ग बनाने की पहल सराहनीय है। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि करीमनगर जिला अस्पताल में 30 नर्सों को प्रसूति विद्या संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है और फर्नांडीज़ फाउंडेशन तेलंगाना सरकार के लिए मिडवाइफरी में 1500 नर्सों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मातृत्व स्वास्थ्य प्रसूति विद्या देखभाल में सुधार लाना बहुत महत्वपूर्ण है और अनावश्यक सिजेरियन प्रसवों में कमी लाने की भी जरूरत है। सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में जाने वाली प्रत्येक महिला और नवजात शिशु को नि:शुल्क गरिमापूर्ण, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जानी चाहिए। हमें कभी भी "बांटना और देखभाल" के भारत के प्राचीन दर्शन को कभी नहीं भूलना चाहिए।

कुपोषण भारत में महिलाओं को लगातार प्रभावित कर रहा है और इस समस्या को दूर करने के लिए सम्मिलित प्रयास किए जाने चाहिए। पिछले कुछ वर्षों में जननी मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। प्रधान मंत्री मातृ वंदना योजना, जिनके बेहतर मातृ स्वास्थ्य परिणाम हैं, जैसी योजनाओं से हमें संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के लक्ष्य 3.1 को प्राप्त करने के लिए जननी मृत्यु दर में कमी लाने के काम में तेजी लानी चाहिए जिसका उद्देश्य 2030 तक प्रति 100,000 जीवित शिशु जन्म पर वैश्विक जननी मृत्यु दर को घटाकर 70 से कम करना है।

निस्संदेह, परिवार के समग्र स्वास्थ्य के लिए महिलाओं का स्वास्थ्य बहुत महत्वपूर्ण है। हमारी आबादी में महिलाओं का 50 प्रतिशत हिस्सा होने के कारण महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि हम महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को नज़रअंदाज़ करेंगे तो हम स्वस्थ समाज का सृजन नहीं कर पाएंगे। विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी उपाय महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को मजबूत करने और उन्हें पूरा करने पर केन्द्रित होने चाहिए क्योंकि वे स्वस्थ समाज की रीढ़ हैं।

अपनी बात समाप्त करने से पहले, मैं पुन: डॉ. एविटा को महिलाओं के स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में अग्रणी पहल करने और अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए बधाई देता हूँ। वे युद्धवीर फाउंडेशन पुरस्कार प्राप्त करने वाले चुनिंदा दिग्गजों के समूह में शामिल हो गई हैं।

मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि फाउंडेशन ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को पुरस्कार प्रदान किए हैं।

अंत में, मैं युद्धवीर फाउंडेशन के अध्यक्ष और ट्रस्टी और 'डेली हिन्दी मिलाप' परिवार का धन्यवाद करता हूँ जिन्होंने मुझे यह स्मृति व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया।

जय हिन्द !”