28 अप्रैल 2019 को नई दिल्ली में निःशक्तजन कलाकारों के समूह द्वारा प्रस्तुत मिरेकल ऑन व्हील्स नृत्य प्रदर्शन के अवसर पर सभा में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | अप्रैल 28, 2019

मुझे यहाँ इस अनोखे समारोह, "मिरकल्स ऑन व्हील्स" (पहियों पर चमत्कार), जिसे पुष्पविहार अयप्पा सेवा समिति द्वारा स्थापित पुष्पविहार श्री धर्मसास्था मंदिर के निर्माण कार्य को पूरा करने हेतु आयोजित किया जा रहा है, में उपस्थित होकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।

आरंभ में, मैं "मिरकल्स ऑन व्हील्स" कार्यक्रम के कलाकारों की प्रशंसा करना चाहूँगा जिन्होने यह दर्शाया कि मजबूत इच्छाशक्ति में सभी सीमाओं को पार कर लेने की शक्ति होती है।

मुझे यह बताया गया कि मुख्य रूप से व्हील चेयर पर निर्भर दिव्यांगजनों का एक समूह आज अपनी प्रस्तुति देने जा रहा है। अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से असाधारण और अति प्रतिभाशाली व्यक्तियों का यह समूह यह दिखाता रहा है कि यदि पूरी निष्ठा और जुनून के साथ किसी लक्ष्य की ओर बढ़ा जाए तो कोई भी सीमा किसी भी व्यक्ति को अपने सपने पूरे करने से रोक नहीं सकती।

मुझे खुशी है कि पुष्पविहार अयप्पा सेवा समिति के बोर्ड के सदस्य कुल-वंश, लिंग, जाति, धर्म अथवा सामाजिक स्थिति के आधार पर कोई भेद-भाव किए बिना समाज की सेवा कर रहे हैं।

सामुदायिक कल्याण भारतीय सामाजिक लोकाचार के केंद्र में है।

"सर्वे जनः सुखिनः भवन्तु" हमारे सभी विचारों और कार्यों का मूलभूत विषय रहा है।' लोकोपकार और सहभाजन हमारी सांस्कृतिक परंपरा के केंद्र में रहे हैं ।

जैसा कि आप सभी अवगत हैं, केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए और उन्हें एक सम्मानजनक जीवन जीने देने के लिए कई पहलें की गयी हैं। यद्यपि, कई सिविल समाज संगठन सरकार के साथ भागीदारी कर रहे हैं, तथापि इस दिशा में और बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। दिव्यांगजनों को समानुभूति, प्रोत्साहन, सुविधा और सशक्तिकरण की आवश्यकता है।

भेद-भावपूर्ण प्रवृत्तियों को समाप्त करना दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण की ओर पहला कदम होना चाहिए। दिव्यांगजनों को समर्थन प्रदान करना और उन्हे एक सम्मानजनक जीवन जीने हेतु समर्थ बनाना सरकार और समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

एक समाज के रूप में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि निशक्तता के साथ कोई कलंक न जोड़ा जाए और हमें निशक्तजनों के रूप में हमारे पास जो बहुमूल्य मानव परिसंपत्तियाँ हैं उनकी पहचान करना भी सीखना होगा।

मैं एक दृष्टिबाधित गायक, कयमकुलमबाबू, भजन गायक श्री अनूप अशोकन और सुश्री सितारा को आज के कार्यक्रम में शामिल करने के लिए समिति को बधाई देता हूँ।

यह कार्यक्रम वास्तव में दिव्यांग भारतीयों की एक मजबूत और अत्याधुनिक भारत का निर्माण करने की इच्छाशक्ति दर्शाता है, जिसमें सभी नागरिक सम्मान के साथ रह सकें और एक संतृप्त जीवन जी सकें।

मुझे यह देखकर भी खुशी हो रही है कि यह समिति, जो कि एक धार्मिक संगठन है, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन कर रही है। मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि समिति का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निशुल्क सेवाएँ प्रदान करना है। यह मानवता की सेवा को देवता की सेवा के समान मानने वाले भारतीय दर्शन के अनुरूप है। यह नरसी मेहता जैसे संतों का भी दर्शन है जिन्होने प्रसिद्ध गीत 'वैष्णवजन तो तेने कहिए' गाया था।

भारत एक ऐसा सांस्कृतिक खज़ाना है जिसपर हम सब गर्व कर सकते हैं। आइये हम इसका संरक्षण करते हैं और भारत की धार्मिक परंपरा के मूल में निहित शांति, अच्छाई, करुणा और समावेशन के संदेश का प्रचार प्रसार करते हैं ।

मुझे आशा है कि पुष्पविहार अयप्पा सेवा समिति जैसे धार्मिक संगठन इस प्रकार के कार्यक्रमों, जो हम सभी में उपस्थित ईश्वरीय ज्योति को दर्शाते हैं, के माध्यम से मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार करते रहेंगे।

मैं समिति के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।

जय हिन्द !