20 दिसंबर 2020 को हैदराबाद से सोसाइटी ऑफ कोरोनरी सर्जन के शुभारंभ के अवसर पर सभा में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा वर्चुअली दिया गया भाषण

हैदराबाद | दिसम्बर 20, 2020

“मुझे इस उद्घाटन कार्यक्रम और सोसायटी ऑफ कोरोनरी सर्जन्स (एससीएस) के शुभारंभ के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित हो कर अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है। मुझे बताया गया है कि इस सोसायटी का विजन मूल रूप से डेटा की तुलना करना और हृदय रोगों, विशेष रूप से हृदय की धमनी की शल्य- चिकित्सा के क्षेत्र में मौलिक अनुसंधान करना है। चिकित्सा क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना अत्यंत महत्वपूर्ण है और मुझे यकीन है कि इस तरह की पहल से प्रामाणिक डेटा उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।

पिछले कुछ दशकों में, हमने चिकित्सा क्षेत्र में बहुत प्रगति की है। आज, भारत संख्या की दृष्टि से सीएबीजी (कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट) सर्जरी करने में विश्व में दूसरे स्थान पर रहने के साथ हृदय रोगों का उपचार प्रदान करने में विश्व स्तर पर अहम भूमिका निभा रहा है।

इस कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में भी हमारी क्षमताएं स्पष्ट रूप से साबित हुईं हैं। जब हम दुनिया के कुछेक अग्रणी देशों से तुलना करते हैं तो हमारे यहां कोरोना से मरने वाले व्यक्तियों की संख्या बहुत कम है।

मैं इस महामारी के फैलने के समय से ही चिकित्सा, पराचिकित्सा और अन्य स्वास्थ्य सेवा कर्मियों द्वारा प्रदान की जा रही निस्वार्थ और उल्लेखनीय सेवा की सराहना करता हूं।

मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि हम जल्द ही कोविड का अपना स्वदेशी टीका उपलब्ध कराने वाले हैं।

वास्तव में, भारत हाल के वर्षों में एक चिकित्सा पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरा है। पूर्व में, भारत से मरीज इलाज के लिए विदेश जाते थे। लेकिन अब विकसित देशों सहित विभिन्न देशों के मरीज किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा के लिए भारत आ रहे हैं। साथ ही, अन्य देशों में सेवारत भारतीय चिकित्सकों ने अपने कौशल और ज्ञान के लिए उच्च प्रतिष्ठा अर्जित की है। ऐसा कहा जाता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रत्येक चार शीर्ष चिकित्सकों में से एक चिकित्सक भारत से है।

मैं आज इस अवसर पर आप सभी के साथ अपने विचारों को साझा कर रहा हूं।

प्रिय बहनों और भाइयों,

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) में हृदय, दीर्घकालिक श्वसन रोगी, कैंसर और मधुमेह जैसी बहुत सारी बीमारियां शामिल हैं। विश्व में होने वाली सभी मौतों में लगभग 41 मिलियन (71%) और भारत में होने वाली सभी मौतों में लगभग 5.87 मिलियन (60%) मौतें गैर-संचारी रोगों के कारण होती हैं या दूसरे शब्दों में कहें तो प्रत्येक 4 में से 1 भारतीय की गैर-संचारी रोगों से मौत होने का खतरा है। गैर-संचारी रोगों से होने वाली कुल मौतों में लगभग तीन चौथाई मौतें और 16 मिलियन लोगों, जो असमय या 70 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं, में से 82%लोग कम और मध्यम आय वाले देशों के होते हैं।

गैर-संचारी रोगों में वृद्धि मुख्य रूप से जीवन शैली में बदलाव जैसे कि गतिहीन कार्यों, सामाजिक आर्थिक स्थिति में सुधार से आहार की अस्वास्थ्यकर और अनियमित आदतों, उच्च तनाव, धूम्रपान और तंबाकू चबाने के कारण होती है। उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे रोगों की गैर-संचारी रोगों , विशेष रूप से हृदय रोगों में अहम भूमिका होती है।

अफसोस की बात है कि गैर-संचारी रोगों की महामारी का व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है।

हृदय रोग से होने वाली अधिकांश मृत्यु 40-70 वर्ष के आयु वर्ग में होने के मद्देनज़र गैर-संचारी रोगों से जुड़ी सामाजिक-आर्थिक कीमत को देखते हुए उन्हें रोकना और नियंत्रित करना जरूरी है।

मुझे बताया गया है कि भारत विश्व में सर्वाधिक हृदय रोगों वाले देशों में एक है और भारत में हृदय रोग से होने वाली मौतों की वार्षिक संख्या 1990 में 2.26 मिलियन से बढ़कर 2020 में 4.77 मिलियन होने का अनुमान है। हमारे देश में तीन करोड़ से अधिक हृदय रोगी हैं और हर साल करीब दो लाख हृदय शल्य चिकित्सा की जा रही हैं।

हृदय रोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह जानकर अच्छा लगा कि कुछ हृदय शल्य चिकित्सक हृदय रोगों और आय अर्जित करने वाले लोगों को प्रभावित करने के मामले में हृदय रोगों से होने वाले अत्यधिक नुकसान की रोकथाम के मिशन के साथ सोसायटी ऑफ कोरोनरी सर्जन्स बनाने के लिए मिलजुल कर आगे आए हैं।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि हमारे हृदय शल्य चिकित्सकों ने डेटा एकत्र करने और हृदय रोगों के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने तथा हृदय रोगों से पीड़ित रोगियों के जीवन में सुधार के लिए निरन्तर अनुसंधान करने की आवश्यकता को समझा है।

मुझे आशा है कि सोसायटी अपने उद्देश्यय के अनुरुप, हृदय रोगों पर गहन अनुसंधान करेगी और इसके कारणों की पहचान करके तथा सही निदान और गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करके हृदय रोगियों की बढ़ती संख्या को कम करने की कोशिश करेगी।

प्रिय बहनों और भाइयों,

यह चिंता का विषय है कि अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक और उन्नत सुविधाओं के अभाव के साथ स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे का प्रसार असंतुलित है। इस स्थिति को युद्धस्तर पर सुधारना होगा। निजी क्षेत्र को सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से किफायती कीमत पर ग्रामीण क्षेत्रों में नवीनतम स्वास्थ्य देखभाल नैदानिक और उपचार सुविधाओं के लिए सरकार के साथ हाथ मिलाना होगा।

यह अनुमान है कि भारत में सभी प्रकार की चिकित्सा के लिए जाने वाले लगभग 86% लोग ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। अधिकांश लोगों द्वारा चिकित्सा लागत को स्वयं वहन किए जाने के कारण बीमा कवरेज को बढ़ाने की बड़ी आवश्यकता है।

'आयुष्मान भारत', जो भारत सरकार का प्रमुख कार्यक्रम है, वास्तव में एक सराहनीय पहल है और यह 10.74 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर तबके के परिवारों (लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) जो भारतीय आबादी का 40%निचला तबका है, को द्वितीयक और तृतीयक देखभाल हेतु अस्पतालों में भर्ती होने के लिए प्रति वर्ष प्रति परिवार 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करने का प्रावधान करता है।

मैं इस सोसायटी के सदस्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी के बोझ पर ध्यान देने का भी आग्रह करता हूं। जैसा कि आप सभी जानते हैं, अधिकांश लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं और हृदय रोग के जोखिम कारकों का समान रूप से सामना करते हैं।

यह जानकर निराशा भी होती है कि चिकित्सक मरीज अनुपात की दृष्टि से, भारत की स्थिति डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुरुप नहीं है। देश की वर्तमान अनुमानित 135 करोड़ आबादी के अनुसार प्रत्येक 1,445 भारतीयों के लिए एक चिकित्सक उपलब्ध है, जो डब्ल्यूएचओ द्वारा 1,000 लोगों के लिए के एक चिकित्सक के निर्धारित मानदण्ड से कम है। इस पहलू पर भी तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए और निजी क्षेत्र को किफायती चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने के सरकार के प्रयासों से भागीदारी करनी चाहिए।

अंत में, अपनी बात समाप्त करने से पहले, मैं आधुनिक जीवन शैली के कारण होने वाले तनाव से बचने और हृदय रोगों की रोकथाम के लिए सभी से नियमित रूप से योगाभ्यास और ध्यान करने तथा खाने- पीने के पारंपरिक तौर-तरीकों को फिर से अपनाने का आग्रह करता हूं। वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला है कि अनुचित जीवन शैली हृदय रोगों के मामले में वृद्धि का प्रमुख कारण है।

योग और ध्यान व्यक्ति को अंतर्मन से जोड़ने के सबसे अच्छे उपाय हैं। हमारे प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्रभाई मोदी जी के प्रयासों की बदौलत, संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया है ताकि प्रतिदिन इसका अभ्यास करने की आदत को अपनाया जा सके और इसके लाभों का आनंद उठाया जा सके। योग व्यक्ति को तनाव से मुक्ति दिलाता है और बीमारियों को दूर रखता है। इसलिए, प्रत्येक व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करना चाहिए।

सोसायटी ऑफ कोरोनरी सर्जन्स को मेरी शुभकामनाएं!

जय हिन्द!"