11 मार्च, 2022 को सिक्किम में कंचनजंगा राज्य विश्वविद्यालय (केएसयू) की आधारशिला रखने के अवसर पर आयोजित समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का संबोधन

सिक्किम | मार्च 11, 2022

“बहनो और भाईयो,
मुझे आज कंचनजंगा राज्य विश्वविद्यालय (केएसयू) की आधारशिला रखते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है। यह राज्य सरकार का अब तक का पहला विश्वविद्यालय है और मुझे विश्वास है कि यह संस्थान नए मानक स्थापित करेगा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में एक प्रतिमान बनेगा।
जैसा कि आप सभी जानते हैं, विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षा संस्थान राष्ट्र निर्माण और भारत को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज इस राज्य विश्वविद्यालय की आधारशिला रखते हुए, हम सामूहिक रूप से एक अधिक समृद्ध, विकसित सिक्किम की आधारशिला रख रहे हैं, जहां सतत प्रगति के लिए अधिगम एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक बन गया है।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि नवीनतम अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (एआईएसएचई) की रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा में सिक्किम राज्य का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 75.8 प्रतिशत है जो भारत में सर्वाधिक है। एक और उल्लेखनीय प्रगति यह है कि सिक्किम सरकार ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के प्रतिबद्ध कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सिक्किम शिक्षा सुधार आयोग (एसईआरसी) का गठन किया है। ये प्रशंसनीय उपाय हैं और मैं सिक्किम को पूर्वोत्तर में शैक्षिक केंद्र के रूप में आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए राज्य सरकार की सराहना करता हूं।
बहनो और भाइयो,
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 एक दूरदर्शी दस्तावेज है जो समग्र रूप से शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत बनाने का प्रयास करती है। यह विद्यालय और उच्च शिक्षा दोनों में 21वीं सदी की मांगों के अनुरूप अत्यावश्यक सुधार लाने का प्रयास करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षकों के प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी के रचनात्मक उपयोग, लचीलेपन और उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता पर विशेष जोर देती है। एक अच्छी नीति केवल पहला कदम है। महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को कितनी अच्छी तरह लागू किया जाता है।
राज्यों को अधिगम-शिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तन लाने और वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए संकल्प भाव के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करना होगा। मुझे यह जानकर हर्ष हुआ कि सिक्किम ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पहले ही कई कदम उठाए हैं और कंचनजंगा राज्य विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर की स्थापना करना उस दिशा में एक और कदम होगा।
बहनो और भाइयो,
मुझे इस राज्य विश्वविद्यालय का उद्घाटन करते हुए विशेष रूप से प्रसन्नता हो रही है क्योंकि पूर्वोत्तर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में तेजी लाने के लिए शिक्षा संभावित रूप से सबसे प्रभावी साधनों में से एक है।
इस क्षेत्र के युवाओं के लिए, इस तरह के विश्वविद्यालय अपने ज्ञान का विस्तार करने और 21वीं सदी के लिए आवश्यक नए कौशल अर्जित करने के लिए अपार अवसर पैदा करते हैं। अपनी ओर से, युवाओं को उन्हें प्रदान किए गए अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए और अपने चुने हुए क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करना चाहिए। इस क्षेत्र में पर्यावरण-पर्यटन, बागवानी और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में प्राकृतिक प्रतिभा है। उन्हें विशेष प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इस क्षेत्र की युवा और उद्यमी आबादी की प्रतिभा का लाभ उठाकर, हमें स्थायी व्यापार मॉडल बनाने की आवश्यकता है जिससे अंततः राज्य के लोगों को लाभ होगा।
इस तरह के विश्वविद्यालयों को अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भारत के साथ-साथ विश्व के अन्य देशों के कुछ प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग करना चाहिए। मुख्य रूप से अकादमिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए भी विश्वविद्यालयों को उद्योग और स्थानीय संस्थानों के साथ संबंध विकसित करने होंगे ताकि उस क्षेत्र की विशिष्ट समस्याओं के अभिनव समाधान ढ़ूंढ़े जा सकें। दूसरे शब्दों में, विश्व स्तरीय विचार रखें लेकिन स्थानीय रूप से कार्य करें।
अंत में, विश्वविद्यालयों को पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों में अनुसंधान को प्रोत्साहित करना होगा, जैसे कि जैविक खेती और औषधीय प्रणाली - सिक्किम के मामले में सोवा रिग्पा। विचार यह होना चाहिए कि हमारी बौद्धिक पूंजी को फिर से खोजा जाए और सामूहिक रूप से विरासत में मिले ज्ञान के आधार को व्यवस्थित और वैज्ञानिक रूप से बढ़ाया जाए।
इस संबंध में, यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि जैविक खेती में अग्रणी सिक्किम ने अपने सभी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में इस विषय पर व्यावसायिक प्रशिक्षण देना आरंभ किया है। मुझे जानकारी दी गई है कि सिक्किम ने सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्राथमिक कक्षाओं की नई पाठ्यपुस्तकें भी प्रकाशित की हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान सुविधाओं को विकसित करने के साथ, सिक्किम शिक्षा को सतत विकास के लिए एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक बनाने में एक गति निर्धारक बन सकता है।
मुझे यह जानकर भी खुशी हो रही है कि राज्य सरकार पश्चिमी सिक्किम के चाकुंग में एक उत्कृष्टता विश्वविद्यालय स्थापित कर रही है और इसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस को समर्पित कर रही है। यह उत्कृष्टता विश्वविद्यालय पूर्वी हिमालय पर विशेष ध्यान देने के साथ देश के इस हिस्से के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के अलावा वनस्पतियों और जीवों, लोगों, उनकी संस्कृति और विरासत के बारे में एक ज्ञान का भंडार तैयार करेगा। इससे सिक्किम की प्राचीन विरासत जीवित रहेगी और आने वाली कई पीढ़ियों तक फलती-फूलती रहेगी। आजादी के 75वें वर्ष में जब पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है यह वास्तव में नेताजी को एक महान और उचित श्रद्धांजलि है।
बहनो और भाइयो,
कोविड-19 महामारी ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उथल-पुथल पैदा कर दी जब स्कूलों और कॉलेजों को लंबे समय के लिए बंद करना पड़ा, जिससे अचानक शिक्षा को मजबूरन पूरी तरह से ऑनलाइन करना पड़ा। सिक्किम राज्य, जिसका भूभाग कठिन है और नेटवर्क कनेक्टिविटी खराब है, को ऑनलाइन शिक्षा अपनाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, मुझे यह जानकर हर्ष हो रहा है कि राज्य ने अधिगम की कमी को पाटने के लिए ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की हैं और होमस्कूलिंग भी शुरू की है। मुझे यह जानकारी भी दी गई है कि राज्य ने अपने वरिष्ठ छात्रों के लिए एक समर्पित ऐप भी शुरू किया है और अपने शिक्षकों के लिए वर्चुअल रूप से प्रशिक्षण प्रदान किया है। ये वाकई सराहनीय प्रयास हैं।
अब, जब देश में 180 करोड़ से अधिक वैक्सीन खुराक दी जा चुकी हैं और कोविड -19 के मामलों में कमी आ रही है, कई शैक्षणिक संस्थान छात्रों को प्रत्यक्ष रूप से पढ़ाई करने के लिए बुला रहे हैं।
जैसे-जैसे हम विभिन्न प्रकार के हाइब्रिड मोड के माध्यम से अपनी कक्षाओं में वापस लौट रहे हैं- हमारे मौजूदा तंत्र पर विचार करना महत्वपूर्ण हो गया है। हमें उन अवसंरचनात्मक कमजोरियों को समझने का प्रयास करना होगा जो महामारी के दौरान स्पष्ट हो गई हैं और नए समाधान ढ़ूंढ़ने होंगे।
उदाहरण के लिए, शिक्षा का डिजिटल घटक बना रहेगा। हमें इसके लिए आवश्यक तकनीक - सस्ते इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, तीव्र इंटरनेट कनेक्टिविटी और ओपन-सोर्स डिजिटल पोर्टल, का लोकतंत्रीकरण करना होगा जिससे ग्रामीण छात्रों के लिए सीखने के अवसरों को अधिक सुलभ और किफायती बनाया जा सके। भारतीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री भी आरंभिक चरण में है। केंद्र और राज्य सरकारों को स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री के विकास को बढ़ावा देना चाहिए।
इसी प्रकार, इस विश्वव्यापी महामारी ने शिक्षा के एक प्रमुख पहलू- शारीरिक शिक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि पिछले वर्ष के दौरान बिना किसी शारीरिक गतिविधि या सामाजिक संपर्क के घरों में छात्रों के कैद रहने से उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ा है। अब जब हम ऑफ़लाइन कक्षाओं में वापस लौट रहे हैं, शिक्षकों और अभिभावकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्र पर्याप्त शारीरिक गतिविधियाँ करें। छात्रों को प्रकृति की गोद में कुछ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। हमें विश्वव्यापी महामारी के दौरान शिक्षा के अनुभव से प्राप्त इस महत्वपूर्ण सीख को लागू करना चाहिए।
महामारी ने हमें अचानक और अप्रत्याशित रूप से उत्पन्न परिस्थितियों के प्रति स्वयं के अनुकूलन का महत्व भी सिखाया है। यह हमारी शिक्षा प्रणाली में प्रतिबिंबित होना चाहिए, जो स्थिर नहीं रह सकता। हमें अपने पाठ्यक्रम का लगातार अद्यतनीकरण और उन्नयन करना चाहिए और नई चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने छात्रों के कौशल को बढ़ाना चाहिए। छात्रों को नवीनतम तकनीकी विकास, कार्यक्षेत्र संबंधी नई भूमिकाओं और बाजार की बदलती मांगों से अवगत कराया जाना चाहिए। पाठ्यक्रम भी परिवर्तनशील और लचीले होने चाहिए। विशेष रूप से उच्च शिक्षा के लिए, नवोन्मेष को आगे बढ़ने का पैमाना होना चाहिए।
बहनो और भाइयो,
सिक्किम स्पष्ट रूप से शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरित प्रयास कर रहा है और मैं आगामी वर्षों में इसकी सफलता की कामना करता हूं। देश के एनआईआरएफ (नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) में दर्ज शीर्ष 100 संस्थानों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के कम से कम 10 विश्वविद्यालयों को देखना मेरी हार्दिक इच्छा है। मेरा मानना है कि निकट भविष्य में यह संभव है और मैं सिक्किम को इस मामले में अगुवाई करने के लिए शुभकामनाएं देता हूं।
एक बार फिर मैं यह कहना चाहूंगा कि, मुझे इस विश्वविद्यालय की आधारशिला रखते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है। विश्वविद्यालय को उसके भावी प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं।

नमस्कार। जय हिन्द!”