28 नवंबर, 2019 को नई दिल्ली में इंडियन वूमेन्स प्रेस कोर (आईडब्ल्यूपीसी) के रजत जयंती समारोह के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | नवम्बर 28, 2019

"नमस्कार

सर्वप्रथम मैं अपने संबोधन की शुरूआत इंडियन वूमेन्स प्रेस कोर (आईडब्ल्यूपीसी), जोकि महिला पत्रकारों का एक प्रतिष्ठित संघ है, के 25 सफलतम वर्ष पूरा करने की बधाई देकर करता हूँ। इसका गठन महिला पत्रकारों को उनके पेशागत कार्यों में सहायता देने, उनके ज्ञान तथा कौशल में वृद्धि करने तथा संपर्क का एक मंच उपलब्ध कराने के लिए 1994 में किया गया था।

मुझे खुशी है कि यह संगठन महिला पत्रकारों के लिए कार्य का अनुकूल वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है औरउनके अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है। यह एक गैर-लाभकारी, निष्पक्ष, प्रगतिशील पेशेवर संगठन है जो महिला पत्रकारों के लिए सकारात्मक परिवर्तन लाने पर ध्यान केंद्रित करता रहा है।

इस संगठन के सदस्य प्रिंट, टीवी तथा नए मीडिया के रिपोर्टर, एडीटर, प्रोड्यूसर, ऐंकर तथा कैमरापर्सन हैं और यह एक महत्वपूर्ण संस्था बन गई है। यह संस्था विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात व्यक्तियों के साथ प्रेस बैठकों तथा वार्ता का आयोजन करती रही है।

यह सराहनीय है कि राज्य के चोथे स्तंभ के रूप में अपनी यथोचित भूमिका निभाने के लिए महिलाएं इस पवित्र पेशे को अपनाने के लिए बड़ी संख्या में आगे आई हैं।

मुझे बताया गया है कि आईडब्ल्यूपीसी महिला पत्रकारों को फील्ड तथा डेस्क, दोनों में उनके कर्त्तव्यों के निष्पादन में उन्हें सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक अवसंरचनात्मक सहायता उपलब्ध करवा रहा है।

प्रेस और मीडिया ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनता को अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित करने में और स्वतंत्रता के बाद से देश में लोकतांत्रिक नींव को सुदृढ़ करने में अग्रणी और प्रमुख निभाई है।

पत्रकारिता, नागरिकों को उनके जीवन, उनके समुदायों, उनके समाजों तथा उनकी सरकारों के बारे में सर्वोत्तम संभव निर्णय लेने के लिए आवश्यक सूचना प्रदान करती है।

पत्रकारिता का उद्देश्य लोगों को बेहतर निर्णय लेने हेतु आवश्यक सूचना देना है। दूसरे शब्दों में पत्रकारिता से जनता को सशक्त किया जाना अपेक्षित है।

मीडिया की यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि वह न केवल सही सूचना उपलब्ध कराए बल्कि लोगों को उनके अधिकारों तथा उत्तरदायित्वों के बारे में भी शिक्षित करे।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, पिछले कुछ वर्षों में मीडिया परिदृश्य नाटकीय रूप से बदल गया है और इसीलिए पत्रकारिता के मूल्य और आचार-शास्त्र भी बदल गया है।

राजनति, चिकित्सा और पत्रकारिता जैसे पेशे को मिशन माना जाता था और जो इस नौकरी में थे वे आचार-शास्त्र के प्रति प्रतिबद्ध थे। दुर्भाग्यवश व्यवसाय तथा राजनीति सहित विभिन्न कारकों के कारण इस प्रकार की प्रतिबद्धता में गिरावट आई है। दुर्भाग्य से वृत्तांत और रिपोर्ट में प्रबंधन की सोच के अनुसार राय समाहित कर दी जा रही है।

इसके साथ-साथ झूठे या बनावटी वृतांतों का खतरा भी है जो समाचार, इंटरनेट तथा मैसेजिंग सेवाओं के माध्यम से जनता तक पहूँचते हैं। ऐसे दृष्टांतों से प्राय: अराजकता, भ्रम तथा घबराहट की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

मैं मीडिया से समाचारों में अपनी राय शामिल नहीं करने का आग्रह करता रहा हूँ और वस्तुनिष्ठता, निष्पक्षता तथा परिशुद्धता को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देता रहा हूँ।

पत्रकारिता का आधारभूत सिद्धांत द्वारपाल की भूमिका निभाए बिना अपने पाठकों तथा दर्शकों के समक्ष निष्पक्ष, वस्तुनिष्ठ, परिशुद्ध तथा संतुलित सूचना प्रस्तुत करना है।

मुझे खुशी है कि अनेक पत्रकार इन सिद्धांतों का पालन करते हैं जो यह आश्वस्त करता है कि भारतीय मीडिया कुल मिलाकर विश्वसनीय है।

पत्रकार परिवर्तन के उत्प्रेरक हैं और मीडिया समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के एक साधन के रूप में कार्य करता है। मीडिया पेशेवर समाज का रखवाला है और अपने अवलोकनों, सुझावों तथा लेखों के माध्यम से लोकतंत्र को सुदृढ़ करता है।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे सामने अभी भी महिलाओं के उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव तथा घरेलू हिंसा के उदाहरण आते हैं। एक अदृश्य अवरोध जो विकास हेतु महिलाओं के अवसर को सीमित करता है, दुर्भाग्यवश अभी भी वर्तमान समाज की एक वास्तविकता है।

वैश्विक मीडिया निगरानी परियोजना (जीएमएमपी) के 2015 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वैश्विक स्तर पर न्यूज रिपोर्टर के रूप में महिलाएं सर्वाधिक 41 प्रतिशत रेडियो में और सबसे कम 35 प्रतिशत प्रिंट न्यूज में कार्यरत हैं (शेष 24 प्रतिशत टीवी और इंटरनेट पर हैं)।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2010 और 2015 के बीच रेडियो और टेलीविजन दोनों माध्यमों में महिला रिपोर्टरों की वैश्विक हिस्सेदारी कम होकर चार प्रतिशत तक रह गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 1995 और 2015 के बीच समाचार पत्र, टेलीविजन, रेडिया में महिला मीडियाकर्मियों की प्रतिशतता 17 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई है जो 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। पुरूष 76 प्रतिशत के साथ अभी भी इस उद्योग में प्रमुख स्थान रखते हैं।

यूनेस्को और यूएन वूमेन तथा इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईएफजे) द्वारा आरंभ किए गए एक अन्य अध्ययन, 'इनसाइड द न्यूज: चैलेंजेज एंड एस्पिरेशंस ऑफ वूमेन जर्नलिस्ट्स इन एशिया एंड पैसिफिक' में सुझाव दिया गया है कि मीडिया में महिलाओं की उपस्थिति दो दशकों में दुगुने से भी अधिक हो गई है परंतु वे एशिया और पैसिफिक में मीडिया के कार्यबल का केवल 28.6 प्रतिशत हैं और भारत में पुरूष महिलाओं से संख्या में अधिक हैं जिनका अनुपात 4:1 है।

इसमें दर्शाया गया है कि 'पूरे एशिया और पैसिफिक क्षेत्र में महिलाएं मीडिया कार्यबल की औसतन 28.6 प्रतिशत हैं। मीडिया संगठनों में निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में उनका अनुपात कम है जहां कार्यकारी भूमिका में महिलाएं 17.9 प्रतिशत, वरिष्ठ संपादन में 19.5 प्रतिशत और मध्यस्तरीय संपादकीय पदों पर 22.6 प्रतिशत हैं।'

यू.एन. वूमेन द्वारा हाल ही में जारी एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार भारत के प्रमुख मीडिया संगठनों में भारत की महिला पत्रकार 'अपनी उचित भागीदारी से लगातार वंचित बनी हुई है'। "भारतीय मीडिया में लैंगिक असमानता" रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व समाचार पत्रों तथा टीवी की तुलना में ऑनलाइन अधिक है।

इन बातों को ध्यान में रखते हुए समाचार संगठनों के प्रबंधकों, आपके जैसे संघों तथा भारतीय प्रेस परिषद तथा एनबीए को इस पेशे में लैंगिक आधारित भेदभाव को दूर करने के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए और कोई उपाय निकालना चाहिए।

महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सम्मान संबंधी महत्वपूर्ण मुद्दों का हल निकालने के लिए मीडिया और सरकार द्वारा एक व्यवस्थित, संरचित दृष्टकोण लाया जाना चाहिए। लैंगिक भेदभाव तथा महिलाओं की उपेक्षा को तत्काल समाप्त करने की आवश्यकता है।

मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि सदस्यों और उद्योग के लिए महिला पत्रकारों को संसाधन के रूप में विकसित कर मीडिया में महिलाओं के प्रभाव में वृद्धि के अपने महत्वपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह संगठन अपने सदस्यों के लिए नियमित रूप से कार्यशालाएं तथा प्रशिक्षण सत्र आयोजित करता रहा है।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, राष्ट्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह देखना सरकारों, संस्थाओं, मीडिया तथा सिविल सोसाइटी का उत्तरदायित्व है कि राष्ट्र की विकास प्रक्रिया में महिलाओं को समान साझीदार बनाया जाए।

मीडिया को अन्य महिलाओं को प्रेरित करने के लिए उपलब्धियां प्राप्त करने वाली महिलाओं की सफलता की कहानी को रेखांकित करना चाहिए।

आज जब हम आईडब्ल्यूपीसी के 25 वर्षों की यात्रा का जश्न मना रहे हैं तो हमें मीडिया के क्षेत्र में उच्च मानक स्थापित करने और उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।

मैं आप सभी से चाहता हूं कि आप तथ्यों पर आधारित अच्छी तरह से प्रलेखित, शोध आधारित रिपोर्ट के माध्यम से लोगों को सूचना दें और उन्हें शिक्षित करें।

सोशल मीडिया के उदय ने संस्थाओं एवं संगठनों के बीच प्रतियोगिता में वृद्धि की है। यह महत्वपूर्ण है कि हमारे न्यूज रुम तथा मीडिया कर्मियों को समाचार और अपडेट्स दिखाने में अधिकतम सतर्कता बरतने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए और संवेदनशील बनाया जाना चाहिए।

सनसनी वाले समाचारों पर रोक लगाने, पक्षपातपूर्ण कवरेज और पेड न्यूज को बंद करने के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। एक जिम्मेदार संस्था के रूप में संपूर्ण मीडिया को देश की लोकतांत्रिक जड़ों को सुदृढ़ करने में योगदान देना चाहिए।

यहां प्रेष परिषद और आपके जैसे मीडिया संगठनों को मीडिया वृत्तिकों को प्रसारित करने में और अधिक जिम्मेदार बनने हेतु प्रशिक्षित करने के लिए आगे आना चाहिए।

आपको श्रोताओं या पाठकों को इतना सशक्त बनाना चाहए कि वे समझबूझकर कोई विकल्प अपनाएं।

मैं मीडिया से, विशेषकर क्षेत्रीय और देशी भाषाओं के मीडिया संगठनों से आग्रह करता हूँ कि वे समाचारों के साथ-साथ विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय भाषाओं, भिन्न-भिन्न राज्यों की संस्कृति तथा परंपराओं को प्रोत्साहन दें।

अंत में, मैं मीडया से आग्रह करता हूं कि वह ग्रामीण भारत पर ध्यान दे। हमें किसानों, महिलाओं, युवाओं तथा उद्यमियों से संबंधित विषयों पर विशेष बल देना चाहिए।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि आईडब्ल्यूपीसी महिला पत्रकारों को पुस्तकालय, कंप्यूटर जैसे महत्वपूर्ण पेशेवर संसाधन उपलब्ध कराती रही है ओर अपने सदस्यों को जीवन के सभी क्षेत्रों के पत्रकारों से मिलने में समर्थ बनाती रही है।

मुझे यकीन है कि ऐसी सहायता सभी पत्रकारों, विशेषकर युवा पत्रकारों को अपने वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत के दौरान सीखने और अपने पेशेवर कौशल को बढ़ाने में सहायता करती है।

मैं एक बार पुन: इंडियन वूमेन्स प्रेस कोर (आईडब्ल्यूपीसी) और इसके सभी सदस्यों को इस पेशे में और राष्ट्र में उनके योगदान के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूँ।

जय हिंद!"