10 मार्च, 2022 को आईजोल, मिजोरम विधान सभा में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का संबोधन

आईजोल | मार्च 10, 2022

“मुझे आज यहां आप सभी के बीच, इस महती सभा जो कि मिजोरम के लोगों और इस सुंदर राज्य के लिए सर्वोच्च विधि निर्माणकारी संस्था है और वास्तव में हमारे लोकतांत्रिक सिद्धांतों और लोकाचार की प्रतीक है, में आपसे मिलकर और आपको संबोधित करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।
मैं विधान सभा के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री, मंत्रियों और मिजोरम विधान सभा के सभी सदस्यों को मुझे यह अवसर देने के लिए धन्यवाद देता हूं।
सबसे पहले, मैं मिजोरम के लोगों को अपनी बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। मुझे बताया गया है कि इस वर्ष मिजोरम विधान सभा की 50वीं वर्षगांठ है और मई माह में स्वर्ण जयंती समारोह आयोजित किया जाएगा।
  मैं इस ऐतिहासिक अवसर पर इस महती सभा के सभी पूर्व और वर्तमान सदस्यों को बधाई देता हूं। यह सुखद संयोग है कि इस वर्ष हम एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में विकास का 75वां वर्ष भी मना रहे हैं। आपकी विधानसभा का स्वर्ण महोत्सव और देश की आजादी का अमृत महोत्सव भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में उल्लेखनीय प्रगति के जश्न का अवसर है। 50 वर्ष पहले, मिजोरम एक अलग इकाई बना और एक संघ राज्य क्षेत्र के रूप में अपनी यात्रा शुरू की और बाद में 20 फरवरी 1987 को 23 वां राज्य बनकर भारत संघ का पूर्ण राज्य बन गया।
जिस तरह से मिजोरम ने शांतिपूर्ण चुनावी प्रक्रियाओं, विधानसभा में विधायकों के शालीन आचरण और पिछले पांच दशकों में निरंतर, समावेशी विकास के प्रयासों से हमारे देश की लोकतांत्रिक जड़ों को मजबूत किया है, उससे मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई।
हमें विधि निर्माणकारी निकायों के उस उच्च स्थान को पहचानने की जरूरत है जो लोगों की धारणा में प्रचलित है। यह वास्तव में एक पवित्र स्थान है जहां लोगों के विचार अभिव्यक्त होते हैं और सुने जाते हैं, जहां उनकी आशाओं और आशंकाओं पर चर्चा होती है, जहां विधियों जो उनका संरक्षण करती हैं, उनकी प्रगति को बढ़ावा देती हैं और तीव्र राष्ट्रीय विकास को सक्षम करती हैं, का निर्माण किया जाता है।
यह जानकर प्रसन्नता होती है कि विधान सभा के सत्र अत्यंत अनुशासन, कर्मठता और शालीनता के साथ आयोजित किए जाते हैं। आपने वास्तव में उस विश्वास, आशाओं और आकांक्षाओं को बरकरार रखा है जो लोगों ने आप पर अपने प्रतिनिधियों के रूप में जताया है। मैं आप सभी को उच्च मानदंड जिनका अन्य राज्य विधानमंडल और यहां तक कि संसद भी अनुकरण कर सकती है, को स्थापित करने के लिए बधाई देता हूं ।
मिजोरम ने संवाद की शक्ति और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान जो लोकतंत्र में बहुत जरूरी है, का प्रदर्शन किया है। 1986 में भारत सरकार, मिजोरम सरकार और मिजो नेशनल फ्रंट के बीच ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने से दो दशकों से अधिक की अशांति और संघर्ष की समाप्ति हुई और शांति तथा प्रगति की शुरुआत हुई। इस शांति समझौते ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी बुनियाद पर उत्तर पूर्वी क्षेत्र के अन्य हिस्सों में इसी तरह के शांति समझौते एक वास्तविकता बन गए हैं।
 आपको गर्व होना चाहिए कि मिजोरम की आज न केवल देश के सबसे शांतिपूर्ण राज्यों में से एक के रूप में गिनती की जाती है, बल्कि यह राज्य असाधारण उत्साह के साथ विकास की यात्रा पर भी निकल पड़ा है। आखिरकार हमारे संविधान निर्माताओं ने यही सपना देखा था। वे चाहते थे कि हमारे देश का शासन लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी हो और शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से मतभेदों को सुलझाए।
मैं मिजोरम के लोगों को उनकी समग्र भागीदारी के लिए बधाई देता हूं जिससे राजनीतिक प्रक्रिया को एक असाधारण गति मिली, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में शांति और व्यवस्था की बहाली हुई।
यह सर्वथा उल्लेखनीय है कि आपके राज्य में 1987 के पहले राज्य विधानसभा चुनावों से लेकर हाल के 2018 के चुनावों तक शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव हुए हैं। गौरतलब है कि मुझे बताया गया है कि मिजोरम के इतिहास में कभी भी बल-प्रयोग या बूथ कैप्चरिंग की एक भी घटना नहीं हुई है।
मुझे यह जानकर बहुत खुशी हो रही है कि आपके राज्य ने जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को भी मजबूत करने की सराहनीय पहल की है। माननीय राज्यपाल डा. हरि बाबू कंभमपति ने मुझे बताया है कि राज्य में चर्च, गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी के साथ शांतिपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण वातावरण में स्थानीय स्तर पर नियमित चुनाव हुए हैं।
यह वास्तव में हमारे देश के लोकतांत्रिक लोकाचार की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित लोगों के चरित्र के प्रति एक सम्मान की बात है।
मिजोरम का मेरे दिल में एक विशेष स्थान है - इसका समृद्ध इतिहास और शानदार सांस्कृतिक विविधता, इसकी ढ़लानयुक्त पहाड़ियां, झीलें और नदियां, और अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता हमेशा मेरे लिए स्थायी आकर्षण का केंद्र रही हैं। यह वास्तव में प्रशंसनीय है कि आपने सदियों से जातीय और सांस्कृतिक परंपराओं के इस आकर्षक मोज़ेक को सावधानीपूर्वक संपोषित और संरक्षित किया है। गर्मजोशी, उदारता, नम्रता, दया और करुणा मिज़ो लोगों की मूल और प्रिय विशेषताएं हैं।
जब मैं उत्तर पूर्वी क्षेत्र का दौरा करता हूं तो मैं बहुत उत्साहित और प्रेरित महसूस करता हूं। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर इस क्षेत्र की ताकत और संभावनाओं तथा यहां मौजूद विशाल सामूहिक क्षमता के बारे में बात करते हैं। वास्तव में, आठ राज्य अष्ट लक्ष्मी हैं जैसा कि कुछ लोग इन्हें कहते हैं, हमारे महान राष्ट्र का गौरव हैं। प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में एक्ट ईस्ट नीति की घोषणा करते हुए रेखांकित किया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र इसका आधार होगा जिसके तहत यह क्षेत्र साझा लाभों के लिए एक प्रभावी विकास इंजन के रूप में उभरेगा। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि संस्कृति, वाणिज्य, कनेक्टिविटी और क्षमता निर्माण इस नीति को आगे बढ़ाएंगे।
मिजोरम पूर्व और दक्षिण में म्यांमार और पश्चिम में बांग्लादेश के बीच स्थित होने के कारण हमारे महान राष्ट्र के उत्तर-पूर्वी कोने में रणनीतिक महत्व का क्षेत्र है। भारत सरकार की नवीकृत एक्ट ईस्ट नीति के तहत, मिजोरम महत्वपूर्ण स्थान बनने के लिए तैयार है क्योंकि यह इस क्षेत्र के साथ-साथ देश में दक्षिण पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में काम करेगा। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में मिजोरम महत्वपूर्ण कलादान मल्टी मॉडल परियोजना के माध्यम से क्षेत्र की प्रगति और विकास का एक आधार बन जाएगा, जिसके पूरा होने पर न केवल मिजोरम बल्कि पूरे उत्तर पूर्वी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बदल जाएगी और आर्थिक विकास और संवृद्धि में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
भले ही मिजोरम में अन्य उत्तर पूर्वी राज्यों की तुलना में विकास प्रक्रिया देरी से शुरू हुई थी परन्तु मुझे यह देखकर अत्यंत खुशी हो रही है कि इस महत्वपूर्ण राज्य द्वारा कई अवसंरचना परियोजनाओं को पूरा करने के साथ सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। इस प्रकार का परिवर्तन पुनरुत्थान का स्पष्ट प्रमाण है, जिसे मैंने पहले 'एनईआर इन एनईआर' कहा था जिसका अर्थ है 'पूर्वोत्तर क्षेत्र में पुनरुत्थान का नया युग'।
कोविड-19 महामारी ने हमारे देश की ताकत और धैर्य की परीक्षा ली है। मुझे बताया गया है कि मिजोरम सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक है। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि मिजोरम समुदायों, चर्चों और समुदाय-आधारित संगठनों के अथक प्रयासों के कारण महामारी से प्रभावी ढंग से लड़ने में सक्षम रहा है। मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में मिजो नैतिक आचारण और जीवन संहिता - 'तल्वमंगैहना' पर आधारित यह अनूठा मॉडल मिजोरम की महामारी के खिलाफ लड़ाई का मंत्र रहा है। सामूहिक प्रयासों के तालमेल से स्पष्ट रूप से मृत्यु दर में कमी और अस्पतालों में मरीजों की भर्ती में कमी आई है।
मिजोरम ने विकास को जन-केंद्रित बनाने और लोगों को सकारात्मक बदलाव का सक्रिय कारक बनने के लिए सशक्त करने के सिद्धांत को मान्यता प्रदान करके लोकतंत्र के आवश्यक आयाम का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
एक प्रगतिशील राज्य का सबसे सच्चा मापदंड उसके लोगों का कल्याण और उनका विकास है। सरकार का यह प्रयास होना चाहिए कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे। मुझे राज्य सरकार के प्रमुख कार्यक्रम, सामाजिक-आर्थिक विकास कार्यक्रम (एसईडीपी), जिसका उद्देश्य समावेशी और जन-केंद्रित सामाजिक-आर्थिक विकास करना है, के बारे में जानकर खुशी हो रही है।
यह खुशी की बात है कि नवीनतम सतत विकास लक्ष्यों- एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2021 में, मिजोरम 2019-20 के सूचकांक में अपनी रैंकिंग में 21वें स्थान से सुधार करके 2020-21 के सूचकांक में 12वें स्थान पर पहुंच गया है। संसाधन और परिसंपत्ति, चाहे वह कृषि-वानिकी आधारित संसाधन, विशेष रूप से राज्य के बांस समृद्ध संसाधन, नदी संसाधन, अनुकूल मौसम हो, इनका हर संभव तरीके से उपयोग किया जाना चाहिए ताकि सतत विकास को एक वास्तविकता बनाया जा सके। सक्षम मुख्यमंत्री के नेतृत्व में, मुझे विश्वास है कि राज्य सरकार अपने सतत विकास लक्ष्य हासिल करेगी। 
मिजोरम के प्रभावशाली विगत कार्य निष्पादन ने इसे अपने विकासात्मक प्रयासों के लिए केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियों से पर्याप्त समर्थन प्राप्त करने में सक्षम बनाया है। यह नव घोषित उत्तर-पूर्व के लिए प्रधानमंत्री विकास पहल (पीएम-डिवाइन) योजना के तहत दो परियोजनाओं हेतु इस साल केंद्रीय बजट में 600 करोड़ रुपये के धन के आवंटन से स्पष्ट है। पश्चिम की तरफ आइजोल बाय-पास (सिहमुई से मुआलुंगथु तक) के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये और राज्य के विभिन्न जिलों में विभिन्न स्थानों पर बांस लिंक सड़कों के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये की ये दो परियोजनाएं राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और अनेक लोगों को आजीविका प्रदान करने में काफी उपयोगी होंगी।
मैं आर्थिक विकास के लिए एक प्रमुख शर्त के रूप में भौतिक अवसंरचना, विशेष रूप से परिवहन अवसंरचना के अत्यन्त महत्व पर जोर देना चाहता हूं। मुझे पता है कि राज्य सरकार इस पर ध्यान दे रही है और मैं उन्हें अपने प्रयास जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करुंगा। मुझे खुशी है कि विश्व बैंक से प्राप्त धनराशि की सहायता से निर्मित चम्फाई-जोखावथर रोड, तलबुंग-कावरपुइछुआ और छुमखुम-चावंगटे रोड और एशियाई विकास बैंक के तहत निर्मित सेरछिप-बुआरपुई सड़क जैसी कुछ परियोजनाएं पिछले साल पूरी हुई हैं। मुझे बताया गया है कि आइजोल के पास बैराबी से सिहमुई तक ब्रॉड गेज लाइन का निर्माण अच्छी प्रगति कर रहा है। एक बार इसके पूरा हो जाने के बाद, इससे विकास के नए रास्ते खुलेंगे और प्रगति तथा विकास के एक नए युग की शुरुआत होगी।
बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ, आप कृषि और संबद्ध क्रियाकलापों जैसे कि बागवानी तथा पुष्पकृषि पर अपना ध्यान उचित रूप से केंद्रित कर रहे हैं। मिजोरम में, देश के कई हिस्सों की तरह, कृषि मुख्य व्यवसाय है और मिजोरम में मिम कुट, चापचर कुट और पावल कुट जैसे कुछ प्रमुख त्योहार कृषि क्रियाकलापों से जुड़े हुए हैं। समग्र समृद्धि लाने और खाद्य सुरक्षा प्राप्त करने के लिए कृषि का विकास आवश्यक है। सतत कृषि प्रथाओं को संवर्धित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, मिजोरम में बागवानी और पुष्पकृषि के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। उदाहरण के लिए, ऑर्किड और एन्थ्यूरियम न केवल किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान कर सकते हैं बल्कि मिजोरम को एक पसंदीदा पर्यटन स्थल भी बना सकते हैं। एंथुरियम महोत्सव और चापचर कुट का पारंपरिक त्योहार जिसे आपने पिछले सप्ताह मनाया था, भी पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।
 मिजोरम समृद्ध वन संसाधनों से संपन्न है जिन्हें परिरक्षित और संरक्षित करने की आवश्यकता है। हमें एक सुंदर ग्रह विरासत में मिला है और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त संसाधन छोड़ना हमारा नैतिक कर्तव्य है। इसके लिए प्रकृति की देखभाल करने, संसाधनों के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने और ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों जैसे जलविद्युत, सौर, पवन और बायोमास के उपयोग को बढ़ाने के दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
मिजोरम में बांस और इमारती लकड़ी के उत्पादों, कृषि-उद्योग, हथकरघा और हस्तशिल्प के साथ-साथ औषधीय और सुगंधित पौधों पर आधारित लघु उद्योगों के लिए काफी संभावनाएं हैं। विभिन्न डिजाइनों वाली सुंदर मिजो शॉल और पुआन मिजो महिलाओं के बुनाई कौशल को दर्शाते हैं।
आपका राज्य वास्तव में प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और आप शिक्षा तथा स्वास्थ्य के माध्यम से मानव संसाधनों को पोषित कर रहे हैं।
मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि मिजोरम ने वह साक्षरता दर हासिल कर ली है, जो राज्यों में केरल के बाद दूसरे स्थान पर है। अपने उच्च साक्षरता स्तर और अंग्रेजी भाषा कौशल के साथ, मिजोरम के युवाओं को एक विशिष्ट लाभ प्राप्त है। मानव संसाधनों का यह प्रतिभाशाली बड़ा पूल आज मिजोरम और राष्ट्र की विकास यात्रा की पटकथा लिख रहा है।     
एक ओर जहां आपने हमारे देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को लगातार मजबूत किया है और आदर्श लोकतांत्रिक परंपराओं का एक ज्वलंत उदाहरण स्थापित किया है, वहीं मेरा मानना है कि आगे सुधार के कुछ क्षेत्र हैं जिन पर आप ध्यान देंगे।
दो दिन पहले 8 मार्च को पूरी दुनिया ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया। यह इस बात को स्वीकार करने का अवसर था कि हमारी विकास नीति में महिलाओं को पूरी तरह से शामिल किया जाना चाहिए। जीवन के सभी क्षेत्रों में उनकी भागीदारी विकास को गति दे सकती है और हमारी विकास प्रक्रिया को और अधिक समावेशी बना सकती है। यह एक जीवंत लोकतंत्र के मूल सिद्धांत के अनुरूप भी है जहां प्रत्येक व्यक्ति को देश के विकास में योगदान करने और विकास करने के समान अवसर मिलते हैं।
          एक मुद्दा जिस पर मैं ध्यान दिलाना चाहता हूं, वह है हमारे देश के विधानमंडलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व। इस क्षेत्र के सांस्कृतिक लोकाचार को देखते हुए आमतौर पर यह माना जाता है कि महिलाओं को इस क्षेत्र के सामाजिक-सांस्कृतिक और राजनीतिक ढांचे में बेहतर स्थिति है। लेकिन मुझे लगता है कि पूर्वोत्तर राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है। जबकि मिजोरम और नागालैंड की विधानसभाओं में कोई महिला सदस्य नहीं हैं, मणिपुर विधानसभा में दो और त्रिपुरा विधानसभा में पांच महिला सदस्य हैं। इस क्षेत्र की आठ विधानसभाओं में कुल 498 सदस्यों में से केवल 20 महिला सदस्य हैं जो केवल 4% हैं। इस क्षेत्र में विधि निर्माण में अधिक महिला सदस्यों को शामिल करने का एक ठोस आधार है। यहां तक कि संसद में भी महिलाओं की संख्या केवल 11 प्रतिशत है।
मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इस विधानसभा में महिलाएं काफी संख्या में निर्वाचित होंगी।
आप इस बात की भी जांच कर सकते हैं कि यदि विधानसभा सत्रों की उचित समय पर योजना बनाई जाए ताकि हमें विचार-विमर्श, चर्चा, बहस और अंत में निर्णय लेने के लिए पर्याप्त समय मिल पाएगा। प्रत्येक सत्र में विधानमंडलों की अधिक बैठकें और अधिक रचनात्मक बहस होनी चाहिए। पूर्वोत्तर राज्यों की विधानसभाओं सहित विधानमंडलों को अधिक संख्याओं और लंबी अवधि के लिए बैठकें करने और कानून बनाने, कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने और व्यापक जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए खुद को समर्पित करने की आवश्यकता है।
पर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों और अनुकूल माहौल के साथ, घनिष्ठता से जुड़ा मिज़ो समाज देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक बनने की आकांक्षा रख सकता है। आज आपने जिस गर्मजोशी से स्वागत और रंगारंग स्वागत सत्कार किया, उससे मैं अभिभूत हूँ। मैं माननीय राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री, माननीय विधानसभाध्यक्ष, माननीय उप मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों तथा मिजोरम सरकार को धन्यवाद देता हूं। मिजोरम के माननीय राज्यपाल लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में साथ काम करने वाले मित्र और सहयोगी रहे हैं। उनके यहां रहते, मुझे मिजोरम की यात्रा करके बहुत खुशी हो रही है।
मैं एक बार फिर आप सभी को, इस महती सभा के माननीय सदस्यों और मिजोरम के सभी लोगों को अपने सुंदर राज्य को हमारे देश के सबसे समृद्ध और शांतिपूर्ण राज्यों में से एक बनाने के लिए आपके समर्पण, कड़ी मेहनत और आपके अथक प्रयासों के लिए बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ।
आइए हम इस क्षेत्र के साथ-साथ पूरे देश में अपने लोगों के जीवन में बदलाव लाने के अंतिम उद्देश्य के साथ एक-दूसरे की क्षमता का लाभ उठाते हुए टीम इंडिया के रूप में काम करना जारी रखें। जैसा कि हम स्वतंत्र भारत में विकास का 75वां वर्ष, आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, हमें अपने राष्ट्र की महान लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करने का निश्चय करना चाहिए, एक महा संकल्प करना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी राज्य विधानसभाएं और संसद नया भारत बनाने, जिसका हम सभी सपना देख रहे हैं, के लिए प्रभावी साधन बनें। हमारा लोकतंत्र दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है। आइए इसे सर्वश्रेष्ठ बनाएं।

जय हिन्द!”