29 सितंबर 2020 को उपराष्ट्रपति निवास, नई दिल्ली में फिक्की हील के 14वें संस्करण के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया उद्घाटन भाषण

नई दिल्ली | सितम्बर 29, 2020

"प्रिय बहनों और भाइयों,

सबसे पहले मैं उपयुक्त समय पर 'पोस्ट कोविड हेल्थकेयर - द न्यू बिगिनिंग' विषय पर इस आयोजन के लिए फिक्की को बधाई देता हूं।

आज दुनिया एक अभूतपूर्व महामारी की चपेट में है, जिससे अधिकांश देशों में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक दबाव पड़ा है। इस समय, सभी सरकारों और स्वास्थ्य प्राधिकरणों की प्राथमिक चिंता संक्रामक वायरस के प्रसार को रोकने, लोगों के जीवन को बचाने और निवारक टीके के विकास के प्रयासों का समर्थन करने की है। हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में टीके के मोर्चे पर अच्छी खबर मिलेगी।

महामारी ने राष्ट्रों की स्वास्थ्य प्रणालियों और अर्थव्यवस्थाओं पर बड़े पैमाने पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। इस बीमारी के अत्यधिक संक्रामक होने और अभी तक कोई उपचार उपलब्ध न होने के कारण इसके प्रसार को रोकने के लिए सामाजिक दूरी, मास्क पहनना, हाथों को बार-बार धोना और लॉकडाउन अपरिहार्य हो गए हैं। निस्संदेह, समाज के सभी वर्गों को अपनी सामान्य दिनचर्या में व्यवधान को देखते हुए अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ा है।

लेकिन, हम सभी को सामूहिक रूप से वायरस को हराने के लिए नए सिरे से दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। न केवल हमें वायरस को खत्म करने के तरीके खोजने की आवश्यकता है, बल्कि हमें कोविड की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार रहना होगा और भविष्य की किसी भी महामारी का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

प्रिय बहनों और भाइयों,

इस खतरनाक वायरस के संचरण को रोकने के लिए तथा सरकार और स्वास्थ्य कर्मियों के बहुमुखी प्रयासों का समर्थन करने हेतु लोगों के लिए यह अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्हें नए सामान्य की संस्कृति के अनुकूल ढलना होगा और सभी निर्धारित सावधानियों को गंभीरता से लेना होगा।

प्रारंभिक लॉकडाउन से लेकर विभिन्न प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देने तक सरकार ने संक्रमण के प्रसार को रोकने और लोगों को होने वाली कठिनाई को कम करने के लिए कई उपाय किए हैं। सब कुछ क्रमिक और चरणबद्ध रूप से फिर से खोलने से व्यक्तियों, समुदायों और प्रणालियों को महामारी से निपटने में मदद मिल रही है और साथ ही साथ अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में मदद मिल रही है।

हालांकि, हम सभी को सामान्य स्थिति के लौटने तक सतर्क रहना चाहिए। हम किसी भी स्थिति में ढिलाई नहीं बरत सकते और अपनी सतर्कता को कम नहीं कर सकते।

सरकार द्वारा अतिरिक्त स्वास्थ्य अवसंरचना बनाने, मानव संसाधन तथा महत्वपूर्ण चिकित्सा उपभोज्य सामग्रियों व पीपीई, एन-95 मास्क और वेंटिलेटर जैसे उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन में वृद्धि करने के लिए कदम उठाए गए हैं। मुझे खुशी है कि डीआरडीओ और कुछ निजी उद्योग इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए आगे आए।

कोविड-19 मामलों के उचित प्रबंधन के लिए भारत सरकार ने राज्य सरकारों को कोविड के लिए अभिन्न रूप से स्वास्थ्य सुविधाओं की त्रिस्तरीय व्यवस्था स्थापित करने की सलाह दी है।

प्रिय बहनों और भाइयों,

हमें यह ध्यान रखना होगा कि दुर्भाग्य से, कोविड-19 का सार्वभौमिक मनोसामाजिक प्रभाव पड़ा है और यह कुछ लोगों के लिए अवसाद और मनोरोग की स्थिति का कारण बना है। वृद्ध लोगों, उनकी देखभाल करने वालों, मनोरोग रोगियों और हाशिए के समुदायों के मनोसामाजिक पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

अग्रणी कोरोना योद्धाओं और कोविड-19 रोगियों से अनुचित व्यवहार और भेदभाव के कई दुखद उदाहरण सामने आए हैं। इस तरह का व्यवहार पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।

यह महत्वपूर्ण है कि हम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ भेदभाव न करें जो कोविड+ है या जो किसी कोविड रोगी के संपर्क में आया है। हमें कोविड-19 के संबंध में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण और सकारात्मक संदेश को बढ़ावा देना होगा।

मैं वायरस के प्रसार से लड़ने और लोगों के जीवन को बचाने के लिए चिकित्सकों, प्रशिक्षणाधीन चिकित्सकों, नर्सों से लेकर वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञों और समर्थक कर्मियों द्वारा की जा रही निस्वार्थ सेवा और समर्पण की विशेष रूप से सराहना करना चाहता हूं।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि फिक्की के सदस्य न केवल महामारी से निपटने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं और समाधानों को साझा कर रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने सहित कई तरीकों से सरकार का समर्थन कर रहे हैं।

मैं इस महत्वपूर्ण समय में कोविड और गैर-कोविड रोगियों के उपचार में अपनी सुविधाओं, श्रमशक्ति और उपकरणों को उपलब्ध कराने में अनेक निजी अस्पतालों की भूमिका की भी सराहना करना चाहूंगा।

प्रिय बहनों और भाइयों,

वर्तमान महामारी ने नई चुनौतियों का निर्माण करने के साथ-साथ हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को बदलने के अवसर भी पैदा किए हैं। इनमें निवारक और प्राथमिक देखभाल पर अधिक ध्यान देने के साथ-साथ नए स्वास्थ्य देखरेख मॉडल, उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग, देखभाल के स्तर और घर पर देखभाल की शुरूवात, संक्रामक रोगों से निपटने की तैयारी के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं में संरचनात्मक परिवर्तन, स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए उत्पादों और उपचार में अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) देखभाल भी शामिल हैं।

हमें अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा सुलभ और सस्ती बनानी होगी। हमें अपने देश में प्रत्येक हितधारक की मुख्य क्षमता का उपयोग करना चाहिए। हमें अपनी स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों को आहरित करना चाहिए।

मैं चाहूंगा कि निजी क्षेत्र आगे आए और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से अपने कार्य का विस्तार करे और ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेष रूप से दूरदराज और दुर्गम स्थानों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना करे।

निजी कंपनियों ने देश में स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र की क्षमता और सामर्थ्य में वृद्धि की है। मुझे विश्वास है कि वे बुनियादी ढांचे और कौशल को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

सरकार के प्रयासों का समर्थन करने के लिए उद्योग जगत के साथ-साथ नागरिक समाज संगठनों के सहयोगात्मक प्रयास भी होने चाहिए।

दुनिया का सबसे बड़ा सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज कार्यक्रम - आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) अब देश की मध्यम आबादी, जो अब तक इससे वंचित थी, तक विस्तारित किया जा रहा है। यह सुनिश्चित करेगा कि वंचित रह गई आबादी के एक बड़े हिस्से - जिसमें अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिक, स्व-नियोजित, पेशेवर, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के कर्मचारी और अन्य शामिल हैं - को स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जाए।

कोविड महामारी ने भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सार्वजनिक और निजी अस्पतालों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में दवा उत्पादों, यंत्रों, उपभोज्यों और निर्वर्त्यों सहित चिकित्सा उपकरणों और उपस्करों की मांग बढ़ेगी।

मैं निजी क्षेत्र से आग्रह करता हूं कि वे आत्मानिर्भर अभियान का पूरा लाभ उठाएं और हाई-टेक और उन्नत उपकरणों सहित विभिन्न चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण में अपना योगदान दें।

प्रिय बहनों और भाइयों,

मैं एक बार फिर से उस सबसे महत्वपूर्ण सबक पर जोर देना चाहूंगा जो इस महामारी ने हमें सिखाया है। इस महामारी ने हमें शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ रहने का महत्व सिखाया है। संतुलित आहार और फिटनेस से बीमारियां दूर रहती हैं। स्वस्थ रहना समय की आवश्यकता है। यह हमारे कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करते हुए हमें बीमारियों को दूर रखने में सक्षम करेगा।

हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि देश में गैर-संचारी रोगों की बढ़ती घटनाओं के पीछे गतिहीन जीवन शैली मुख्य कारणों में से एक है। किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि जैसे स्पॉट जॉगिंग/रनिंग/ब्रिस्क वॉकिंग/एरोबिक्स और स्ट्रेचिंग फिट रहने के लिए हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन सकते हैं।

वास्तव में, मेरा सुझाव है कि एक बार स्थिति के सामान्य हो जाने के बाद स्कूलों और कॉलेजों में खेल के साथ-साथ योग और ध्यान को दैनिक समय-सारिणी का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

फिटनेस दिनचर्या के अलावा स्वस्थ और संतुलित आहार लेना भी आवश्यक है। तेजी से हो रहे शहरीकरण और आधुनिक जीवन शैली ने लोगों की खाने की आदतों में भारी बदलाव किया है। हमारी आहार संबंधी आदतों को नियंत्रित करने और उनमें बदलाव करने का यह उच्च समय है। हमें केवल स्वाद के लिए नहीं खाना चाहिए। हमें याद रखना चाहिए कि जैसा हम खाते हैं हम वैसे ही बन जाते हैं और भोजन पोषण के लिए है। हमें विवेकहीन तरीके से खाने के बजाय पौष्टिक और प्रोटीन-युक्त भोजन लेना चाहिए। इस महामारी का एक अच्छा पहलू यह है कि अधिक से अधिक लोग घर पर बने ताजे पके हुए जैविक भोजन का सहारा ले रहे हैं।

हमें स्वस्थ जीवन को बनाए रखने के लिए "दिनचर्या" अर्थात दैनिक व्यवस्था और "ऋतुचर्या" अर्थात मौसन के अनुकूल व्यवस्था की अवधारणा का अनुसरण करना होगा।

हम सभी जानते हैं कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। फिटनेस के लिए दैनिक आधार पर समय और ऊर्जा का निवेश निश्चित रूप से हमें इसके लाभों को प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। यह हमें दीर्घकाल तक जीवन के बेहतर पहलुओं का आनंद और स्वाद लेने में मदद करेगा। इसलिए, मैं एक बार फिर सभी से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और एक फिटनेस दिनचर्या अपनाने का आग्रह करता हूं।

प्रिय बहनों और भाइयों,

मैं इस महामारी के दौरान उद्योग जगत द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करता हूं। मैं एक बार फिर आप सभी से स्वास्थ्य क्षेत्र में सफल और व्यवहार्य पीपीपी मॉडल के लिए सरकार से हाथ मिलाने का आग्रह करता हूं।

मुझे इस बात की भी खुशी है कि निजी क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों, जिनमें फिक्की भी शामिल है, ने मिलकर कोविड उपचार के संबंध में डॉक्टरों से परामर्श के लिए "स्वस्थ" नामक एक टेलीमेडिसिन मंच विकसित किया है।

हमें ऐसी परियोजनाओं को तैयार करने और प्रचारित करने और देश भर में स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं का विस्तार करने की आवश्यकता है, ताकि हम 'सभी के लिए स्वास्थ्य देखभाल' के दृष्टिकोण को हासिल कर सकें।

मुझे खुशी है कि फिक्की, 'हील 'प्लेटफॉर्म के द्वारा उत्तम प्रथाओं के लिए नवीन विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम से उद्योग जगत को सही उत्प्रेरक प्रदान कर रहा है। मुझे विश्वास है कि ये वार्तालाप हमें वर्तमान संकट से अधिक प्रभावी ढंग से निपटने और देश में सस्ती, सुलभ, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए नए समाधान लाने में मदद करेंगे।

जय हिन्द!"