16 अगस्त, 2021 को बेंगलुरु में जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) के छात्रों और वैज्ञानिकों को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का संबोधन

बेंगलुरु | अगस्त 16, 2021

“आज सुबह स्वयं को आप सभी के साथ पाकर और देश के कुछ प्रख्यात वैज्ञानिकों और युवा शोधकर्ताओं के साथ बातचीत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। मुझे इस संस्थान के "नवाचार और विकास केंद्र" की आधारशिला रखते हुए भी प्रसन्नता हो रही है, जो संस्थान की वैज्ञानिक सफलताओं को प्रदर्शित करेगा।
अंतर्विषयक विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान के क्षेत्रों में इस संस्थान द्वारा की गई व्यापक प्रगति और प्रभावशाली उपलब्धियों को देखकर मुझे खुशी हो रही है। 30 वर्षों की अवधि में, इसने एक उत्कृष्ट प्रकाशन रिकॉर्ड के साथ खुद को एक प्रमुख वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र के रूप में स्थापित किया है। मुझे बताया गया है कि इस संस्थान के कई पूर्व छात्र शिक्षा और उद्योग में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं।
मुझे पता है कि इस संस्थान जो एक स्वायत्त संस्थान और एक सम विश्वविद्यालय है, का मुख्य फोकस पीएच.डी. और एम.एससी के छात्र पैदा करना है। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि एनआईआरएफ रैंकिंग में 2017 के लिए इसे विश्वविद्यालयों में चौथा और संपूर्ण श्रेणी में 11वां स्थान मिला। 
मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इस केंद्र के शोध ने वैश्विक स्तर पर ध्यानाकर्षित किया है और इसे देश और विदेशों में प्रतिष्ठित एसोशिएसनों को दिए गए पेटेंट और अध्येतावृत्ति दोनों के रूप में मान्यता मिली है।
मेरा दृढ़ विश्वास है कि किसी भी संस्थान द्वारा किया गया शोध समाज के लिए प्रासंगिक होना चाहिए-चाहे वह अकादमिक हो या औद्योगिक। इस संदर्भ में, मूलभूत शोध महत्वपूर्ण हो जाता है और मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि इस संस्थान ने 300 से अधिक पेटेंट्स तैयार किए हैं और स्वदेशी आविष्कारों के आधार पर कुछ स्टार्टअप्स की स्थापना को बढ़ावा दिया है।
यह देखकर खुशी हो रही है कि प्रो. सी एन आर राव, जिन्हें अक्षय ऊर्जा स्रोतों एवं भंडारण में अनुसंधान के लिए प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय एनी पुरस्कार, 2020 के लिए नामांकित किया गया था, इस केंद्र में अनुसंधान कार्य जारी रख रहे हैं। मुझे विश्वास है कि वे अब से कुछ महीनों में इटली के राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करेंगे। बधाई प्रो. राव! आप न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित कर रहे हैं।
मुझे यह जानकर खुशी हुई कि इस केंद्र ने अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ एक नेटवर्क बनाया है और विश्वभर के वैज्ञानिकों के साथ अकादमिक संबंध स्थापित किए हैं। दुनिया भर के वैज्ञानिकों के साथ विचारों के आदान-प्रदान और बातचीत से बौद्धिक वातावरण स्वाभाविक रूप से मजबूत हो जाएगा। थर्ड वर्ल्ड अकेडमी ऑफ साईंस के क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना भी इस केंद्र के लिए एक उपलब्धि है।
हालांकि यह संस्थान विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी शोध करने के लिए जाना जाता है, मैं यहां के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को संश्लेषित जीव विज्ञान, अभिकलनात्मक जीव विज्ञान, उच्च निष्पादनकारी इंजीनियरिंग सामग्री जैसे विज्ञान तथा आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस के नए उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान करने का सुझाव देना चाहता हूं।
यदि हम वैश्विक परिदृश्य के बारे में बात करें, तो मैंने पाया है कि इस संस्थान ने अपने विशेषज्ञता के क्षेत्रों में शीर्ष संस्थानों में खुद को स्थापित कर अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रभाव डाला है। मुझे उम्मीद है कि यह अपनी इस स्थिति को बनाए रखेगा और उत्कृष्टता के लिए अपनी खोज को जारी रखेगा जो इसे विश्व के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से एक बना देगा।
प्रत्येक वैज्ञानिक को लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए उत्कृष्टता और नवाचार करने का प्रयास करना चाहिए। दूसरे शब्दों में, वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन से लेकर कृषि, स्वास्थ्य और चिकित्सा आदि तक मानव जाति के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों का समाधान करने के लिए अभिनव तरीके अपनाने चाहिएं।
यह प्रमुख संस्थान, जो आईआईएससी, आईआईटी और आईआईएसईआर जैसे प्रतिष्ठित संगठनों की श्रेणी में शामिल है, देश में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने और शोध नतीजों में सुधार करने के लिए अत्यधिक योगदान दे सकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 यह सुनिश्चित करेगी कि छात्रों की सभी क्षेत्रों में नई शिक्षण और अधिगम की युक्तियों तक पहुंच हो। इससे उपयुक्त शैक्षिक वातावरण तैयार होगा और उनके ज्ञान का आधार समृद्ध होगा और साथ ही उनके कौशल में भी निखार आएगा। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में देश भर में कई नए आईआईटी, आईआईएम, केंद्रीय विश्वविद्यालय और कौशल विकास केंद्र स्थापित किए गये हैं।
मुझे पता चला है कि भारत सरकार का विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी)के अनुसंधान एवं विकास संस्थानों को इसके अधीन लाते हुए एक राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव है। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि यह संस्थान इस संबंध में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
मेरे प्यारे छात्रों,
मुझे कहना होगा, आप सौभाग्यशाली हैं कि आप यहां अध्ययन और प्रख्यात वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में आधुनिक अग्रणी विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर शोध कर रहें हैं। साथ ही, इस प्रकार का शांत वातावरण छात्रों को उनके चुने हुए क्षेत्र में शोध करने के लिए उपयुक्त परिवेश प्रदान करता है।
विज्ञान किसी भी देश की प्रगति और तकनीकी उन्नति का आधार है। भारत एक युवा आबादी के साथ एक विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश से विशिष्ट रूप से धन्य है।
समय की मांग है कि कम उम्र से ही वैज्ञानिक सोच को विकसित किया जाए और विश्व स्तर के वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा दिया जाए जो सामाजिक समस्याओं का समाधान करता हो।
प्रिय छात्रों,
आपने एक रोमांचक करियर की शुरुआत की है और आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए।
कृपया याद रखें कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। आपको हमेशा अपनी पूर्ण क्षमता का उपयोग करने का प्रयास करना चाहिए और कभी भी यथास्थिति से संतुष्ट या आत्मसंतुष्ट नहीं रहना चाहिए।
आप उन विशिष्ट छात्रों में से हैं जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। आपको प्राप्त हुए अवसर का इष्टमत उपयोग करना चाहिए और चमकीले तारों की तरह जगमगाना चाहिए। इस केंद्र से प्राप्त ज्ञान और अनुभव के साथ, मुझे विश्वास है कि आप राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
मैं संकाय सदस्यों से यह भी आग्रह करूंगा कि छात्रों द्वारा अध्ययन, अन्वेषण और अनुसंधान करने के लिए एक अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करें।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि यह केंद्र पिछले दो दशकों से विज्ञान प्रसार कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। मुझे बताया गया है कि इन प्रसार कार्यक्रमों से न केवल कर्नाटक, बल्कि उत्तराखंड तक के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के सैकड़ों छात्र और शिक्षक लाभान्वित हुए हैं। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि महामारी के दौरान ये कार्यक्रम ऑनलाइन तरीके से आयोजित किए गए थे।
मैं कोविड-19 महामारी की स्थिति के संबंध में किए गए कार्यों और "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम के अनुरूप स्वदेशी गतिविधियों पर कुछ स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए उपायों के लिए संस्थान को बधाई देना चाहता हूं।
मुझे यह जानकर भी खुशी हो रही है कि " नवाचार एवं विकास" केंद्र (आई एंड डी) उद्भन तथा मूलभूत शोध को बढ़ावा देने के लिए इन-हाउस आविष्कारों के साथ शुरू की गई स्टार्ट-अप कंपनियों की मेजबानी करेगा।
मैं एक बार फिर प्रोफेसर सीएनआर राव को उनके शोध और प्रेरणादायक वैज्ञानिक व्याख्यानों के माध्यम से देश भर के युवा दिमागों को प्रज्वलित करने के लिए बधाई देना चाहता हूं।
सभी संकाय सदस्यों और छात्रों को मेरी शुभकामनाएं!
जय हिन्द!”