29 अगस्त, 2019 को हैदराबाद में क्वालिटी सर्कल फ़ोरम ऑफ़ इंडिया के 33वें सम्मेलन में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

हैदराबाद | अगस्त 29, 2019

"क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया के 33 वें सम्मेलन का उद्घाटन करने के लिए आज यहाँ हैदराबाद में उपस्थित होकर मैं अत्यंत प्रसन्नता हूँ। मुझे बताया गया था कि क्यूसीएफ़आई का गठन एक गैर-लाभकारी निकाय के रूप में किया गया था और जमीनी स्तर के कर्मचारियों को स्वयं के व आपसी विकास के लिए शिक्षित और प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से इसे सोसायटी अधिनियम के तहत पंजीकृत किया गया था।

मुझे बताया गया कि 1000 से अधिक प्रतिभागी इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं और 200 से अधिक सुधार परियोजनाएँ यहाँ इस सम्मेलन में प्रस्तुत की जा रही हैं। सभी प्रतिभागियों को मेरी बधाई और मैं आशा करता हूँ कि यह कार्यक्रम सभी प्रतिभागियों के लिए उपयोगी और पारस्परिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगा।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि हैदराबाद चैप्टर क्यूसीएफ़आई के सबसे पुराने चैप्टरों में से एक है और इसका उद्घाटन 1986 में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री एन.टी. रामा राव ने किया था। तमिलनाडु के पूर्व राज्यपाल श्री पी.एस. राम मोहन राव क्यूसीएफ़आई हैदराबाद चैप्टर के संस्थापक अध्यक्ष हैं।

मुझे बताया गया है कि क्यूसीएफ़आई मुख्य रूप से जिस क्षेत्र पर बल देता है वह है जमीनी स्तर के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना है ताकि वे अपने कार्य क्षेत्रों में आने वाली दीर्घकालिक समस्याओं की पहचान कर सकें, सरल सांख्यिकीय समस्या-समाधान उपकरणों को लागू करके उनका विश्लेषण कर सकें और समाधान ढूंढ सकें।

अंतर्निहित विचार यह है कि प्रत्येक व्यक्ति के पास अपनी खुद की एक बुद्धिमत्ता है और जब इसे उचित दिशा दी जाती है, तो इसका उपयोग रचनात्मक और लाभकारी उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। क्यूसीएफ़आई का मूल उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति में छिपी अप्रयुक्त क्षमता का दोहन करना है।

मुझे बताया गया था कि क्यूसी दर्शन मानवता का सम्मान करने और एक खुशनुमा कार्यस्थल बनाने में मदद करता है। यह कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच उत्पादकता और संचार में सुधार करने में भी मदद करता है।

मुझे खुशी है कि यहां मौजूद क्यूसी टीमें अपनी सुधार परियोजना प्रदर्शित कर रही हैं, जिनसे उनके संगठनों को काफी फायदा हुआ है। हमें नवोन्मेष की संस्कृति बनाने और 'मेक इन इंडिया' जैसे कार्यक्रमों पर जोर देने की आवश्यकता है।

नवाचार की संस्कृति बनाने के लिए यह आवश्यक है कि बहु- विषयक समूहों की सामूहिक क्षमता का दोहन किया जाए, अपने आसपास के लोगों को दूसरों के विचारों को आधार बनाकर नए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए और इस तरह से नेतृत्व किया जाए कि आपके संगठन में सभी की क्षमताओं में और वृद्धि हो। शीर्ष पदों पर रहने वालों को इस तरह का नेतृत्व प्रदान करना चाहिए।

समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से और साथ में काम करके भी हल किया जा सकता है। शायद साथ मिलकर काम करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। संगठनों को समस्याओं को हल करने और यथास्थिति को स्वीकार नहीं करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की स्वाभाविक क्षमता को बाहर लाने हेतु एक समर्थकारी वातावरण बनाना होगा।

टीम भावना को बढ़ावा देने, नए विचारों को प्रोत्साहित करने, कर्मचारियों को खुलकर अपनी राय व्यक्त करने हेतु सशक्त बनाने से सभी को मदद मिलेगी।

कोई संगठन ग्राहकों द्वारा दिए गए फीडबैक को महत्व देकर किसी उत्पाद या सेवा में महत्वपूर्ण मूल्य वर्धन कर सकता है।

प्रिय बहनों और भाइयों,
तेज-रफ्तार वाली, आधुनिक जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण पक्ष है कार्य और जीवन के बीच संतुलन सुनिश्चित करने की आवश्यकता। तनाव सर्वव्यापी हो गया है और यह लोगों के स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर रहा है। स्वयं के लिए पर्याप्त समय न होना आदर्श बात नहीं है। परिवार के साथ बिताने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। इसके अलावा यह भी आवश्यक है कि योग और ध्यान को एक दैनिक कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए।
उचित आहार आदतों सहित एक स्वस्थ जीवन शैली एक खुशहाल जीवन के लिए अनिवार्य है।

जहां कोई कार्य स्थल पर लापरवाही, अनुशासनहीनता या गैरजिम्मेदारी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता वहीं यह संगठन की भी जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि संगठन का माहौल कर्मचारियों के व्यक्तिगत जीवन को खतरे में न डाले। अपना मुनाफा कमाने के साथ साथ कर्मचारियों के लिए एक स्वस्थ कार्य जीवन सुनिश्चित करने पर भी संगठनों का ध्यान अनिवार्य रूप से केन्द्रित होना चाहिए।

हमारे युवा और ऊर्जावान कार्यबल को समाज सेवा संबंधी कार्यों में लगाना भी आवश्यक है। वास्तव में, मुझे लगता है कि वंचित और दलित वर्गों की सहायता हेतु विशेष रूप से केन्द्रित गतिविधियां शुरू करने के लिए डॉक्टर, वकील, सनदी लेखाकार और अन्याओं सहित विभिन्न व्यवसायों द्वारा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व की तर्ज पर व्यावसायिक सामाजिक उत्तरदायित्व संबंधी एक कोड अपनाया जाना चाहिए।

हमें समझना होगा कि देश तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक कि समाज का प्रत्येक वर्ग भारत की विकास गाथा में भागीदार नहीं बन जाता।

सॉर्ट (छंटाई), स्ट्रेटेन (सुलझना), शाइन (चमकना), स्टैंडर्डाइज (मानकीकरण) एंड सस्टेन (कायम रखना) के 5 एस की अब धारणा का उद्देश्य कार्य स्थल पर समग्र दक्षता में सुधार करना है। इस अवधारणा को अगर उद्योगों, स्कूलों, अस्पतालों, बैंकों, कॉलोनियों और घर में सही अर्थों में लागू किया जाता है, तो "स्वच्छ भारत" का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

गुणवत्ता को एक जीवन पद्धति बनाने के लिए, इसे स्कूलों और कॉलेजों में शुरू किया जाना चाहिए।

गुणवत्ता की अवधारणाओं में शिक्षा पार्श्व सोच को बढ़ावा देने और छात्रों को भविष्य के कार्य स्थलों के लिए तैयार करने में मदद कर सकती है।

पार्श्व सोच को विकसित करके, छात्र लीक से हटकर सोच रखने के माध्यम से किसी समस्या के लिए आवश्यकता-आधारित समाधान निकालने की क्षमता प्राप्त करते हैं।

उच्च रैंक हासिल करने के लिए छात्रों के बीच "प्रदर्शन तनाव" समूहिक गतिविधियों में भाग लेने से बहुत कम हो जाएगा। कार्यस्थल में सफल होने के लिए, छात्रों को समूह निर्माण (टीम बिल्डिंग) और सम्प्रेषण कौशल पर ध्यान देना चाहिए।

मैं राज्य सरकार और क्यूसीएफ़आई हैदराबाद चैप्टर से हमारी भावी पीढ़ी के हितार्थ स्कूलों और कॉलेजों में इस कार्य को बड़े पैमाने पर करने का आग्रह करता हूं। मुझे यकीन है कि यह "मेक इन इंडिया" को गति देने में भी मदद करेगा। भारत में निर्मित उत्पादों के लिए उच्चतम गुणवत्ता मानकों को पूरा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुझे खुशी है कि क्यूसीएफ़आई ने हमारे उद्योग के पेशेवरों को सभी स्तरों पर सशक्त और प्रशिक्षित किया है और एक प्रभावी कार्यबल बनाने में मदद की है जो राष्ट्र को तेजी से प्रगति करने में और अर्थव्यवस्था को बढ़ने में मदद कर रहा है।

अंत में, अपनी बात समाप्त करने से पहले, मैं सभी राजनीतिक दलों से पंचायतों से लेकर संसद तक के सभी स्तरों पर अपने जनप्रतिनिधियों के लिए एक आचार संहिता बनाने का आह्वान करना चाहूंगा। देश में सार्वजनिक चर्चा की गुणवत्ता बढ़ाने की भी आवश्यकता है।

क्यूसीएफ़आई के सभी भावी प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनायें।

जय हिन्द!"