16 अक्तूबर, 2017 से चेन्नई में आयोजित मगुदम पुरस्कार, 2017 वितरण के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया अभिभाषण

चेन्नई | अक्टूबर 16, 2017

इस महती समारोह में उपस्थित मेरे सम्मानित मित्रों, आपको नमस्कार। आज हम यहाँ भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में तमिलनाडु के सर्वोत्तम और प्रसिद्ध लोगों का सम्मान करने के लिए एकत्र हुए हैं। चाहे खेल-कूद हो, कला एवं साहित्य, समाज सेवा, व्यापार या अन्य कोई भी व्यवसाय हो, तमिल लोग भारत को वैश्विक सुपर पावर्स की अगली पीढ़ी में शामिल करवाने के लिए शक्तिशाली बनाते हुए राष्ट्र-निर्माण में अग्रणी रहे हैं।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् से ही देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बहुत बड़ा योगदान देकर भारत के आर्थिक विकास में तमिलनाडु सदैव अग्रणी रहा है। तमिलनाडु, जिसकी अर्थव्यवस्था 13.39 लाख करोड़ की है, वह उन शीर्ष राज्यों में शामिल है जो भारत के राजकोष में बहुत बड़ा योगदान देते हैं। यह राज्य वर्तमान में 7.49 प्रतिशत की दर से विकास कर रहा है और ऐसा अनुमान है कि यह अगले वर्ष 9 प्रतिशत की विकास दर हासिल करेगा।

इसके लिए सात करोड़ तमिल लोगों का धन्यवाद जो न केवल इस राज्य में अपितु देशभर में और विश्व भर में रहते हैं और काम करते हैं।

तमिल लोग बहुत परिश्रमी और अन्वेषक होते हैं जिसे इस समारोह में उपस्थित कई सुप्रसिद्ध और सम्मानीय अतिथियों की मौजूदगी से देखा जा सकता है। उन्होंने इस संसार में अपनी एक पहचान बनाई है, जिनमें से कुछ नाम - गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, एक चैन्नईवासी - प्रतिभाशाली संगीतज्ञ ए. आर. रहमान, फिल्म निर्माता अशोक अमृतराज और फिल्म निर्देशक मनोज 'नाइट' श्यामलन हैं।

तिरुवल्लुवर की बुद्धिमत्ता से लेकर मदुरै के मंदिरों, रामनाथपुरम की दरगाहों और मस्जिदों, कन्या कुमारी के गिरिजाघरों और छोटे-छोटे प्रार्थना स्थलों तक - फैली समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर वाला तमिलनाडु एक प्राचीन और अनूठी सभ्यता की जन्म भूमि है जिसमें मंचन कलाएं, मूर्तिकला, चित्रकला, लेखन और व्यापार शताब्दियों से पल्लवित हुए हैं।

इसी संदर्भ में, मैं आज यहाँ न्यूज 18 तमिलनाडु के सर्वप्रथम मगुदम पुरस्कार वितरण समारोह में बोल रहा हूँ। तमिल भाषा में मगुदम का अर्थ मुकुट होता है और इस पुरस्कार के लिए यही नाम उपयुक्त है क्योंकि सभी पुरस्कार विजेता अपने-अपने क्षेत्रों में महाराजा और महारानी होते हैं।

न्यूज 18 तमिलनाडु का मगुदम पुरस्कार उस कड़े परिश्रम और दृढ संकल्प का सम्मान है जिससे खेल-कूद, सिनेमा, समाज सेवा, व्यापार एवं उद्यमिता, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ-साथ कला एवं साहित्य - सभी छह श्रेणियों में समस्त कठिनाइयों के विरूद्ध सफलता प्राप्त होती है। इन सबके अलावा, आज हम एक व्यक्ति को आजीवन उपलब्धि के लिए भी सम्मानित करेंगे।

भाइयों और बहनों, आज सफलता का जश्न मनाने का दिन है। जैसा कि महान तमिल कवि तिरूवल्लुवर ने कहा है - "असाधारण काम को अंजाम देने के लिए जब भी कोई दुर्लभ अवसर मिले उसे जाने न दें।

आज हमारे बीच में कुछ ही ऐसे असाधारण व्यक्ति मौजूद हैं जिन्होंने असाधारण काम को अंजाम देने के लिए उस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाया है और वे सफल हुए। इसके लिए अत्यधिक बाधाओं के समक्ष उनके साहस, निश्चय और अदम्य जोश का साधुवाद।

सफलता की परिभाषा क्या है? क्या यह धन-दौलत है? क्या यह प्रसिद्धि है? क्या यह वैभव है? जोश, दृढ़ता और अनथक मेहनत का परिणाम है सफलता। धन-दौलत, प्रसिद्धि और वैभव तो केवल सफलता के परिणाम मात्र है।

उदाहरण के लिए आज की प्रत्येक श्रेणी में नामांकित व्यक्तियों को ही देख लीजिए। इनमें से प्रत्येक व्यक्ति इन्ही गुणों-अपने-अपने चुने गए व्यवसायों के प्रति जुनून, गरीबी एवं समस्त कठिनाइयों से लड़ने का दृढ निश्चय और अनथक परिश्रम - के कारण सफल हुए हैं।

उदाहरण के लिए व्यापार श्रेणी में - और मैं केवल कुछ नाम उद्धृत कर रहा हूँ, चूंकि समय कम है- भारत मेट्रीमोनी, फ्रेश डेस्क और वाट्सएप जैसी अवधारणाएं समर्पण और उत्साह के साथ एक नए विचार के कारण सफलता की कहानियां बन गई हैं।

मदुरै की प्रशंसनीय मददगार सहृदय महिला गांधीमती अम्माल, जिन्होने हर दिन सड़कों पर रहने वाले व्यक्तियों को खाना खिलाने का काम शुरू किया ... कोयम्बटूर के गुणाशेखरन जो गरीब छात्रों तक कला को ले जाते हैं और उनके जीवन को समृद्ध बनाने में सहायता करते हैं ... विल्लुपुरम का अर्विचूदार टयूशन सेंटर जिसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के सैंकड़ों गरीब छात्रों तक स्तरीय शिक्षा पहुँची है ... ये सब एक जुनून के प्रतिफल हैं और आज हम यहां इन अद्भुत लोगों में से कुछ को सम्मानित करेंगे।

भारत वैश्विक शक्तियों के साथ कंधें से कंधा मिलाकर प्रतियोगिता करते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भी अग्रणी है तथा मंगल अभियान के प्रणेता सुब्बैया अरुपन जैसे व्यक्तियों ने भारत को यह स्थान दिलाने में सहायता की है। चाहे यह हिपेटाइटिस बी विषाणु का उपचार खोजना हो, जैसे कि प्रोफेसर के रूप में एम. पी. त्यागराजन द्वारा किया गया है, अथवा - ई-कचरे को कम करने के लिए जो जो आई आई टी मद्रास की इन्दुमति नाम्बी और प्रवीणा गंगाधरन द्वारा किए गए नए कार्य से पता चलता है कि वास्तव में हम वैश्विक स्तर पर नाम रोशन करने के मार्ग पर हैं।

जहां तक खेल-कूद के क्षेत्र का संबंध है, भारतीय खिलाड़ी विश्व चैम्पियन खिलाड़ियों के समक्ष लगातार कड़ी चुनौतियां पेश कर रहे हैं। इनमें तमिल लोगों - युवा मरियप्पन थंगावेलु, जिसने 2016 के रियो पैरालिम्पिक में देश का नाम रोशन किया, बास्केट बॉल खिलाड़ी अनीता और क्रिकेट खिलाड़ी वांशिंगटन सुंदर जैसे अगली पीढ़ी के उदीयमान खिलाड़ियों की विशेष भूमिका है, मुझे विश्वास है कि ये खिलाड़ी निकट भविष्य में राष्ट्र को गौरवान्वित करेंगे।

तमिलनाडु के लोगों को अपने सिनेमा से प्रेम है - वास्तव में सिनेमा इस राज्य के लोगों के जीवन और राजनीति का अभिन्न अंग है। श्री एम.जी. रामचन्द्रन, श्री एम. करूणानिधि और स्वर्गीया सुश्री जयललिता - ये सभी मुख्यमंत्री सिनेमा के क्षेत्र से संबंधित है। नंदिगर थिलगम शिवाजी गणेषन और सुपर स्टार रजनीकांत के बिना भारतीय सिनेमा कैसा होगा?

तमिल सिनेमा नवोन्मेषण, प्रयोगधर्मिता और चेतना के क्षेत्र में भी अग्रणी है। चेतना से मेरा यह अर्थ है कि युवा निर्भीक निर्देशकों द्वारा जो तमिल फिल्में बनाई जा रही हैं वे सामाजिक संदेशों से गुंथी हुई हैं, सच्चाई एवं कला से ओत-प्रोत हैं और फिर भी वाणिज्यिक सफलता प्राप्त कर पा रही हैं।

युवा निर्देशक मणिकंदन की "काका मोट्टई" चैन्नई की मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चों के जीवन पर बनी कृति है। शिवाथा, ऐश्वर्य राजेश और विजय सेतुपति जैसे असाधारण प्रतिभाशाली युवा अभिनेता ग्रामीण तमिल चरित्रों को जीवंत बनाकर बड़ी स्क्रीन पर चमक रहे हैं। निर्देशक सीनू रामासामी, युवा कार्तिक नरेन जिन्होंने अपने पहले ही प्रयास में "धुरुवंगल पतिनारु" नामक ब्लॉक बस्टर फिल्म देने के साथ-साथ धनुष और सत्यराज जो पहले से ही स्थापित है और शीर्ष पर बने हुए हैं - तमिल सिनेमा में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।

मगुदम आजीवन उपलब्धि का पुरस्कार विजेता नास्सर सर्वकालिक महानतम अभिनेताओं में से एक होने के साथ-साथ निर्देशक, गायक और गीतकार हैं। उन्होंने अभिनेता बनने के अपने जुनून का अनुसरण किया और बाहुबली सहित 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है।

कला और साहित्य के क्षेत्र में तो परमाशिवन जैसे नाम सर्वविदित हैं - प्राचीन तमिल संस्कृति पर उनके शोध और उनके अथाह ज्ञान तथा उनकी कलम से सृजित जादू को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। यद्यपि तो. था. लेखन के संसार से जुड़े हुए हैं, आरपी अमुधन जैसे अन्य लोग कैमरे और माइक्रोफोन के माध्यम से सशक्त तरीके से समान रूप से सच्चाई बयान कर रहे हैं।

आज यहां जो लोग एकत्र हुए हैं इन सभी लोगों में एक चीज साझी है कि ये सब अपने-अपने क्षेत्रों में सफलता के मानक हैं और कारण स्पष्ट हैं।

समस्त संसार में सफल लोगों की मुख्य विशेषताओं पर शताब्दियों से शोध किया जाता रहा है - क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति अन्तत: सफल होना चाहता है। सफल लोगों की प्रमुख विशेषताओं के बारे में मैं आपको बताता हूं।

आशावाद और सृजनात्मकता सफल व्यक्तियों को औसत व्यक्तियों से पृथक करती है। किसी यत्न के प्रति नकारात्मक नजरिया और दृष्टिकोण केवल मात्र विफलता की गारंटी हो सकते हैं। इसी प्रकार किसी व्यक्ति द्वारा एकदम नियमानुसार कार्यों को अंजाम देते हुए नवोन्मेषण करने एवं अपनी सृजनात्मकता का उपयोग करने से वह व्यक्ति अन्य लोगों से अलग दिखाई देता है।

लचीलापन और स्वनियंत्रण ऐसे दो अन्य गुण हैं जिन्हें अत्यधिक सफल लोग स्वंय ही विकसित करते हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, चुनौतियों के बावजूद और किसी बाधा का सामना करते हुए कठिन परिश्रम से उसे लाभ की स्थिति में बदलना ही लचीलापन है। यह सुनिश्चित करने के लिए स्व-नियंत्रण महत्वपूर्ण है कि हम लक्ष्यित मार्ग से डिगें नहीं और यह सुनिश्चित करना है कि हम अपने लक्ष्यों पर पूर्णत: अपना ध्यान केन्द्रित रखें।

सत्यनिष्ठा और आत्मविश्वास सफल लोगों के दो अन्तिम गुण होते हैं जिन पर आज में प्रकाश डालना चाहूंगा। सरल रास्ता अपनाने से कभी भी सफलता सुनिश्चित नहीं हो सकती है। केवल विश्वसनीयता, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा ही किसी व्यक्ति को सफलता के मार्ग पर अग्रसर कर सकती है। जब हम अपनी सत्यनिष्ठा को बनाए रखते हैं तो हम अपने साथियों को यह दर्शाते हैं कि हमें अपने पर भरोसा है और कोई भी चीज हमें नीचे नहीं गिरा सकती है। हम अपने ग्राहकों और मालिकों और जिन लोगों के साथ बातचीत करते हैं उन्हें यह दिखाते हैं कि हमारे मूल्य असंदिग्ध हैं। हम उन्हें दिखाते हैं कि हम जो कुछ है अपनी मेहनत के बलबूते ही बने हैं और स्वतंत्र हैं।

और, देवियों और सज्जनों, ये ऐसे गुण हैं जो इस सभागार में उपस्थित लोगों को बांधने वाले साझा सूत्र हैं।

आज मैं अपने भाषण का समापन महान कवि भरतियार द्वारा रचित "मनाधिल उरुधि वेंदम" उत्साहपूर्ण कविता के साथ करता हूं - आप सब इससे परिचित होंगे -

आओ मन को दृढ़ बनाएं

आओ वाणी को मधुर बनाएं

अपने विचारों को श्रेष्ठ बनाएं

आओ जो पसंद है उसे प्राप्त करें

आओ सभी स्वप्नों को साकार करें

और तेजी से,

इस संसार में धन-दौलत और खुशहाली हो,

और कीर्तिगान हो

आओ, हम अपनी आँखे खुली रखें

व्यक्ति अपने लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु दृढ़ संकल्प हो

स्त्रियों को आजादी मिले

प्रभु हम सबकी रक्षा करें

ये धरती उर्वर हो

हमें स्वर्ग यहीं महसूस हो

सत्यमेव जयते।

बहुत-बहुत धन्यवाद और अब हम न्यूज 18 तमिलनाडु के मगुदम पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करें।

धन्यवाद।

जयहिन्द।