25 जुलाई, 2019 को नई दिल्ली में संसद सदस्य, राज्य सभा, डॉ. नरेंद्र जाधव द्वारा लिखित न्यू ऐज टेक्नालजी एंड इन्डस्ट्रीअल रेवलूशन 4.0 नामक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | जुलाई 25, 2019

“सर्वप्रथम मैं लेखक डॉ. नरेंद्र जाधव को हमें अत्यधिक समकालीन प्रासंगिकता वाली पुस्तक प्रदान करने के लिए बधाई देता हूं।

चौथी औद्योगिक क्रांति की आधारशिला रखने वाली उभरती हुई प्रौद्योगिकी क्रांति अपार अवसर और संभावनाएं प्रदान कर रही है। इसके साथ ही, विस्तृत हो रही 'ट्रांसफॉर्मेटिव टेक्नोलॉजी' ने कई जटिल प्रश्नों और दूरगामी सामाजिक चिंताओं को जन्म दिया है।

इस पुस्तक में तथाकथित औद्योगिक क्रांति 4.0 के विभिन्न आयामों की गंभीर रूप से जांच और विस्तृत उल्लेख किया गया है। इसमें उभरती हुई नए युग की प्रौद्योगिकी का उल्लेख किया गया है, अवसरों और जोखिमों को समझाया गया है, वैश्विक संदर्भ में प्रासंगिक सार्वजनिक नीतिगत मुद्दों की पहचान और विश्लेषण करने का प्रयास किया गया है। इस पुस्तक में वैश्विक और भारतीय परिप्रेक्ष्य का ध्यान रखा गया है।

इसमें अर्थव्यवस्था, समाज, लोकतंत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक शांति संबंधी जटिल मुद्दों और चिंताओं का उल्लेख किया गया है।

इसमें यह उल्लेख करते हुए कि प्रौद्योगिकी उत्पादकता, धन सृजन और वैश्विक आर्थिक विकास में तेजी लाकर मानवता को कैसे लाभान्वित कर सकती है, यह रेखांकित किया गया है कि प्रौद्योगिकी विकास को उचित सार्वजनिक नीतिगत उपायों के साथ जोड़ दिया जाए तो गरीबी को काफी हद तक कम किया जा सकता है और समाप्त भी किया जा सकता है।

इसमें कृषि, उद्योग, सेवाओं, वित्तीय क्षेत्र, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रौद्योगिकीय सफलताओं की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा उभरती हुई प्रौद्योगिकी का उपयोग 'ग्लोबल वार्मिंग' और जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान से बचने के लिए किए जा रहे वैश्विक प्रयासों को सुदृढ़ करने के लिए भी किया जा सकता है।

चौथी औद्योगिक क्रांति की चुनौतियां

जहाँ तक चौथी औद्योगिक क्रांति की चुनौतियों का संबंध है, यह उल्लेख किया गया है कि जबकि आर्थिक विकास को निस्संदेह अत्यधिक बढ़ावा मिलेगा परन्तु उसी अनुपात में नौकरियों में वृद्धि नहीं होगी। जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था उच्च विकास मार्ग पर अग्रसर होगी, आर्थिक विषमताएं और सामाजिक असमानताएं बढ़ सकती हैं।

कृत्रिम आसूचना और मशीन अधिगम का प्रभाव

विनिर्माण से अंतरिक्ष अन्वेषण तक के क्षेत्र में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' अनुप्रयोगों की एक विस्तृत श्रृंखला का उल्लेख करते हुए लेखक ने कृत्रिम आसूचना की सीमाओं पर विस्तार से चर्चा की है। इसी तरह, सरकारी और निजी क्षेत्र में 'बिग डेटा' और 'डेटा एनलिटिक्स' को अपनाने से लागत-दक्षता, उत्पादकता और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है।

कृत्रिम आसूचना के उद्भव और बढ़ती संगणक क्षमता के साथ, रोबोट द्वारा मनुष्यों के कार्यों में सहयोग करने की संभावना कई गुना बढ़ गई है।

नए युग की प्रौद्योगिकी उत्पाद नवाचारों, अत्याधुनिक कृषि पद्धतियों और बाजार के विकास के अवसर प्रदान करती है। फसल आनुवंशिकी, जैविक कृषि के साथ-साथ सिंचाई और अन्य बुनियादी अवसंरचना में नवाचार से छोटे किसानों की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है।

तकनीकी प्रगति से होने वाले संभावित लाभों को विभिन्न देशों में अधिक समावेशी बनाने के लिए, राष्ट्र-राज्यों के बीच डिजिटल अंतर को दूर करना अनिवार्य है। अवसंरचना, ऊर्जा, जल, अपशिष्ट प्रबंधन, परिवहन, भू-संपदा और शहरी आयोजना जैसे विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियों को दूर किया जा सकता है।

नए युग की प्रौद्योगिकी के उद्भव के साथ, नौकरी विस्थापन या बेरोजगारी की चिंताएं पैदा हुई हैं और उन पेशेवरों के पुन: कौशल की आवश्यकता महसूस हुई है जिनको इसका सामना करना पड़ेगा। ऐसे परिवेश में केवल एक ही अच्छी बात है, "जब स्वचालन के कारण शारीरिक नौकरियां समाप्त होती हैं, तो दिमागी तौर पर की जाने वाली नौकरियों का मार्ग प्रशस्त होता है"।

इस पुस्तक में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि किस प्रकार बैंकिंग का पारंपरिक दृष्टिकोण तेजी से बदल रहा है। बैंकों और बीमा कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को कथित 'फिनटेक्स’और 'टेकफिन्स’, जिसमें वित्तीय सेवा प्रदाताओं और स्टार्ट-अप की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है, द्वारा चुनौती दी जा रही है।

ई-कॉमर्स

पुस्तक में जिन अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों का उल्लेख किया गया है, उनमें ई-कॉमर्स और पिछले लगभग एक दशक में सूचना प्रौद्योगिकी ने किस प्रकार लोगों द्वारा खरीददारी करने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है,शामिल हैं। व्यक्तिगत निजता के महत्वपूर्ण पहलू, और जिस तरह से सोशल मीडिया समाज, अर्थव्यवस्थाओं, लोगों के दृष्टिकोण, व्यवहार, संस्कृतियों और यहां तक कि उनके विश्व-दृष्टिकोण पर प्रभाव डाल रहा है, की भी पुस्तक में चर्चा की गई है।

जहां सूचना का त्वरित संचार सोशल मीडिया की सबसे बड़ी ताकत है, वहीं हमें बिना सोचे-समझे, फर्जी सूचनाओं और फर्जी समाचारों से बचना होगा।

वर्तमान युग में साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण का महत्व बहुत बढ़ गया है। जबकि, वेब व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों तरह की विधिसम्मत गतिविधियों का एक स्रोत है, फिर भी राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताएँ उत्पन्न होती हैं, क्योंकि वेब की निर्बाध कार्यप्रणाली का उपयोग आतंकवादियों द्वारा कहर बरपाने और सभ्य समाजों के कुछ हिस्सों को तबाह करने के लिए किया जा सकता है। दुनिया भर में नीति-निर्माताओं और सरकारों द्वारा यह महसूस किया जा रहा है कि किसी भी देश पर दूर से हमला किया जा सकता है। इस तरह के हमलों से टेलीफोन नेटवर्क को व्यापक नुकसान हो सकता है और यहां तक कि विमान उड़ान नियंत्रण प्रणाली को भी नष्ट किया जा सकता है।

चूंकि समुदाय, समाज और नागरिक तेजी से डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग की तरफ अग्रसर होते हैं, यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में डेटा सभी मानवीय गतिविधियों का केंद्र बिंदु होगा। इसलिए, देशों के लिए एक-दूसरे का सहयोग करना और डेटा की सुरक्षा और शेयरिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन करना अनिवार्य है। एक ऐसी बहु-स्तरीय डेटा-शेयरिंग संरचना को विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है जो पर्याप्तता और पारस्परिक आदान-प्रदान के सिद्धांतों पर आधारित हो।

निस्संदेह, क्षेत्रीय, महाद्वीपीय या वैश्विक स्तर पर डेटा साझा करने के लिए एक बहु-स्तरीय गोपनीयता संरचना तैयार करने में मुख्य मुद्दा एक ही है - वैश्विक सहयोग के साथ किसी देश की क्षेत्रीय संप्रभुता के अधिकार को बनाए रखना।

निष्कर्ष

मैं डॉ. नरेंद्र जाधव और उनकी टीम की बहुत ही सही समय पर भारत और शेष दुनिया से संबंधित इस अति महत्वपूर्ण मुद्दे पर पुस्तक लाने के लिए तहेदिल से सराहना करता हूं । यह पुस्तक न केवल तकनीक के जानकार लोगों के लिए बल्कि नीति-निर्माताओं के लिए भी उपयोगी होगी।

धन्यवाद, जय हिंद! "