27 अगस्त, 2019 को विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश के स्वर्ण भारत ट्रस्ट में आंध्र प्रदेश राज्य कौशल विकास निगम (एपीएसएसडीसी) द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद सभा में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश | अगस्त 27, 2019

“मुझे यहां उपस्थित हो कर और आंध्र प्रदेश राज्य कौशल विकास निगम (एपीएसएसडीसी) द्वारा छात्रों तथा युवाओं के हित के लिए राज्य द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों और विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में जानकारी को प्रदर्शित करने के लिए लगाई गई प्रदर्शनी में आकर बड़ी खुशी हो रही है।

मुझे खुशी है कि विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों और स्वर्ण भारत ट्रस्ट के प्रशिक्षुओं को इस मेले के माध्यम से अच्छी जानकारी मिल रही है।

मुझे बताया गया है कि आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य के लिए दहाई अंकीय वृद्धि हासिल करने और आंध्र प्रदेश को देश का सबसे विकसित राज्य बनाने के लिए 7 अलग-अलग मिशनों का गठन किया है। इनमें अन्य सभी मिशनों को प्रशिक्षित और कुशल श्रमबल प्रदान करने के लिए ज्ञान और कौशल मिशन का गठन किया गया है।

मैं अगले 15 वर्षों में आंध्र प्रदेश में 20 मिलियन लोगों तक पहुंचने और सभी मिशनों की कुशल श्रमबल संबंधी मांगों को पूरा करने और आंध्र प्रदेश को कुशल-कार्यबल तथा ज्ञान का हब बनाने के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना करता हूं।

चूंकि हम भारत को एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति और ज्ञान का केंद्र बनाने के लिए तत्पर हैं, इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम नवोन्मेष के लिए सक्षम वातावरण तैयार करें। नवाचार के साथ-साथ देश की विशाल जनसांख्यिकीय क्षमता का दोहन करके एक कुशल जनशक्ति का सृजन किया जाना चाहिए।

यह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि भारत के पास जनसांख्यिकी लाभांश है। जनसांख्यिकीय लाभांश में आर्थिक विकास का सामर्थ्य है, जो जनसंख्या की आयु संरचना, मुख्यतः जब कामकाजी-आयु वाली आबादी गैर-कामकाजी आबादी की आयु से बड़ी होती है, में बदलाव से हो सकता है।

भारत एक युवा, आकांक्षी देश है। हमारी 65% जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु वर्ग की है। हमारी 62% आबादी 15-59 वर्ष के कामकाजी आयु वर्ग में है। हमारे पास 48 करोड़ का कार्यबल है और हर वर्ष एक करोड़ से अधिक लोग इस कार्यबल में शामिल होते हैं।

यह सही समय है कि हम कौशल प्रदान करके अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाएं। कौशल और ज्ञान किसी भी देश के लिए आर्थिक विकास और सामाजिक विकास की प्रेरक शक्तियां हैं।

चूंकि हमारा लक्ष्य 5 ट्रिलियन$ की अर्थव्यवस्था वाला विकसित देश बनना है इसलिए विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए आवश्यक कौशल समूहों के साथ कुशल जनशक्ति का होना जरूरी है। समतामूलक विकास सुनिश्चित करने और अवसर सृजित करने के मामले में शहरी-ग्रामीण विभाजन को कम करना भी महत्वपूर्ण है।

हमें अपने छात्रों को प्रभावी संचार कौशल से लैस करने की भी आवश्यकता है। मात्र डिग्री और डिप्लोमा किसी व्यक्ति को रोजगार योग्य नहीं बनाएंगे। उदाहरण के लिए, नैस्कॉम सर्वे (2011) में पाया गया कि आईटी क्षेत्र में काम करने वाले स्नातकों में से केवल 25 प्रतिशत के पास आवश्यक कौशल है।

इसलिए, आपकी डिग्री और डिप्लोमा को भूमंडलीकृत और उदारीकृत आर्थिक वातावरण में असंख्य अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए उपयुक्त कौशल द्वारा परिपूरक किए जाने की आवश्यकता है।

हमारे युवाओं की यथास्थिति को बदलने और मौलिक नवाचारों को आगे बढ़ाने के लिए उनकी प्रतिभा का पोषण करना महत्वपूर्ण है। हमारी बढ़ती आर्थिक प्रोफ़ाइल के साथ, हमने कौशल विकास को राष्ट्रीय मिशन के रूप में बढ़ावा दिया है।

विश्वविद्यालयों को न केवल ज्ञान केंद्र होना चाहिए, बल्कि उन्हें अनुसंधान, उद्भवन और नवाचार के आकर्षण केंद्र के रूप में उभरने की आवश्यकता भी है। सहयोगी, अंतर-विषयी और बहु-विषयी अनुसंधान पहलों द्वारा एक सुदृढ़ अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की अत्यधिक आवश्यकता है।

अनुसंधान और विकास पर व्यय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को बढ़ावा देने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के प्रयास का एक प्रमुख संकेतक है। लेकिन भारत में, अनुसंधान और विकास पर सार्वजनिक व्यय कम है।

वर्तमान समय में युवाओं को कौशल निर्माण द्वारा सशक्त बनाना एक शक्तिशाली माध्यम है। इससे भविष्य में बेहतर उत्पादकता और विकास के लिए कार्य की प्रभावकारिता और गुणवत्ता बढ़ेगी।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों के तहत सालाना एक करोड़ से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अग्रणी प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना की शुरूआत के बाद से 56 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है।

मुझे खुशी है कि केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारें उद्योग की आवश्यकताओं के आधार पर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और मॉड्यूल प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

हमारा देश एक बड़े परिवर्तन के लिए तैयार है। युवा इस परिवर्तन के कारक हैं। मैं आप सभी से उपलब्ध कार्यक्रमों और विस्तारित अवसरों का उपयोग करने का आह्वान करता हूं।

प्रधान मंत्री मोदी द्वारा "रिफॉर्म, पर्फोर्म और ट्रांसफॉर्म" के आह्वान से प्रेरित भारत तेजी से अपने आप को बदल रहा है और सुदृढ़ कर रहा है।

मैं आप सभी से सीखते रहने और अपने कौशल में सुधार करने का आग्रह करता हूं। आप हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहें।

विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षा संस्थानों को 21 वीं सदी की प्रौद्योगिकी पर निर्भर नौकरी बाजार के लिए आवश्यक कौशल से छात्रों को परिचित कराने हेतु कॉर्पोरेट फर्मों और अन्य उद्योगों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।

हमें श्रम बल में मौजूदा और नए लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए बुनियादी संरचना का निर्माण करना चाहिए। यहाँ मैं उद्योग जगत और फिक्की, एएसओसीएचएएम जैसे उद्योग निकायों तथा अन्य से विभिन्न क्षेत्रों के लिए कुशल श्रमशक्ति सृजित करने में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह करता हूं।

मैं उच्च शिक्षा प्रदान करने वाली प्रत्येक संस्था से कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित विभाग रखने का भी आह्वान करता हूं । इस तरह के विभाग को छात्रों को उद्यमिता में अवसरों की तलाश करने के लिए सशक्त बनाना चाहिए।

धन्यवाद, जय हिंद!