20 जुलाई, 2019 को हैदराबाद में डॉ. एमसीआर एचआरडी संस्थान में एमईएस परिवीक्षाधीनों के लिए प्रथम फाउंडेशन पाठ्यक्रम के विदाई समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

हैदाराबाद | जुलाई 20, 2019

"मैं मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज के परिवीक्षकों के लिए तेलंगाना सरकार के डॉ. एमसीआर एचआरडी संस्थान द्वारा पहली बार आयोजित किये गए फाउंडेशन कोर्स के प्रतिभागियों से बातचीत करके प्रसन्न हूँ।

सर्वप्रथम, मैं देश भर से 13 राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले ग्रुप 'ए' के 63 अधिकारियेां को बधाई देना चाहूँगा कि उन्होंने हमारे देश के एक सबसे प्रतिष्ठित और होनहार करिअर अपनाया है, मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज सबसे पुरानी (26 सितंबर, 1923 को गठित) और भारत में रक्षा अवसंरचना विकास के लिए सबसे बड़ी सरकारी एजेंसी है।

मुझे बताया गया कि इस भारतीय मिलिटी इंजीनियर सर्विसेज़ (एमईएस) से संबंधित कार्मिक मुख्य रूप से थल सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय आयुध निर्मिाणियों, डीआरडीओ और भारतीय तटरक्षक सहित भारतीय सशस्त्र बलों के लिए इंजीनियरिंग और निर्माण के कार्यों में नियुक्त होते हैं।

सशस्त्र बलों के लिए पारंपरिक बिल्डिंग निर्माण के अलावा, मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज एयर फील्ड, इमारतों, सड़कों, क्रीडा संकुलों, हवाई पट्टियों, हैंगर्स, डॉकयार्ड, घाटों और अन्य समुद्री संरचनाओं जैसी उन्नत और जटिल परियोजनओां को पूरा करने में भी शामिल रहती है।

मुझे बताया गया कि एमईएस एक मिलिट्री संगठन है जिसमें फौजी और सिविल दोनों तरह के अधिकारी और अन्य अधीनस्थ कर्मचारी होते हैं। यह संयोजन आपके संगठन को अनूठा और बेहद महत्वपूर्ण बनाता है।

एमईएस तीनों सेनाओं और रक्षा मंत्रालय के संबद्ध संगठनों के लिए रणनीतिक और परिचालनगत अवसंरचना बनाने के साथ ही प्रशासनिक भवनों के निर्माण और उनके अनुरक्षण की जिम्मेदारी भी उठाता है।

आपके जैसे प्रशिक्षित अधिकारियों के पास आपदा शमन, राहत कार्यों, सार्वजनिक अवसंरचना विकास और बड़े पैमाने पर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने का बड़ा अवसर मौजूद है।

मैं यह जानकर बेहद खुश हूँ कि एमईएस ने अपनी पर्यावरण के अनुकूल पहल के रूप में ऊर्जा संरक्षण, नवीनीकरण ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी का प्रयोग और देश के विभिन्न हिस्सों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्षेत्र में कुछ नवोन्मेषी पहल की हैं।

मुझे यह जानकर बेहद प्रसन्नता हो रही है कि डा. एमसीआर एचआरडी संस्थान में 14 सप्ताह का फाउंडेशन कार्स करने के अतिरिक्त, एमईएस परिवीक्षकों को मिलिट्री इंजीनियरिंग महाविद्यालय, राष्ट्रीय निर्माण प्रबंधन और अनुसंधान संस्थान (एनआईसीएमएआर), राष्ट्रीय रक्षा वित्तीय प्रबंधन अकादमी (एनएडीएफएम), संसदीय अध्ययन तथा प्रशिक्षण ब्यूरों में 26 सप्ताह के अन्य प्रशिक्षणों से गुजरने की आवश्यकता होगी।

तथापि, प्रशिक्षण मात्र एक बार के लिए नहीं होना चाहिए। अधिकारियों और अन्य के लिए कौशल, ज्ञान को अद्यतित करने और नवीनतम घटनाक्रम से परिचित होने के लिए नियमित अंतराल पर प्रशिक्षण अनिवार्य है।

मैं डा. एमसीआर एचआरडी संस्थान द्वारा प्रशिक्षण के लिए व्यापक उपागम डिजाइन किए जाने के लिए उनकी सराहना करता हूँ, जिसमें बहिरंग, पाठ्येत्तर और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को शामिल किया गया ताकि एमईएस परिवीक्षकों में व्यापक दृष्टि विकसित हो सके और वे मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज़ के लाभकारी सदस्यों के रूप में उभर सकें।

मैं आशा करता हूँ कि एमईएस परिवीक्षक मुझसे सहमत होंगे कि मुन्नार, केरल में पहाड़ों पर चढ़ाई करने से उन्हें न केवल पहाड़ो औरवनों की प्राकृतिक शोभा देखने को मिली बल्कि उन्हें नेतृत्व और समूह गतिकी को समझने का अवसर मिला है।

'गाँव का दौरा' भी समान रूप से महत्वपूर्ण रहा है। चूंकि इसने सीखने की नई संभावनाओं को खोल दिया है और आपको ग्रामीण भारत की अनोखी समस्याओं, अनुभूत आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी मिली होगी।

समाज के हाशिये पर मौजूद वर्गों की आवश्यकताओं को समझने के लिए, सुदूर क्षेत्रों में सेवाओं के वितरण का प्रत्यक्ष अनुभव आपको वापस जाकर बेहतर तरीके से योजना बनाने में सहायक होगा।

पिछले कुछ वर्षों से, मिलिट्री इंजीनियर सविसेज़ ने भारतीय सशस्त्र बलों, भारतीय आयुध निर्माणियों, डीआरडीओ और भारतीय तटरक्षक को उनके वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

तथापि, इंजीनियर का पेशा, विशेष रूप से मिलिट्री परिदृष्य में विलक्षण परिवर्तनों के दौर से गुजर रहा है। आप, इसीलिए भारतीय सशस्त्र बलों की परिवर्तनशील आवश्यकताओं के अनुसार पेशेवर प्रोफाइल को अद्यतित करना सुनिश्चित करें।

आपको भारत के अंदर और बाहर की बेहतरीन कार्यप्रणालियों, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों, को सीखना होगा और उत्कृष्ट परिणाम देने के लिए प्रक्रियाओं और प्रणालियों में सुधार लाने का प्रयास करना होगा।

तथापि, यह देखा गया है कि कई सारे अधिकारी अपना कार्य बिना किसी से परामर्श के करते हैं। इसीलिए यह सलाह देना उचित होगा कि वे एक-दूसरे के साथ सामंजस्य स्थापित कर, पूरक बनकर और सहायता प्रदान कर अपने विशिष्ट क्षेत्र के अनुभवों के साथ उच्च स्तर की उत्पादकता हासिल करने के लिए कार्य करें।

मात्र प्रणाली, प्रक्रियाओं और संगठनों की संरचना में परिवर्तन करने से ही परिणाम प्राप्त नहीं होंगे। आपको अपनी सोच और कार्यकलापों में तदनुरूप परिवर्तन लाने होंगे। वर्तमान में रक्षा अवसंरचना बड़े स्तर पर आधुनीकीकरण की ओर बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त, सशस्त्र बलों को उम्मीद है कि अवसंरचना विकास के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी को अपनाया जाएगा।

इसीलिए, अवसंरचना का किफायती और समय-बद्ध विकास समय की आवश्यकता है। इसके लिए एमईएस पेशेवरों को निरंतर अपने ज्ञान को अद्यतन बनाने और अग्रणी तकनीक के प्रयोग की आवश्यकता है। मैं परिवीक्षकों को यह कहना चाहूँगा कि वे सदैव उच्च स्तर की सत्यनिष्ठा, प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखें।

मैं इस अवसर पर डा. एमसीआर एचआरडी संस्थान को एमईएस परिवीक्षकों के लिए फाउंडेशन कोर्स आयोजित करने के लिए बधाई देना चाहूँगा।

धन्यवाद

जय हिंद!"