16 अक्तूबर, 2017 को एनएसजी परिसर, मानेसर, हरियाणा में आयोजित एनएसजी के 33वें स्थापना दिवस समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया अभिभाषण

मानेसर, हरियाणा | अक्टूबर 16, 2017

राष्ट्रीय सुरक्षा गारद (एनएसजी) के महानिदेशक श्री सुधीर प्रताप सिंह, अधिकारीगण और मेरे बहादुर "ब्लैक कैट" कमांडो।

मैं राष्ट्रीय सुरक्षा गारद के 33वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होकर खुशी का अनुभव कर रहा हूं। आरंभ में, मैं एनएसजी के उन 19 वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देता हूँ, जिन्होंने अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए अपने जीवन का बलिदान दिया और इस प्रकार वीरता और बलिदान के सर्वोत्तम परम्पराओं को कायम रखा।

एनएसजी एक विशेष रूप से प्रशिक्षित, अत्यधिक कुशल और अत्यंत समर्पित बल है जिसे अनेक प्रकार की जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं। चाहे आतंकरोधी या विमान-अपहरण से निपटने का अभियान हो या अधिक खतरे वाले विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा करनी हो, आप हर अवसर पर चुनौतियों को करारा जवाब देते हुए खरे उतरे हैं। पूरे देश को आपकी उपलब्धियों पर गर्व है। देशभर में एनएसजी ने अपनी छाप छोड़ी है और गांधीनगर में विशेष कंपोजिट समूह का गठन इस तथ्य का प्रमाण है कि एनएसजी के कार्यों में आगे और विस्तार हुआ है।

राष्ट्रीय सुरक्षा गारद वीरता, व्यवसायिक कुशलता और अधिकतम समर्पण का पर्याय बना हुआ है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी को इस बात का गर्व होगा कि आप इस विशेष बल का हिस्सा है क्योंकि सम्पूर्ण देश के लोग हमेशा आपकी ओर आदर, आशा और विश्वास के साथ देखते हैं और अपनी सुरक्षा और कल्याण के प्रति आश्वस्त रहते हैं। यह आत्मविश्वास इस तथ्य से उजागर होता है कि एनएसजी ने सभी विषम परिस्थितियों में चुनौतियों की गंभीरता पर विचार किए बिना विजय प्राप्त करते हुए परिणाम दिये हैं।

विगत 33 वर्षों के दौरान आपने अपने आतंकवादी और विमान-अपहरण की स्थितियों को सफलतापूर्वक सँभाला है। देश अक्षरधाम, मुम्बई और पठानकोट हमलों में आपकी निर्णायक भूमिका को हमेशा याद रखेगा। एनएसजी ने चुनौतियों को स्वीकार किया और जबरदस्त पेशेवर जोश के साथ अपने कार्य को अंजाम देते हुए गंभीर खतरों को समाप्त किया।

हाल के वर्षों में पूरे विश्व में आतंकवादी घटनाएं बढ़ी है और कुछ हमले ऐसे स्थानों पर हुए हैं, जहां ऐसी वारदातें कभी नहीं हुईं थीं और संभवत: वहां इनकी सबसे कम आशंका थी। यह मुख्य शब्द हैं - सबसे कम आशंका थी। इसी प्रकार से आतंकवादी फलते-फूलते हैं और आशंका रहित स्थानों और लोगों पर लुक-छिपकर हमले करके अशांति पैदा करने का प्रयास करते हैं। इसलिए, शाश्वत सतर्कता ही स्वतंत्रता की कीमत है।

यह वास्तव में विडंबना ही है कि जैसे-जैसे मानवजाति प्रौद्योगिकी की मदद से प्रगति कर रही है, आतंकवादी भी नए-नए तरीकों से उसका प्रयोग लोगों के जीवन और उनकी स्वतंत्रता को बर्बाद करने के लिए कर रहे हैं। लंदन, बार्सिलोना और फ्रांस में अकेले आतंकवादी द्वारा किए गए हमलों और लोगों को कुचलने के लिए वाहनों का प्रयोग ऐसी घटनाओं की पुनरावृति से बचने के लिए सार्वजनिक स्थानों में कड़ी निगरानी रखे जाने की जरूरत को दर्शाता है।

आप सभी इस बात से अवगत हैं कि विगत तीन दशकों से भारत आतंकवाद की समस्या का सामना कर रहा है। हमने ऐसे राष्ट्र-विरोधी तत्वों को हमेशा मुहतोड़ जवाब दिया है।

तथापि, हाल में, हमारे दुश्मनों की कार्य-प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव आया है, जिससे खतरा केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि वह भीतरी भागों में भी प्रदर्शित हुआ है। अत: हमें प्रचालनात्मक क्षमताओं की लगातार समीक्षा करने और उनमें वृद्धि करने की आवश्यकता है।

इसके लिए, हम सभी को अपनी प्रचालनात्मक तैयारी का उन्नयन करने और उसे निखारने के उद्देश्य से नवीनतम प्रौद्योगिकी को अपनाने और विशेषज्ञ दक्षताओं को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध रहना होगा।

इस प्रकार इस बात की अत्यंत आवश्यकता है कि मुकाबले में हमेशा आगे बने रहने के लिए युक्तियों की निरंतर समीक्षा करें, उनमें सुधार किया जाए और रणनीति को नवोन्मेषी और अद्यतन बनाएं। दूसरे शब्दों में, आतंकवादियों के षड़यंत्रों, बुरे इरादों को परास्त करने के लिए मानव और मशीन दोनों को उनसे अधिक कुशल होना होगा।

इस उद्देश्य के लिए, आपने निगरानी, शस्त्रबल और यूएवी-रोधी क्षमताओं को विकसित करने में जो प्रगति की है वह वास्तव में सराहनीय और प्रशंसनीय है।

Iमैं महसूस करता हूँ कि अब समय आ गया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ऐसे देशों जो आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, को अलग-थलग करने के लिए समन्वित प्रयास शुरू करे। अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी जैसा कुछ भी नहीं है। आतंकवाद कोई धर्म या सीमाएं नहीं जानता है और किसी को भी विचारधारा के नाम पर हिंसक कृत्य करने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है।

मैं संयुक्त राष्ट्र से पुरजोर ढ़ग से अपील करता हूँ कि वह यह देखे कि अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद को दबाने से संबधित एक विस्तृत अभिसमय, जिसका प्रस्ताव भारत की ओर से दिया गया है और वह 1996 से लंबित है, संपन्न किया जाए।

यह देखना अत्यंत प्रशंसनीय है कि एनएसजी न केवल अपनी स्वयं की प्रगति सुनिश्चित करने की दिशा में कठोर प्रयास कर रही है। बल्कि विशेष रूप से हमारे राज्य पुलिस बलों का क्षमता निर्माण भी कर रहा है। इससे हमारे देश में आतंकवाद का एक साथ राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करना सुनिश्चित होगा। अन्य बल भी आपकी विशेषज्ञतापूर्ण आतंक-रोधी युक्तियों, बम निष्क्रिय करने की तकनीकों और आपकी के-9 क्षमताओं से काफी अधिक लाभान्वित हुए हैं। इस उपाय द्वारा, आप राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ क्षमता निर्माण का दोहरा उद्देश्य प्राप्त कर रहे हैं और इसके लिए मैं आपको बधाई देता हूँ।

एनएसजी जैसे किसी बल के लिए प्रशिक्षण प्रमुख तत्व है और यह अनिवार्य है कि आपको विश्वभर में उपलब्ध सर्वोत्तम उपलब्ध प्रशिक्षण दिया जाए। मुझे खुशी है कि आपने भारत और विश्व के अन्य विशेष बलों के साथ सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करके इस खजाने में आगे और वृद्धि की है।

अंत में, मैं एनएसजी के 33वें स्थापना दिवस पर आप में से प्रत्येक को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ।

मैं आशा करता हूँ कि आप "एक विश्वस्तरीय त्रुटिरहित बल" के रूप में अपने लक्ष्य-वाक्य के प्रति सदैव वचनबद्ध रहेंगे। हमारी शुभकामनाएं और प्रार्थनाएं सदैव आपके साथ हैं और मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप हमारे महान देश की सेवा करते हुए हमेशा अपना सर्वोत्तम कार्य करते रहेंगे और अपने सभी प्रयासों में सफलता प्राप्त करेंगे।

जय हिन्द