18 अगस्त, 2021 को बेंगलुरु में 'सर एम. विश्वेश्वरैया स्मृति पुरस्कार' समारोह के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

बेंगलुरू | अगस्त 18, 2021

“बहनों और & भाइयों!
भारत के एक महानतम सपूत, श्री एम. विश्वेश्वरय्या की स्मृति में आयोजित इस पुरस्कार समारोह में उपस्थित होना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है।
भारत रत्न, 'आधुनिक मैसूर के जनक' और प्रसिद्ध सिविल इंजीनियर, बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी श्री एम. विश्वेश्वरय्या एक नए आधुनिक भारत की क्षमताओं, आकांक्षाओं और प्रतिभा के प्रतीक थे। मैं इस अवसर पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने और हमारे देश के अग्रणी निर्माताओं में से एक के रूप में उनके द्वारा दी गई उत्कृष्ट सेवा को याद करने के लिए यहां उपस्थित होकर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।
एक प्रख्यात अभियंता के रूप में, श्री एम. विश्वेश्वरय्या को कई बड़ी उपलब्धियों के साथ-साथ मैसूर में कृष्णा सागर बांध, हैदराबाद में एक बाढ़ सुरक्षा प्रणाली की रूपरेखा तैयार करने और विशाखापत्तनम बंदरगाह को कटाव से बचाने के लिए काम करने जैसी कई प्रतिष्ठित परियोजनाओं की योजना बनाने और उनका कार्यान्वयन करने का श्रेय दिया जाता है। यह आश्चर्य की बात है कि नब्बे वर्ष की आयु में भी, उन्होंने डिजाइन करना और भारतीय नदियों पर बांध बनाने के लिए सरकारों को प्ररित करना जारी रखा। यह उनकी अभियंत्रिक प्रतिभा के प्रति एक श्रद्धांजलि है कि हम हर वर्ष उनकी जयंती को 'अभियंता दिवस के रूप में मनाते हैं।
मैसूर के मुख्य अभियंता के रूप में और बाद में मैसूर के दीवान के रूप में, श्री एम. विश्वेश्वरय्या एक महान दूरदर्शी और राजनीतिज्ञ रहे और उन्होंने भद्रावती में लौह एवं इस्पात संयंत्र, मैसूर सोप फैक्ट्री, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर जैसे कई ऐतिहासिक संस्थानों और परियोजनाओं की स्थापना की। उन्होंने मैसूर चैंबर ऑफ कॉमर्स नामक व्यापार निकाय की भी स्थापना की जो बाद में इस संस्थान फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के रुप में विकसित हुई।
अपने शुरुआती दिनों से ही, हम श्री एम. विश्वेश्वरय्या में नवाचार के लिए एक विशेष झुकाव और भारत के आधुनिकीकरण के लिए एक महान देशभक्तिपूर्ण उत्साह देखते हैं। वे विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रबल समर्थक थे और उन्होंने हमारी आजादी के पहले से ही भारत में औद्योगीकरण के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था। औद्योगीकरण के उद्देश्य का समर्थन करते हुए उन्होने कहा था और उनका यह कथन काफी प्रसिद्ध भी हुआ था "औद्योगिकीकरण लाओ या फिर मिट जाओ!"
मित्रों,
श्री एम. विश्वेश्वरय्या असाधारण प्रतिभा के धनी थे। यह उनके समय के दौरान मौजूद प्रणालियों की दक्षता में सुधार लाने के उनके कुशल प्रयासों में परिलक्षित होता है जिन्हें उन्होंने डिजाइन किया, नवप्रर्वतन किया और शानदार सफलता के साथ अन्यत्र दोहराया। मैं श्री एम. विश्वेश्वरय्या में निरंतर नवाचार की इस भावना पर बल देना चाहता हूं जो उन्हें अन्य लोगों से बेहतर बनाती है और उन्हें आधुनिक भारत का महान निर्माता-इंजीनियर बनाती है।
उनकी जिज्ञासु और नवोन्मेषी प्रवृत्ति का एक उदाहरण भारत में जल प्रबंधन से संबंधित उनके महत्वपूर्ण कार्य में झलकता है। जल संरक्षण के लिए अपने जुनून से प्रेरित होकर, श्री एम. विश्वेश्वरय्या ने स्वचालित वियर फ्लडगेट की प्रणाली, जिसे 1903 में पुणे के पास खडकवासला जलाशय में स्थापित किया गया था, को डिजाइन और पेटेंट कराया। इन फाटकों ने बांध को नुकसान पहुंचाए बिना जलाशय की भंडारण क्षमता में वृद्धि की। उनकी सफलता अन्यत्र - ग्वालियर के पास तिगरा बांध और मैसूर के पास कृष्ण राज सागर बांध में भी दोहराई गई। उन्होंने अदन (यमन), कोल्हापुर, इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, नागपुर, गोवा, राजकोट, भावनगर, बड़ौदा, सांगली और पूरे बिहार और ओडिशा में जल आपूर्ति प्रणालियों की संरचना तैयार की या उस पर अपनी पेशेवर सलाह दी । उनके योगदानों से पानी जैसे दुर्लभ प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण हुआ और सिंचाई तथा बिजली के लिए इसकी पूरी क्षमता का दोहन करने में हमे मदद मिली। ऐसा कहा जाता है कि श्री मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ने तिरुमाला मंदिर को जाने वाली पहली घाट रोड के निर्माण के दौरान अपनी जानकारी साझा की थी। जैसा कि श्री विश्वेश्वरय्या ने अपने विजन से स्पष्ट रूप से सिद्ध किया है कि एक व्यक्ति की प्रतिभा वास्तव में किसी राष्ट्र के भाग्य को बदल सकती है।
मित्रों,
यह वही उद्यमशीलता और नवोन्मेष की भावना है जिसकी हमें आज जरूरत है क्योंकि हम एक 'नए भारत' के निर्माण का प्रयास कर रहे हैं - 'रिफॉर्म, परफॉर्म एंड ट्रांसफॉर्म' के मंत्र को अमल में लाने और लोगों के जीवन तथा अर्थव्यवस्था की स्थिति को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए हमें अपने युवाओं में कम उम्र से ही नवाचार और रचनात्मकता की संस्कृति को बढ़ावा देना होगा। स्कूली शिक्षा को बच्चों को खोज की यात्रा पर ले जाना चाहिए। अटल टिंकरिंग लैब्स की तर्ज पर प्रायोगिक प्रयोगों के माध्यम से शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया के द्वारा उनमें बच्चों में जिज्ञासा को जागृत और पोषित करना होगा। कॉलेजों में नवाचार केंद्र होने चाहिएं जहां छात्र प्रोटोटाइप बनाकर अपने विचारों का परीक्षण कर सकें। इसी तरह, कंपनियों को भी अनुसंधान एवं विकास में अधिक निवेश करना चाहिए और अपने कर्मचारियों में नवाचार को प्रोत्साहित करना चाहिए।
 प्रिय बहनों और भाइयों,
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए वैश्विक सहयोग और कार्रवाई के संदर्भ में अगले कुछ वर्ष बहुत महत्वपूर्ण होंगे। इस संदर्भ में, हमें अपनी अर्थव्यवस्थाओं और जीवन शैली को अधिक टिकाऊ बनाने के तरीकों के बारे में सोचने की जरूरत है। श्रेष्ठ उपाय यह होना चाहिए कि सीमित संसाधनों के साथ और अधिक काम चलाया जाए और वह रास्ता अपनाया जाए जिसे 'सर्कुलर इकोनॉमी' कहा जाता है। जलवायु परिवर्तन और विकास के संदर्भ में, मेरा मानना है कि 'स्थिरता 'नवोन्मेष सधारणीयता की मांग है'।
हमें अविलम्बनीयता की भावना के साथ अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने और और संसाधनों को कम करने और उनका पुनर्चक्रण करने के लिए स्मार्ट तरीके अपनाने की जरूरत है। राष्ट्रीय नवप्रर्वतन प्रतिष्ठान, नीति आयोग जैसे संस्थान और अटल इनोवेशन मिशन और स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रम भारत में नवाचार की संस्कृति को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें अपनी मानवीय क्षमता जो वैश्विक मंच पर हमें सबसे अलग बनाती है, में निवेश करने की जरुरत है।
हमारे युवाओं को नवीनतम तकनीकों से परिचित कराने के लिए उनका कौशल उन्नयन करना समय की मांग है। कौशल विकास के क्षेत्र में सरकारी प्रयासों को उद्योगों की निजी पहलों का समर्थन मिलना आवश्यक है।
अंत में, मैं हमारे निजी क्षेत्र और एफकेसीसीआई जैसे औद्योगिक निकायों का आह्वान करता हूं कि वे नवाचारों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए जमीनी स्तर पर नवचारो की पहचान करके उन्हें प्रोत्साहन प्रदान करके उनका उद्भवन और अनुमापन करके उन्हे बढ़ावा देने के लिए इस राष्ट्रीय मिशन में शामिल हों। यह प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण है।
मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि नवाचार को प्रोत्साहित करने के ऐसे प्रयासों के परिणामस्वरूप, कर्नाटक ने जनवरी 2021 में नीति आयोग द्वारा जारी इंडिया इनोवेशन इंडेक्स 2020 में 'प्रमुख राज्यों' की श्रेणी में देश के सबसे नवोन्मेषी राज्य के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है। इस संबंध में, मैं राज्य सरकार, उद्योग जगत के नेताओं और इसमें शामिल सभी हितधारकों को बधाई देता हूं।
इसी तरह, मुझे यह जानकर भी खुशी हो रही है कि भारत में निवेश के वातावरण में पिछले कुछ वर्षों से सुधार हो रहा है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) द्वारा वार्षिक रूप से प्रकाशित वैश्विक नवोन्मेष सूचकांक (जीआईआई) में, भारत को पहली बार शीर्ष 50 देशों में शामिल करते हुए, 2020 में दुनिया के 48 वें सबसे नवोन्मेषी राष्ट्र का दर्जा दिया गया है। हमें निकट भविष्य में नवोन्मेष के लिए शीर्ष दस वैश्विक केंद्र में से एक बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।
बहनों और भाइयों,
हमारे लिए श्री विश्वेश्वरय्या के जीवन से सीखने और अनुकरण करने के लिए बहुत कुछ है। उनके विचार और उद्यमशीलता की भावना न केवल उनके समय में क्रांतिकारी थी, बल्कि वर्तमान संदर्भ में भी भारत के लिए बहुत प्रासंगिक हैं। यह वह अभियान है जो डीआरडीओ, इसरो और फार्मा उद्योग जैसे संगठनों में हमारे वैज्ञानिकों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने और अंतरिक्ष या वैक्सीन विकास जैसे उन्नत क्षेत्रों में नए मोर्चे तलाशने के लिए प्रेरित कर रहा है। एक राष्ट्र के रूप में, हमें नीतिगत और नैतिक समर्थन के माध्यम से उनके साथ खड़ा होना चाहिए।
मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि श्री एम. विश्वेश्वरय्या द्वारा स्थापित फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफकेसीसीआई) नवोन्मेष को प्रोत्साहित कर रहा है और 105 वर्षों से राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा दे रहा है। मैं न केवल व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने में, बल्कि छात्र समुदाय में उद्यमिता की भावना को विकसित करने के लिए 'मंथन' जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करने जैसे सामाजिक कार्यों में अहम भूमिका निभाने के लिए भी एफकेसीसीआई को बधाई देता हूं।
इस अवसर पर, मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि श्री एम विश्वेश्वरय्या की स्मृति में यह पुरस्कार एमएस रमैया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष डा. एम आर जयराम को शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, सामाजिक और परोपकारी क्रियाकलापों के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है। डा.एम आर जयराम ने अपने समर्पण और कड़ी मेहनत से अभियांत्रिकी, मेडिसिन, नर्सिंग, डेंटल, विधि और प्रबंधन सहित विभिन्न संस्थानों के साथ एम.एस. रमैया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस को एक सक्षम शैक्षिक केंद्र बनाया।
डा. एम आर जयराम के पिता स्वर्गीय श्री रमैया का जीवन अत्यंत प्रेरणादायी है- वे विकट परिस्थितियों के कारण अपनी शिक्षा छोड़ने के लिए मजबूर हुए परन्तु उन्होंने विपरीत परिस्थितियों को एक अवसर में बदल दिया और एक सफल उद्यमी बन गए। किसी व्यक्ति के जीवन को आकार देने में शिक्षा के महत्व के बारे में पूरी तरह से जागरूक होने के नाते उन्होंने 1962 में एम एस रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना की। इसके बाद, उन्होंने विभिन्न विषयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने वाले शैक्षणिक संस्थानों की एक श्रृंखला स्थापित की।
एक बार फिर मैं यह कहना चाहूंगा कि, मुझे आज एफकेसीसीआई द्वारा आयोजित श्री एम विश्वेश्वरैया स्मृति पुरस्कार समारोह में आप सभी के बीच उपस्थित होकर प्रसन्नता हो रही है।
कर्नाटक को व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में देश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य और निवेश के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए राज्य सरकार और एफकेसीसीआई द्वारा किए जा रहे प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं। एफकेसीसीआई के सभी पदाधिकारियों और कर्मचारियों को मेरी शुभकामनाएं।
आप सबको एक बार पुन: धन्यवाद।

जय हिन्द!”