11 अगस्त, 2020 को उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में अपने तीन वर्षों के कार्यकाल के वृतांत पर 'कनेक्टिंग, कम्युनिकेटिंग, चेंजिंग' नामक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वे

नई दिल्ली | अगस्त 11, 2020

मैं और राजनाथ जी एक ऐसी पीढ़ी से हैं, जो वास्तविक दुनिया में अधिक विश्वास करते हैं जबकि प्रकाश जी आभासी वास्तविकता को अधिक सहजता से स्वीकार करते हैं। जीवन में परिवर्तन शाश्वत है। आभासी वास्तविकता वर्तमान समय की सच्चाई के रूप में उभरी है और यह मेरे कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने पर एक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर आज के आयोजन में दिख रहा है कि इसमें शारीरिक रूप से बहुत कम लोग उपस्थित हैं। यह जीवन का नया सामान्य तरीका है क्योंकि हम सभी कोरोना वायरस के कारण लगाए गए प्रतिबंधों के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहे हैं।

2. जहां तक संभव हो पाता है मुझे लोगों के साथ और उनके बीच रहना पसंद है। मैंने अपने सार्वजनिक जीवन के चार दशक इसी प्रकार बिताए हैं जब तक कि इस वायरस और कोविड -19 महामारी के रूप में हमें इस नई वास्तविकता का सामना नहीं करना पड़ा।

3. ईमानदारी से कहूं तो इस साल 25 मार्च से परिरोध के शुरुआती दिन मेरे लिए आसान नहीं रहे। फिर, मैंने एक गहरी साँस ली और नई वास्तविकता का अहसास किया और आगे बढ़ने का रास्ता खोजने के लिए आंतरिक शक्ति का आह्वान किया। इसके परिणामस्वरूप मन को शांति मिली और इस नई सामान्य स्थिति को निर्धारित करने के लिए मन को पुनः तैयार हुआ था।

4. भारत के उपराष्ट्रपति और राज्य सभा के सभापति के रूप में मेरे प्रयासों और निष्कर्षों पर इस पुस्तक का आज का विमोचन इस कड़ी में तीसरा है। "कनेक्टिंग, कम्युनिकेटिंग एंड चेंजिंग" शीर्षक वाली यह पुस्तक मुख्य रूप से मेरे मिशन और निष्कर्षों के संदर्भ को परिभाषित करती है।

5. अगस्त, 2019 के बाद से पिछला एक साल पहले लगभग आठ महीनों के दौरान लोगों से मिलने के व्यस्त कार्यक्रमों और कोरोना के कारण आई असहज सुस्ती का मिश्रण रहा है। पहले चरण में प्रति माह लगभग 20 जन संपर्क कार्यक्रम होते थे। मैंने 70 से ज्यादा सार्वजनिक कार्यक्रमों में कई मुद्दों पर बात की और 14 दीक्षांत समारोहों को संबोधित किया। मेरे लक्षित समूह; किसान जो मेरे अत्यंत प्रिय हैं, युवा जिनमें छात्र शामिल हैं जो हमारे देश का भविष्य हैं, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ जो अनेक मुद्दों का समाधान करते हैं, प्रशासक, उद्योगपति और विदेश यात्राओं के दौरान भारतीय प्रवासी रहे हैं।

6. इन लक्षित समूहों के साथ जुड़ने और संवाद करने का मुख्य उद्देश्य उनके दृष्टिकोण को जानने के अलावा उनके साथ अपने अनुभवों, चिंताओं, अपने वैश्विक दृष्टिकोण और एक नए भारत के निर्माण के लिए आगे का रास्ता साझा करना था। वायरस के फैलने से पहले तक यह सब सुचारू रूप से चल रहा था।

7. इस साल मार्च के बाद, 'मिशन कनेक्ट' ने एक अलग आयाम हासिल कर लिया। बिना कोई यात्रा और भौतिक बैठकों के, आपस में जुड़े रहने का एकमात्र तरीका प्रौद्योगिकी का माध्यम था। लॉकडाउन के बाद शुरुआती हिचकिचाहट के बाद जैसे ही मैंने खुद से समझौता किया, मैं यह जानने के लिए उत्सुक था कि मेरे पुराने और दीर्घकालिक परिचित कोरोना के खतरे का सामना किस प्रकार कर रहे हैं। जैसे-जैसे ये पूछताछ फायदेमंद साबित हुई, मैंने मिशन को आगे बढ़ाया। मैंने स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय के साथियों, शिक्षकों, पिछले चार दशकों के सार्वजनिक जीवन में सहयोगियों, राज्य सभा के लगभग सभी सदस्यों सहित विधि निर्माताओं, मीडियाकर्मियों सहित 1600 से अधिक लोगों से संपर्क किया। यह बहुत ही सारगर्भित और फलदायक अनुभव रहा है।

8. जैसे-जैसे वायरल संक्रमणों का स्तर बढ़ता जा रहा था और झूठी एवं गलत सूचनाएं फैलती जा रही थीं, मैं इस वायरस, इसके प्रसार, इस बीमारी, इसकी रोकथाम और इसे दूर करने के लिए बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में सत्यापित और प्रामाणिक जानकारी साझा करने का इच्छुक था। मैं चाहता था कि लोगों में घबराहट पैदा न हो और इसके बजाय वे अपनी दैनिक आदतों में कुछ बदलाव करें। इस संबंध में सोशल मीडिया काम आया। मैंने इस साल अप्रैल से लगभग 350 ट्वीट और 55 फेसबुक पोस्ट किए। मैंने वायरस और महामारी के बारे में गहन अध्ययन के लिए उपलब्ध समय का अच्छा उपयोग किया। इससे मुझे प्रिंट और सोशल मीडिया दोनों के लिए काफी लेख लिखने में मदद मिली।

9. संक्षेप में, कोरोना वायरस के कारण हुए परिरोध ने मुझे पहले से अधिक मशगूल और व्यस्त रखा। उपराष्ट्रपति के रूप में इस मिशन कनेक्ट के परिणामों को वास्तव में परिमाणित किया जा सकता है क्योंकि ऐसा करने के कोई तरीका नहीं है।

10. मैं अब राज्य सभा के सभापति के रूप में अपनी भूमिका पर आता हूं और इस अपेक्षा के साथ आपसे यह जानने के लिए कुछ आंकड़े साझा करना चाहता हूँ कि क्या पिछले तीन वर्षों के दौरान क्या कुछ बदलाव आया है।

11. हमारी राजव्यवस्था में, कई मुद्दों पर सार्वजनिक संवाद अक्सर साक्ष्य पर आधारित नहीं होते हैं। यह राज्य सभा सहित संसद के कामकाज पर बहस पर भी लागू होता है। पिछले साल, मैंने 1952 में राज्य सभा के अस्तित्व में आने के बाद से इसके कामकाज का विश्लेषण शुरू किया है। इस तरह के पहले प्रयास से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं जैसे:

I. पिछले 68 वर्षों में, तत्कालीन सरकारों के पास राज्य सभा में 39 वर्षों तक बहुमत नहीं था, जिसमें पिछले 31 वर्षों का समय शामिल है। यह आँकड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि सदन की संरचना का इसके कामकाज पर असर पड़ता है;

ii. सरकारी विधेयकों को पारित करने में लगने वाला समय पिछले वर्षों में लगभग समान रहा है;

iii. हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में प्रश्नकाल सहित अन्य उपायों के माध्यम से कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने में लगने वाले समय में निराशाजनक गिरावट की प्रवृत्ति प्रदर्शित हुई है;

iv. सदन में विचार-विमर्श में लगने वाला समय 2004-14 के दौरान 28% की तुलना में अब सदन के कुल समय के 36% के रिकार्ड उच्च स्तर तक पहुँच गया है; और

v. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले 25 वर्षों में सदन की उत्पादकता में लगातार गिरावट आई है। इस घटती उत्पादकता को और स्पष्ट करने के लिए, राज्य सभा ने पिछले 20 वर्षों के दौरान 1999 में केवल एक बार 100% की वार्षिक उत्पादकता हासिल की है।

12. 19 वर्षों तक राज्य सभा के सदस्य के रूप में, मुझे इसकी सीमाओं और सदन के बड़े तबको की लगातार व्यवधानों पर कुंठाओं के बारे में पता है। सभापति के रूप में, मैंने पिछले तीन वर्षों में समूहों और अलग अलग व्यक्ति सहित सभी संबंधितों तक संपर्क के विभिन्न तरीकों को अपनाकर इस स्थिति में बदलाव लाने का प्रयास किया।

13. राज्य सभा के सभापति का पद संभालने के बाद से, मैंने 244वें सत्र से शुरू करके अभी तक आठ सत्रों की अध्यक्षता की है। इस अवधि के दौरान सदन की औसत उत्पादकता 65.50% रही है।

14. सत्र-वार, पिछले आठ सत्रों में से चार सत्रों में अच्छी उत्पादकता दिखी है। 246 वें सत्र के दौरान यह 73%; 249 वें सत्र के दौरान 104%; 250 वें ऐतिहासिक सत्र के दौरान 99% और पिछले 251 वें सत्र के दौरान 76% थी।

15. जैसा कि आप सभी जानते हैं, पिछले तीन वर्षों में, 2019 के आम चुनावों के चलते राज्य सभा में एक वर्ष के लिए कार्य प्रभावित रहा। इससे सदन के कामकाज पर प्रभाव पड़ा जो 245 वें सत्र में 28.90%, 247 वें सत्र के दौरान 27.30% और 248 वें सत्र के दौरान 6.80% की निम्न उत्पादकता से प्रदर्शित होता है। परिणामस्वरूप, राज्यसभा ने 2018 के दौरान वार्षिक औसत उत्पादकता 35.75% दर्ज की है जो अब तक की सबसे कम उत्पादकता है।

16. हालाँकि, मैं आशावादी बना रहा और अपने 'मिशन फॉर चेंज' पर कायम रहा। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सदन में 2019 के दौरान 78.42% की उत्पादकता रही , जो 2010 के बाद से सबसे अच्छी रही है। पिछले तीन सत्रों के दौरान लगातार उच्च उत्पादकता परिवर्तन का निश्चित सूचक है।

17. पिछले तीन वर्षों के दौरान, राज्य सभा ने कुल 93 विधेयकों को पारित किया, जिसमें कई दूरगामी प्रभाव वाले विधेयक भी शामिल थे। गत तीन सत्रों के दौरान 60 विधेयक पारित किए गए जो कुल विधेयकों का 65 प्रतिशत है। यह बेहतर विधायी परिणाम के रूप में दृष्टिगोचर परिवर्तन को और आगे बढ़ने में सहायक है।

18. राज्य सभा की आठ विभाग संबंधित स्थायी समितियों की कार्यप्रणाली मेरी चिंता का एक अन्य विषय रहा है। मैंने अपनी चिंता को उन समितियों के अध्यक्षों और विभिन्न दलों के नेताओं के साथ साझा किया है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इन समितियों की बैठकों में औसतन उपस्थिति 2019-20 के दौरान पहली बार 50 प्रतिशत के स्तर से अधिक रही है। यह पिछले दो वर्षों के लिए 42.90 प्रतिशत की औसत उपस्थिति की तुलना में 50.73 प्रतिशत रही है। इसके अतिरिक्त, गणपूर्ति के बिना आयोजित होने वाली बैठकों की संख्या 2018-19 के दौरान 38.77 प्रतिशत से घटकर 2019-20 के दौरान 10.20 प्रतिशत रह गई है। इस अवधि के दौरान 50 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति वाली बैठकों की संख्या 14.28 प्रतिशत से बढ़कर 51.02 प्रतिशत हो गई है। यह उस परिवर्तन के दौर की एक और पुष्टि है, जिसका मैं उल्लेख कर रहा था।

मित्रों !

19. राज्य सभा की आवश्यकता को लेकर संविधान सभा में व्यक्त की गई आशंकाओं को नकारते हुए, इस महत्ती संस्थान ने पिछले सात दशकों के दौरान देश की कायापलट के लिए विधान बनाने में एक सृजनात्मक सहभागी के तौर पर कार्य किया है। इस भावना के अनुरूप, सदन की संरचना और दलीय स्थितियों के बावजूद, राज्य सभा ने हाल ही में तीन तलाक विधेयक, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक और नागरिकता (संशोधन) विधेयक जैसे कुछ प्रमुख विधेयकों को पारित किया है। सभा में कुछ गुणवत्तापरक वाद-विवाद और चर्चाएं भी हुई हैं।

20. परिवर्तनों के इस दौर के मध्य, मुझे ज्ञात है कि पिछले आठ सत्रों के दौरान, व्यवधान के कारण सदन के मूल्यवान कार्यात्मक समय का लगभग एक तिहाई भाग नष्ट हुआI सामूहिक रूप से, सदन के सभी वर्गों को इस व्यवधानकारी भाग को कम करने की आवश्यकता है।

21. राज्यसभा के कामकाज में जो भी बदलाव परिलक्षित हुए हैं, वह विभिन्न दलों के नेताओं और सदस्यों द्वारा प्रदर्शित सूझबूझ और सहयोग के परिणामस्वरूप हुआ। मैं इसके लिए उन सभी की प्रशंसा करता हूँ एवं उनसे और भी अधिक सहयोग करने का आग्रह करता हूं। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हमारी संसद और विधानसभाएं रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए वाद-विवाद के मानकों और गुणवत्ता को बढ़ाकर और अधिक जीवंत और मजबूत बनेंI

22. हम 2022 में अपने राष्ट्र की आजादी के 75 साल का जश्न मनाने वाले हैं, ऐसे में हम सभी को महात्मा गांधी और अन्य नेताओं द्वारा प्रतिपादित स्वतंत्रता संग्राम के प्रेरक आदर्शों का स्मरण करने की जरूरत है। अपनी जन्मजात क्षमता और समर्थता को ध्यान में रखते हुए हमारे राष्ट्र को वैश्विक नेतृत्व में सबसे आगे रखने के लिए अपना सर्वोत्तम करने में विधायिकाओं सहित सभी व्यक्ति और संस्थान कृतसंकल्प होंगे।

23. पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली विभिन्न बाधाओं को दूर करने के अलावा शासन की कार्यप्रणाली, नवाचार और उद्यमशीलता को बेहतर बनाने के लिए कई पहल की हैं। विज्ञान, अनुसंधान और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के माध्यम से एक ज्ञानपूर्ण समाज के निर्माण पर अधिक जोर दिया जा रहा है। देश के युवाओं को और अधिक आक्रामक रूप से विकासात्मक पथ से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, जबकि हमारे वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को नवाचारों और उत्कृष्ट अवधारणाओं और समाधानों के साथ आगे आना चाहिए ताकि जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान किया जा सके । उन्हें लोगों के जीवन को और अधिक आरामदायक बनाने पर ध्यान देना चाहिए। विज्ञान का उपयोग कृषि को और अधिक उत्पादक बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी किया जाना चाहिए।

नई शिक्षा नीति को लागू करने से शिक्षा में सुधार के द्वारा एक नए भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। शिक्षा, राष्ट्र निर्माण की नींव है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश के बच्चे और युवा भारतीय लोकाचार से गहन रूप से जुड़े रहें और अधिक से अधिक भारतीय भाषाएं विशेष रूप से मातृभाषा सीखें एवं इसके साथ-साथ उन्हें वैश्विक नागरिक भी बनना चाहिए।

भाषा को समावेशी विकास का उत्प्रेरक बनना चाहिए। भारत में हम भाग्यशाली हैं कि एक महान भाषायी परंपरा के उत्तराधिकारी हैं। हमारा देश भाषाओं का समृद्ध खजाना है। हमारा देश एक ऐसा देश है जो अपनी असाधारण भाषायी और सांस्कृतिक विविधता के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है। कई भाषाओं की बहुलता और सह-अस्तित्व, हमारे देश में रंग और जीवंतता को बढ़ाते हैं और इसे अद्वितीय बनाते हैं। हमारी भाषाएं हमारे सामूहिक ज्ञान और बुद्धिमता का भंडार हैं जो हमने अपनी जीवंत सभ्यता की लंबी यात्रा के दौरान हासिल की हैं। हमें अपनी भाषाओं और संस्कृति को संरक्षित करने की आवश्यकता है। हमें अपने स्कूलों में एक ऐसे पाठ्यक्रम की शुरुआत करनी चाहिए जिसमें शिक्षार्थियों के लिए शिक्षा प्रदान का माध्यम कम से कम प्राथमिक स्तर पर उनकी मातृभाषा का हो, जैसा कि नई शिक्षा नीति में सुझाया गया है।

24. हमें अपने द्वारा निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचने की कोशिश में नए जोश के साथ काम करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि विभिन्न संस्थान अपने कार्यों के निर्वहन में अधिक मजबूत और प्रभावी बनें। 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के अलावा सरकार द्वारा 2022 के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से गरीबी, अशिक्षा, असमानता, लिंग भेदभाव, भ्रष्टाचार और अन्य सभी सामाजिक बुराइयों को जल्द से जल्द समाप्त किया जाएगा। शहरी-ग्रामीण विभाजन को समाप्त करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास का लाभ सभी तक पहुँचे। आइए हम कड़ी मेहनत से जीते हुए स्वराज को सर्वसमावेशी सु-राज (सुशासन) में परिवर्तित करें।

25. वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में, यह अपने विभिन्न सहायक स्तंभों पर निर्मित आर्थिक शक्ति ही है जो वैश्विक स्तर पर घटनाओं को प्रभावित करने के लिए अवसर और आवाज प्रदान करती है। हमारे देश को राष्ट्र मंडल में अपना उचित स्थान प्राप्त करने के लिए अपनी पूर्ण आर्थिक क्षमता का उपयोग करना चाहिए। कोविड महामारी के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान की जल्द से जल्द उच्च विकास दर प्राप्त करते हुए भरपाई करनी होगी जिसके लिए संकल्प और एकजुट प्रयास की आवश्यकता है।

26. इस अवसर पर, मैं विनम्रतापूर्वक कहना चाहूंगा कि पिछले तीन वर्षों में मेरे ‘मिशन कनेक्ट एंड कम्युनिकेट'का उद्देश्य इस ‘परिवर्तन' को साकार करना रहा हैI हमें अधिक सकारात्मक रवैया अपनाने और देश को आर्थिक रूप से मजबूत, स्थिर और सुरक्षित बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है। आज, भारत एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी चरण में है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी के असाधारण नेतृत्व के कारण, देश एक टीम के रूप में समावेशी और सतत विकास की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। यदि हम यथास्थिति बनाए रखें और एक साथ मिलकर काम करें, तो हम श्रेष्ठ भारत, समृद्ध भारत, स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत और आत्म निर्भर भारत का सपना साकार कर पाएंगे जो हम सभी सामूहिक रूप से देख रहे हैं।

27. मैंने आज जब अपने कार्यालय का तीसरा महत्वपूर्ण वर्ष पूरा किया है, मैं उत्सुकता से सामान्य स्थिति के लौटने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ ताकि मैं लोगों के साथ बातचीत और मेलजोल की अपनी पसंदीदा गतिविधि को फिर से शुरू कर सकूं। आराम मुझे व्याकुल कर देता है। जब मैं विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से किसानों, युवाओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवा अधिकारियों और उद्यमियों से मिलता हूं, तो मैं खुद को ऊर्जावान और जोशपूर्ण महसूस करता हूं। जब तक स्थिति में सुधार नहीं हो जाता, तब तक हम सभी मास्क पहनने और सामाजिक दूरी का पालन करने जैसी सावधानियां रखें ।

मैं राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविंद जी को उनकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद देना चाहूंगा। मैं श्री राजनाथ जी और श्री जावड़ेकर जी को भी इस अवसर पर हमारे साथ उपस्थित होने के लिए धन्यवाद देता हूं। मैं सूचना और प्रसारण मंत्रालय, विशेष रूप से प्रकाशन विभाग द्वारा इस पुस्तक के प्रकाशन के किए गए प्रयासों की सराहना करता हूं।

धन्यवाद!