14 मार्च, 2019 को कोयम्बटूर में पी.एस.जी. प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रथम स्नातक समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

कोयम्बटूर | मार्च 14, 2019

"मुझे आप सब के साथ बातचीत करने और पीएसजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड रिसर्च के प्रथम स्नातक समारोह के इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपने कुछ विचार साझा करने पर खुशी है।

जब से मैंने देश के उपराष्ट्रपति का यह महत्वपूर्ण पदभार ग्रहण किया है, मैंने अपने देश के प्रतिभाशाली युवा नागरिकों के साथ बातचीत करने के लिए हर अवसर का उपयोग किया है। और ऐसा प्रत्येक अवसर देश के उज्ज्वल भविष्य हेतु मुझे में आशा और उम्मीद की भावना भर देता है।

शिक्षण संस्थानों में मेरी यात्रा तीर्थ यात्रा की तरह रही है।

एक शैक्षिक संस्थान की यात्रा हमारे समाज के बेहतर और उज्ज्वल भविष्य के लिए एक तीर्थ यात्रा की तरह है। और आज इस प्रतिष्ठित संस्थान की मेरी यह यात्रा एक ऐसा ही अवसर है।

इस बैच के छात्रों ने भविष्य के बैचों के लिए एक उदाहरण स्थापित किया है।

मुझे बताया गया है कि पहले बैच के 85% से अधिक छात्रों ने अपनी प्रमुख योग्यता के क्षेत्र में रोज़गार प्राप्त कर लिया है।

मैं आप सभी को एक उज्ज्वल और उपलब्धियों से भरे कैरियर के लिए बधाई देता हूं।

भारतीय परंपरा में कहा जाता है कि ज्ञान पर न तो कर लगाया जा सकता है, न ही इसे चुराया जा सकता है, न ही इसे भाई-बहनों में विभाजित किया जा सकता है, यह ऐसा धन है जो खर्च करने और साझा करने से बढ़ता ही है, इसलिए ज्ञान का धन सभी प्रकार के धन के बीच सर्वोत्तम है।

న చోర హార్యం | న రాజ హార్యం |

న భ్రాత్ర భాజ్యం | న చ భారకారీ |

వ్యయే కృతే | వర్ధతే ఏవ నిత్యం |

విద్యా ధనం | సర్వధన ప్రధానం |

इस उदात्त आदर्श का अनुसरण करके पीएसजी एंड संस चैरिटीज़ ट्रस्ट ने, 1924 से जब इस धर्मार्थ संगठन की स्थापना हुई थी, अपने 30 शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से मुख्य रूप से कमजोर तबके के 3 लाख से अधिक छात्रों के बीच ज्ञान का प्रसार किया है । मैं इस धर्मार्थ संस्थान के प्रबंधन, संकाय और छात्रों की, राष्ट्रीय उत्थान हेतु उनके महान योगदान के लिए, सराहना करता हूं।

दोस्तों,

हम सभी शास्त्री जी द्वारा दिए गए “जय जवान, जय किसान” के आह्वान के साथ बड़े हुए हैं। 1998 में सफल अभियान शक्ति के बाद हमारे पूर्व प्रधान मंत्री अटल जी ने आधुनिक समाज में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के महत्व को रेखांकित करते हुए "जय विज्ञान" को इस नारे के साथ जोड़ा। आज हमें अपने भविष्य के उद्यमियों और पेशेवरों की नवोन्मेषी भावना पर भरोसा करने की आवश्यकता है। नारा अब "जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान" होना चाहिए।

हमें एक अभिनव विचार की अवधारणा को इसे एक वाणिज्यिक उत्पाद में बदलने तक, विचारों की प्रयोगशाला और उसके क्रियान्वयन के बीच की मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। बौद्धिक संपदा अधिकारों के इस युग में युवा पेशेवरों की नवोन्मेष और उद्यमिता हमारी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और एक समावेशी समाज का निर्माण करने में एक प्रमुख भूमिका निभाएगी।

कृपया याद रखें कि ज्ञान भारतीय अर्थव्यवस्था का संचालक होने वाला है और लोगों की जीवन स्थितियों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसलिए भारत को इस अवसर पर अपनी योग्यता साबित करनी चाहिए और अपनी उच्च शिक्षा प्रणाली को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इसे नया रूप देना चाहिए।

शिक्षा केवल रोजगार के लिए नहीं है। इसे व्यक्ति को ज्ञान और विवेक प्रदान करना चाहिए, ताकि वह सही-गलत की परख कर सके। समावेशी विकास सुनिश्चित करने और किसी भी तरह के भेदभाव को रोकने के लिए सभी के लिए सभी स्तरों पर शिक्षा तक पहुंच उतनी ही आवश्यक है।

वर्तमान में भारत के पास अत्यधिक जनसांख्यिकीय लाभांश मौजूद है जहां जनसंख्या का 65% भाग 35 वर्ष से कम आयु का है। हमारे पास लगभग 48 करोड़ का कार्यबल है जिसमें हर साल एक करोड़ लोग और शामिल हो जाते हैं। हालाँकि, हमारे पास इस जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने के लिए 2040 तक 20 साल की एक बहुत ही कम अवधि का समय है।

हमारे पास सबसे बड़ा शिक्षित युवा कार्यबल होने का लाभ है, अत: इस समय आवश्यकता इस बात की है कि हम उनकी रचनात्मक क्षमता का इष्टतम उपयोग करें ताकि भारत को ज्ञान और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाया जा सके। कृपया याद रखें कि भारत को एक समय में 'विश्वगुरु' कहा जाता था और यह वैश्विक जीडीपी में 27 प्रतिशत का योगदान देता था।

समय आ गया है कि भारत को दुनिया की अग्रणी आर्थिक शक्तियों में से एक के रूप में पुन: स्थापित किया जाए। हमें अपने उच्च शिक्षा संस्थानों को अध्ययन के विश्व स्तरीय शिक्षा केंद्रों में बदलने के अलावा अपने विनिर्माण उद्योग का बड़े स्तर पर विस्तार करने की आवश्यकता है।

साथ ही, हमें कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों की मांगों को पूरा करने के लिए कौशल प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करने और नवोन्मेषकारी उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। हमें अपने युवाओं को नौकरी खोजने वालों की बजाय उन्हें रोजगार सृजक बनाने के लिए उपयुक्त साधन उपलब्ध कराने होंगे।

मुझे खुशी है कि हमारे युवा उद्यमी धीरे-धीरे रोजगार प्रदाता बन रहे हैं। आज 'स्टार्ट अप्स' ने 1.5 लाख से अधिक नौकरियां सृजित की हैं। भारत तेजी से अभिनव समाज के रूप में उभर रहा है और मुझे खुशी है कि तमिलनाडु सहित 21 राज्यों ने 'स्टार्ट अप' उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए अपनी 'स्टार्ट अप' नीतियां बनाई हैं। आज 39,000 'स्टार्ट अप्स' के साथ हम 'स्टार्ट अप्स' का दूसरा सबसे बड़ा वैश्विक केन्द्र बन गए हैं। यह भी खुशी की बात है कि इनमें से 44% स्टार्ट अप श्रेणी 2 और श्रेणी 3 शहरों में स्थित हैं। यह इंगित करता है कि अभिनव उद्यमशीलता की संस्कृति बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है और छोटे शहरों में भी यह फल-फूल रही है।

वैश्विक निवेशकों का हमारे स्टार्ट अप्स पर भरोसा है। वैकल्पिक निवेश निधि के माध्यम से इन स्टार्टअप उद्यमों में निवेश 80,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यह हमारे उद्यमियों के लचीलेपन और व्यावसायिक व्यवहार्यता को दर्शाता है।

मुझे खुशी है कि पीएसजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने नवोन्मेष के महत्व को महसूस किया है और आप अपने सेंटर्स ऑफ एक्सेलेंस एंड इनोवेशन सेंटर के माध्यम से नवाचार और अनुप्रयुक्त अनुसंधान की भावना को अंतर्विष्ट कर रहे हैं और इसे बढ़ावा दे रहे हैं।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि प्रमुख उद्योगों और अन्य लोगों के साथ मिलकर, आपने आभासी उपकरणों (वर्चुअल इंस्ट्रूमेंटेशन), मोबाइल एप्लिकेशन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आई.ओ.टी.) में छात्रों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कायशालाएं और इंटर्नशिप आयोजित कराने, आईआईटी, बॉम्बे की मदद से एक डिजिटल अर्थव्यवस्था और ई-यंत्र रोबोटिक लैब के लिए अपेक्षित कौशल विकसित करने के लिए उत्कृष्टता और नवाचार केंद्र स्थापित किए हैं।

मुझे बताया गया है कि आपने उत्पाद अनुप्रयोग केंद्र (पीएसी) की स्थापना की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्र इंजीनियरिंग अवधारणाओं को वास्तविक विश्व के इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों से जोड़ें।

उत्कृष्टता के ये केंद्र उद्योग-अकादमी साझेदारी के उत्कृष्ट उदाहरण हैं और यह अनुप्रयोग अनुसंधान के छात्रों के लिए अपेक्षित अनुभव प्रदान करेगा, नए विचारों की खोज करेगा और उनकी तकनीकी प्रयोज्यता और व्यावसायिक व्यवहार्यता का परीक्षण करेगा। छात्रों का इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यापक स्तर पर हो रही गतिविधियों से परिचय होगा।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि पीएसजी डिज़ाइन डाटा बुक भारत और विदेशों के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में लोकप्रिय है।

मुझे विश्वास है कि युवा छात्र, स्टार्टअप प्रवर्तक और युवा उद्यमी, जो आज उर्त्तीण हो रहे हैं, इस संस्थान को गौरवान्वित करेंगे।

ऐसा करते समय, कृपया अपने प्रतिष्ठित संस्थान के संदृश्य वाक्य को याद करें, "शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता हासिल करना और इंजीनियरों को नैतिकता के साथ शिक्षा देना... "। अपने संस्थान और शिक्षकों द्वारा दिए गए नैतिक मूल्यों को हमेशा याद रखें। व्यापक समाज की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं के प्रति जिम्मेदार रहें।

तिरुक्कुरल कहते हैं कि आपको व्यापक समाज के प्रति किए किए गए वायदे को निभाना है। समुदाय के प्रति आपकी प्रतिबद्धता है।

యాదానుం నాడామల్ | ఊరామాల్ ఎండ్రు ఒరువన్ | సాంతొణయుం కల్లాద వార్

"जो सीखना है उसे शुचिता के साथ पूरी तरह से सीखें और उसके बाद उसे अपने आचरण में उतारें।" अपने ज्ञान, मूल्यों और बुद्धिमत्ता के अनुसार ईमानदारी से चलें। मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि पीएसजी अपनी कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के माध्यम से हर माह संवाद द्वारा भारतीय दर्शन के ज्ञान को साझा कर रहा है।

इस प्रकार का शिक्षण आपको अपने सामाजिक लोकाचार में मूल रूप से बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

पीएसजी एंड सन्स ट्रस्ट द्वारा किए गए धर्मार्थ और परोपकारी कार्य वास्तव में सराहनीय हैं और दूसरों द्वारा अनुकरण किए जाने योग्य हैं। पीएसजी के संस्थापक, पीएस गोविंदराज ने केवल अपने शब्दों द्वारा ही नहीं बल्कि अपने धर्मार्थ कार्यों के माध्यम से वंचितों के प्रति अपनी चिंता दिखाई थी । यद्यपि उनके तीन बेटे हैं, तथापि उन्होंने अपनी संपत्ति को चार भागों में विभाजित किया, ताकि ट्रस्ट की गतिविधियां विभाजित भाग द्वारा चलाई जा सकें। देश को गरीब और हाशिये पर रह रहे वर्गों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऐसे संगठनों की अत्यधिक आवश्यकता है।

युवा मित्रों,

किसी समाज का लचीलापन अपने नागरिकों के लिए जीवन की बेहतर गुणवत्ता हेतु अथक प्रयास करने में परिलक्षित होता है। अभी भी हमारे बहुत से नागरिकों की आवश्यक सामाजिक संसाधनों तक पहुंच सुलभ नहीं है। हमें शिक्षा, गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य देखभाल, प्रामाणिक और प्रासंगिक जानकारी की समय पर उपलब्धता, सरकारी सेवाओं तक पहुंच और ई-गवर्नेंस पहलों जैसी सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता है।

प्रौद्योगिकी को इन सुविधाओं तक पहुंच को सुगम बनाना चाहिए। सूचना प्रौद्योगिकी ने हमें शक्ति प्रदान की है। इस शक्ति को कमजोर वर्गों तक पहुँचाया जाए। यह सुनिश्चित करें कि नई तकनीकों का उपयोग आम आदमी, विशेषकर हाशिए पर रह रहे वर्गों जैसे महिलाओं, किसानों, असंगठित मजदूरों और हमारे देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर में सुधार के लिए किया जाए।

प्रिय छात्रों,

वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। आज हम रोमांचक समय में रह रहे हैं। भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है और अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। परिणामस्वरूप, विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं के लिए प्रचुर अवसर होंगे। हालांकि, शिक्षण संस्थानों को बदलते समय के अनुसार बदलना चाहिए और युवा छात्रों को उपयुक्त कौशल प्रदान करना चाहिए। तदनुसार, पाठयक्रम और शैक्षणिक पद्धत्तियों को नया रूप देना होगा।

छात्रों को कार्य कर के, अभिकल्पन और प्रयोग द्वारा और समकालीन समस्याओं के हल खोज कर सीखने की जरूरत है। छात्रों को ज्ञान के बहु-विषयक अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। रोबोटिक्स, बिग-डेटा एनालिटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नई तकनीकें हमारे जीवन को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं । हमें ऐसे उत्पादों और तकनीकों की आवश्यकता है जो स्वदेशी हों, कम लागत वाली हों, बड़े पैमाने पर तेजी से प्रयोग में लाई जा सकें, मजबूत और लचीली हों ताकि कोई रूकावट न आए।

मैं उच्चतर शिक्षण संस्थानों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों के क्षेत्रीय दौरे के आयोजन के महत्व पर भी जोर देना चाहूंगा। छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों के साथ कुछ दिन बिताने के लिए कहा जाना चाहिए ताकि वे गांवों में लोगों के सामने आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर सकें। यह उन्हें ग्रामीण लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को दूर करने के लिए उन पर विचार करने और नयी योजनाएं बनाने में समर्थ बनाएगा।

हमें कभी भी प्रयासहीन नहीं होना चाहिए और जो हमने हासिल किया है उससे संतुष्ट नहीं होना चाहिए। नवोन्मेष के लिए निरंतर विचारों के मंथन, रचनात्मक सोच और विशिष्ट उत्पादों को विकसित करने की आवश्यकता होती है।

मुझे विश्वास है कि आप आने वाले वर्षों में उत्कृष्टता को प्राप्त करने के अपने प्रयास को जारी रखेंगे। यथास्थिति को बदलने के लिए अपनी अभिनवता की प्रवृत्ति को बनाए रखें।

जैसा कि तिरुक्कुरल कहते हैं

తొట్టనైత్తు ఊరుం | మణర్కేణి మాంతరుక్కు |

కట్ర నైత్తు ఊరుం అరివు |

“आप रेतीली जमीन को जितना गहरा खोदेंगे, उतना ही पानी बहेगा; इसी तरह, जितनी गहराई से आप सीखते हैं, आपका ज्ञान उतना ही बढ़ता है”।

मुझे आशा है कि इस अपेक्षाकृत युवा संस्थान के छात्र, विद्वान और संकाय सदस्य आने वाले तकनीकी परिवर्तन के समय में इस संस्था को एक मानदंड के रूप में स्थापित करेंगे।

प्रिय छात्रों,

आपकी महत्वाकांक्षाओं के लिए मैं आपकी प्रशंसा करता हूं और आशा करता हूं कि उन्हें हासिल करने के लिए आप पर्याप्त प्रयास करेंगे। मैं कामना करता हूं कि पीएसजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी भारत के गौरवशाली भविष्य के लिए आपकी परिकल्पना को साकार करने में हर सफलता प्राप्त करे।

जय हिन्द!"