17 दिसंबर, 2020 को कोयंबटूर में तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के 41वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

कोयम्बटूर | दिसम्बर 17, 2020

“मुझे कृषि अनुसंधान और शिक्षा में अपने योगदान के लिए व्यापक रूप से सराहे गए इस प्रसिद्ध कृषि विश्वविद्यालय के 41वें दीक्षांत समारोह में भाग लेते हुए अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है। मैं शिक्षा पूर्ण करने वाले उन सभी छात्रों को बधाई देता हूं जो इस उत्कृष्ट संस्था से विभिन्न डिग्रियां, पुरस्कार और प्रतिष्ठा प्राप्त कर रहे हैं।
मैं छात्रों का मार्गदर्शन करने और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सशक्त बनाने तथा उनमें सही दृष्टिकोण और मूल्यों को विकसित करने के लिए सभी शिक्षकों और अभिभावकों को बधाई देता हूं।
मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि इस संस्था के पूर्व छात्र प्रसिद्ध अनुसंधान संगठनों, नीति-निर्माण निकायों और सिविल सेवाओं में महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं।
कृषि हमेशा से ही न केवल हमारी अर्थव्यवस्था का, बल्कि हमारी संस्कृति और सभ्यता का भी अभिन्न अंग रही है। अत:, मेरे प्यारे मित्रो, आपने एक ऐसा व्यवसाय चुना है जो न केवल महत्वपूर्ण है, अपितु पवित्र भी है। वास्तव में, कृषि मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि मैं ऐसे क्षेत्र से आता हूं जो मुख्यत: चावल की खेती के लिए जाना जाता है।
हमारी 50 प्रतिशत से अधिक आबादी अभी भी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है, इसलिए यह क्षेत्र हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसलिए, लाखों लोगों के लिए भोजन और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कृषि को प्रत्येक जलवायु के अनुकूल, लाभदायक और फलप्रद बनाना समय की मांग है।
मेरे प्यारे छात्रों,
अभी हम एक महामारी के दौर से गुज़र रहे हैं, जिसने हमारे प्रत्येक कार्य को बाधित कर दिया है तथा भारत और दुनिया के बाकी हिस्सों को अभूतपूर्व तरीके से प्रभावित किया है। जबकि इस वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट आने का अनुमान है, मुझे विश्वास है कि 2021 में यह एक प्रभावशाली विकास दर के साथ वापस पटरी पर आएगी और सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था की स्थिति को फिर से हासिल करेगी।
इस महामारी की अवधि में जब अन्य सभी क्षेत्र मंदी का सामना कर रहे हैं, अकेले कृषि क्षेत्र ने अच्छा प्रदर्शन किया है और अर्थव्यवस्था को अत्यावश्यक संबल प्रदान किया है। वास्तव में, खरीफ फसलों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र पर कोविड-19 का कोई प्रभाव नहीं हुआ। खेती का रकबा बढ़ा है - पिछले साल की तुलना में खरीफ फसलों के तहत लगभग 59 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र जुड़ा है। भारत सरकार द्वारा बीज, कीटनाशक, उर्वरक, मशीनरी और ऋण जैसे इनपुट के संबंध में समय पर पूर्व-निर्धारण ने लॉकडाउन की स्थिति के दौरान इस बड़ी कवरेज को संभव बनाया।
कोविड-19 संकट के बावजूद खाद्यान्न उत्पादन 2019-20 के खरीफ मौसम के दौरान 143.38 मिलियन टन की तुलना में 2020-21 खरीफ मौसम में 144.52 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर आंका गया है। मैं अत्यंत कठिन समय के दौरान भी अदम्य जोश और समर्पण प्रदर्शित करने के लिए किसानों का अभिवादन करता हूं।
प्रिय बहनों और भाइयों,
कृषि क्षेत्र की वृद्धि को अब बढ़ती जनसंख्या, सिकुड़ती कृषि भूमि, भूमि अवक्रमण, शहरीकरण के विस्तार, उपभोग परिपाटी में बदलाव, जलवायु परिवर्तन, वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता, कमजोर बाजार संपर्कों तथा अप्रभावी आपूर्ति श्रृंखला और खाद्यान्नों की अत्यधिक बर्बादी जैसे कई परिवर्तनकारी परिवर्तनों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
यह चिंता का विषय है कि जल-स्तर नीचे जा रहा है और सिंचाई के स्रोत तेजी से प्रदूषित हो रहे हैं, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि एक बड़ी चुनौती बन गई है, विशेषत: तमिलनाडु जैसे जल-संकट वाले राज्य में। इसके लिए सूखे का सामना करने में सक्षम जीनोटाइप और जल को बचाने वाली प्रौद्योगिकियों को विकसित करने हेतु प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
मैं समझता हूं कि तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय ने जैविक और अजैविक तनाव प्रतिरोध के लिए पारंपरिक और जैव-प्रौद्योगिकीय साधनों का उपयोग करके व्यवस्थित जीनोटाइप विकसित करने के क्षेत्र में एक पहचान बनाई है। मैं चाहूंगा कि आप इस क्षेत्र में शोध को और तेज करें। अंतर्निर्मित प्रतिरोधी क्षमता वाली फसल की किस्म जलवायु संबंधी कई समस्याओं से बच सकती है।
इस संदर्भ में, जल शक्ति मंत्रालय से वर्ष 2019 के लिए 'बेस्ट स्टेट अवार्ड फॉर वॉटर मैनेजमेंट' प्राप्त करने के लिए तमिलनाडु की सराहना करनी होगी, जिसे मैंने 11 नवंबर 2020 को राज्य को प्रदान किया है। पिछले अनेक वर्षों के दौरान कृषि और संबद्ध गतिविधियों में तमिलनाडु राज्य का प्रदर्शन केवल उत्पादन के मामले में ही नहीं, बल्कि नई उच्च उपज देने वाली किस्मों और प्रौद्योगिकियों को अपनाने के मामले में भी अनुकरणीय है, जिसके परिणामस्वरूप सर्वाधिक उत्पादन हुआ है।
प्रिय छात्रो,
अगले कुछ दशकों में जलवायु परिवर्तन का सीधा असर कृषि और खाद्य प्रणालियों पर पड़ेगा। यह स्थिति जलवायु का सामना करने में सक्षम फसलों/किस्मों के विकास की मांग करती है जो सूखे, बाढ़, जलमग्नता, गर्मी, ठंड, लवणता, जीव-कीट और बीमारियों जैसे व्यापक तनावों का सामना कर सके।
इस कारण से, भारतीय कृषि का लचीलापन बढ़ाने के किसी भी प्रयास का उद्देश्य जलवायु की अस्थिरता के अनुकूल तनाव प्रतिरोधी किस्मों और अन्य प्रबंधन प्रथाओं को विकसित करना होना चाहिए। ऐसी प्रौद्योगिकी और तरीके, जो छोटे और सीमांत किसानों की अरक्षितता को कम कर सकते हैं, सतत कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।
सामान्य रूप से जीनोम एडिटिंग, और विशेष रूप से सीआरआईएसपीआर-सीएएस9 ऐसे क्रांतिकारी उपाय हैं जो आने वाले दिनों में विज्ञान, खाद्य उत्पादन और समाज को प्रभावित कर सकते हैं। इस प्रौद्योगिकी में पौधों को जैविक और अजैविक तनावों के प्रति सहिष्णु बनाकर और उनके पोषण मूल्य और उपज में सुधार करके कृषि को बदलने की काफी संभावना है।
मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि इस विश्वविद्यालय ने त्वरित फसल सुधार के लिए पहले से ही इस प्रौद्योगिकी का उपयोग करना शुरू कर दिया है। उदाहरण के लिए, इसका उपयोग अन्य के साथ-साथ चावल में बीटा-कैरोटीन और सुगंध बढ़ाने, लवणता के लिए प्रतिरोध प्रदान करने और शाकनाशी सहिष्णुता के लिए किया जाता है।
कृषि के आधुनिकीकरण और व्यवसायीकरण के लिए कृषि का मशीनीकरण अत्यन्त महत्वपूर्ण है। बेहतर उपकरणों के उपयोग से उत्पादकता को 30 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है और खेती की लागत को 20 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। आवश्यकता-आधारित मशीनरी के विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
मुझे यह जानकर खुशी हुई कि तमिलनाडु धान की मशीन से रोपाई और कस्टम हायरिंग सेंटरों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए सहायता दे रहा है। इस परिस्थिति में मैं यह भी कहना चाहूंगा कि प्रकाश, बाड़ लगाने और फसल को सुखाने जैसे विविध फील्ड प्रचालनों के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करना समय की मांग है।
नैनो-प्रौद्योगिकी एक उभरता हुआ नया क्षेत्र है। कृषि में आने वाली कुछेक समस्याओं से निपटने में इसका लाभ उठाया जा सकता है। 2010 की शुरुआत में ही कृषि अनुसंधान के लिए एक समर्पित नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित करके इस क्षेत्र में अग्रणी बनने के लिए मैं तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय की सराहना करता हूं।
मुझे बताया गया है कि इस केंद्र ने अन्य के साथ-साथ नमी, पोषक तत्वों की कमी और कीटनाशक अवशेषों तथा नैनो-कृषि आदानों की ऑन-साइट पहचान के लिए नैनो-डायग्नोस्टिक्स को विकसित किया है।
प्रिय बहनो और भाइयो,
हाल के वर्षों में भारत सरकार ने कृषि के पनरूद्धार के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें एक मौलिक बदलाव आया है और किसानों की आय को दोगुना करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। भारत के 72 प्रतिशत से अधिक किसानों को लाभान्वित करने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) का हालिया कार्यान्वयन भी एक वरदान है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदान की जाने वाली सब्सिडी के साथ इस सहायता से किसानों के लिए आर्थिक लाभ पर गुणात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए हमें उत्पादकता में सुधार करने, संसाधनों का कुशलता से उपयोग करने, फसल की तीव्रता बढ़ाने और उच्च मूल्य वाली फसलों का उत्पादन करके फसलों मंर विविधता लाने का प्रयास करना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए कि किसानों को बेहतर भंडारण और प्रसंस्करण और कृषि आदानों, वित्तपोषण और उपज की बिक्री के लिए कुशल बाजार तंत्र के माध्यम से लाभकारी प्राप्त हो। साथ ही, पर्यावरण की रक्षा करना और आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और हरित ग्रह प्रदान करना हमारा पवित्र कर्तव्य है।
इस प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालय के स्नातकों के रूप में, मैं आप में से प्रत्येक का आह्वान करता हूं कि प्रौद्योगिकी-आधारित सतत कृषि विकास का नेतृत्व करें, किसानों की बेहतर आय प्राप्त करने में सहायता करें सके और हमारे देश के लाखों लोगों को खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित कराएं। आपका शोध समाज के लिए प्रासंगिक होना चाहिए और उसमें जलवायु परिवर्तन से लेकर स्वास्थ्य मुद्दों तक मानव जाति के सामने आने वाली विभिन्न समस्याओं के समाधान खोजने पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए।
हमें कोविड-19 के प्रभाव से अपने जोश और भविष्य के प्रति अपने विचारों को कमज़ोर नहीं होने देना चाहिए। आप एक ऐसी दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं जो अधिक चुनौतीपूर्ण है, इसलिए परिवर्तनों को गले लगाने के लिए तैयार रहें, चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करें और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाएं। आपको नवाचार, रचनात्मकता और करुणा के साथ एक बेहतर दुनिया बनाने की जिम्मेदारियों को निभाना होगा।
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय ने अपने 100 से अधिक वर्षों के अस्तित्व में अत्यधिक प्रतिष्ठा अर्जित की है। मुझे विश्वास है कि विश्वविद्यालय उत्कृष्टता के लिए अपनी खोज जारी रखेगा और आने वाले वर्षों में कई और ऊंचाइयों को हासिल करेगा। आप सभी को मेरी शुभकामनाएं!
मित्रो, अपनी बात समाप्त करते हुए मैं चाहूंगा कि देश के युवा भावी पीढ़ी के बारे में सोचें और यह सुनिश्चित करें कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को एक सुंदर, भरपूर, हरा-भरा और रहने योग्य ग्रह मिले।
जय हिन्द!”