21 सितंबर, 2019 को हैदराबाद में 11वें परियोजना प्रबंधन राष्ट्रीय सम्मेलन-2019 का उद्घाटन करने के बाद सभा में माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

हैदराबाद | सितम्बर 21, 2019

"मैं इस विशाल-सम्मेलन के आयोजन के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (पीएमआई), इंडिया को बधाई देकर अपनी बात शुरू करता हूं। मैं हैदराबाद शहर में आकर प्रसन्न हूं, जो कि एक जीवंत शहर है और जो मेरे दिल में एक विशेष स्थान रखता है।

हमारा देश पिछले पांच वर्षों में आर्थिक प्रगति, बुनियादी ढांचे के विकास, बाजार में विश्वास और सामाजिक सशक्तिकरण के मामले में बड़े बदलाव का साक्षी रहा है।

प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हम “सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन” के मिशन पर हैं। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर लोगों के जीवन और देश में बदलाव लाना है।

मुझे यह जानकर खुशी है कि इस सम्मेलन का विषय "एडाप्ट, ट्रांसफ़ॉर्म, एक्सेलेरेट, मेड पॉसीबल बाय ए प्रोजेक्ट मैनेजर" है।

एक राष्ट्र की प्रगति के लिए परियोजना प्रबंधक बेहद महत्वपूर्ण होते हैं - चाहे वह सही ढंग से परियोजनाओं की योजना बनाना और उन्हें क्रियान्वित करना हो, परिवर्तन में अग्रणी बनना हो या विभिन्न भौगोलिक स्थानों, संस्कृतियों और जातियों के लोगों को सबकी भलाई के लिए एकजुट होने हेतु प्रेरित करना हो।

परियोजना प्रबंधकों ने सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण से सूचना प्रौद्योगिकी तक, दूरसंचार से विद्युत क्षेत्र तक, स्वास्थ्य देखरेख सेवा और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हालांकि, सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास हासिल करने के लिए देश को और अधिक कुशल प्रतिभाओं की आवश्यकता है।

यह अनुमान लगाया गया है कि 2027 तक भारत को 70 लाख नए परियोजना प्रबंधकों की आवश्यकता होगी।

इसलिए मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि आप सही समय पर सही जगह पर हैं।

यह आपके लिए अपने उद्योग और अपने देश में योगदान करने का अवसर है - क्योंकि समय पर और बजट के भीतर सफलतापूर्वक कार्यान्वित की गई प्रत्येक परियोजना से सैकड़ों, हजारों और कभी-कभी लाखों लोग लाभान्वित होते हैं।

अफसोस की बात है कि हमारे देश का समय पर परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के मामले में अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा है। इसे बदलने की जरूरत है। यद्यपि परिवर्तन सभी स्तरों पर होना चाहिए, परियोजना प्रबंधक को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी और उन्हें परिवर्तन के अभिकर्ता के रूप में कार्य करना होगा।

इस साल अप्रैल में प्रकाशित सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की फ्लैश रिपोर्ट से पता चलता है कि केंद्रीय क्षेत्र की 25% से अधिक बड़ी परियोजनाएं (जिनकी लागत 150 करोड़ रुपये या उससे अधिक है) अपनी निर्धारित तिथि तक पूरी नहीं हो पाईं।

हमें अपनी परियोजनाओं और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में सुधार करना होगा। उसके लिए हमें परियोजनाओं की योजना बनाने, हितधारकों के लिए प्रबंध करने, प्रगति की निगरानी करने के तरीके में, सुधारात्मक कार्रवाई को तेजी से तथा निर्णायक तरीके से करने तथा एक उच्च प्रौद्योगिकी से लैस भविष्य के लिए तैयार प्रतिभाओं को विकसित करने की आवश्यकता है।

पीएमआई इंडिया, नीति आयोग द्वारा परियोजना और कार्यक्रम प्रबंधन पर स्थापित एक कार्य बल का हिस्सा है।

कार्य बल ने "परियोजना और कार्यक्रम प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नीतिगत ढांचा" स्थापित करने की सिफारिश की है और सार्वजनिक परियोजनाओं में परियोजना पेशेवरों के लिए वैश्विक मानक और प्रमाणन विहित किए हैं।

भारतीय गुणवत्ता परिषद इस समय नीतिगत ढांचे पर काम कर रही है। यदि इसे लागू किया जाता है, तो ऐसा पहली बार होगा जब भारत सरकार परियोजना और कार्यक्रम प्रबंधन के लिए औपचारिक दृष्टिकोण की शुरूआत करेगी।

मेरा मानना है कि इस तरह के कदम के लिए यह उपयुक्त समय है। हमारा देश अभूतपूर्व गति और पैमाने के साथ एक ऐसे विकास एजेंडे पर चल पड़ा है जो साहसिक और महत्वाकांक्षी है।

भारत अभियांत्रिकी और वास्तुशिल्प चमत्कारों का देश है जो महाबलिपुरम के प्राचीन मंदिरों से लेकर अशोक स्तंभ तक महान परियोजना प्रबंधन प्रथाओं के उदाहरणों के रूप में काम करते हैं, जो कि अपनी जंग-प्रतिरोधी गुणवत्ता के कारण आज भी धातुविदों को आश्चर्यचकित करता है।

आधुनिक भारत की कई उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हैं जो हमारी क्षमताओं का प्रमाण हैं।

गुजरात में केवडिया में नर्मदा नदी के तट पर स्टैच्यू ऑफ यूनिट इसका एक उदाहरण है जिसका हाल ही में उद्घाटन किया गया है।

न केवल हमने दुनिया में 597 फीट की सबसे ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया बल्कि हमने 33 महीनों के रिकॉर्ड समय में इसका निर्माण भी किया।

अन्य कई परियोजनाएं और कार्यक्रम हैं जो हमारे लिए बहुत गर्व की बात है - आधार, जो दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक डेटाबेस है; चंद्रयान 1 और 2 जिन्होंने हमें अंतरिक्ष अनुसंधान की दुनिया में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर ला दिया है; भारत में होने वाले चुनाव, जो विश्व में होने वाली सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है; और कुंभ मेला, जो कि विश्व की सबसे बड़ी मानव सभा है।

मुझे दो मंत्रालय संभालने का सौभाग्य मिला है, ग्रामीण विकास मंत्रालय और आवासन और शहरी कार्य के मंत्रालय जिन्होंने देश के कुछेक सबसे बड़ी और सबसे जटिल परियोजनाओं और कार्यक्रमों में से कुछ को पूरा किया है - जिनका पिछले दिनों देश साक्षी रहा है।

अगले कुछ मिनटों में, मैं उन कुछ सबसे बड़ी सफलताओं के बारे में बात करूँगा जो हमने हाल के वर्षों में देखी हैं, जिन चुनौतियों का हमने सामना किया है और जो सबक हमने उनसे सीखे हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में मैंने ग्रामीण कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए वर्ष 2000 में प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना शुरू की, जिसका लक्ष्य देश में सड़क नेटवर्क से असंबद्ध और अलग-थलग गांवों को सड़क नेटवर्क में लाना था।

अब तक, मंत्रालय ने इस कार्यक्रम के तहत 6 लाख किमी से अधिक ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया है।

इनमें से कई गाँव देश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में हैं और इनकी आबादी 500 से कम है।

आवासन और शहरी कार्य के मंत्री के रूप में मुझे सरकार के कुछेक सबसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों - स्वच्छ भारत, स्मार्ट सिटीज़, आवासन और प्रधान मंत्री आवास योजना के क्रियान्वन की निगरानी करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

हमने गांधीजी के स्वच्छ भारत के सपने साकार करने की दिशा में अच्छी प्रगति की है, एक शपथ जो प्रधानमंत्री मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को ली थी। कुछ ही दिनों में जब हम गांधीजी की 150 वीं जयंती मनाएंगे, तब तक हम इस वादे को काफी हद तक पूरा कर लेंगे।

अक्टूबर 2014 से देश भर के 699 जिलों और 4300 से अधिक शहरों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है।

यह उल्लेखनीय प्रगति है लेकिन स्वच्छ भारत केवल शौचालय बनाने से कहीं अधिक व्यापक कार्यक्रम है। यह लोगों की आदतों को बदलने और प्रथाओं को तोड़ने के बारे में है जिनकी जड़ें गहरी हो चुकी हैं।

इसलिए यहां परियोजना प्रबंधन की बड़ी चुनौती लोगों की धारणाओं को बदलने और स्थायी प्रभाव के लिए उनके समर्थन को हासिल करने की है।

'स्मार्ट सिटीज' एक और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, विश्व में जिसकी बराबरी के बहुत कम ही कार्यक्रम हैं।

विश्व में वर्ल्ड अरबेनाइजेशन प्रोस्पेक्ट्स के अनुसार, वर्ष 2025 में शहरी आबादी बढ़कर 42.5 प्रतिशत (566 मिलियन) हो जाएगी।

हमारे उभरते शहर आज जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनमें से कई समस्याओं का हल स्मार्ट सिटीज कार्यक्रम प्रदान करेगा - जैसे सार्वजनिक परिवहन, जल प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अपराध की रोकथाम।

मेरे अनुसार यहां बड़ी चुनौती वित्त-पोषण या अवसरंचना या प्रौद्योगिकी नहीं बल्कि नेतृत्व है। जहां किसी राज्य या शहर में सकारात्मक, दूरदर्शी नेतृत्व है, वहां स्मार्ट सिटी परियोजनाएं अच्छी तरह से आगे बढ़ी हैं।

प्रधानमंत्री जन धन योजना सरकार की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है। हम अपने तय किए लक्ष्यों से भी आगे बढ़ गए हैं- हमारा मूल लक्ष्य 7.5 करोड़ नए बैंक खाते खोलना था, जिसे संशोधित कर 12.54 करोड़ किया गया।

सरकार ने उस लक्ष्य का 100 प्रतिशत प्राप्त किया है - जिनमें से 6० प्रतिशत खाते ग्रामीण क्षेत्रों में हैं और 51 प्रतिशत खाताधारक महिलाएँ हैं।

इससे परियोजना प्रबंधन संबंधी यह सीख मिलती है कि साहसिक पहलों के लिए ऐसे पुराधाओ की आवश्यकता होती है जो टीम को बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करें।

इस मामले में प्रधान मंत्री ने दुनिया में इस सबसे बड़े वित्तीय समावेशन कार्यक्रम का समर्थन किया।

अब मैं एक अन्य प्रेरक पहल की बात करता हूं।

जमीन अधिग्रहण में कठिनाई राजमार्ग परियोजनाओं के समय से पूरा न होने की एक बड़ी वजह रही है।

हमने इसके लिए एक अच्छा समाधान ढूंढ लिया है - जब तक कि 80 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण नहीं हो जाता है, हम किसी राजमार्ग के निर्माण का ठेका नहीं देते हैं। परिणामस्वरूप, पिछले चार वर्षों में भारत में चल रही 700 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में से 40 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी हैं।

इससे परियोजना प्रबंधन की यह सीख ली जा सकती है कि नवोन्मेषी सोच और ऐसा करने की इच्छाशक्ति कठिनाइयों पर काबू पाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

हमने भारत के हर गांव को विद्युत ग्रिड से जोड़ने का वादा किया था, और आज मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमने उस लक्ष्य का 100 प्रतिशत हासिल कर लिया है।

यहां सबसे बड़ी सीख है कि एक वादे को वास्तविकता में बदलने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और ग्राम पंचायतों और बिजली वितरण कंपनियों के बीच समन्वित प्रयास अपेक्षित है।

खाना पकाने के दौरान धुएं के संपर्क में आने से ग्रामीण नागरिकों और शहरों में रह रहे गरीबों, खासकर महिलाओं में सांस की बीमारियों में वृद्धि हुई है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से अब 7 करोड़ गरीब परिवारों को नि:शुल्क एलपीजी चूल्हे और शुरुआत में भरे हुए सिलेण्डर की सुविधा मिली है।

दो अन्य क्षेत्र हैं जिन पर देश में तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है और प्रधान मंत्री ने उन मुद्दों को ठीक ही उठाया है। वे मुद्दे हैं- स्वच्छ जल की सुलभता और देश को प्लास्टिक रहित बनाना।

एक और बड़ी परियोजना जो सरकार द्वारा शुरू की जा रही है, वह है 2024 तक पूरे भारत में सभी घरों में पाइप से पानी पहुंचाने की सुविधा।

हमारे देश ने जो सफलताएँ हासिल की हैं, उनमें से कई में निजी क्षेत्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मेरा मानना है कि निजी क्षेत्र राष्ट्र निर्माण में और भी बड़ी भूमिका निभा सकता है। चाहे वह स्मार्ट शहर, शिक्षा, स्वास्थ्य देखरेख या अवसरंचना का निर्माण हो, मेरा मानना है कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी वर्तमान समय के लिए सबसे उपयुक्त रहेगी।

एक महत्वपूर्ण सीख जो सरकारी एजेंसियों को निजी क्षेत्र से लेनी चाहिए, वह है परियोजना प्रबंधन को संस्थागत बनाना।

कई संगठन एक नेता के कारण आगे बढ़ते हैं लेकिन एक बार उस नेता के चले जाने के बाद वे काम करने के अपने पुराने तरीकों पर लौट जाते हैं।

हां, हमें ऐसे नायकों की जरूरत है जो हमें प्रेरित करें और हमें बड़ी सफलताएं हासिल करने के लिए आगे बढ़ायें। लेकिन हमें ऐसी व्यवस्था और प्रक्रियाएं भी स्थापित करने की आवश्यकता है जो यह सुनिश्चित करेंगी कि कोई संगठन अच्छे ढंग से कार्य करे, चाहे वहां नेतृत्व मौजूद हो या नहीं। आने वाले दिनों में यह महत्वपूर्ण होगा।

मेरा मानना है कि परियोजना प्रबंधक एक बड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं। इस समय व्यापक बदलाव हो रहे हैं और संगठनों को विकसित करने में मदद करने में आपका ज्ञान और कौशल निर्णायक होगा, जिसके परिणामस्वरूप उद्योग और देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

मैं आपको दोहरा संदेश देना चाहता हूं: सही कौशल प्राप्त करें और भविष्य की मांगों के अनुरूप स्वयं को सदा तैयार रखें।

प्रौद्योगिकी तेजी से बदल रही है और आपको अपने रोजगार में प्रासंगिक बने रहने के लिए नवीनतम डिजिटल कौशल के बारे में जानकारी होनी चाहिए। हालांकि, केवल तकनीकी कौशल से ही आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे। दुनिया में सर्वश्रेष्ठ से प्रतिस्पर्धा करने के लिए नेतृत्व कौशल और व्यावसायिक ज्ञान का विकास करें।

दूसरा, ऐसा बहुत कुछ है जो आप अपनी व्यक्तिगत हैसियत में अपने समुदाय के लिए कर सकते हैं।

अपनी 50 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में पीएमआई के ग्लोबल सेलिब्रेशन ऑफ सर्विस के बारे में सुनकर मैं बेहद खुश हूं।

मैं पीएमआई के समुदाय को 100,000 घंटे की सेवा समर्पित करने के प्रण के लिए इसकी सराहना करता हूं।

यह परियोजना प्रबंधकों के लिए समाज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक बड़ा अवसर है। इसलिए आगे बढ़ो और अपने आप को एक ऐसे लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध करो जिसमें आप विश्वास करते हैं।

मैं एक बार पुन: पीएमआई पर्ल सिटी चैप्टर के सदस्यों को बधाई देता हूं और पीएमआई को उसके पेशेवर विकास और सामुदायिक-निर्माण की पहल के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!

जय हिन्द!"