27 सितंबर, 2019 को नई दिल्ली में, विश्व पर्यटन दिवस-2019 समारोह के उद्घाटन के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | सितम्बर 27, 2019

मुझे विश्व पर्यटन दिवस 2019 के अवसर पर वैश्विक पर्यटन उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ उपस्थित होते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मुझे खुशी है कि संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडबल्यूटीओ) ने विश्व पर्यटन दिवस 2019 के आयोजन के लिए भारत को मेजबान देश के रूप में चुना है।

विश्व पर्यटन दिवस हर साल पर्यटन के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक मूल्यों के प्रति जागरूकता पैदा करने और साथ ही वैश्विक समुदायों को यात्रा करने और अनुभव करने तथा दुनिया की विविध संस्कृतियों का सम्मान करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु मनाया जाता है।

इससे अंततोगत्वा यात्रा और पर्यटन के माध्यम से आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि विश्व पर्यटन दिवस 2019 की थीम'पर्यटन और नौकरियां: सभी के लिए बेहतर भविष्य’ है।

पर्यटन आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण साधन है और भारत सहित कई देशों में रोजगार और विदेशी मुद्रा की कमाई का एक प्रमुख स्रोत है।

इस संदर्भ में, यह थीम सबसे उपयुक्त है क्योंकि यह बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए पर्यटन की क्षमता को स्वीकार करता है और सम और सतत विकास प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

देश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत, कई तरह की जलवायु तथा देश भर में फैले प्राकृतिक सौंदर्य से भरे इलाकों और स्थानों के मद्देनजर भारत में पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं।

लेह के बर्फीले रेगिस्तानों से लेकर, राजस्थान चिलचिलाती धूप से सने रेत के धोरों तक, मध्य प्रदेश के हरे-भरे जंगलों से लेकर केरल के विस्तृत जल बांधों, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मनमोहक समुद्र तक भारतीय उपमहाद्वीप की नैसर्गिक सुंदरता अद्वितीय है।

आज, भारत दुनिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है।

30 सांस्कृतिक और 7 प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थल वाला यह भारत नए और पुराने का एक मंत्रमुग्धकारी संगम है।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, हमारी सभ्यता 5000 साल पुरानी है। उसी प्रकार , भारत में पर्यटन का इतिहास बहुत पुराना है। भारतीय सभ्यता वैदिक, इस्लामी और पश्चिमी संस्कृतियों के सार का मिश्रण है।

इसकी यात्रा परंपरा पूर्व -वैदिक- सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू होती है, जो सामाजिक एकीकरण, व्यापार और सीखने के उद्देश्यों के लिए विभिन्न मानव सभ्यता के लोगों की यात्राओं का गवाह रहा है।

पारंपरिक उद्योगों, व्यापारिक मार्गों और फलते-फूलते व्यापार के विकास ने भारत में यात्रियों की एक और वर्ग तैयार किया।

8 वीं और 9 वीं शताब्दी के दौरान, महान भारतीय दार्शनिक शंकराचार्य, जिन्हें भारत में तीर्थयात्रा पर्यटन के वास्तुकार के रूप में भी जाना जाता है, ने घरेलू तीर्थयात्रा को प्रोत्साहित किया।

देश के भीतर यात्रा का यह दौर आज भी जारी है। वास्तव में, भारत में पर्यटन के क्षेत्र में घरेलू पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान है।

1991 से 2018 तक सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के घरेलू पर्यटकों के दौरे में 13.11% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) रही है।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

यह जानकर खुशी हो रही है कि वर्ष 2018 में विश्व भर में कुल 1.4 बिलियन पर्यटकों ने यात्रा की, जिससे विश्वव्यापी निर्यात में 1.7 ट्रिलियन अमरीकी डालर का सृजन हुआ। यह लगातार नौवें वर्ष अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में निरंतर वृद्धि को दर्शाता है।

पर्यटन दुनिया भर में आय का 10 प्रतिशत प्रदान करता है और रोजगार के असंख्य अवसर पैदा करता है। पर्यटन की पहुंच वहां तक है जहां अन्य क्षेत्र अक्सर नहीं पहुंच पाते हैं। एक छोटे से द्वीप राष्ट्र मालदीव या भूपरिवेष्ठित हिमालयी राज्य भूटान को ही ले लीजिए, वहां पर्यटन राजस्व पैदा करता है और रोजगार प्रदान करता है।

विकसित और कम विकसित दोनों अर्थव्यवस्थाओं में, यात्रा और पर्यटन अन्य क्षेत्रों की तुलना में महिलाओं को अधिक अनुपात में रोजगार देते हैं। पर्यटन क्षेत्र में न केवल अधिक से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं, बल्कि उनके पास उन्नति के अधिक अवसर भी हैं।

वैश्विक पर्यटन में वृद्धि के अनेक कारक हैं, जिनमें वैश्विक आवागमन की बाधाओं को दूर करना, पहुंच में वृद्धि और साथ ही बड़ी संख्या में लोगों की यात्रा करने की इच्छा और दुनिया भर के देशों की विविध संस्कृतियों तथा जीवनशैली का अनुभव करना शामिल है।

भारत में भी पर्यटन विकास के एक मजबूत दौरे से गुजर रहा है जो कि उभरते हुए भारतीय मध्यम वर्ग, अत्यधिक खर्च करने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि और एक बहुआयामी पर्यटन स्थल के रूप में 'अतुल्य भारत' को बढ़ावा देने के लिए समन्वित सरकारी अभियान से प्रेरित है । भारतीय पर्यटन उद्योग वास्तव में भारत में सेवा क्षेत्रों के विकास के प्रमुख संवाहकों में से एक के रूप में उभरा है।

भारत अब दुनिया की 7 वीं सबसे बड़ी पर्यटन अर्थव्यवस्था है और चिकित्सा पर्यटन के लिए दुनिया के शीर्ष 3 गंतव्यों में शामिल है। वर्ष 2018 में, 27.39 मिलियन पर्यटक भारत आए और हर साल 6 लाख से अधिक चिकित्सा पर्यटक भारत आते हैं।

वर्ष 2019 में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 34 'विश्व यात्रा एवं पर्यटन प्रतिस्पर्धा रैंक' में भारत का स्थान 140 अर्थव्यवस्थाओं में से 34वां है। यह दक्षिण एशिया की यात्रा और पर्यटन जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा है और भारत उप-क्षेत्र की सबसे प्रतिस्पर्धी यात्रा और पर्यटन अर्थव्यवस्था बनी हुई है।

देश को यात्रियों के लिए सुलभ और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने कई निर्णायक कदम उठाए हैं। पर्यटन के साथ-साथ व्यापार और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए वीजा व्यवस्था को काफी उदार बनाया गया है।

अब हम 180 से अधिक देशों के पर्यटकों को ई-वीजा सुविधा देते हैं।

भारत ने भी अपने व्यावसायिक माहौल, व्यापार करने की सुविधा में, समग्र यात्रा और पर्यटन नीति और सक्षमकारी परिस्थितियों, बुनियादी ढांचे तथा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी में बहुत सुधार किया है।

हम पर्यटन के बुनियादी ढांचे के विस्तार और उन्नयन पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बजट 2019 में घरेलू और विदेशी पर्यटकों के आवगमन में वृद्धि के लिए विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्रों के रूप में 17 प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों के विकास की परिकल्पना की गई है।

एक और जहां केंद्र और राज्य सरकारें पर्यटन स्थलों को विकसित करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपना काम कर रही हैं, वहीं मेरा सुझाव है कि कॉरपोरेट क्षेत्र सरकारों के प्रयासों में सहयोग करे।

मैं सरकार को स्वदेश दर्शन, राष्ट्रीय तीर्थयात्रा कायाकल्प मिशन एवं आध्यात्मिक संवर्धन अभियान (प्रसाद) जैसी योजनाओं को शुरू करने और विशेष तीर्थयात्रा पैकेज शुरू करने के लिए रेल मंत्रालय की भी सराहना करता हूं ।

आतिथ्य क्षेत्र पर जीएसटी कम करने का हालिया निर्णय भी पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए एक सकारात्मक कदम है।

मुझे लगता है कि जैसा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सुझाव दिया है, लोगों, विशेष रूप से युवाओं को घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 2022 तक भारत के भीतर कम से कम 15 पर्यटन स्थलों का दौरा करना चाहिए।

हमारे देश के युवाओं, विशेष रूप से छात्रों को भारत की संस्कृति, विरासत, भाषाओं और व्यंजनों के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानने और देश की बहुरंगीय अद्वितीय संस्कृति की अपनी समझ को बढ़ाने के लिए, 'भारत दर्शन' शुरू करना चाहिए। इस समझ से आज देश के सामने आ रही चुनौतियों का सरल और प्रभावी समाधान तलाशने में मदद मिलेगी।

भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए जाने सहित भारत यात्रा और पर्यटन के लिए एक बड़े स्रोत बाजार के रूप में भी उभर रहा है । देश में पर्यटकों की यह दो-तरफ़ा आवा-जाही सभी के लिए पारस्परिक रूप से लाभदायक है।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

पर्यटन लोगों के बीच परस्पर संपर्क को सक्षम बनाने वाला एक प्रमुख कारक है।

पर्यटन दिलों और मन को जीतने में मदद करता है।

पर्यटन हमें कई सबक सिखाता है। यह हमें धैर्य और सहनशीलता के गुणों की पहचान करने में मदद करता है। जब हम नई-नई जगहें देखेंगे, तो दुनिया के प्रति हमारा ज्ञान और समझ बढ़ेगी।

मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि एक संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के रूप में, विश्व पर्यटन संगठन विश्व स्तर पर जिम्मेदार, स्थायी और सार्वभौमिक रूप से सुलभ पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है।

आर्थिक विकास, समावेशी विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के संवाहक के रूप में पर्यटन को बढ़ावा देने और विश्व स्तर पर ज्ञान तथा पर्यटन नीतियों को आगे बढ़ाने में पर्यटन क्षेत्र के लिए नेतृत्व और सहयोग देने में यूएनडब्ल्यूटीओ की भूमिका सराहनीय है।

हमें पर्यटन को केवल अर्थव्यवस्था को बदलने के तरीके के रूप में नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के भीतर और बाहर के लोगों के जीवन को बदलने के तरीके के रूप में देखना चाहिए।

हमारे लिए परिवर्तन केवल पर्यटक आगमन में वृद्धि, जीडीपी में वृद्धि, निवेश और व्यापार में वृद्धि और मौजूदा उद्योग ढांचे में नौकरियों की वृद्धि के बारे में नहीं है। परिवर्तन का यह विचार इससे कहीं आगे है।

यह पर्यटन के माध्यम से अवसरों को सृजित करने, हर एक व्यक्ति के लिए एक सीधी भूमिका निभाने और पर्यटन के माध्यम से अर्जित होने वाले लाभों में हिस्सा लेने के बारे में है।

इस तरह के परिवर्तन को स्थानीय समुदायों को सक्रिय और सार्थक रूप से उद्योग के विकास में अग्रणी भूमिका निभाने और विकास की दिशा को प्रभावित करने में सक्षम बनाना चाहिए।

जैसे ही हम बड़ी संख्या में पर्यटकों, मजबूत मांगों और उच्च बिक्री कारोबार के लिए तैयार होते हैं, तो हमें आगे की चुनौतियों के प्रति सचेत रहना चाहिए।

यात्रा में 'नैतिकता' के पहलू को ध्यान में रखना आवश्यक है।

पर्यटन को लोगों और विभिन्न गंतव्यों के परिवेश को लाभान्वित करना चाहिए।

इसे स्थानीय उत्पादों और सेवाओं का उपयोग करके, उस क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को बेहतर आय प्रदान करनी चाहिए। इसे स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण के लिए एक माध्यम के रूप में काम करना चाहिए।

मैं यूएनडब्ल्यूटीओ को इस महीने अपने 23वें महाधिवेशन के दौरान पर्यटन नीति पर अब तक के पहले कन्वेंशन अभिसमय को अपनाने और इस प्रकार से यूएनडब्ल्यूटीओ को व्यापक संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अनुरूप लाने के लिए बधाई देता हूं।

भारतीय पर्यटन उद्योग को मेरी सलाह है कि वे उत्कृष्ट सेवा के लिए निरंतर प्रयास करें जोकि पर्यटन उद्योग में उत्पादकता का एक महत्वपूर्ण मापदंड है।

हमें पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ संरक्षण और स्थिरता पर भी बहुत जोर देना चाहिए।

बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवाजी से पानी और ऊर्जा के उपयोग के साथ-साथ अपशिष्ट निर्माण और प्रदूषण भी होता है।

सेवा प्रदाताओं के साथ-साथ पर्यटकों को अपने पारिस्थितिक पैर प्रिंट के प्रति जागरूक होना चाहिए और संसाधनों की खपत के लिए अधिक विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी पर्यटन के सभी लाभों का लाभ उठाने का अवसर मिल सके।

उसके लिए, पर्यावरण अनुकूल तरीके से हमारे पर्यटन क्षेत्र के विकास हेतु हमारे पास एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण और एक मजबूत रोडमैप होना चाहिए ताकि पर्यावरण अनुकूल तरीके से चल सके।

एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का कदम प्रदूषण को रोकने के लिए एक लंबा रास्ता तय कर सकता है और इस दिशा में यह एक सही कदम है।

हमें चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्र में अपनी जबरदस्त संभावनाओं का पूरा उपयोग करना चाहिए। भारत आयुर्वेद जैसी चिकित्सा और स्वास्थ्य की अद्वितीय, प्राचीन प्रणालियों की स्थली है। हमें इस प्राचीन ज्ञान का लाभ उठाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक पर्यटक, जो समग्र कल्याण चाहते हैं, को आकर्षित किया जा सके।

सरकार और पर्यटन क्षेत्र, जो कौशल में सुधार, उपलब्ध नौकरियों की गुणवत्ता और संख्या में वृद्धि तथा उद्योग में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, के बीच एक साझेदारी को देखकर मुझे खुशी हो रही है।

सरकार संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि भारतीयों को पर्यटन से अधिकतम लाभ मिल सके।

मैं पर्यटन उद्योग के हितधारकों की प्रतिबद्धता और जुनून की सराहना करता हूं।

'अथिथि देवो भव:’ का आदर्श अनादिकाल से हमारी सभ्यता के मूल में रहा है। आइए हम इस उदात्त आदर्श के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखें और दुनिया के लिए अपने राष्ट्र के द्वार को खोलें और दुनिया भर के यात्रियों का अतुल्य भारत में स्वागत करें!

मैं सभी पुरस्कार विजेताओं को अपनी हार्दिक बधाई देना चाहता हूं और आप सभी को आने वाले समय में अपनी उत्कृष्ट सेवा और श्रेष्ठता के माध्यम से पर्यटन उद्योग को और अधिक ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!

जय हिन्द!