21 जून, 2020 को नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | जून 21, 2020

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आप सभी को मेरी शुभकामनाएं!

छठे वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन पर आप सभी के साथ आभासी तौर पर जुड़कर मुझे अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है।

सर्वप्रथम, मैं आभासी श्रृंखला 'अनुभव' की सफलता के लिए स्पिक मैके को हार्दिक बधाई देता हूं।

अपने आदर्श वाक्य 'हमारी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से सकारात्मकता का सतत प्रसार करना ’ के अनुरूप स्पिक मैके ने सच्ची भावना से भारतीय विरासत के विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरूकता बढ़ाकर और इसमें समाहित अनमोल मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने के लिए युवा दिमागों को प्रेरित करके औपचारिक शिक्षा की गुणवत्ता को समृद्ध करते रहे हैं।

मुझे यह जानकर खुशी है कि स्पिक मैके के माध्यम से देश के सबसे कुशल कलाकार स्कूलों और कॉलेजों में भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य, लोक संगीत, कविता, रंगमंच, पारंपरिक चित्रों, शिल्प और योग के कार्यक्रमों को मुख्य रूप से प्रस्तुत करते हैं।

मुझे यकीन है कि स्पिक मैके भारत के साथ-साथ दुनिया की समृद्ध और विविध संस्कृति का पता लगाने और उसे अनुभव करने के लिए युवाओं को प्रेरित करता रहेगा।

मुझे आशा है कि इन कलाओं में सन्निहित सुंदरता, अनुग्रह, मूल्य और ज्ञान उनके जीवन और सोचने के तरीके को प्रभावित करेंगे और उन्हें बेहतर मानव बनने के लिए प्रेरित करेंगे।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

वर्ष 2014 में योग को एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस को अपनाने संबंधी संयुक्त राष्ट्र में अपने प्रस्ताव के दौरान, प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी ने विश्व के लिए योग के महत्व को संक्षेप में बताया था। योग को प्राचीन भारतीय परंपरा का एक "अमूल्य उपहार" बताते हुए, उन्होंने कहा "यह मन और शरीर, विचार और कार्य, संयम और पूर्णता की एकता के साथ-साथ मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य; स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण का प्रतीक है।"

भारत के प्रस्ताव को 175 देशों ने समर्थन दिया और संयुक्त राष्ट्र ने 11 दिसंबर 2014 को एक प्रस्ताव में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया।

योग, दुनिया के लिए भारत का एक अनूठा उपहार, अब दुनिया भर में लाखों लोगों के जीवन में सफलतापूर्वक सकारात्मक परिवर्तन कर रहा है।

‘योग’, जिसका अर्थ है 'जोड़ना' या 'एक करना', मूल रूप से मन और शरीर के बीच सामंजस्यपूर्ण मिलन का प्रयास करता है। यह एक विज्ञान है जो संतुलन, शांतचित्त, शिष्टता, समानता, शांति और सद्भाव पर बल देता है।

योग, जो कि एक 5000 साल पुरानी परंपरा है, केवल एक व्यायाम नहीं है। यह उससे कहीं अधिक है, यह एक दर्शन है, एक अनुशासन है। योग में विभिन्न आसन, श्वास व्यायाम (प्राणायाम) और ध्यान तकनीकें शामिल हैं।

ये सभी घटक मानव शरीर और मन में असंख्य तरीकों से एक सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक हैं।

योग जीवन के प्रति एक ऐसा दृष्टिकोण भी है जिसमें संतुलन स्थापित किया जाता है, जिसमें अति की स्थितियों को वर्जित करने के साथ ही संतुलन और शिष्टता कायम रखने के लिए शरीर की गतिविधियों की सूक्ष्म बारीकियों की सराहना की जाती है। जैसा कि भगवान कृष्ण ने भगवद गीता में अर्जुन को बताया है "समत्वम योग उच्यते" (योग संतुलन है)।

पतंजलि के अष्टांग योग या आठ स्तर योग के पहले दो चरण 'यम' और 'नियम' हैं। वे मानसिक अनुशासन से संबंधित हैं। 'शौच,' जिसका आशय है सफाई और शुचिता, को 'नियम' के अंतर्गत शामिल किया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 1984 में अपने संकल्प में 'आध्यात्मिक आयाम' को स्वास्थ्य के एक भाग के रूप में स्वीकार किया है। पहले स्वास्थ्य को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दृष्टि देखा जाता था। हमने उस परिप्रेक्ष्य से हटकर एक अधिक समग्र एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया है, जहां मानव अस्तित्व के विभिन्न तत्व विविध प्रकार की अन्तः क्रियाओं के माध्यम से मानव कल्याण में योगदान देते हैं। यह एकीकृत दृष्टिकोण, जिसमें विभिन्न घटकों को एक साथ जोड़ा जाता है, योग का सार है और विचारों का यही उपहार हमने विश्व को दिया है।

योग अब भारत की कूटनीति में 'सॉफ्ट पॉवर' का एक प्रभावशाली स्रोत बन गया है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की जबरदस्त प्रतिक्रिया हर्ष का विषय है।

हमें इस बात की प्रसन्नता है कि हम इस तरह के सकारात्मक कार्य के लिए दुनिया को एकजुट करने में सफल रहे हैं।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

जैसा कि हम सभी जानते हैं, इस वर्ष दुनिया सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक कोविड-19 महामारी से लड़ रही है। वास्तव में दुनिया चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रही है और हम इस महामारी से हार नहीं मान सकते। हमें एकजुट होकर एक मजबूत लड़ाई लड़नी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि हम शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ रहें।

निस्संदेह, ये तनावपूर्ण समय हैं जिसमें हम में से अधिकांश आमने-सामने सामान्य बातचीत किए बिना, शारीरिक व्यायाम और मनोरंजक गतिविधियों को छोड़कर घर पर रहने के लिए मजबूर होते हैं। योग हमारे जीवन में महामारी के कारण पैदा हुए तनाव के उच्च स्तर के लिए एक प्रभावी उपाय हो सकता है।

योग अवसाद, चिंता और तनाव जैसी समस्याओं, जो आधुनिक जीवन-शैली के कारण सर्वव्यापी हो गई हैं, से प्रभावी ढंग से निपटने में सहायक हो सकता है। जब भी मैं नौजवानों द्वारा आधुनिक दौर के दबावों और तनाव का सामना करने में असमर्थ होने के कारण आत्महत्या करने की ख़बरें देखता हूं, तो मुझे अत्यधिक पीड़ा होती है। ऐसी सभी मौतों पूरी तरह से टाला जा सकता है। योग और ध्यान तनाव को कम करने में अत्यधिक सहायक साबित हो सकते हैं।

योग विशेष रूप से अस्थमा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित लोगों की तरह कमजोर लोगों के लिए शरीर की प्रतिरक्षा में सुधार करने के लिए सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है।

महामारी एकमात्र स्वास्थ्य संकट नहीं है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि 2016 में भारत में 63 प्रतिशत मौतें गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की वजह से हुई थीं। इनमें से, 30 वर्ष से 70 वर्ष की आयु के लोगों की अकाल मृत्यु का जोखिम पुरुषों के लिए 27 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत था।

जीवन शैली संबंधी बीमारियों को रोकने और नियंत्रित करने के लिए योग अविश्वसनीय रूप से एक सरल लेकिन सशक्त साधन है। यह समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए अपेक्षाकृत कम जोखिम और अधिक लाभ वाली पद्धति है और इसकी पूरी क्षमता का लाभ उठाया जाना चाहिए।

चूँकि भारत को अत्यधिक जनसांख्यिकीय लाभ की स्थिति प्राप्त है जिसे लाभांश में परिवर्तित किया जा सकता है, हमें यह सुनिश्चित करने के लिए पूरा प्रयास करना चाहिए कि हमारे युवा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी 'शारीरिक गतिविधि संबंधी अपनी वैश्विक कार्य योजना 2018-2030: एक स्वस्थ दुनिया के लिए अधिक सक्रिय लोग' में योग का स्वास्थ्य में सुधार के एक साधन के रूप में उल्लेख किया है।

चिकित्सा की एक विधा के रूप में योग अथवा योगचिकित्सा अब काफी लोकप्रिय हो गई है और बड़ी संख्या में अध्ययनों और सुव्यवस्थित समीक्षाओं में कई बीमारियों के इलाज में योग की क्षमता के वैज्ञानिक प्रमाण मिले हैं।

स्वास्थ्य संबंधी निदान के रूप में योग की असीम संभावनाओं को और बेहतर तरीके से जानने के लिए हमें बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक प्रयोग करना चाहिए।

प्रिय छात्रों,

योग आज दुनिया भर में सबसे बड़े स्वास्थ्य अभियानों में से एक बन गया है।

भारत की प्राचीन विरासत अर्थात योग की निर्बाध परंपरा रही है और इस अमूल्य परंपरा को जीवित रखने का उत्तरदायित्व हम सभी का है। हमारे बच्चों को कम उम्र में ही योग से परिचित कराया जाना चाहिए।

महामारी के मद्देनजर केवल ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन करने वाले शिक्षण संस्थानों को मैं यह सुझाव देना चाहता हूँ कि वे योग को ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रमों के एक भाग के रूप में शामिल करें।

मुझे खुशी है कि 'यूनिसेफ किड पावर'ने बच्चों के लिए 13 योग 'मुद्राएं और आसनों को' सूचीबद्ध किया है।

मैं 'योग पेशेवरों के लिए स्वैच्छिक प्रमाणन योजना' जैसे कार्यक्रम प्रारम्भ करने के लिए भी सरकार की सराहना करता हूं। इस योजना के माध्यम से अधिक संख्या में पेशेवर योग शिक्षकों को प्रमाणित किया जाएगा,जिससे योग का प्रसार और अभ्यास बढ़ेगा।

दुनिया के सभी भागों और सभी लोगों को योग की उपचार शक्ति का लाभ प्रदान करने के लिए और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। आखिरकार, 'लोका: समस्ता: सुखिनो भवन्तु' हमेशा भारत का मंत्र और प्रार्थना रही है।

आभासी योग और ध्यान शिविर जैसी यह पहल सही दिशा में उठाया गया एक कदम है। मुझे आशा है कि आने वाले समय में इस तरह की कई और पहलों की अभिकल्पना करते हुए उन्हें साकार किया जाएगा।

मैं इस चुनौतीपूर्ण समय में युवाओं के लाभ के लिए इस शिविर के आयोजन के लिए स्पिक मैके को पुनः बधाई देता हूं। मैं इस नेक पहल की शानदार सफलता की कामना करता हूं।

धन्यवाद!

जय हिन्द!