24 दिसंबर, 2019 को एनआईटी, ताडेपल्लीगुडेम, आंध्र प्रदेश के प्रथम दीक्षांत समारोह के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

आंध्र प्रदेश | दिसम्बर 24, 2019

“मुझे एनआईटी आंध्र प्रदेश, जो ताडेपल्लीगुडेम की प्राचीन भूमि में बसा हुआ एक नया और उदीयमान संस्थान, के प्रथम दीक्षांत समारोह में आज आप सभी के बीच आकर अपार हर्ष हो रहा है।

आंध्र प्रदेश का दौरा मेरे लिए घर लौटने जैसा है। मैं यहां पैदा हुआ और इस महान भूमि द्वारा पोषित और पल्लवित हुआ।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी),जो क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेजों (आरईसी) से स्तरोन्नत हुए हैं, देश में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी हैं।

एनआईटी, आंध्र प्रदेश को देश के पहले आरईसी एनआईटी वारंगल के संरक्ष्ा।ण और परामर्श के तहत काम करने का सौभाग्य प्राप्त है।

मुझे यह जानकर हर्ष है कि एनआईटी आंध्र प्रदेश देश का 31वां एनआईटी है।

मुझे बताया गया है कि एनआईटी, आंध्र प्रदेश ने श्री वासवी इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर, तडेपल्लीगुडम में अपने संरक्षक संस्थान एनआईटी वारंगल के मार्गदर्शन में कार्य करना प्रारम्भ किया।

मुझे 20 अगस्त 2015 को आयोजित एनआईटी, आंध्र प्रदेश का शिलान्यास समारोह स्मरण है, जब मैं केंद्रीय शहरी विकास और संसदीय कार्य मंत्री था।

यह वास्तव में उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2018 में प्रारम्भ किया गया परिसर का निर्माण कार्य तेरह महीनों में पूरा किया गया।

एक पूर्ववर्ती रनवे को राष्ट्रीय महत्व के एक संस्थान के शानदार प्रेरक परिसर में परिवर्तित किया जाना वास्तव में उल्लेखनीय है।

निदेशक द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन से यह स्पष्ट है कि देश के नवीनतम एनआईटी ने सभी क्षेत्रों में काफी प्रगति की है।

मेरे प्यारे युवा छात्रों,

मैं इस अवसर पर इस शानदार उपलब्धि के लिए आप सभी को बधाई देता हूँ। आपको एनआईटी, आंध्र प्रदेश से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों का पहला बैच होने का गौरव मिला है।

एनआईटी आंध्र प्रदेश आपके साथ प्रारम्भ हुआ, आपके साथ आगे बढ़ेगा और आपके साथ समृद्ध होगा।

आज जब आप इस संस्थान के परिसर को छोड़ रहें हैं, तो कृपया याद रखिए कि आप हमारे देश की सबसे मेधावी युवा प्रतिभाओं में शामिल हैं।

आप वैज्ञानिक और तकनीकी नवोन्मेषों के एक बहुत ही रोमांचक दौर में रह रहें हैं।

ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डेटा और एनालिटिक्स के रूप में तकनीकी खोजों ने वास्तव में हमारे जीने और काम करने के तरीके को बदल दिया है।

विज्ञान की मौजूदा सीमाओं को कला से लेकर मानविकी तथा इंजीनियरिंग से लेकर जैव-प्रौद्योगिकी तक विभिन्न विषयों के बीच पारस्परिक प्रभाव के माध्यम से लगातार चुनौती दी जा रही है।

आप जैसे युवा इंजीनियरों के पास इन प्रौद्योगिकियों में आगे और क्रांतिकारी बदलाव लाने और मानवता के लाभ के लिए उनका उपयोग करने के नए तरीके खोजने के अपार अवसर है।

मैं इस बात पर बल देना चाहता हूँ कि सभी प्रकार के तकनीकी विकास का अंतिम उद्देश्य निश्चित रूप से आम आदमी के जीवन की बेहतरी होना चाहिए। उन्हें हमारे दौर की ऐसी समस्याओं का समाधान खोजना होगा जिसका तत्काल समाधान करना अत्यंत आवश्यक है।

मुझे कोई संदेह नहीं है कि नवाचार 21वीं सदी का नारा है। आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों को नवाचार केंद्र बनना होगा।

उन्हें प्रत्येक छात्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए उसकी क्षमता को पहचानते हुए उसका पोषण करना चाहिए। इन संस्थानों में पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों को कभी भी अनम्य नहीं बनाना चाहिए। उन्हें समय के अनुरूप लगातार विकसित किया जाना चाहिए।

तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों को नवीनतम तकनीकों के साथ सिखाने और प्रयोग करने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए। उन्हें विचारों के मुक्त प्रवाह की अनुमति देनी चाहिए और कठोर नयाचार के माध्यम से अभिनव सोच पर रोक नहीं लगानी चाहिए।

मैं कुछ ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहता हूँ जिन्हें मेरे विचार से नवीन तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से रूपांतरित किया जा सकता है।

पहला कृषि क्षेत्र है। कृषि विकास को बढ़ावा देने और किसानों का भाग्य बदलने के लिए नवीन और नवोन्मेषी तकनीकों को लागू करने की अपार संभावना है। यह युवा इंजीनियरों के लिए जलवायु परिवर्तन से लेकर फसल की उत्पादकता बढ़ाने तक कृषकों के सामने आने वाली समस्याओं के लीक से हटकर समाधान खोजने का समय है।

मैं भारतीय प्रौद्योगविदों से आग्रह करता हूं कि वे खंडित भूमि जोत और अपर्याप्त बाजार पहुंच सहित भारतीय कृषि के समक्ष आने वाली वास्तविक समस्याओं को समझें।

मैं चाहता हूं कि आप इस पर विचार करें।

क्या हम मिट्टी की बेहतर जानकारी जुटा सकते हैं?

क्या हम कमी को दूर करके और अधिशेष से बचकर अधिक प्रभावी सिंचाई कर सकते हैं?

भारतीय कृषि मौसम पर अत्यधिक निर्भर है। बदलती हुई जलवायु और वर्षा चक्र में बदलाव को ध्यान में रखते हुए, क्या हम बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करते हुए कृषि को अधिक लचीला बना सकते हैं?

क्या हम किसानों को बेहतर मूल्य खोज और बाजार तक बेहतर पहुंच की सुविधा दे सकते हैं?

यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण है कि हम अपने खाद्य उत्पादन को बढ़ावा दें ताकि भूख पर काबू पा सकें और एक अरब लोगों को भोजन प्रदान कर सकें। मैंने हमेशा कहा है कि आयातित खाद्य सुरक्षा कभी भी समाधान नहीं हो सकती।

दूसरा क्षेत्र स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा है।

हमारे जलवायु पैटर्न और मौसम प्रणाली बदल रहे हैं। 'ग्लोबल वार्मिंग' एक सच्चाई है और अब इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है। हम अब इसे नकार नहीं सकते।

भारत आज दुनिया में सबसे कम कार्बन उत्सर्जन करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। हमारे दूरदर्शी प्रधान मंत्री के नेतृत्व में भारत सरकार 2022 तक 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य, जो हमने अपने लिए निर्धारित किया था, को पार करने की दिशा में अग्रसर है।

वित्त वर्ष 2014-18 के दौरान हमारी सौर क्षमता में आठ गुना वृद्धि हुई है और हमने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में अग्रणी भूमिका निभाते हुए 'शून्य उत्सर्जन स्रोतों' के विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता को सिद्ध किया है।

मैं चाहता हूं कि आप जैसे इंजीनियर और प्रौद्योगविद स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग का समर्थन करें।

मेरा दृढ़ मत है कि अच्छी तकनीक के माध्यम से पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन कायम किया जा सकता है।

यह जरूरी है कि हम उस संतुलन को बनाए रखें।

हमारा विकास दीर्घकालिक होना चाहिए।

आपके प्रत्येक नवाचार का आधार संरक्षण होना चाहिए।

तीसरा क्षेत्र है शहरी विकास।

2020 तक भारत की शहरी आबादी बढ़कर 517 मिलियन होने की संभावना है और यह 2050 तक 700 मिलियन के आंकड़े को पार कर जाएगी।

हमारे शहरी क्षेत्र हमारे विकास के साधन हैं।

दुर्भाग्य से, हमारे शहरों और नगरों पर जनसंख्या का दबाव उनकी धारण क्षमता से अधिक हो गया है और उनका दम घुट रहा है।

हमारे सबसे समृद्ध शहरों में बड़ी संख्या में झुग्गियां भी पाई जाती हैं।

हमारे शहरों का विकास समावेशी और दीर्घकालिक होना चाहिए।

हमें शहरों में व्याप्त आय में अत्यधिक अंतर को दूर करने के लिए के लिए वहनीय आवास, पेयजल, सार्वजानिक परिवहन की समस्याओं का समाधान करते हुए आर्थिक अवसर प्रदान करने होंगे।

हमें प्रदूषण और भीड़-भाड़ संबंधी चिंताओं को दूर करते हुए स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और अपशिष्ट-से-धन अर्जन संबंधी पहलें विकसित करनी होंगी।

हमें अपने शहरों को महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित तथा दिव्यांगजनों के लिए सुलभ बनाना होगा।

हमें ग्रामीण क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, अन्य सुविधाएं और आर्थिक अवसर प्रदान करते हुए तंगी के कारण होने वाले प्रवास पर रोक लगानी चाहिए।

शहरी विकास तभी संभव है जब हम ग्रामीण विकास करें, यह कार्य मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

महात्मा गांधी का भी मानना था कि समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए गाँव आत्मनिर्भर होने चाहिए ।

हमारे ग्रामीण क्षेत्रों को भी ऐसे तकनीकी हस्तक्षेपों की आवश्यकता है जो उनकी विशिष्ट जरूरतों के अनुरूप हों।

मैं आपसे जल प्रबंधन की चुनौतियों का समाधान खोजने का भी आग्रह करता हूं।

भारत के कई हिस्से अत्यधिक जल संकट से जूझ रहे हैं। यह संकट आने वाले समय में और बढेगा।

नीति आयोग द्वारा वर्ष 2018 में जारी 'कम्पोजिट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स' (सीडब्ल्यूएमआई) रिपोर्ट के अनुसार, 2020 तक 21 प्रमुख शहरों में शून्य भूजल की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

केंद्रीय सरकार ने हाल ही में एक नया जल शक्ति (जल) मंत्रालय बनाया है, जिसका उद्देश्य एक साकल्यवादी और एकीकृत दृष्टिकोण के साथ पानी के मुद्दों का समाधान करना है। इस मंत्रालय ने 2024 तक भारत के हर घर में पाइप से पानी पहुँचाने के लिए कनेक्शन देने संबंधी महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है।

सरकार अकेले सम्पूर्ण समस्या का समाधान नहीं कर पाएगी। हमें सरकार के प्रयासों में सहयोग करना चाहिए।

हमें बेहतर वर्षा जल संचयन और जल उपयोग दक्षता में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना होगा।

हमें 'अधिकाधिक जलापूर्ति' के प्रावधान में तत्काल बदलाव करते हुए ऐसे उपाय करने चाहिए जिनसे जल उपयोग दक्षता को बेहतर बनाया जा सके।

आज के युवा प्रौद्योगविदों के रूप में, जब आप अपने जीवन के अगले पड़ाव की और अग्रसर हो रहे हैं, मैं आप सभी के समक्ष उपस्थित इन समस्याओं, जिनका तत्काल समाधान किए जाने की आवश्यकता है, का तकनीकी समाधान खोजने की चुनौती पेश करता हूँ।

मुझे आशा है कि आप कड़ी मेहनत और रचनात्मक सोच के साथ इन चुनौतियों का समाधान कर पाएंगे।

आपको महंगे नवाचारों का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। उन्नति के लिए लगातार सुधार और मितव्ययी नवाचार किए जा सकते हैं।

इन समस्याओं को हल करके आप उत्तरोत्तर लाभकारी प्रभाव का एक ऐसा चक्र निर्मित करेंगे जिससे लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकलने और अपनी जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में सहायता मिलेगी।

कृपया याद रखें कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी का अंतिम उद्देश्य लोगों के जीवन को आरामदायक और खुशहाल बनाना है।

मेरे प्यारे नौजवानों,

अस्थायी वैश्विक मंदी के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में आने वाले वर्षों में 5 ट्रिलियन अमरीकी डालर की अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता है क्योंकि समष्टि आर्थिक बुनियादी ढांचे सुदृढ़ और लचीले हैं। सरकार जीडीपी विकास में सुधार करने, लालफीताशाही में कटौती करने और अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए समय-समय पर विभिन्न सुधार भी कर रही है।

एक उज्ज्वल भविष्य आप सभी का इंतजार कर रहा है। देश के सभी हितधारकों, विशेष रूप से आप जैसे युवाओं को प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी के 'रिफॉर्म, परफॉर्म एंड ट्रांसफॉर्म’के तीन शब्दों वाले मंत्र के अनुरूप राष्ट्र और लोगों के जीवन को बदलने का प्रयास करना चाहिए।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे हमारे तकनीकी शिक्षा संस्थान युवा प्रौद्योगविदों को ऐसे कौशल प्रदान करते समय उनमें जीवन कौशल और नैतिक मूल्यों का पोषण करने का कार्य भी करते हैं। महात्मा गांधी के शब्दों को हमेशा याद रखें। उन्होंने कहा था कि चरित्र के बिना शिक्षा पाप है।

इस संस्थान के परिसर से उत्तीर्ण होने वाले प्रत्येक स्नातक को न केवल अकादमिक रूप से कुशल होना चाहिए अपितु उन्हें नैतिक मूल्यों से सम्पन्न दयालु और ईमानदार व्यक्ति भी होना चाहिए।

अपनी बात समाप्त करने से पूर्व मैं एक और मुद्दा उठाना चाहता हूं।

मैं तनाव से निपटने और चुनौतियों का सामना करने में असमर्थता के कारण युवा छात्रों द्वारा आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाए जाने की ख़बरों को पढ़कर अत्यधिक चिंतित हूं।

हमारे कैम्पस राष्ट्र के सबसे सुरक्षित स्थान होने चाहिए क्योंकि हमारे कैम्पस में हमारा भविष्य आकार लेता है।

मैं हमारे उच्चतर शिक्षण संस्थानों से युवाओं को तनाव प्रबंधन सिखाने के लिए अतिरिक्त ध्यान देने का आग्रह करता हूं।

मैं समझता हूँ कि पाठ्यक्रम का अत्यधिक बोझ है। परन्तु छात्रों को अपने लिए समय निकालना सिखाया जाना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे छात्र शारीरिक रूप से स्वस्थ और मानसिक रूप से खुश रहें।

मेरे प्यारे युवा दोस्तों,

मदद या समर्थन की आवश्यकता होने पर अपने दोस्तों, शिक्षकों या प्रियजनों से संपर्क करने में कभी संकोच न करें।

आशावादी बनें और एक संतुलित मन के साथ अपने जीवन और करियर में आने वाली चुनौतियों का सामना करें। योग और ध्यान के अभ्यास से आपको तनावपूर्ण परिस्थितियों से शांतचित्त होकर निपटने में बहुत मदद मिलेगी।

मुझे पक्का विश्वास है कि आप अपने धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ असंभव को भी संभव कर पाएंगे।

मैं आप सभी को एक बार पुनः बधाई देता हूं।

आगे बढ़ो और स्वयं के लिए, हमारे देश और दुनिया के लिए एक उज्ज्वल, सुंदर भविष्य का निर्माण करो।

धन्यवाद।

जय हिन्द!"