24 अगस्त, 2021 को राजभवन, बेंगलुरु में “वैक्सिनेट इंडिया प्रोग्राम” का शुभारंभ करने के बाद सभा में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु का संबोधन

बेंगलुरु | अगस्त 24, 2021

“मुझे 'गिव इंडिया फाउंडेशन,' जो देश में गरीबी दूर करने के उद्देश्य से व्यक्तियों और संगठनों को अलग-अलग कारणों से धन जुटाने और दान करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, के सहयोग से योजना विभाग, कर्नाटक सरकार की पहल ‘वैक्सिनेट इंडिया प्रोग्राम’ का शुभारंभ करते हुए अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है।
जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ विभिन्न हितधारकों, विशेष रूप से स्वास्थ्य कर्मियों और वैज्ञानिकों द्वारा की गई संयुक्त कार्रवाई के कारण देश कोविड-19 की काफी संतोषजनक तरीके से रोकथाम करने में सफल रहा है। दुर्भाग्य से, हमारे स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे, जिसका इस संकट के दौरान अधिकतम उपयोग किया गया, को सुधारने के लिए किए गए सभी प्रयासों के बावजूद इस विश्वव्यापी महामारी के कारण अब तक 4.3 लाख से अधिक लोगों की मौतें हो चुकी है।
इस महामारी के फैलने के बाद से ही पूरी दुनिया में हलचल मच गयी है। यहां तक कि अधिक आधुनिक और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं वाले सबसे उन्नत राष्ट्र भी इस संकट की भयावहता का प्रभावी ढंग से सामना नहीं कर सके। इसने विश्व स्तर पर अर्थव्यवस्थाओं, जीवन और आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
वैक्सीन की आवश्यक खुराक लेना, मास्क पहनना, सुरक्षित शारीरिक दूरी बनाए रखना, बार-बार हाथ धोना और व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करना हम सभी के लिए अनिवार्य हो गया है, चाहे हम अधिक दृढ़़ संकल्प के साथ महामारी से लड़ने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
टीम इंडिया की सच्ची भावना के साथ, भारत सरकार और सभी राज्य सामूहिक रूप से अधिक से अधिक लोगों को कोविड-19 से बचाव का टीका लगाने के लिए कार्य कर रहे हैं। मुझे यह जानकर हर्ष की अनुभूति हो रही है कि अब तक देश में 58 करोड़ वैक्सीन डोज दी जा चुकी हैं और 13 करोड़ लोगों का टीकाकरण पूरा हो चुका है। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि 'गिव इंडिया' जैसे संगठन सरकार के प्रयासों में सहयोग कर रहे हैं।
जबकि अब तक किए गए टीकाकरण की संख्या काफी सराहनीय है, परंतु हमें टीकाकरण की गति को तेज करने, इसका प्रसार बढ़ाने और सभी तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। मुझे यह जानकर खुशी है कि बच्चों के लिए टीके तैयार करने की प्रकिया जारी है। दो खुराक में से पहली खुराक लेने वाले वयस्कों की बड़ी आबादी के साथ, हम निश्चित रूप से कोविड-19 से निपटने में बेहतर स्थिति में हैं।
प्रिय बहनों और भाइयों,
अब यह स्पष्ट हो गया है कि टीकाकरण कोविड-19 के खिलाफ सबसे प्रभावी कवच है। हालांकि यह किसी व्यक्ति को संक्रमित होने से पूरी तरह से सुरक्षित नहीं कर सकता परंतु टीकाकरण निश्चित रूप से अस्पताल में भर्ती होने से बचने और बीमारी की गंभीरता को कम करने में मदद करेगा। दूसरे शब्दों में, वायरस से संक्रमित होने पर भी रोग की गंभीरता कम होगी।
यह स्मरण रखना चाहिए कि कोरोना वायरस विश्वव्यापी महामारी ने हर मोर्चे पर एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा की है। हम अभी भी पूरी तरह से खतरे से बाहर नहीं हैं और हम में से प्रत्येक को कोविड से संबंधित सभी प्रोटोकॉल और सावधानियों को जारी रखने की आवश्यकता है।
यह अत्यधिक राहत की बात है कि देश में ठीक होने की दर 97.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है और कुछ महीने पहले की स्थिति की तुलना में संक्रमण और मौतों की संख्या में काफी गिरावट आई है। लेकिन, ढ़िलाई के लिए कोई जगह नहीं है। हम अपनी सुरक्षा को कम करने का जोखिम नहीं उठा सकते। साथ ही, कुछ वर्गों में टीकाकरण कराने में भी हिचकिचाहट दिखाई दे रही है। ऐसे लोगों को टीकाकरण की सुरक्षा और उसके महत्व के बारे में शिक्षित और जागरूक करना नितांत आवश्यक है जिनके मन में अभी भी संदेह हैं। यह याद रखना चाहिए कि महामारी का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए सार्वभौमिक टीकाकरण और कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन करना महत्वपूर्ण है।
मैं सामान्य तौर पर चिकित्सा जगत और विशेष रूप से भारतीय चिकित्सा संघ से इस संबंध में विशेष जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह करता हूं। मीडिया को भी लोगों को टीकों की सुरक्षा और टीके को लेकर झिझक को दूर करने की आवश्यकता के बारे में शिक्षित करना चाहिए। सटीक जानकारी देकर गलत धारणाओं को दूर करने की आवश्यकता है।
 जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, महामारी से शहरी केंद्रों से लेकर आंतरिक ग्रामीण इलाकों तक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से उजागर हुई है। इस संबंध में पिछड़े और दूरस्थ क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र को सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए।
मैं हमारे वैज्ञानिकों, भेषज कंपनियों, उद्यमियों, चिकित्सकों और नियामक प्राधिकरणों को आत्मनिर्भर भारत की सच्ची भावना के अनुरूप स्वदेशी पीपीई किट, सैनिटाइज़र, चेहरे के मास्क और अन्य उपकरणों सहित टीकों के निर्माण में तेजी लाने के लिए बधाई देता हूं।

मैं समाज के वंचित वर्गों के लिए कोविड-19 टीकों की सुविधा मुहैया कराने के लिए विभिन्न दाताओं और सहयोगी संगठनों के साथ सहयोग स्थापित करने के लिए 'गिव इंडिया' की पुन: सराहना करता हूं।"