21 जून, 2019 को लाल किला मैदान, दिल्ली में प्रजापिता ब्रह्मा कुमारीज़ विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सभा में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

दिल्ली | जून 21, 2019

"मंच पर उपस्थित विद्वान वक्ताओं और इस समारोह में आए ब्रह्मकुमारी ब्रदर्स एवं सिस्टर्स

सर्वप्रथम मैं प्रजापिता ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय को ऐतिहासिक लाल किले के मैदान में इस कार्यक्रम का आयोजन करने तथा इसमें मुझे मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए बधाई देता हूँ।

यह देश के लिए गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है।

11 दिसम्बर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से 21 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के रूप में स्थापित करने के संकल्प को मंजूरी दी। इस संकल्प को 177 देशों का समर्थन प्राप्त हुआ।

योग को अब शारीरिक दुरूस्ती और स्वास्थ्य पाने और इसे बनाए रखने के साधन के रूप में व्यापक रूप से माना जाता है। हालांकि योग प्रत्येक दिन कुछ मिनटों के लिए किया जाने वाला शारीरिक व्यायाम नही है।

यहाँ एक संपूर्ण विधा है जो किसी व्यक्ति को स्वस्थ मन, मजबूत शरीर और सम्पूर्ण कल्याण की ओर ले जाता है।

योग का अर्थ- आत्मा और शरीर, विचार और कर्म, मनुष्य और प्रकृति का मिलन भी है। एक सच्चा योगी स्वयं के साथ, दूसरों के साथ और पर्यावरण के साथ एक सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करता है जो एक स्वस्थ समाज और एक स्वस्थ ग्रह की बुनियाद है।

योग एक जीवन पद्धति है जो सादगी, ईमानदारी करूणा और सभी प्राणियों और प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है। यह विचारों, भावनाओं, शब्दों और कार्यों में प्रत्येक स्तर पर अहिंसा पर आधारित जीवन शैली है।

योग इस बात की संस्तुति करता है कि हम अपने जीवन में बाहरी विरोधाभास को जितना कम करेंगे और अपने दिमाग के कोलाहल को दूर करेंगे, उतना अधिक हम ध्यान केंद्रित कर पाएंगे और आंतरिक शांति पाएंगे।

जैसा कि लोगों का दृष्टिकोण और जीवनशैली भौतिकवादी हो गई है तो आज योग के इस पहलू को लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता है। अधिक संसाधनों, धन, सुख और शक्ति के लिए अंधाधुंध दौड़ से मूल्यों, नैतिकता का हृास और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है। अब हम जलवायु परिवर्तन और बढ़ती असमानताओं के रूप में इन सब को देख रहे हैं। हमें भौतिक वस्तुओं के लिए इस लालसा पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है।

योग का उद्देश्य 'संतुलन' और 'धैर्य,' 'शांति' 'संतुलन' और शिष्टता की प्राप्ति है। यह उत्कृष्टता, समन्वय और सामंजस्य की खोज के लिए एक अवर्णनीय अभिव्यक्ति है। यह भारतीय वैश्विक दृष्टिकोण का भावपूर्ण प्रतीक है। यह प्रकृति और अन्य प्राणियों के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से एक साथ मिलकर रहने के भारतीय जीवन शैली को दर्शाता है।

हम बड़ी चुनौतियों, अप्रत्याशित दिशाओं में अभूतपूर्व बदलाव के समय में जी रहे हैं। हमारे जीने, सीखने, काम करने और आनंद लेने के तरीकों में तेज़ी से बदलाव हो रहा है। प्रौद्योगिकी के माध्यम से जीवन-शैली बदल रही है। हम आर्थिक वृद्धि और समृद्धि के लिए निरंतर प्रयास में, सुविधा और आराम को बढ़ाने में, अपने ज्ञान और कौशल को समृद्ध करने में, मनोरंजन और शिक्षा के लिए अपने विकल्पों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहे हैं।

हमें प्रकृति के अंधाधुंध दोहन और अत्यधिक उपभोग करने से बचने की आवश्यकता है। संवहनीयता नया मंत्र होना चाहिए। संवहनीयता का केन्द्र 'संतुलन' है। योग से तात्पर्य है शारीरिक स्वास्थ्य से लेकर सभी क्षेत्रों में संतुलन।

ऐसे समय में जब लोग दैनिक जीवन में भारी तनाव का सामना कर रहे हैं, योग के सूक्ष्म विज्ञान को बढ़ावा देने की अत्यधिक आवश्यकता है, जिसका अनुसरण, प्रत्येक व्यक्ति न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को प्राप्त करने के लिए, बल्कि प्रबुद्ध विकल्प चुनकर बेहतर जीवन के लिए भी कर सकता है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि योग एक प्राचीन, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास है जिसकी उत्पत्ति भारत में लगभग 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में हुई थी। इसे स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करके, इस समग्र अभ्यास का प्रचार करने और इसे जीवित रखने की आवश्यकता है क्योंकि यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को सुनिश्चित करता है बल्कि अनुशासन की भावना भी पैदा करता है। देश में बदलती जीवनशैली और असंक्रामक रोगों के बढ़ते मामलों के कारण यह और अधिक आवश्यक है।

द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए मैंने विभिन्न देशों का दौरा किया है। मुझे यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि योग अभ्यास पूरी दुनिया में अत्यधिक लोकप्रिय हो गया है।

मुझे पता लगा है कि संयुक्त राष्ट्र अमरीका सहित कुछ देशों में कुछ स्कूलों ने योग को बच्चों के लिए स्कूल पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में शामिल किया है। मैंने कई देशों, उदाहरण के लिए पेरू में योग केन्द्र देखे हैं। कोस्टारिका में राष्ट्रपति द्वारा एक आदेश जारी किया गया जिसमें योग और ध्यान को बढ़ावा देने से संबंधित सभी कार्यों और प्रयासों को जनहित के कार्यों के रूप में घोषित किया गया।

योगिक दृष्टिकोण हमें हमारे कार्यों के व्यापक निहितार्थ को देखने में सक्षम बनाने और सार्वभौमिक योजना के एक अविभाज्य अंग के रूप में हमारी भूमिका और जिम्मेदारियों से अवगत कराता है।

मुझे यह जानकर खुशी है कि प्रत्येक वर्ष 21 जून को ब्रह्म कुमारीज़ विश्वविद्यालय योग को स्वस्थ जीवन शैली के रूप में बढ़ावा देने के लिए व्यायाम और ध्यान के मिश्रित कार्यक्रम आयोजित करता है।

जय हिन्द!"