29 मार्च, 2022 को नई दिल्ली में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रथम डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय स्मृति व्याख्यान में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम.वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | मार्च 29, 2022

“बहनो और भाइयो,

नमस्कार!

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर इस प्रतिष्ठित संस्थान के अध्यक्ष के रूप में, पहला डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय स्मृति व्याख्यान देते हुए मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। भारत में कोविड-19 महामारी की चुनौती समाप्त हो रही है, और प्रतिबंधों में ढील होने पर, मुझे आप सभी के साथ यहां आकर प्रसन्नता हो रही है। मैं यह अवसर प्रदान करने के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान को धन्यवाद देता हूँ ।

एक प्रतिष्ठित नेता, महात्मा गांधी ने कई मौकों पर जिनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की, स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति, भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक समृद्ध, एकीकृत और मजबूत भारत बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। एक छात्र कार्यकर्ता से स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति तक बाबू राजेंद्र प्रसाद की उल्लेखनीय यात्रा, उनकी अदम्य क्षमता, देश और समाज के प्रति उनके संकल्प और प्रतिबद्धता की एक महान गाथा है। यह भारतीय राजनीति में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों को भी प्रतिबिंबित करता है, जिसमें एक छात्र कार्यकर्ता राष्ट्र की सेवा करने के लिए अपनी मजबूत प्रतिबद्धता से प्रेरित होकर, समय के साथ भारत का पहला राष्ट्रपति बनकर उभरा।

बाबू राजेंद्र प्रसाद एक दूरदर्शी नेता थे, जो एक मजबूत और समावेशी भारत को आकार देने में सिविल सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका को समझते थे। देश भर में हमारे सिविल सेवक पिछले सात दशकों से डॉ. राजेंद्र प्रसाद के विजन को साकार बनाने के लिए प्रयासरत हैं। इस राष्ट्रीय प्रयास में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

1954 में स्थापना होने के समय से संस्थान की यात्रा में अनेक घटनाएं हुई हैं, जिसमें शासन की बदलती आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी होने पर बल दिया जाना महत्वपूर्ण है। भारतीय लोक प्रशासन संस्थान ने वर्षों से, नीति अभिविन्यास सहित शैक्षणिक उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। मुझे विश्वास है कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान द्वारा किए जाने वाले कार्यक्रमों और गतिविधियों की विस्तृत श्रृंखला में भारत के एकीकरणकर्ता सरदार पटेल की प्रशासकों को दी गई सलाह का सार समाहित है, जिसमें उन्होंने उन्हें सेवा की भावना से कार्य करने को कहा है। संस्थान आज, देश में शासन संबंधी सुधार लाने में उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने वाला प्रमुख संस्थान है । संस्थान अपनी गतिविधियों और सहयोग के माध्यम से यह कार्य प्रभावी ढंग से कर सकता है, जिसे प्रतिष्ठित संकाय और प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों के एक बड़े समूह की सहायता प्राप्त है। आईआईपीए के 68 वें स्थापना दिवस के अवसर पर, मैं सार्वजनिक नीति और शासन में ज्ञान की सीमाओं को व्यापक बनाने के लिए इसके अथक प्रयासों की सराहना करता हूं।

बहनो और भाइयो,

लोक प्रशासन को न्याय, नैतिकता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के आधार पर पर अधिक नागरिक केंद्रित होने का अनिवार्य रूप से प्रयास करना चाहिए। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के "सब का साथ, सब का विकास, सब का विश्वास, सब का प्रयास" के दृष्टिकोण से प्रेरित, भारत आज एक परिवर्तनकारी युग के शिखर पर खड़ा है जिसमें प्रत्येक नागरिक सामाजिक- आर्थिक परिवर्तन का एक सशक्त उत्प्रेरक बनना चाहता है । प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 'न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन' की अवधारणा के अनुरूप, भारत सरकार हमारे नागरिकों के जीवनयापन की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से नीतियां और कार्यक्रम तैयार कर रही है। वैश्विक महामारी के विनाशकारी प्रभाव के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार, 'आत्मनिर्भर' भारत के समावेशी विकास की संभावनाएं प्रस्तुत करता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के लिए 2022 में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है और यह एक स्वागत योग्य संकेत है।

आज, भारत सरकार का सामाजिक सुरक्षा जाल पहले से कहीं अधिक व्यापक है, जिसमें समाज के सबसे जरूरतमंद वर्गों को शामिल किया गया है। सरकार के 'सु-राज' या सुशासन के मॉडल के कई मूर्त संकेतक हैं। उनमें से प्रधान मंत्री जन धन योजना (पीएमडीवाई), विश्व की सर्वाधिक दूरगामी वित्तीय समावेशन पहल, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, जो कोविड -19 महामारी से उपजे संकट से उबरने में गरीबों की सहायता करने के लिए है, आयुष्मान भारत, सरकार का प्रमुख स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) और कई अन्य पहलें हैं।

बहनो और भाइयो,

गरीबों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील, मजबूत, उत्तरदायी और सक्षम प्रशासन के सक्रिय सदस्य बनने के लिए सिविल सेवकों को प्रशिक्षित करने में आईआईपीए की भूमिका प्रशंसनीय है। जबकि एक लोक सेवक के नेतृत्व की प्रकृति सेवा में निहित है, सार्वजनिक सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है और यहीं पर प्रशासक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई कार्यक्रमों और गतिविधियों के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षित करने का आपका काम भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सिविल सेवकों और प्रशासकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वितरण प्रणाली में कमियों को कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से दूर किया जाए। हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सिविल सेवकों की है कि शासन हमारी आबादी के सबसे गरीब और सबसे कमजोर वर्ग के दरवाजे तक पहुंचे। किसी भी विकास कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन का मानदंड उस सीमा तक है जिस तक यह समाज के जरूरतमंद वर्गों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सके और उसे बदल सके। सिविल सेवकों को इस बात को याद रखना चाहिए कि किसी कल्याणकारी योजना और विकास पहल के लिए इसके कुशल कार्यान्वयन के माध्यम से इसके लाभार्थियों की समृद्धि से बेहतर कोई पैमाना नहीं है।

अन्य बातों के अलावा, इस मिशन को पूरा करने के लिए प्रशासकों को ज़रूरतमंद और वंचितों के लिए अधिक सुलभ बनना होगा। सिविल सेवकों को समाज के सभी वर्गों से लेकर अंतिम व्यक्ति तक नागरिकों को भारत के विकास की कहानी लिखने में सक्रिय भागीदार के रूप में शामिल करना चाहिए। ऐसा करके वे बाबू राजेंद्र प्रसाद के समृद्ध और समावेशी भारत के सपने को साकार करेंगे।

शासन का नागरिक-केंद्रित प्रतिमान कुशल सार्वजनिक सेवा वितरण प्रणाली पर टिका है। ऐसी प्रणाली में नागरिकों की बढ़ती आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुकूल स्वयं को ढालने की क्षमता होनी चाहिए। समावेशिता, उत्तरदायित्व, चपलता, पारदर्शिता, निष्पक्षता और ईमानदारी लोक शासन के जटिल कार्य के प्रमुख पहलू हैं। इसलिए, सुशासन की कुछ निर्धारक विशेषताएं व्यापकता, निष्पक्षता, अखंडता, दक्षता और न्याय संगतता हैं। मुझे यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि सिविल सेवकों को अपने कौशल को उन्नत करने, भारत के भीतर और देश के बाहर से प्राप्त सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और बढ़ाने के लिए तैयार होना चाहिए। तभी वे जमीनी स्तर पर कार्यक्रमों और नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्रशासन और शासन में जटिल चुनौतियों के लिए अभिनव, लीक से हटकर रणनीतियां और समाधान लाएंगे।

प्रशासकों की नेतृत्व संबंधी और प्रशासनिक दक्षताओं को बढ़ाने के लिए उनके तकनीकी प्रबंधकीय कौशल को प्रखर बनाने में आईआईपीए की भूमिका वास्तव में सराहनीय है। प्रशासकों के लिए प्रशिक्षण, अनुसंधान और परामर्श गतिविधियों संबंधी व्यापक कार्य करके, और अपने कई सहयोगों के माध्यम से, संस्थान हमारे समाज की आशाओं और आकांक्षाओं के प्रति सार्वजनिक शासन प्रणालियों की सकारात्मक प्रतिक्रियात्मकता में योगदान दे रहा है। कुशल, प्रभावी और नैतिक शासन के लिए मानव संसाधन के प्रशिक्षण, विकास और प्रबंधन के लिए एक वातावरण बनाकर, आप डॉ राजेंद्र प्रसाद के साथ-साथ इस संस्थान के संस्थापकों के विजन को भी पूरा कर रहे हैं।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद सत्य और अहिंसा के गांधीवादी सिद्धांत में दृढ़ विश्वास रखते थे, और वे स्वयं बापू के प्रिय थे। गांधीजी ने उनके समर्पण को तब पहचाना जब उन्होंने बिहार के चंपारण का दौरा किया और बाद में अपनी आत्मकथा में लिखा:

“राजेंद्र बाबू मेरे साथ काम करने वाले सर्वोत्तम स्वयंसेवकों में से एक हैं। उनके स्नेह ने मुझे उन पर इतना निर्भर बना दिया है कि उनके बिना मैं एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकता।"

बाबू राजेंद्र प्रसाद ने जाति और पंथ की बेड़ियों से मुक्त एक सामंजस्यपूर्ण और समतावादी भारत का सपना देखा था, एक ऐसा भारत जिसमें शासक और प्रशासक सभी के लिए सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास करें।

मैं इस व्याख्यान को डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पवित्र स्मृति को समर्पित करता हूं और अपनी मातृभूमि के इस महान सपूत को नमन करता हूं, जिनका जीवन परोपकार, सत्य, सेवा और सादगी के गुणों से परिभाषित होता है।

मैं कामना करता हूं कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान और उसकी टीम अपने सभी भावी प्रयासों में सफल रहे।

जय हिन्द!”