25 सितंबर, 2019 को बेंगलुरु, कर्नाटक में इंडियाज़ चैन्जिंग पैरडाइम स्किल एंड आन्ट्रप्रनर्शिप फॉर ग्लोबल कम्पेटिटिव्निस एंड 38वें एडिशन ऑफ नेशनल इन्स्टिटूट ऑफ पर्सनेल मैनिज्मन्ट पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया न

बेंगलुरु | सितम्बर 25, 2019

मुझे 'भारत के बदलते प्रतिमान: वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए कौशल और उद्यमिता' पर नैटकॉन 2019 सम्मेलन में भाग लेने पर प्रसन्नता हो रही है।

वास्तव में, नैटकॉन 2019 के लिए राष्ट्रीय कार्मिक प्रबंधन संस्थान (एनआईपीएम) द्वारा चुना गया विषय बहुत उपयुक्त है।

प्रिय मित्रों,

जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत एक युवा राष्ट्र है, जिसकी कुल जनसंख्या का लगभग 54 प्रतिशत हिस्सा 25 वर्ष से कम आयु वर्ग और 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु वर्ग की है।

ऐसा अनुमान है कि अगले दशक में लगभग 250 मिलियन युवा भारत के कार्यबल में शामिल होंगे, जो तेजी से बदलती प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में अपने साथ नए कौशल लेकर आएंगे। प्रौद्योगिकियों और डिजिटलीकरण की नई लहर से उद्योग जगत में अभूतपूर्व परिवर्तन आए हैं। इसके परिणामस्वरूप, नए बाजार विकसित करने वाली निरंतर परिवर्तनशील प्रौद्योगिकियों की दुनिया में भावी कार्यबल को पूर्णत: भिन्न कौशलों की आवश्यकता होगी। स्वचालन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता उद्योग जगत की आवश्यकताओं को अत्यधिक प्रभावित करेगी।

संकेंद्रित कौशल प्रयासों और प्रतिभा के पोषण के माध्यम से मानव विकास की इस यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए, विभिन्न हितधारक वृहद प्रतिभा और कौशल व्यवस्था में अनेक नवीन कार्य विधियां अपना रहे हैं।

यद्यपि साक्षरता, कंप्यूटर, इंटरनेट की बुनियादी समझ, और मातृभाषा या अंग्रेजी में संप्रेषण कौशल जैसे मौलिक कौशल अत्यंत प्रासंगिक हैं तथापि भविष्य के लिए आवश्यक नवाचार और सफलता प्रक्रियाओं का पूर्वाभास करना और विभिन्न क्षेत्रों की मांगों को पूरा करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम का अनुमान है कि 35 प्रतिशत प्रमुख कौशल बदल जाएंगे जिससे एक मिलियन से अधिक लोगों को अन्य प्रकार के रोजगार देखने पड़ेंगे।

मैं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन का आयोजन करने के लिए एनआईपीएम की प्रशंसा करता हूं।

कौशल परितंत्र में, व्यवसाय जगत के अग्रणी लोगों और मानव संसाधन क्षेत्र के अग्रणी व्यक्तियों को प्रतिभासंपन्न व्यक्तियों का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि 21वीं सदी के प्रौद्योगिकी पर निर्भर रोजगार बाजार में कौशल पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि कौशल का अर्थ केवल एक कार्य को जानना या किसी कार्यकलाप को सटीक रूप से करना मात्र नहीं है। इसका अर्थ नई तकनीक को सीखने और बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुकूल होने के लिए व्यक्ति की इच्छा और तत्परता है।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, जनवरी 2019 में टाटा कम्यूनिकेशंस और एडेको ग्रुप की साझेदारी में इनसीड बिजनेस स्कूल द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धा के स्तर में 80वें स्थान पर है।

रिपोर्ट में 68 परिवर्तियों के आधार पर वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धा के स्तर को मापा गया है, जैसे कि काम पर रखने में आसानी, लैंगिक आय अंतर और फ़र्मों में प्रशिक्षण की व्यापकता। इसमें कहा गया कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती प्रतिभाओं को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने की अपनी क्षमता में सुधार करना है।

बेरोजगारी कम करने, आय बढ़ाने और जीवन स्तर में सुधार करने के लिए उचित कौशल के साथ कार्यबल बनाना महत्वपूर्ण है। यह न केवल रोजगार की गारंटी देता है बल्कि लोगों, खासकर महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी मदद करता है।

विश्व बैंक के अनुसार, दो बिलियन से अधिक कामकाजी आयु के वयस्क, नियोक्ताओं द्वारा अपेक्षित अति आवश्यक साक्षरता कौशल से सुसज्जित नहीं हैं । 25 से कम उम्र के युवा वयस्कों में, यह संख्या दुनिया भर में लगभग 420 मिलियन है।

तेजी से बदलती हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था कर्मियों से नवोन्मेषी, लचीला और अनुकूलनशील होने की मांग करती है। कंपनियों, कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत पेशेवर फ़र्मों के लिए यह जरूरी है कि वे कर्मचारियों के कौशल विकास, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास निर्माण में निवेश करें।

प्रिय बहनों और भाइयों, अभी वैश्विक कौशल आपूर्ति से आगे सोचने और अधिक जोखिम उठाने वाले उद्यमशीलों के निर्माण पर ध्यान देने की भी आवश्यकता है।

मैं उद्यमिता और कौशल, दोनों को कार्यक्रम के दो प्रमुख क्षेत्र मानने के लिए आयोजकों की सराहना करता हूँ। एक रोजगार पैदा करता है और दूसरा, व्यक्ति को रोजगार के लिए योग्य बनाता है।

जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, हमारे पास हमारी शक्ति के रूप में युवा एक उत्कृष्ट जनसांखिकीय लाभांश है।

भारत को कौशल और उद्यमिता के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए, हमें उद्यमिता की उन्नति के लिए एक वातावरण की परिकल्पना करनी होगी। इस तरह से यह प्रतिमान बदलाव का आह्वान करता है जिस तरह से हम कौशल और उद्यमिता को महसूस करते है। माप (स्केल), गति (स्पीड) और गुणवत्ता (क्वालिटी) पर ध्यान देना आवशयक है।

स्कूली समय से उद्यमिता की भावना को अंतर्निविष्ट करना और युवाओं को नौकरी खोजने वालों की जगह नौकरी देने के लिए सशक्त बनाने पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया जैसे कार्यक्रम सरकारी विभागों तक सीमित नहीं होने चाहिए। सभी क्षेत्रों से उद्योग की भागीदारी, शैक्षिक संस्थानों और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों का शामिल होना उन कार्यक्रमों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली विशाल क्षमता को पूर्णतया साकार करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हालांकि हम दुग्ध उत्पादन, धन प्रेषण, और वैश्विक खुदरा विकास के संबंध में वैश्विक सूचकांक में भारत की उपलब्धियों पर उचित गर्व कर सकते हैं और हम नवीकरणीय ऊर्जा देश आकर्षकता (2), दुनिया के सबसे मूल्यवान नेशन ब्रांड (7): प्रत्यक्ष विदेशी निवेश- विश्वास (8) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आगम (10) के क्षेत्रों में 10 से नीचे की रैंकिंग पर हैं, तथापि हमें वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक में अपनी स्थिति में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

हमें ज्ञानार्जन, डिजिटल और लैंगिक अंतरों में असमानताओं को दूर करने की तरफ कार्य करने तथा युद्ध स्तर पर युवाओं को कुशल बनाने के प्रयासों को तीव्र करने की आवश्यकता है। ग्रामीण युवाओं को व्यावसायिक और तकनीकी कौशल प्रदान करने के लिए मजबूत नींव बनानी चाहिए। औपचारिक शिक्षा, ऑफ-द-जॉब और ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण का एक अच्छा मिश्रण करने की आवश्यकता है।

इंटरनेट का बढ़ता प्रवेश ग्रामीण युवा को प्रशिक्षित करने का एक अवसर प्रदान करता है। स्थान विशेष के अनुकूल और उद्योग केन्द्रित कौशल उनको सशक्त करने का उत्तम माध्यम है। अन्यथा, हम अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का दोहन नहीं कर पाएंगे।

अकादमिक-उद्योग अंतर्संबंध पर अधिक ध्यान देने के साथ प्राथमिक शिक्षा के स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक के स्तर के लिए हमारी शिक्षा प्रणाली को समग्र रूप से पुनर्जीवित करना और एक कुशल कार्यबल बनाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण के घटक को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

मैं आशा करता हूँ कि नई शिक्षा नीति इन मामलों में से कुछ मामलों पर ध्यान देगी। शिक्षा के समवर्ती सूची में होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों को साथ मिलकर व्यवसाय-आधारित पाठ्यक्रम को प्रोत्साहित करने का कार्य करना चाहिए।

मुझे खुशी है कि सुधारों के भाग के रूप में, सरकार ने कौशल विकास के लिए एक अलग मंत्रालय बनाया है। राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद की स्थापना और राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा तैयार करना सही दिशा में सही कदम हैं।

मुझे खुशी है कि आप विभिनन क्षेत्रों में प्रतिभाओं की मांग के संबंध में कौशल आपूर्ति की मात्रा की अपेक्षा गुणवत्ता पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। केवल अगर हम लागत और गुणवत्ता के संबंध में प्रतिस्पर्धी हैं, तो हम अधिक एफडीआई आकर्षित करेंगे और हमारे उत्पादों को टेलेंट सोर्सिंग से परे पसंद किया जाएगा।

अंत में, अपनी बात समाप्त करने से पहले, मैं उद्योग जगत से एक उच्च-कुशल जनशक्ति विकसित करने में बड़ी भूमिका निभाने का आग्रह करूंगा, जो न केवल भारत, बल्कि विश्व की आवश्यकताओं को भी पूरा करेगा।