17 दिसंबर, 2019 को उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में बांग्लादेश से आए प्रशिक्षु-राजनयिकों को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का संबोधन

नई दिल्ली | दिसम्बर 17, 2019

“बांग्लादेश विदेश सेवा अकादमी के रेक्टर और महानिदेशक की अगुवाई में बांग्लादेश के राजनयिक प्रशिक्षणार्थियों के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करना हर्ष का विषय है।

बांग्लादेश हमारे लिए विशेष है। इसलिए, आपकी भारत यात्रा भी विशेष है।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि एफएसआई द्वारा राजनयिक प्रशिक्षुओं के लिए संचालित किया जाने वाला यह चौथा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम है। मुझे नवंबर 2018 में उपराष्ट्रपति भवन में प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों के पूर्व बैच का दौरा स्मरण है।

मुझे पता है कि आपका भारत में दो सप्ताह का व्यस्त कार्यक्रम है। दूसरे सप्ताह में एफएसआई सत्र आपको भारत की विदेश नीति का संक्षिप्त परिचय देंगे।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि भारत की राजनीतिक व्यवस्था, सांस्कृतिक कूटनीति और सॉफ्ट पॉवर प्रकल्पन के अलावा आपने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल से भी मुलाकात की और राष्ट्रपति भवन, भारत निर्वाचन आयोग, शांति निकेतन, विश्व भारती, एलिफेंटा की गुफाओं, नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट, एग्ज़िम बैंक और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का दौरा किया।

मुझे यह भी बताया गया है कि आपकी भारत यात्रा में, एफएसआई द्वारा अन्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के विपरीत, पांच शहर शामिल होंगे जो पुनः भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों के अनूठे स्वरूप के अनुरूप है।

मुझे यकीन है कि आप भारत की गहन समझ के साथ बांग्लादेश लौटेंगे।

मेरे प्यारे युवा दोस्तों,

भारत बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सर्वाधिक महत्व देता है। हमारा सदैव यह मानना हैं कि मजबूत, स्थिर और समृद्ध बांग्लादेश भारत के हित में है और हम 2041 तक एक विकसित देश बनने की आपकी प्रगति की यात्रा में भागीदार बनना चाहते हैं।

हम एक आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष, समृद्ध, संप्रभु राज्य के रूप में बांग्लादेश के साथ 1971 की भावना को ध्यान में रखते हुए और विकसित बांग्लादेश के लिए बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और प्रधानमंत्री शेख हसीना के दृष्टिकोण के अनुरूप खड़े होने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।

यह बहुत सराहनीय है कि बांग्लादेश ने पिछले एक दशक में 6 प्रतिशत की स्थिर विकास दर बनाए रखी है और गरीबी दर भी आधी रह गई है। आज, बांग्लादेश के आर्थिक विकास को एक सफलता की गाथा माना जाता है।

भारत पूरे क्षेत्र के लोगों की सामूहिक समृद्धि के लिए दोस्ती, विश्वास और समझ के आधार पर बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। हम बांग्लादेश के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं के पूर्ण समर्थक हैं।

भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंध अब दिन-प्रतिदिन और सुदृढ़ हो रहे हैं।

हमारे प्रधान मंत्री श्री मोदी ने इसे हमारे द्विपक्षीय संबंधों में 'सोनाली अध्याय' के रूप में उपयुक्त तौर पर वर्णित किया है।

हम भू-सीमा और समुद्री सीमा के मुद्दे सहित कुछ बकाया मुद्दों को मिलकर हल करने में सफल रहे हैं। आज, भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों को अच्छे पड़ोसी संबंधों का आदर्श माना जाता है।

बांग्लादेश भारत का प्राकृतिक सहयोगी और लंबे समय से भरोसेमंद दोस्त है। भारत दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

जहां तक नागरिकता संशोधन अधिनियम का संबंध है, भारत सरकार ने उच्चतम स्तर पर स्पष्ट किया है कि यह धार्मिक रूप से प्रताड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए है न कि किसी भारतीय की नागरिकता छीनने के लिए। यह किसी भी धर्म के भारतीय नागरिकों की नागरिकता को प्रभावित नहीं करता है।

भारत और बांग्लादेश संयुक्त रूप से बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को अत्यधिक समृद्ध बना सकते हैं। हमें इस उप-क्षेत्र में मौजूद अवसरों का पूरी तरह से दोहन करने के लिए बिकेसटेक में सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है।

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच लगातार विचार-विमर्श हमारे द्विपक्षीय संबंधों की गहनता को दर्शाता है। अक्टूबर 2019 में प्रधान मंत्री शेख हसीना की हाल ही की भारत यात्रा के दौरान प्रधान मंत्री मोदी के साथ उनकी चर्चाओं ने हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ावा दिया है।

भारत और बांग्लादेश के बीच आज एक मजबूत और जीवंत साझेदारी है। पिछले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच विशेष रूप से अंतरिक्ष, असैन्य परमाणु ऊर्जा, साइबर सुरक्षा और आईटी सहित उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में लगभग 100 समझौतों/समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं यह तथ्य हमारे संबंधों के विस्तार और मजबूत होने का प्रमाण है।

भारत बांग्लादेश का एक प्रतिबद्ध विकास भागीदार है और हमने विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पिछले 7 वर्षों में बांग्लादेश को 8 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक की ऋण सहायता प्रदान की है।

यह भारत द्वारा किसी भी एक देश को प्रदान की गई सर्वाधिक ऋण सहायता राशि है।

हमने रेल, सड़क, वायु और जलमार्ग द्वारा संपर्क बढ़ाने में काफी प्रगति की है। इस संबंध में प्रधान मंत्री हसीना का 1965 से पूर्व के संपर्क बहाल करने का सपना हमारे लिए एक मार्गदर्शक कारक रहा है।

हमने अपनी वीजा नीति को बहुत उदार बनाया है और लंबी अवधि के बहु प्रवेश वीजा अब मानक हैं। वरिष्ठ नागरिकों, सभी मुक्तियोद्धाओं और पात्र व्यावसायिक व्यक्तियों को पांच-वर्षीय बहु प्रवेश वीजा दिए जा रहे हैं।

हम अगले वर्ष बांग्लादेश में 'मुजीब बारशो ’(बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी) के उत्सव में भाग लेने के लिए उत्सुक हैं।

मैं अप्रैल 2017 में प्रधान मंत्री हसीना और मार्च 2018 में बांग्लादेश के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त की गई भावनाओं को पुनः दोहराना चाहता हूँ कि भारत सरकार तीस्ता समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध और सतत तौर पर प्रयासरत है।

भारत म्यांमार के राखीन राज्य से लाखों विस्थापितों के आगम से बांग्लादेश पर पड़ने वाले अत्यधिक भार से पूरी तरह अवगत है।

भारत इन विस्थापितों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाने के लिए बांग्लादेश की अत्यधिक सराहना करता है।

भारत विस्थापित लोगों की सुरक्षित और स्थायी म्यांमार वापसी सुनिश्चित कर इस संकट के समाधान के लिए म्यांमार पर द्विपक्षीय रूप से प्रभाव डाल रहा है। भारत कम लागत वाले घरों के निर्माण के माध्यम से राखीन राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए भी सहायता प्रदान कर रहा है, जो बांग्लादेश से विस्थापितों की वापसी को सुकर बनाएगा।

हम आशा व्यक्त करते हैं कि सितंबर 2017, अप्रैल 2018, सितंबर 2018 और दिसंबर 2018 में बांग्लादेश सरकार को भेजी गई राहत की चार खेप बड़ी संख्या में रह रहे विस्थापित रोहिंग्याओं की कुछ आवश्यकताओं को पूरा करने में उपयोगी रही होंगी।

हम टेंट, सिलाई मशीन आदि सहित राहत और बचाव सामग्री की पांचवीं खेप भी भेजने वाले हैं।

शरणार्थियों के आगम से उत्पन्न इस भारी चुनौती से निपटने के लिए हमारी मानवीय सहायता एकबारगी नहीं है, बल्कि बांग्लादेश की सहायता के लिए एक निरंतर प्रयास है।

आप विस्थापित रोहिंग्याओं के प्रत्यावर्तन में म्यांमार के साथ अपने द्विपक्षीय प्रयासों के प्रति हमारे पूर्ण समर्थन पर विश्वास कर सकते हैं।

मेरे प्रिय मित्रों,

जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत एक प्रभावशाली विकास गाथा लिख रहा है। हमारी आर्थिक स्थिरता सुदृढ़ बुनियादी और लचीले संस्थानों द्वारा प्रबलित है और अपने सबसे उत्साही स्तर पर है। एक समाज के रूप में, हम उन सामाजिक बुराइयों की बेड़ियों को तोड़ रहे हैं जो हमारी प्रगति में बाधक हैं।

हमारे पास एक अद्भुत युवा आबादी है जो एक विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश की स्थिति प्रदान करती है। हम अपने कानूनों में सुधार कर रहे हैं और व्यापार सुगमता में अत्यधिक सुधार कर रहे हैं।

दुनिया भर में भारत के बारे में विश्वास और आशावाद बढ़ रहा है। हमारा मानना है कि हमारे पड़ोस में शांति और स्थिरता समावेशी और सतत विकास के हमारे एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए एक अनिवार्य पूर्व शर्त है। हमने सदैव हमारी सभ्यता के मुख्य मंत्रों में से एक 'लोका: समसता: सुखिनो भवन्तु’ में संपुटित 'वसुधैव कुटुम्बकम ’के सिद्धांतों का पालन किया है ।

हमारा मानना है कि प्रगति और समृद्धि तभी सार्थक होती है जब इसे साझा किया जाता है, हमारे दोस्तों के साथ साझा किया जाता है, हमारे पड़ोसियों के साथ साझा किया जाता है।

हमें विश्वास है कि समावेशी और सतत विकास की चाह में बांग्लादेश हमारा साथ देगा।

हमें यह समझना चाहिए कि दुनिया अब बहु-ध्रुवीय है।

यह समय की मांग है कि हम अपने बहुपक्षीय संगठनों, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र का इस नई वैश्विक वास्तविकता को प्रतिबिंबित करने के लिए पुनर्गठन और सुधार करें।

हम इन अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सुधार के एजेंडा को आगे बढाने के लिए अपने पड़ोसियों के सुदृढ़ समर्थन की आशा करते हैं ताकि पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाली नीतियां कुछ देशों द्वारा तय न की जाएं।

मेरे प्यारे युवा दोस्तों,

मैं उपराष्ट्रपति भवन में एक बार पुनः आपका स्वागत करता हूं और एक लंबे और शानदार करियर के लिए आप सभी को शुभकामनाएं देता हूँ ।

मुझे उम्मीद है कि प्रभावी कूटनीति के माध्यम से आप दुनिया को विभाजित करने वाली संकीर्ण दीवारों को तोड़ देंगे और उनके स्थान पर लोगों को जोड़ने वाले पुलों का निर्माण करेंगे।

धन्यवाद!

जय हिन्द!"