23 अप्रैल, 2019 को आंध्र प्रदेश के श्री सिटी में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रथम दीक्षांत समारोह के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

श्री सिटी, आंध्र प्रदेश | अप्रैल 23, 2019

"मुझे आईआईआईटी श्री सिटी के प्रथम दीक्षांत समारोह में उपस्थित होते हुए बेहद खुशी हो रही है। मैं इस संस्थान से स्नातक उत्तीर्ण करने वाले पहले बैच के छात्रों को उनके जीवन की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। यह वास्तव में सभी छात्रों और उनके माता-पिता के लिए गर्व का क्षण है।" आप सभी को मेरी शुभकामनाएँ!

मुझे इस दीक्षांत समारोह के लिए आईआईआईटी श्री सिटी में फिर से आने पर बहुत खुशी हो रही है क्योंकि 2015 में मैं इसके शिलान्यास समारोह में भी आया था। शहरी विकास मंत्री के रूप में, मैंने इस संस्थान में स्मार्ट सिटी केंद्र का उद्घाटन किया था।

आईआईआईटी श्री सिटी एक बड़े और आधुनिक औद्योगिक शहर में स्थित है जंहा पर प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियां और घरेलू उद्योग हैं। संभवतः अन्य किसी संस्थान के पास यह लाभ प्राप्त नहीं है। सार्वजनिक-निजी सहभागिता मोड पर स्थापित अन्य आईआईआईटी संस्थानों के पास उनका सहयोग करने के लिए केवल कुछ औद्योगिक साझेदार हैं। यह औद्योगिक साझेदार, श्री सिटी, यहां से संचालित होने वाली 100 से अधिक कंपनियों तक पहुंचने की सुलभता प्रदान कर रही है।

मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि आईआईआईटी श्री सिटी ने पहले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। औद्योगिक साझेदार श्री सिटी फाउंडेशन और श्री सिटी प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय है। इस अभूतपूर्व वृद्धि को सुनिश्चित करने का श्रेय श्री श्रीनिवास राजू, अध्यक्ष और श्री रवि सनना रेड्डी, प्रबंध निदेशक को जाता है।

मुझे विश्वास है कि यह संस्थान अधिक से अधिक ऊंचाइयां प्राप्त करेगा और आईटी शिक्षा तथा अनुसंधान में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित होगा।

प्रिय छात्रों,

आपका बैच इस संस्था से स्नातक करने वाले प्रथम गौरवशाली बैच है। मुझे यकीन है कि पहले बैच के रूप में आपने अन्य छात्रों के अनुसरण के लिए एक अच्छा उदाहरण स्थापित किया होगा। दूसरे शब्दों में, आपका बैच एक ऐसा मार्गदर्शक बैच होगा जिसकी प्रशंसा आगे आने वाले बैच करेंगे। भले ही आप उच्चतर अध्ययन करें या नौकरी करें परंतु अपने चुने हुए क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास अवश्य करें। आप अपनी मातृ संस्था और माता-पिता को गौरवान्वित करें। जैसे-जैसे आप अपने करियर में आगे बढ़ें, कभी भी आत्मसंतुष्ट होकर न बैठें बल्कि नए-नए मानक तय करें और उन्हें ईमानदारी, अनुशासन और कड़ी मेहनत के साथ हासिल करने का प्रयास करें। आप इष्टतम प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हों और मुझे यकीन है कि आप अवश्य सफल होंगे। मैं एक बार फिर आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं!

मैं इस गरिमापूर्ण अवसर पर एकत्रित हुए स्नातक छात्रों, संकाय सदस्यों और अन्य लोगों से कुछ विचार साझा करना चाहता हूं।

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत कभी विश्वगुरु के रूप में जाना जाता था और यह विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था थी। भारत में सर्वश्रेष्ठ अध्ययन केंद्र थे और दुनिया भर के विद्वान नालंदा, तक्षशिला और पुष्पगिरि में अध्ययन करने के लिए यहां आते थे।

प्रिय छात्रों, हम अवसरों और चुनौतियों के एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं और हमें विश्व नेतृत्वकर्ता की स्थिति को पुनः प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई एक बड़ी अर्थव्यवस्था है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार, हमारी अर्थव्यवस्था द्वारा इस वित्त वर्ष में 7.3 प्रतिशत की विकास दर और 2020 में 7.5 प्रतिशत दर्ज करने की उम्मीद है। अन्य वैश्विक एजेंसियों द्वारा भी इसी तरह के अनुमान लगाए गए हैं। अगले दो दशकों के दौरान भारत का दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में रहने का अनुमान है। भारत अगले 10-15 वर्षों में10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है।

भारत के आर्थिक नेता के रूप में उभरने से, आप जैसे युवा स्नातकों के लिए प्रचुर अवसर पैदा होंगे। आप भारत के परिवर्तन के साक्षी और सहभागी होंगे। भारत को युवा आबादी का एक अनूठा फायदा भी है। हमारी लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। किसी अन्य देश के पास भारत जितनी मानव संसाधन की पूंजी नहीं है। हमें कौशल और प्रशिक्षण प्रदान करके इस मानव संसाधन की क्षमता का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए और अपनी अर्थव्यवस्था के विकास में तेजी लानी चाहिए। यह सब हासिल करने के लिए, हमारे विश्वविद्यालयों, उच्चतर शिक्षा संस्थानों और विभिन्न अध्ययन केंद्रों को परिवर्तनकारी भूमिका निभानी चाहिए।

आज हमारे देश में 900 से अधिक विश्वविद्यालय हैं। लेकिन विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में कोई भी भारतीय विश्वविद्यालय अपनी जगह नहीं बना पाया है। केवल विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। संख्या महत्वपूर्ण है, लेकिन गुणवत्ता उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। हमें अपनी उच्चतर शिक्षा प्रणाली को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए इसमें पूरी तरह से सुधार करने की आवश्यकता है। हमारे विश्वविद्यालयों को इस प्रयास में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए और भारत को फिर से वैश्विक शिक्षा का केंद्र बनाना चाहिए। इस शुरूआत के लिए, हमारे विश्वविद्यालयों का लक्ष्य अपने आप को दुनिया के शीर्ष 100 संस्थानों में शामिल कराने का होना चाहिए।

हमारी संस्थाओं को बहुत कम समय में असाधारण परिणाम प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। उन्हें शिक्षण विधियों, अनुसंधान कार्य नीतियों को नए सिरे से तैयार करने और वैश्विक संस्थानों की तर्ज पर उच्च शैक्षणिक मानक स्थापित करके लक्ष्य निर्धारण के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि आईआईआईटी श्री सिटी ने योग्य संकाय को नियुक्त किया है और रणनीतिक योजना प्रक्रिया शुरू की है। मुझे यकीन है कि सभी हितधारक औद्योगिक साझेदारों के सहयोग से वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने में योगदान देंगे।

कोई भी संस्थान तकनीकी प्रगति और व्यवधान की अनिश्चितता से खुद को बचा नहीं सकता है। कार्य का भविष्य डिग्री पर नहीं, बल्कि कौशल पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में रोजगार का स्वरूप वर्तमान समय से काफी अलग होगा और इसलिए विश्वविद्यालयों और उद्योगों को भविष्य के रोजगार के लिए छात्रों को तैयार करने के लिए संगठित होकर काम करना होगा।

संस्थानों की सफलता इसमें नहीं है कि हम अगले कुछ वर्षों में क्या करेंगे, बल्कि भविष्य के लिए तैयार पेशेवर बनाने की हमारी क्षमता से है।

सूचना प्रौद्योगिकी पूरी तरह व्यापक हो गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग, बिग डेटा, कंप्यूटर विज़न, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स क्षेत्र में प्रगति से आर्थिक मूल्य सृजित करने के नए अवसर पैदा होंगे। मुझे यकीन है कि आईआईआईटी श्री सिटी जैसे संस्थान अध्ययन और अनुसंधान के अपने कार्यक्रमों में इन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

साथ ही, मुझे यह जानकर खुशी हुई कि आईआईआईटी श्री सिटी ने उद्योगों के लिए विशेषज्ञता प्राप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स, एआई एंड मशीन लर्निंग, ब्लॉक चेन, फिनटेक और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अध्ययन की विशेषज्ञता वाले कार्यक्रम शुरू करने के प्रयास शुरू किए हैं।

मेरा दृढ़ मत है कि आर्थिक समृद्धि से न्यायसंगत विकास सुनिश्चित होना चाहिए। भारत में करीब 65 प्रतिशत लोग अभी भी गांवों में रहते हैं और उच्च प्राथमिकता शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य क्षेत्रों में शहरी-ग्रामीण अंतर को कम करने पर दी जानी चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हमारा विकास समावेशी हो, जहां समाज के विभिन्न वर्गों के पास सृजित धन की पहुंच हो, ताकि हम एक सामंजस्यपूर्ण समाज बनाने में सक्षम हों। आकार और जटिलता के कारण, अब केवल सरकारें सामाजिक विकास कार्यक्रमों का संचालन नहीं कर सकती हैं। शैक्षणिक संस्थानों को अपनी सभी तकनीकी और मानव संसाधनों की सहायता ऐसे कार्यक्रमों को सरकारों और उद्योगों से प्राप्त वित्त पोषण के साथ एकीकृत करना होगा। छात्रों को स्थानीय समाजों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा ताकि वे उनके सामने आने वाली समस्याओं का उन्हें प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान प्रस्तुत कर सकें। मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि आईआईआईटी श्री सिटी ने विकास क्रियाकलापों में सहयोग करने के लिए 'उन्नत भारत अभियान' के तहत पांच गांवों को गोद लिया है।

भारत का बहुचर्चित अधिक जनसांख्यिकीय लाभांश एक अवसर और चुनौती दोनों है। यह एक अवसर है क्योंकि अन्य कई देशों की तुलना में यंहा श्रमिक वर्ग के लोगों की संख्या अधिक है। यह तीव्र आर्थिक विकास और समृद्धि से सीधे जुड़ा हुआ है। दूसरी ओर, यह राष्ट्र के लिए एक बोझ बन सकता है अगर हम अपने युवाओं को रोजगार-योग्य बनाने के लिए सही शिक्षा और कौशल प्रदान करने में सक्षम नहीं होते हैं। स्नातकों की एक बड़ी संख्या का तुलनात्मक रूप से रोजगार के योग्य नहीं होने की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, हमें अध्ययन के उपयुक्त कार्यक्रमों पर ध्यान देने और उन्हें ऐसे कौशल प्राप्त करने के अवसर प्रदान करने की आवश्यकता है, जो उभरती हुई नौकरियों की आवश्यकताओं से मेल खाते हैं।

हमें युवाओं में एक समावेशी मानसिकता का विकास करने के लिए लगातार प्रयास करने की आवश्यकता है। मुझे यकीन है कि हमारे अकादमिक संस्थान एक ऐसा समावेशी अध्ययन परिवेश सृजित करने के लिए केन्द्रित प्रयास करेंगे जिसमें सामूहिक उपलब्धियों पर हर्ष मनाया जाता हो।

आप जैसे जैसे जीवन में उन्नति करेंगे वैसे वैसे अपने परिवार, मित्रों और जिस संगठन में आप कार्य करते हैं, उसके प्रति विभिन्न प्रतिबद्धताओं को पूरा करेंगे। आज, आप के पास देश की सेवा करने की एक और महत्तवपूर्ण प्रतिबद्धता है।

भारत के पास अनेक अवसर हैं लेकिन अनेक समस्याओं से भी निपटने की आवश्यकता है। आपको अवसर का लाभ उठाकर या राष्ट्र की समस्याओं का हल करके समाज के लिए प्रभावशाली योगदान देने की आवश्यकता है। मेरा आपसे आग्रह है कि आप अपने सामने आने वाली चुनौतियों से व्याकुल न हों। छोटी शुरुआत करें, अपने आप को किसी भी राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ जोड़ें और ऐसे व्यक्तियों का एक नेटवर्क बनाएं या उसमें शामिल हों जो लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए एक सामान्य जुनून साझा करते हैं। याद रखें, जब लाखों लोग मिल कर थोड़ा थोड़ा कार्य करते हैं तो ये कई गुणा बढ़ कर राष्ट्र को बदल सकते हैं।

प्रिय छात्रों, हमेशा याद रखो कि अनंत काल से भारत का मूल दर्शन मानवता और परोपकार रहे हैं। आप धन अर्जित करें और सफलता का जश्न मनाएं, परंतु साथ-साथ आप हमेशा दूसरों की जरूरतों, विशेषकर वंचित वर्गों पर ध्यान दें। जरूरतमन्द के लिए मददगार होना हमारे जीवन का अंग होना चाहिए। आप अपने आपको सौभाग्यशाली समझें कि आप एक दीपक की तरह हैं जो दूसरों के जीवन में प्रकाश लाता है।

मैं एक बार फिर आप सभी को बेहतरीन करियर और जीवन के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मुझे यकीन है कि आईआईआईटी श्री सिटी औद्योगिक साझेदारों के सहयोग से आने वाले वर्षों में एक विश्व स्तरीय संस्थान बनने का प्रयास करेगा।

धन्यवाद,

जय हिन्द!"