20 अगस्त, 2021 को बेंगलुरु स्थित एचएएल परिसर में हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड तथा एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु।

बेंगलुरु | अगस्त 20, 2021

“आज एचएएल परिवार में आकर मुझे खुशी हो रही है।
हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने गत 80 वर्षों में हमारे देश की सुरक्षा, संरक्षा और प्रौद्योगिकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एचएएल की प्रगति भारत में एरोनॉटिकल उद्योग की उन्नति का पर्याय रही है।
मैं यहाँ उपस्थित एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) के वैज्ञानिकों का अभिवादन करता हूँ। एडीए ने एलसीए तेजस का वह डिजाइन बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है, जिसका उत्पादन होते हुए अब हम एचएएल में देख रहे हैं। इस आधुनिक लड़ाकू विमान और स्वदेशी रूप से विकसित की गई उसकी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी ने आगामी वर्षों में लड़ाकू विमानों के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में मदद की है।
यह एचएएल में मेरा पहला दौरा है और मुझे आपसे ऐसे स्थान पर मिलकर बहुत खुशी हो रही है, जहाँ से भारतीय एरोनॉटिक्स को पंख मिले थे, और जहाँ से वह आगे नई उंचाइयों को छूने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आज बेंगलुरु को देश की विमानन राजधानी माना जाता है और उसे यह उपाधि इसलिए मिली है क्योंकि इन पहाड़ियों और घाटियों के आस-पास कुछ महान दूरदर्शी व्यक्ति भारतीय विमानन के अपने दृष्टिकोण को आकार और संरचना प्रदान करते हैं। मुझे एरोस्पेस और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की आत्मनिर्भरता में एचएएल के समृद्ध योगदान के इस समारोह में आप सभी से मिलकर बहुत खुशी हो रही है।
प्रिय बहनों और भाइयों,
आज भारत अत्याधुनिक स्पेस लांच वाहन, मिसाइलें, वायुयान और अन्य रक्षा उपकरणों का निर्माण करने में सक्षम है। विरोधाभास यह है कि हम अब भी विश्व के सबसे बड़े शस्त्र आयातकों में से एक हैं। इसमें बदलाव आना चाहिए और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास में और अधिक तेजी लायी जानी चाहिए।
आज हम जटिल भू-राजनीतिक वातावरण में सुरक्षा संबंधी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। हमारे सुरक्षाबल बहुत कठिन सुरक्षा वातावरण में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने सभी चुनौतियों का सामना अनुकरणीय पेशेवर रवैये, साहस और प्रतिबद्धता से किया है। यह सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है कि हमारे सशस्त्र बल किसी भी चुनौती का सामना करने तथा किसी भी सुरक्षा खतरे से मजबूती से निपटने के लिए पूरी तरह सुसज्जित हों। इसलिए, रक्षा और एरोस्पेस प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता समर्थ और सक्षम भारत का सृजन करने के लिए परम आवश्यक है।
सरकार ने आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत पहल और सुधार किये हैं। गत वर्ष रक्षा उत्पादन और निर्यात नीति का प्रारूप जारी किया गया था, जिसका लक्ष्य वर्ष 2025 तक एरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में 5 बिलियन यूएस डॉलर के निर्यात सहित 25 बिलियन यूएस डॉलर का टर्नओवर प्राप्त करना है। इस नीति में अनुसंधान और विकास, नवोन्मेष को पुरस्कृत करके और भारतीय आईपी के स्वामित्व का निर्माण करके रक्षा क्षेत्र में शीर्ष देशों के समूह में भारत को आगे बढ़ाने की रूपरेखा बनाई गई है।
निवेशों के प्रवाह को आसान बनाने के लिए सरकार ने स्वचालित मार्ग से रक्षा क्षेत्र में 74 प्रतिशत और सरकारी मार्ग से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया है। यह बात महत्वपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो रक्षा गलियारे स्थापित किये जा रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2020 में 101 मदों की सूची में 'पहली सकारात्मक स्वदेशी सूची' और इस वर्ष 108 मदों की 'दूसरी सकारात्मक स्वदेशी सूची' को अधिसूचित किया है, जिनके लिए आयात पर प्रतिबंध होगा। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को बड़ा अवसर उपलब्ध होगा।
प्रिय मित्रों,
भारतीय एरोस्पेस और रक्षा बाजार के 2030 तक 70 बिलियन यूएस डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो हमारे सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर सरकार द्वारा बल दिये जाने से प्रेरित हुआ है। यह सच है कि एरोस्पेस उद्योग में उच्च-स्तरीय जोखिम और लम्बे समय के लिए अधिक निवेश की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रक्रिया में उद्योग और शोधकर्ताओं के बीच सक्रिय भागीदारी के माध्यम से और तेजी लायी जानी चाहिए।
जैसा कि आप भली-भांति जानते हैं, भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है। केवल इसे शुरुआत में ही पहचानने और उसे भली-भांति संवारने की जरूरत है। आपको यह सुनिश्चित करना है कि देश के सर्वश्रेष्ठ और प्रतिभाशाली व्यक्ति एरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास में शामिल हो सकें। नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए ‘एयरोस्पेस हब’ के विकास हेतु शिक्षा क्षेत्र तथा उद्योग के बीच तालमेल बनाये जाने और इस मुख्य क्षेत्र में कुशलता की कमी के मुद्दे को सुलझाये जाने की जरूरत है।
नीति-निर्माताओं को जिस एक अन्य पहलू पर ध्यान देने की जरूरत है, वह सार्थक परिणामों के लिए रक्षा परियोजनाओं में निजी भागीदारों को शामिल किये जाने की आवश्यकता से संबंधित है। हमें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ उत्पादों के समतुल्य प्रतिस्पर्धी उत्पादों का निर्माण करने के लिए रणनीतिक साझेदारी, प्रौद्योगिकीय साझेदारी तथा टीमवर्क पर निर्भर होना होगा।
हाल ही में भारतीय वायुसेना ने 83 तेजस लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया है और मुझे बताया गया है कि इस खरीद में एचएएल के साथ एमएसएमई समेत लगभग 500 भारतीय कंपनियां काम करेंगी। यह एक सराहनीय पहल है, जिससे यह न केवल लागत-प्रभावी बन सकेगा बल्कि तय समय-सीमा में उत्पादन पूरा करने में भी इससे मदद मिलेगी। ऐसी बड़ी सहयोगपरक परियोजनाओं में भारतीय वायुयान विनिर्माण के परितंत्र को गतिशील आत्मनिर्भर प्रणाली में बदल पाने की क्षमता है। एचएएल इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और इसके लिए मैं आप सभी को बधाई देता हूँ।
मैंने अभी-अभी एलसीए तेजस के निर्माण केंद्र का दौरा किया है। मैं इस सुंदर एयरक्राफ्ट को देखकर बहुत उत्साहित हूँ, जो एडीए और एचएएल के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के वर्षों के समर्पित कठिन परिश्रम का परिणाम है। मुझे विश्वास है कि 4+ पीढ़ी का यह लडाकू विमान भारतीय वायुसेना की प्रचालनगत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक सक्षम प्लेटफार्म होगा।
मैंने पाया है कि एचएएल का हेलिकॉप्टर केंद्र भी बहुत प्रभावशाली है। आधुनिक लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव वर्तमान में भारतीय वायुसेना का मुख्य कार्यशील विमान है और मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि एचएएल ने एक ऐसा हल्का लडाकू विमान बनाया है जो अपने उत्पादन चरण में प्रवेश कर रहा है और एक हल्का यूटिलिटी हेलिकॉप्टर भी, जो पुराने हो रहे चीता/चेतक हेलिकॉप्टरों का स्थान लेगा।
मुझे जानकारी दी गई है कि अपने आरम्भ के बाद से एचएएल ने 4230 एयरक्राफ्टों का निर्माण किया है और 11,730 से अधिक एयरक्राफ्टों और हेलिकॉप्टरों की मरम्मत की है। वर्तमान में, भारतीय रक्षा सेवाओं में प्रयोग होने वाले कुल जहाजों के बेड़े में से एचएएल ने 61 प्रतिशत की आपूर्ति की है और सभी एयरक्राफ्टों/हेलिकॉप्टरों के 75 प्रतिशत का निर्माण करने में सहयोग दे रहा है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा में आपके अनन्य योगदान को दर्शाता है और मैं इसके लिए आप सभी की सराहना करता हूँ।
आज एचएएल के साथ-साथ एडीए, भारतीय वायुसेना के लिए एलसीए एमके2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) जैसे सक्षम एयरक्राफ्ट और भारतीय नौसेना के लिए ट्विन-इंजन डेक बेस्ड फाइटर (टीईडीबीएफ) का निर्माण कर रहा है। इन एयरक्राफ्टों के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत प्रौद्योगिकियां डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं और देश के अन्य वैज्ञानिक संस्थानों में विकसित की जा रही हैं। मुझे विश्वास है कि अगले दशक तक इन एयरक्राफ्टों के विकास से देश को अपनी लडाकू विमानों की जरूरतों के लिए अन्य देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
प्रिय बहनों और भाइयों,
आप मेरी इस बात से सहमत होंगे कि हमारे देश की वास्तविक शक्ति देश के काम आने के सर्वोच्च भाव से ही आएगी। कोविड-19 महामारी से हुए जीवन और आजीविकाओं के बड़े पैमाने पर नुकसान के बाद हमारी अर्थव्यवस्था को उच्च प्रगति के मार्ग पर पुन: लाये जाने की जरूरत है। हमें अपने औद्योगिक और विनिर्माण आधार का विकास करने के साथ ही भारत में नवोन्मेष की ताकत का प्रयोग करने की जरूरत है ताकि हम अपनी गम्भीर चुनौतियों के लिए नए समाधान ढूंढ़ सकें। हमारे आर्थिक विकास के एजेंडा को सामाजिक तथा आर्थिक रूप से अधिक समावेशी, क्षेत्रीय रूप से संतुलित तथा पर्यावरण की दृष्टि से अधिक टिकाऊ बनाये जाने की आवश्यकता है।
कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया में जन-जीवन को तबाह किया है और जीवन एवं अर्थव्यवस्था के सभी पक्षों को प्रभावित किया है। मुझे जानकारी दी गई है कि महामारी के दौरान एचएएल के लगभग 100 कर्मचारियों की मौत हुई है। यह आश्वस्त करने वाली बात है कि एचएएल के दिवंगत कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों की सहायता के लिए वित्तीय सहायता योजना शुरू की गई है। 'शेयर और केयर' का यह दृष्टिकोण हमारी पुरातन सभ्यता के मूल में निहित है।
जब मैं एचएएल की उपलब्धियां देखता हूँ तो मुझे इस बात पर भरोसा होता है आपमें अपनी उच्च विशेषज्ञता के क्षेत्र में विश्व नेता बनने के सभी गुण हैं। तथापि, मैं पुन: इस बात पर बल देकर कहूंगा कि उच्च-स्तरीय और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का विकास किये जाने की जरूरत है, जो इस वैश्विक और प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। मैं आपसे भारत सरकार की "मेक इन इंडिया" पहल में सहयोग देने के लिए नए उत्पादों और उत्पादों के संशोधित स्वरूपों का विकास करने का आह्वान करता हूँ।
स्वदेशी उत्पाद भारत को भविष्य की एरोस्पेस और रक्षा महाशक्ति बनने के लिए ऊंची छलांग लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हमें न केवल भारत को रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाने की आकांक्षा करनी चाहिए, बल्कि उसे अत्याधुनिक हथियार के निर्यात-केंद्र के रूप में उभरने में सहायता भी करनी चाहिए।
देश की अनेक डीआरडीओ प्रयोगशालाएं उत्पादन-सह-विकास भागीदार के रूप में एचएएल के साथ मिलकर एरोस्पेस प्रणालियों का विकास कर रही हैं। इनमें अत्याधुनिक राडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्रणालियां, मानवरहित एरियल प्लेटफॉर्म और अन्य हथियार शामिल हैं। मैं 'विनिर्माण का डिजिटलीकरण' की आसन्न आवश्यकता की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा, जिससे हमारे उत्पादों के विनिर्माण और संचालन के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे। आपको उद्योग 4.0 के लिए तैयार होना चाहिए और उसके अनुकूल बनना चाहिए, जैसा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3डी प्रिंटिंग और बिग डाटा के आगमन के मामले में हुआ।
मेरा विश्वास है कि उड्डयन क्षेत्र में वैश्विक निर्माता के रूप में लोकप्रिय होने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्राहक संतुष्टि बहुत महत्वपूर्ण है। ग्राहक की खुशी के लिए योजना बनाने से लेकर उत्पादन की सुपुर्दगी तक के सभी पक्षों को प्रमाणित प्रक्रियाओं और गुणवत्ता जांचों के द्वारा सुव्यवस्थित किया जाना चाहिए।
मैं अच्छे प्रदर्शन के लिए टीम एचएएल और एडीए की पुन: सराहना करता हूँ। मैं आपके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देता हूँ!
धन्यवाद!
जय हिंद!”