18 अगस्त, 2020 को नई दिल्ली से एआरआईआईए -2020 (नवाचार उपलब्धियों पर संस्थानों की अटल रैंकिंग) के ऑनलाइन पुरस्कार समारोह में वर्चुअली संबोधित करते हुए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु।

नई दिल्ली | अगस्त 18, 2020

सबसे पहले मैं मंत्री जी, एमएचआरडी इनोवेशन सेल और एआईसीटीई को पिछले साल से एआरआईआईए रैंकिंग शुरू करने और इस साल हमारे सामान्य कामकाज में बड़े पैमाने पर व्यवधान के बावजूद इस पूरी कवायद के लिए बधाई देता हूं।

मैं इस लॉकडाउन अवधि के दौरान ऑनलाइन मोड में आयोजित दो विशेष हैकथॉन आइडियाथॉन और समाधन के बारे में भी अवगत हूँ।

प्रिय बहनों और भाइयों,

पिछले पांच वर्षों के दौरान, भारत ने नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। विश्व स्तर पर, ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स रैंकिंग में हम 2015 में 81 वें स्थान से आगे बढ़कर 2019 में 52 वें स्थान पर आ गए हैं।

यह वास्तव में बहुत संतोष की बात है कि हमारे पास आज दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र है।

यह देखकर खुशी होती है कि सरकार ने युवा छात्रों में नवाचार की भावना को विकसित करने के लिए कई पहल की हैं। कक्षा 6 से 12 के बीच 2 मिलियन से भी अधिक छात्र अटल इनोवेशन मिशन के तहत देश भर में स्थापित 5100 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स में काम कर रहे हैं।

नवाचार हमेशा से मानवीय प्रगति को निर्धारित करने का प्रमुख कारक रहा है।

मानवीय प्रयासों के विभिन्न क्षेत्रों में आविष्कारों, खोजों, रचनात्मक कला कार्यों, अनुपम वास्तुकला और प्रयोगों ने मानव जीवन को समृद्ध किया है।

पिंगला, आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त जैसे प्रसिद्ध गणितज्ञों द्वारा "शून्य" से लेकर दशमलव प्रणाली की खोज तक कम से कम 20 शताब्दियों के नवाचारों का भारत का अपना गौरवपूर्ण इतिहास रहा है।

एक समय था जब भारत को विश्व गुरु के रूप में जाना जाता था और दूर देशों के छात्र हमारे विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने आते थे। नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला और पुष्पगिरि शिक्षा के कुछ महान केंद्र थे।

हमें उस बौद्धिक नेतृत्व को पुनः प्राप्त करना होगा।

हमें एक बार फिर से अधिगम और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरना होगा।

हमें नए विचारों, प्रयोग के लिए जुनून, एक नया रास्ता बनाने की इच्छा से ओत प्रोत तेज तर्रार युवा आबादी का लाभ उठाना होगा।

ये हमारे अधिकांश कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवा ही हैं जो हमारे देश के भविष्य को परिभाषित करेंगे कि यह कैसा होगा।

ये युवा ही हैं जिन्हें प्रोत्साहन, सुविधा और मान्यता की आवश्यकता है। नए मोर्चों का पता लगाने के लिए उनका मार्गदर्शन करना चाहिए और स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।

हमारे शिक्षण संस्थानों, विशेष रूप से उच्च शिक्षण संस्थानों को नवाचार करने और फलने-फूलने के लिए रचनात्मक होने की इन नवीन परिस्थितियों को सृजित करने के लिए अपने आप को रूपांतरित करना चाहिए।

मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने इस पहलू पर गहन ध्यान केंद्रित किया है और कई सिफारिशें की हैं जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

इसने एक नई दृष्टि को रेखांकित किया है जो शिक्षण और अधिगम के साथ-साथ अनुसंधान की गुणवत्ता में काफी सुधार कर सकती है।रटंत विद्या से हटकर, यह नीति समझ, गहन सोच, विश्लेषण और ज्ञान की दुनिया के नए पहलुओं की खोज करने की खुशी पर बहुत जोर देती है।

यह रूढ़िवाद को तोड़ने और बहु-अनुशासनात्मक अधिगम के माध्यम से विभिन्न विषयों को जोड़ने का प्रयास करता है।

सूचना और साक्ष्य के बीच इस संबंध को स्थापित करना वास्तव में नवाचार के लिए महत्वपूर्ण है।

यह सवाल करने और जवाब मांगने की क्षमता ही है जो नवाचार की नींव में होती है। यह बालसुलभ जिज्ञासा है जो रचनात्मक आवेग को बलवती कर सकती है।

हमारे शैक्षिक पारितंत्र को अनुसंधान और अभिनव समस्या-समाधान की सहज भावना का लगातार पोषण करना चाहिए।

छात्रों को नवाचार करने के लिए इस अनुकूल वातावरण को बनाने में उत्कृष्टता को पहचाना नवाचार उपलब्धियों पर संस्थानों की अटल रैंकिंग एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रिय बहनों और भाइयों,

रैंकिंग संस्थान कतिपय प्रमुख मापदंडों पर आधारित एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से उन शैक्षिक मार्गदर्शकों को, जो इन संस्थानों का प्रबंधन कर रहे हैं और उन परिवर्तनकारी अनुदेशात्मक मार्गदर्शकों को, जो कक्षाओं में छात्रों को पढ़ाने के साथ-साथ अनुसंधान प्रक्रिया के माध्यम से मार्गदर्शन कर रहे हैं, के प्रयासों को सुवांछित मान्यता प्रदान करते हैं।

मैं इस अटल रैंकिंग को मापने के एक मापदंड 'इनोवेटिव लर्निंग मेथड्स एंड कोर्सेज' की सराहना करता हूं।

यह कक्षाओं और प्रयोगशालाओं, में से एक सराहना करता हूं कि और अधिगम अनुभव ही हैं जो हमारे देश के शैक्षिक परिदृश्य को बदल देंगे।

यह एक सपना है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अभिव्यक्त हुआ है।

इस सपने को सच करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षकों और शैक्षिक प्रबंधकों के पर है।

प्रिय बहनों और भाइयों,

इस महामारी की वजह से हम जिस मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, उससे कभी-कभी नवाचार को प्रोत्साहन दे सकते हैं और चुनौतियों को अवसरों में बदलने की हमारी क्षमता का प्रदर्शन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी ने आत्मानिर्भर भारत के आह्वान के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर बनाने का समयोचित दृष्टिकोण दिया है।

आत्मनिर्भरता के लिए हमें नवाचार करने, विकास संबंधी चुनौतियों के लिए कार्यान्वयन योग्य समाधान तलाशने और प्रयोग के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करने की आवश्यकता है।

भारतीय नवाचार और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को चलाने के लिए भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली एक प्रेरक और सशक्त भूमिका निभा सकती है और इसे यह भूमिका निभानी चाहिए।

विज्ञान, अनुसंधान और उत्कृष्टता को बढ़ावा देकर एक ज्ञानवान समाज बनाने पर अधिक जोर दिया जा रहा है। हमारे छात्रों के बीच नवोन्मेष और उद्यमशीलता की संस्कृति को विकसित करने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिएं, ताकि वे लीक से हटकर सोचने वाले, रचनात्मक रूप से समस्या का हल करने वाले, उद्यमी बन सकें और नौकरी की मांग करने के बजाय नौकरी सृजनकर्ता बन सकें। एक ओर जहां देश के युवाओं को विकास पथ पर और अधिक उत्सुकता के साथ अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया चाहिए वहीं हमारे वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं को नवाचारों और समाधानों को तलाशना चाहिए। उन्हें लोगों के जीवन को अधिक आरामदायक बनाने पर ध्यान देना चाहिए। विज्ञान का उपयोग कृषि को अधिक उत्पादक बनाने और किसानों की आय को अधिक से अधिक बढ़ाने के लिए भी किया जाना चाहिए।

मुझे खुशी है कि शिक्षा मंत्रालय ने नई शिक्षा नीति बनाने के साथ एक बड़ी छलांग लगाई है। हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों में एक नई दिशा की भावना जगाने और निरंतर गुणवत्ता सुधार की संस्कृति को स्थापित करने के लिए यह एक मजबूत ढांचे के रूप में काम कर सकता है।

नवाचार शिक्षा की धड़कन बननी चाहिए। उत्कृष्टता की खोज को कसौटी बनना चाहिए।

मैं नवाचार उपलब्धियों पर संस्थानों की अटल रैंकिंग (एआरआईआईए) के परिणाम घोषणा समारोह के अवसर पर उन सभी संस्थानों को बधाई देता हूं जिन्होंने शीर्ष सम्मान हासिल किया है। मैं आपसे उच्च मानक,जो आप पहले ही स्थापित कर चुके हैं, को बनाए रखने के लिए आग्रह करता हूँ। मैं चाहता हूँ कि अन्य सभी उच्च शिक्षण संस्थान भी इस रैंकिंग चलन में आगे बढ़ने के लिए अपना बलवती प्रयास करें। देश की विकास यात्रा को महत्वपूर्ण रूप से बदलने के लिए भारत को कई और उच्च मानकों वाले संस्थानों की आवश्यकता है।

हमें दुनिया में सर्वश्रेष्ठ से सीखने और सर्वश्रेष्ठ से बेहतर बनने का लक्ष्य रखना होगा।

मैं अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और मंत्रालय की इनोवेशन सेल को इस पहल की योजना बनाने और दो संस्करणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए बधाई देता हूं।

मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि इस द्वितीय संस्करण में पिछले वर्ष की तुलना में संस्थानों की भागीदारी में काफी वृद्धि हुई है।

मुझे उम्मीद है कि भारत के लब्ध प्रतिष्ठ प्रधानमंत्रियों में से एक के नाम पर एआरआईआईए रैंकिंग, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को 'अटल' रहने या विश्व स्तरीय संस्थान बनने की उनकी प्रतिबद्धता के प्रति दृढ़ रहने के लिए प्रेरित करेगी। ऐसे संस्थान जिनकी प्रमुख विशेषता उच्च गुणवत्तायुक्त अनुसंधान के स्तर को बनाए रखना और अनवरत नवाचार करते रहना होगी।

आप सभी को मेरी शुभकामनाएं।

धन्यवाद।

जय हिन्द!