29 अप्रैल 2019 को नई दिल्ली में राज्य सभा दिवस समारोह के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | अप्रैल 29, 2019

राज्य सभा दिवस मनाने के लिए आयोजित इस समारोह में आप सबके साथ सम्मिलित होने पर मुझे प्रसन्नता है। इस सुखद अवसर पर आप सभी बड़ी संख्या में उपस्थित हैं, आप सभी को मेरी शुभकामनाऐं और अभिनंदन।

2. राज्य सभा दिवस,1952 में हुई इस महान संस्था की स्थापना से लेकर आज तक की इसकी घटनापूर्ण यात्रा का स्मरण कराता है। इन वर्षों में राज्य सभा हमारी संसद का जीवंत, सजग प्रहरीसदन बन कर उभरी है। राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका अभिनंदनीय रही है। अपनी विभिन्न भूमिकाओं में, राज्य सभा देश के संविधान निर्माताओं की अपेक्षाओं पर खरी उतरी है।

3. व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए राज्य सभा सदैव प्रिय रही है। अपनी विभिन्न भूमिकाओं में इस सदन से मेरा लंबा नाता रहा है - पहले इस सदन के सदस्य के रूप में, कभी संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में, कभी संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर और अब इस सदन के सभापति के रूप में इस सदन से जुड़ा रहा हूं।

4. जैसा कि आप सभी जानते हैं, राज्य सभा के सभापति के रूप में मुझे कुछ संवैधानिक और वैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है। अपने अब तक के कार्यकाल में, मैंने अपेक्षाकृत कम समय में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिसकी बहुत प्रशंसा हुई। राज्य सभा सचिवालय द्वारा मुझे दी गई विशेषज्ञ सलाह के कारण यह संभव हो सका। मैं राज्य सभा सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की उच्च स्तरीय व्यावसायिकता, दक्षता और प्रतिबद्धता के लिए उनकी हार्दिक प्रशंसा करता हूं।

5. राज्यसभा सचिवालय को एक संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। उपयुक्त शैक्षिक पात्रता व क्षमता और विशेषज्ञता वाले व्यक्तियों को विशेष प्रकृति के संसदीय कार्य को पूरा करने के लिए भर्ती किया जाता है। उनके पास असाधारण गुण हैं, जो सचिवालय को वास्तव में अद्वितीय बनाते हैं। संसदीय कर्मचारियों के साथ-साथ कार्यकारी सचिवालय की विशेषताओं को प्रतिबिम्बित करते हुए, संविधान सभा के एक विद्वान सदस्य श्री आर.के. सिद्धवा ने संविधान के अनुच्छेद 98 से संबंधित वाद-विवाद में भाग लेते हुए सुझाव दिया और जिसे मैं उद्धृत करता हूँ :

मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि विधानमंडल सचिवालय का कर्मचारी कार्यपालिका के कर्मचारियों से काफी अलग होना चाहिए। विधायिका के कर्मचारियों को ऐसे लोगों में से चुना जाना चाहिए जो सदस्यों के लिए मिलनसार, सामाजिक, दयालु, उपयोगी और सहायक हों, न कि उस तरह के कर्मचारी जो कार्यकारी सचिवालय में मौजूद हों।

6. राज्य सभा सचिवालय के अधिकारी, पीठासीन अधिकारियों, संसद सदस्यों, सदन और उसकी समितियों को दलीय राजनीति से दूर रह कर, वस्तुनिष्ठ, तथ्यात्मक सलाह देते रहे हैं। साथ ही, आपने संसद की कार्यप्रणाली, उसके संगठन, बढ़ती हुई जन अपेक्षाओं में हो रहे निरंतर बदलावों के अनुसार भी स्वयं को ढाला है और हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सहयोग दिया है। देश निर्माण में आपका योगदान सराहनीय है।

7. इस विशिष्ट भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्वीकार करते हुए, हमारे यहाँ सचिवालय के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं के मुद्दों का समाधान करने के लिए एक अलग संसदीय वेतन समिति की व्यवस्था है। मुझे खुशी है कि 7 वें केंद्रीय वेतन आयोग के बाद संसदीय वेतन समिति की सिफारिशों को लागू कर दिया गया है। भत्ते में बढ़ोतरी आपकी कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता की स्वीकारोक्ति है। मै आशा करता हूँ कि हमारा सचिवालय विश्व के सबसे अच्छा कार्य निष्पादन करने वाले विधानमंडलों में से एक होगा।

8. आज के विश्व में स्मार्ट टेक्नोलाजी ही सफलता और सक्षमता की कुंजी है। देश की सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था का सचिवालय होने के कारण आपसे अपेक्षित है कि आप टेक्नोलाजी में हो रहे बदलावों को समय के साथ आत्मसात करेंगे। आफिस आटोमेशन तथा तकनीकी बदलाव करेंगे। मुझे यह जानकर हर्ष है कि सचिवालय के अधिकारी तकनीकी उन्नयन और कौशल प्रशिक्षण के प्रति तत्पर रहे हैं। सचिवालय के कामों में सुगमता और सरलता लाने के लिए कई कदम उठाये जा रहे हैं - तकनीक आधारित अटैंडेंस/उपस्थिति पद्धति, ई-आफिस, वर्क फ्लो जैसी प्रणालियों को प्राथमिकता दी जा रही है। सचिवालय के भविष्य के लिए यह शुभ संकेत है।

9. समकालीन विश्व में, स्मार्ट तकनीक प्रचलित या लोकप्रिय शब्द है। शीर्ष विधायी निकाय का सचिवालय होने के नाते, आफिस आटोमेशन और तकनीकी उन्नयन के मामले में नवीनतम के साथ तालमेल रखना हमारे लिए अनिवार्य है। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि सचिवालय के अधिकारी नवाचारों और कौशल उन्नयन के लिए हमेशा तैयार और अनुकूलनशील रहे हैं। काम की आसानी और सहजता के मामले में इस सचिवालय को आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। तकनीक आधारित उपस्थिति पद्धति, वर्क फ्लो और ई-आफिस को प्राथमिकता दी जा रही है। ये सभी हमारे सचिवालय के भविष्य के लिए शुभ संकेत है।

10. संसदीय लोकतंत्र के सुचारू और प्रभावी कार्यकरन को बनाए रखने के लिए विधानमंडल सचिवालय और विधानमंडल एक-दूसरे के पूरक हैं। जबकि सचिवालय विधायी कार्यों की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए सभा और संसद सदस्यों को आवश्यक सचिवालयी सहायता प्रदान करने में हमेशा मुस्तैद और सक्रिय रहता है, हमारी विधानमंडलों की कार्यवाही में बढ़ते व्यवधान ने विधायी उत्पादकता और दक्षता को प्रभावित किया है। राज्य सभा के सभापति के रूप में, मैं सभा के कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहा हूं। सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में संसद की भूमिका सर्व स्वीकृत है। हाउस ऑफ़ एल्डर्स के रूप में, हमसे आमतौर पर दूसरों को रास्ता दिखाने की अपेक्षा की जाती है। परिवर्तन का वाहक बनने के लिए राज्य सभा के सभी सदस्यों के कंधों पर एक महत्वपूर्ण और पवित्र जिम्मेदारी है।

11. पिछले बजट सत्र के समापन पर अपने विदाई उद्गार में मैंने कहा था कि 'देश के लोग चाहते हैं कि हमारी सभा कार्य करने वाली सभा हो। केवल सदस्य ही इस महती सभा को काम करने वाली या काम न करने वाली सभा बना सकते हैं। यह सदस्यों पर निर्भर है। हम सभी को लोगों की उम्मीदों को ध्यान में रखना चाहिए और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करनी चाहिए...।' हमें सभा के हालात के बारे में जनता की धारणा को दूर करने में सक्षम बनना चाहिए।

12. हम आजकल देश में लोकतंत्र का महापर्व मना रहे हैं। कुछ ही दिनों में सत्रहवीं लोक सभा का गठन भी होगा। मुझे विश्वास है कि नयी लोक सभा के गठन के साथ ही दोनों सदनों की कार्यप्रणाली में एक नये अध्याय का सूत्रपात होगा। मैं आशा करता हूं कि अर्थपूर्ण सहयोग, संवाद, विमर्श और विधायी कार्यों के एक नये अध्याय का प्रारंभ होगा।

13. मुझे हर्ष है कि इस शुभ अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक आयोजन रखा गया है। मुझे विश्वास है कि ‘कथक धरोहर’ के प्रतिभावान कलाकार अपने शास्त्रीय नृत्य से हम सभी का मन मोह लेंगे। इस अवसर पर मैं, राज्य सभा दिवस पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीतने वाले राज्य सभा कर्मियों के बच्चों को उनकी उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। और उन सभी को जिन्होंने इन प्रतियोगिताओं में भाग लिया उन्हें भी शुभकामनाऐं देता हूं।

14. मुझे हर्ष है कि हमारे बीच इस अवसर पर राज्य सभा सचिवालय के अवकाश प्राप्त सदस्य भी उपस्थित हैं। आप सचिवालय के वृहत्तर परिवार के सम्मानीय सदस्य हैं और सदैव रहेंगे।

15. राज्य सभा के इस विशाल परिवार के अभिभावक के रूप में, मैं आप सभी को स्वास्थ्य, सुख और संतोष की शुभकामनाऐं देता हूं।

16. सभा के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए, मैंने मौजूदा नियमों और प्रक्रियाओं की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया था। मुझे उसका प्रतिवेदन मिल गया है, जिस पर आगे विचार किया जाएगा। सदस्यों को सभा में सदस्यों को अपनी मातृभाषा में बात करने, यदि वे ऐसा चाहें तो, की सुविधा के लिए, कार्यवाही में उनकी प्रभावी भागीदारी के लिए हमने संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी 22 भाषाओं में भाषांतरण की सुविधा उपलब्ध कराई है।

17. हम आजकल देश में लोकतंत्र का महापर्व मना रहे हैं। शीघ्र ही, सत्रहवीं लोकसभा का गठन किया जाएगा। मुझे पूरी उम्मीद है कि नई लोकसभा का गठन हमारे देश को इसकी क्षमता का भरपूर लाभ उठाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम बनाएगा ।

18. मुझे खुशी है कि इस अवसर पर शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा रहा है। मुझे यकीन है, कथक धरोहर के बहुमुखी कलाकार अपने शास्त्रीय नृत्य के प्रदर्शन से हम सभी का मनोरंजन करेंगे। मुझे बहुत खुशी है कि सचिवालय के कर्मचारी भी एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे हैं। इस अवसर पर मैं, राज्य सभा दिवस पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीतने वाले राज्य सभा कर्मियों के बच्चों को उनकी उपलब्धि पर बधाई देता हूं। मैं उन सभी को, जिन्होंने इन प्रतियोगिताओं में भाग लिया, भी शुभकामनाऐं देता हूं।

19. मैं यहां सचिवालय के कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उपस्थित देखकर प्रसन्न हूं। आप सभी सचिवालय के वृहत्तर परिवार के सम्मानीय सदस्य हैं और भविष्य में भी रहेंगे।

20. राज्य सभा के इस विशाल परिवार के अभिभावक के रूप में, मैं आप सभी को स्वास्थ्य और सुख की शुभकामनाऐं देता हूं।

जय हिन्द!