13 मार्च, 2019 को चेन्नई में वेल टेक विश्वविद्यालय में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

चेन्नई | मार्च 13, 2019

“मैं आज सुबह आपसे मिलकर और आपके संस्थान की प्रतिष्ठित एनआईडीएचआई-सीओई प्रयोगशाला द्वारा प्रवर्तित नवोन्मेष-आधारित स्टार्ट-अप के छात्रों, संकाय सदस्यों और उद्यमियों के साथ बातचीत करके बहुत खुश हूं।

मुझे सूचित किया गया है कि यह पहले चरण में निजी क्षेत्र में स्वीकृत ऐसे छह सीओई में एकमात्र उत्कृष्टता का केंद्र है।

मैं शैक्षणिक कार्यक्रमों की बहुलता के माध्यम से श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान करने के लिए वेल टेक के संस्थापक प्रो. कर्नल वेल आर. रंगराजन और डॉ सगुन्ताला रंगराजन की सराहना करना चाहूँगा।

मुझे बताया गया है कि पूरे भारत और विदेशों से विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले छात्र यहाँ आते है। यह इस संस्थान को भारत के सांस्कृतिक रूप से सबसे विविध शिक्षण केंद्रों में से एक बनाता है।

'बिज़नेस इन्क्यूबेशन' को विश्व स्तर पर आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में मान्यता दी गई है।

इस बात को ध्यान में रखते हुए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के नवोन्मेष और उद्यमिता प्रभाग "प्रौद्योगिकी बिज़नेस इनक्यूबेटर" के अपने प्रमुख कर्योक्रमों के माध्यम से प्रौद्योगिकी-आधारित स्टार्टअप का समर्थन कर रहा है।

प्रिय छात्रों/शोधकर्ताओं

आज की दुनिया और देशों एवं समाजों में नवोन्मेष, 'इन्क्यूबेशन' और स्टार्ट-अप्स चर्चा के शब्द हैं, जो ज्ञान-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-आधारित हैं, ये वैश्विक अर्थव्यवस्था में संवर्धित भूमिका निभाएंगे। हमारे लिए भारत में, अब समय आ गया है कि हम अवसर का लाभ उठाएं और नवोन्मेष और प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा दें।

अगर हमें चौथी औद्योगिक क्रांति में सार्थक और महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है तो हमें भीड़ से आगे रहना होगा । कई अन्य देशों की अपेक्षा, भारत को एक लाभप्रद स्थिति में रखा गया है। भारत में एक ज़बरदस्त जनसांख्यिकीय लाभांश है जिसका दोहन किया जाता है। एक बढ़ती उम्र की दुनिया में, भारत में युवा जनसँख्या सबसे ज्यादा है । 2020 तक, भारत में माध्य आयु, चीन और अमेरिका की 37, पश्चिमी यूरोप की 45 और जापान की 49 की तुलना में सिर्फ 28 होगी।

35 वर्ष से कम आयु के लगभग 65 प्रतिशत लोगों के साथ, हमें इस विशाल मानव पूंजी को युवाओं को प्रौद्योगिकी रूप से सशक्त करके भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बहु गुणक में बदलने की आवश्यकता है। उद्यमिता किसी देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ने और रोजगार निर्माण करने में मदद करती है।

शिक्षा किसी राष्ट्र की प्रगति की नींव रखती है। आज भारत बड़ी संख्या में उच्चतर शिक्षा संस्थानों वाले देशों में एक हो और वैश्विक शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

आज, देश के पास वैश्विक प्रतियोगिताओं को पूरा करने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में नवोन्मेष पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर है। लेकिन इसके लिए विश्वस्तरीय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के एकमात्र उद्देश्य के साथ पाठ्यक्रम की रूपरेखा को पुन: अभिमुखित करने से लेकर बुनियादी ढांचे को संशोधित करने तक आश्चर्यजनक परिवर्तन करने की आवश्यकता है ।

प्रत्येक वर्ष लाखों इंजीनियरिंग स्नातक बनाने वाले देश में, भारत को स्टार्ट-अप और प्रौद्योगिकी-आधारित उच्च विकास उपक्रमों में अग्रणी बनाने के लिए नए विचारों, सफलताओं और नवोंमेषों के लिए सही वातावरण प्रदान करना समय की आवश्यकता है। इसलिए, यह हमेशा की तरह व्यापार नहीं हो सकता। हमें नई तकनीक से चलने वाली दुनिया में सबसे आगे रहने के लिए तत्पर रहना होगा जो भविष्य की गति निश्चित करेगा।

बेशक, प्रौद्योगिकी-आधारित नए उद्यम उच्च जोखिम का सामना करते हैं और उन्हें अपनी सफलता की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए एनआईडीएचआई - उत्कृष्टता का केन्द्र (एनआईडीएचआई-सीओई) जैसे सक्षम वातावरण की आवश्यकता होती है।

मुझे बताया गया है कि एनआईडीएचआई-सीओई के प्राथमिक उद्देश्य नई तकनीक/ज्ञान/नवोन्मेष आधारित प्रभावोत्पारक स्टार्टअप को बढ़ावा देना; शिक्षा, वित्तीय संस्थानों, उद्योगों और अन्य संस्थानों के बीच एक नेटवर्क स्थापित करना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं तालमेल बैठाते हुए रोजगार, धन और व्यवसाय के निर्माण के लिए एक जीवंत स्टार्टअप वातावरण का निर्माण करना है।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, उद्यमिता किसी देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ने और नए रोजगार को विकसित करने में मदद करती है। भारत आज दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और अगले 10-15 वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बनने का अनुमान है। मुझे यकीन है कि सेवा क्षेत्र में स्टार्ट-अप आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा।

प्रिय छात्रों/शोधकर्ताओं, वैश्विक नवोन्मेष सूचकांक में पिछले साल भारत को 57वें स्थान पर रखा गया है, जबकि कई छोटे राष्ट्र भारत से आगे हैं। हमें अपनी उच्चता शिक्षा प्रणाली, विशेष रूप से इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक क्षेत्रों को पुन: अभिमुखित करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन संस्थानों से उत्तीर्ण होने वाले छात्र देश और दुनिया में बड़े पैमाने पर आने वाली समस्याओं के लिए रचनात्मक और नवोन्मेषी समाधान रख सकें।

शिक्षण-अध्ययन के तरीकों को सुविधा द्वारा अध्ययन के रूप में परिवर्तित किया जाना चाहिए जहां छात्र साथियों के साथ सक्रिय रूप से सीखते हैं। हमें अपने पाठ्यक्रम, बुनियादी ढांचे, शिक्षाशास्त्र, शिक्षण और परीक्षा पद्धति और हमारे प्रौद्योगिकी उपकरणों का नवाचार करते रहना होगा।

आधुनिक दुनिया के सामने आने वाली चुनौतियां बहुआयामी हैं। एक ओर शहरीकरण और औद्योगीकरण बढ़ रहा है और दूसरी ओर कृषि संकट है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण के बढ़ते स्तर, ऊर्जा की बढ़ती मांग, गरीबी और अशिक्षा को मिटाना सभी प्रमुख चुनौतियां हैं जिनके लिए नवोन्मेषी और अलग विचारों की आवश्यकता होती है। एक महत्वपूर्ण पहलू जिसे सरकार और निजी क्षेत्र दोनों का ध्यान आकर्षित करने की आवश्यकता है, वह है अनुसंधान और विकास के लिए धन की आवश्यकता। इसी तरह, शिक्षा और उद्योग के बीच के संबंध को व्यवस्थित रूप से विकसित करना है।

मैं यह जानकर काफी खुश हूं कि वेल टेक अपने वेल टेक - टेक्नोलॉजी बिज़नेस इन्क्यूबेटर के माध्यम से उद्यमियों के विकास और उन्हें सहायता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है । यह भी प्रसन्नता की बात है कि वेल टेक टीबीआई ने 103 युवा नवोंमेष्कों को प्रेरित किया है कि वे वेल टेक टीबीआई में स्थापित सुविधाओं का उपयोग करके अपनी कंपनियों को शुरू करें ।

मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि क्यूएस के शीर्ष रैंक वाले विश्वविद्यालयों में, वेलटेक भारत से सीडीआईओ (अवधारणा-डिजाइनिंग-कार्यान्वयन-संचालन) पहल का पहला और एकमात्र सदस्य है। मुझे यह भी बताया गया है कि इस संस्था ने संकाय और छात्रों को वैज्ञानिक, अंतःविषय, क्रॉस-प्रोफेशनल अनुसंधान, जो सीडीआईओ दृष्टिकोण द्वारा समर्थित है, में शामिल होने का अवसर देकर छात्रों के बीच अनुसंधान संस्कृति को विकसित करने के लिए कई कदम उठाए हैं ।

यह नोट करना प्रशंसनीय है कि यह संस्थान महत्वपूर्ण विचारकों को तैयार करने के लिए अनुसंधान-गहन शिक्षण और अध्ययन कार्यों पर ध्यान केंद्रित करता है। नवोन्मेष और उद्यमशीलता दो ऐसे प्रमुख साधन बनने जा रहे हैं जो भारत को आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समावेश के एक नए युग में ले जा रहे हैं।

आपकी उपलब्धियों पर आप सभी को मेरा अभिवादन और आपकी निरंतर सफलता के लिए शुभकामनाएं!

जय हिन्द! "