25 दिसम्बर, 2017 को उदवाडा, गुजरात में इरानशाह उदवाड़ा उत्सव 2017 के अवसर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया अभिभाषण

उदवाडा, गुजरात | दिसम्बर 25, 2017

“मैं इरानशाह उदवाड़ा उत्सव में भाग लेकर तथा पारसी समुदाय के दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों श्री पालूनजी शापूरजी मिस्त्री और डा. फारुख उदवाड़िया का अभिनन्दन करके अत्यधिक प्रसन्न हूं। इस प्रकार के उत्सव और अभिनन्दन कार्यक्रम लोगों को बंधुत्व, सफलता अैर व्यक्तियों की उपलब्धियों को मनाने और अन्य लोगों को प्रेरणा प्रदान करने का कार्य करते हैं।

मित्रों, भारत की समन्वयकारी संस्कृति और लोकाचार इस देश की धर्म-निरपेक्षता की नींव का निर्माण करते हैं। वास्तव में मैं यह कह रहा हूं कि धर्म-निरपेक्षता संविधान में प्रतिष्ठापित होने से बहुत पहले से प्रत्येक भारतीय की खून की बूंद-बूंद में बसी है। 'सर्व धर्म सम भाव' भारत के धर्म-निरपेक्ष लोकाचार का प्रतीक है। भारत विविध संस्कृतियों और धर्मों की भूमि है। सहिष्णुता के मूल्य और सभी धर्मों का सम्मान करना चिरकाल से भारतीय लोकाचार के अभिन्न अंग हैं।

देश में धर्म-निरपेक्षता की नींव को और ज्यादा सुदृढ़ बनाया जाना चाहिए और निहित स्वार्थों एवं धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा धर्म के नाम पर मतभेद उत्पन्न करने के प्रयासों को सिर उठाते ही कुचल दिया जाना चाहिए।

जब तक सामाजिक एकजुटता, साम्प्रदायिक सद्भाव और धार्मिक सहिष्णुता नहीं होगी, देश की प्रगति एवं विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सुदृढ़ समष्टिगत आर्थिक आधार की मौजूदगी से भारत के 2028 तक विश्व में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान है। तथापि, तीव्र आर्थिक वृद्धि और समृद्धि एवं शांति से संपन्न नये भारत के निर्माण के लिए प्रत्येक भारतीय को भ्रष्टाचार, कालाधन, जातिवाद एवं राजनीति के अपराधीकरण जैसी बुराइयों के उन्मूलन के साथ-साथ निरक्षरता, लिंग आधारित भेद-भाव एवं कमजोर तबकों पर अत्याचार जैसी बाधाओं को दूर करने के लिए कंधे-से कंधा मिलाकर काम करना होगा।

मुझे खुशी है कि पारसी समुदाय ने परमाणु ऊर्जा से लेकर औषधि तक विविध क्षेत्रों में देश की वृद्धि एवं प्रगति में अमूल्य योगदान दिया है। पारसी समुदाय की दानशीलता का गुणगान करते हुए, महात्मा गांधी ने कहा था, " मुझे अपने देश भारत पर गर्व है जिसमें वैभवशाली पारसी समुदाय पल्लवित हुआ है जिनकी संख्या तो अत्यन्त कम है किन्तु दानशीलता और परोपकार के क्षेत्र में अनुपम है और निस्संदेह सर्वोत्कृष्ट है।"

मैं उदवाड़ा के इस अधिसूचित विरासत नगर में आकर अत्यन्त प्रसन्न हूं जो पारसी समुदाय का मक्का है क्योंकि इसमें सुप्रसिद्ध इरानशाह आतश बहराम का पवित्र अग्नि मन्दिर स्थित है। मुझे बताया गया है कि पारसी धर्म में अग्नि का स्थान सबसे प्रमुख है और इसे परम शक्ति की प्राणधारी अभिव्यक्ति के रूप में जीवित माना जाता है। पवित्र अग्नि की शुचिता के आधार पर अग्नि मंदिरों को तीन श्रेणियों में वगीकृत किया जाता है जिसमें आतश बहराम का स्थान उच्चतम है। यह माना जाता है कि इरानशाह आतश आश्रम में यह पवित्र अग्नि पिछले 1,290 वर्षों से प्रज्जवलित हो रही है।

इस ऐतिहासिक नगर के साथ पवित्र अग्नि का संबंध 1742 से है जब तत्कालीन शासक दामाजी गायकवाड ने सांझणा पुजारियों को अपनी पवित्र अग्नि, इरानशाह के साथ उदवाड़ा में बसने की अनुमति दी थी।

इरानशाह को केन्द्र में रखकर इस नगर की आयोजना विशिष्ट ढंग से की गई है और इसमें 250 वर्ष पुराने अनेक मकान हैं जो अनूठी विरासत एवं सांस्कृतिक विशिष्टताओं को दर्शाते हैं। मुझे बताया गया है कि इरानशाह का ध्यान इस नगर में बसने वाले नौ पुरोहित परिवारों द्वारा रखा जाता है।

इस स्थल के लिए वर्षभर तीर्थ-यात्रा को बढ़ावा देने के लिए गुजरात सरकार ने इसे पवित्र यात्रा धाम नाम दिया है जो कि उपयुक्त है।

मुझे बताया गया है कि इस नगर की पर्यटक संभावना को देखते हुए गुजरात सरकार ने गन्तव्य विकास परियोजना आरम्भ की थी और इरानशाह अग्नि मन्दिर में और इसके आस-पास कुछ मूलभूत निर्माण किए थे।

मुझे यह जानकर भी खुशी हुई कि इस विरासत नगर को धार्मिक सहिष्णुता और सामंजस्य के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सुझाव दिया था।

धन्यवाद। जय हिंद।"