09 नवंबर, 2017 को नई दिल्ली में भारतीय युवा शक्ति न्यास (बीवाईएसटी) की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मार्गदर्शन शिखर सम्मेलन में भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया अभिभाषण

नई दिल्ली | नवम्बर 9, 2017

"बी.वाई.एस.टी. की रजत जयंती के अवसर पर 'समावेशी प्रगति के लिए युवा ग्राम-उद्यमियों को मार्गदर्शन दिया जाना' विषय पर आयोजित 'अंतर्राष्ट्रीय मार्गदर्शन शिखर सम्मेलन' में आप सबके बीच आकर और विशेषकर देश भर से आए बुनियादी उद्यमियों, उद्योगों से जुड़े मार्गदर्शकों तथा उद्यमशील वातावरण के अन्य सभी समर्थकों को संबोधित करके मुझे खुशी हो रही है।

मुझे यह जानकर हर्ष हुआ कि सुश्री लक्ष्मी को उपेक्षित युवाओं के लिए भारत में युवा उद्यमिता कार्यक्रम शुरू करने के लिए महामहिम से प्रेरणा मिली थी। प्रतीत होता है कि इस कार्यक्रम की रूपरेखा यू.के. में प्रिंसेस ट्रस्ट कार्यक्रम के आधार पर बनाई गई है। हम इस बात की सराहना करते हैं कि महामहिम एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं तथा बीवाईएसटी द्वारा की गई प्रगति से अवगत बने रहे हैं, जिसका प्रमाण यह है कि विगत 25 वर्षों में बीवाईएसटी की यह उनकी पाँचवीं यात्रा है।

मुझे इस वर्ष के प्रारंभ में बीवाईएसटी द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित प्रारंभिक 'अंतर्राष्ट्रीय मार्गदर्शन शिखर सम्मेलन' में सम्मिलित होने और बीवाईएसटी के प्रमुख कार्यक्रम - मेंटरिंग इंडिया के प्रतीक चिन्ह (लोगो) का अनावरण करने का सुअवसर प्राप्त हुआ था।

आज के सम्मेलन में, विशेष तौर पर उपेक्षित समुदायों के युवाजनों तथा व्यवसाय के अनुभवी तथा विशेषज्ञों के "मानस मिलन" जिसमें अनुभव साझा किए जा रहे हैं और मूल्यवान सबकों का आदान-प्रदान किया जा रहा है, को देखकर प्रसन्नता हो रही है।  

मैं समझता हूँ कि बीवाईएसटी ऐसे ग्रामीण युवाओं को एक सुविधाकारी वातावरण देता है जिन्हें आधी-अधूरी शिक्षा मिली है, जिन्होंने जीवन में समय से पहले ही काम करना आरंभ कर दिया है और गरीबी रेखा के आसपास संघर्षशील हैं।

ग्रामीण भारत तेजी से बदल रहा है। ग्रामीण युवा के पास अच्छी जानकारी है, वह सीखने के लिए तत्पर है, उसकी भावना उद्यमशील है और प्राय: उसकी आकाक्षाएं वैश्विक भी हैं।  

ग्रामीण उद्यमिता के लिए एक सुविधायुक्त वातावरण का निर्माण करना अत्यंत आवश्यक है।

मौजूदा सरकार समावेशी प्रगति के लिए अथक रूप से कार्य कर रही है ताकि भारत को विश्व की सर्वाधिक तेजी से वृद्धि करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाया जा सके। स्टार्ट-अप इंडिया तथा अटल नवान्मेश मिशन जैसी नीतियां स्टार्ट-अप वातावरण को तैयार करने के लिए प्रयत्नशील हैं।

शहरी विकास मंत्री के रूप में मेरे पूर्व कार्यकाल में, हमने राष्ट्रीय नगरीय जीविका मिशन (एनयूएलएम) को संशोधित किया था। इसका उद्देश्य है नगरीय गरीब परिवारों तक लाभपूर्ण स्वरोजगार तथा कुशल श्रम रोजगार के अवसर पहुँचाकर उनकी गरीबी तथा दुर्दशा दूर की जाए। राष्ट्रीय नगरीय जीविका मिशन का मूलभूत विश्वास यह है कि गरीब उद्यमशील होते हैं और उनमें गरीबी से बाहर आने की सहज उत्कंठा होती है। चुनौती यह है कि उनकी क्षमताओं को उभारा जाए जिससे अर्थपूर्ण एवं स्थायी जीविका सृजित हो सके।

ऋण, प्रौद्योगिकी के लाभों को प्राप्त करने तथा बाजार तक पहुँच जैसी अड़चनों को दूर किया जाना आवश्यक है और मेरे विचार से, मार्गदर्शन का बीवाईएसटी प्रतिरूप उद्यमी संस्कृति के विकास में एक अहम भूमिका निभा सकता है।

विगत पच्चीस वर्षों के दौरान बीवाईएसटी ने ग्रामीण युवाओं को पंख दिए हैं और उनहें उद्यमी बनने में समर्थ बनाया है। यह ऐसा समूह है जिसकी आकांक्षाएं व्यापक हैं परंतु अवसर सीमित हैं। यह ऐसा समूह है जिसे मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्धन की आवश्यकता है।

मैं यह जानकर आह्लादित हूँ कि बीवाईएसटी उद्यमियों को मार्गदर्शन प्रदान करके एक अनोखी और अहम भूमिका निभा रहा है, फिर उन्हें चाहे मेट्रो शहरों में विशाल उद्योगों से स्पर्धा करनी हो अथवा असम, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे प्रदेशों के विषम ग्रामीण आंतरिक क्षेत्रों में जब मैं सुनता हूँ कि बीवाईएसटी के उद्यमी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीत रहे हैं, तो मैं देख सकता हूँ कि उन्होंने तमाम अवरोधों-अड़चनों को ध्वस्त किया है। वे प्रमुखत: अपने मार्गदर्शकों के निर्बाध सहयोग के कारण अपने व्यवसाय में उल्लेखनीय सफलता अर्जित कर रहे हैं।

मैं आज बीवाईएसटी रजत जयंती पुरस्कार के विजेजा उद्यमियों एवं मार्गदर्शकों को बधाई देता हूँ।

ये वास्तव में मार्गदर्शन की प्रभावशीलता के बेहतरीन नमूने हैं।

युवाजनों में उद्यमिता को प्रोत्साहन देना उनके उत्साह, ऊर्जा तथा आंकाक्षा को आर्थिक विकास में योगदान के लिए उपयोग में लाने का एक अहम तरीका है। ग्राम-उद्यमिता को बढ़ावा देने से महत्वाकांक्षी ग्रामीण भारत का कायाकल्प हो सकता है।

चुनौती है अधिकाधिक युवाओं को नौकरी की तलाश करने वाले बनने की अपेक्षा उद्यमी बनाने के लिए प्रोत्साहित करना। भारतीय युवा शक्ति न्यास (बीवाईएसटी) इस सोच का एक सफल उदाहरण है। ग्रामीण क्षेत्रों में तीव्रता से गरिमापूर्ण जीविका के और अधिक अवसर निर्मित किए जाने चाहिए।

विभिन्न सरकार द्वारा प्रायोजित उद्यमिता विकास कार्यक्रमों अर्थात ईडीपी से लाखों युवा निकलकर आते हैं। हालांकि उन्हें अपने कौशल का उपयोग करने, उनकी क्षमता को और आगे बढ़ाने तथा उसे पूर्ण करने के लिए उन्हें निरंतर सहयोग, मार्गदर्शन, परामर्श तथा समयोचित सलाह की आवश्यकता है। संक्षेप में कहें, तो उन्हें मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन के न होने से युवा अपने कौशल को सही दिशा में ले जाकर सफल उद्यमी बनने में फोकस और दिशा की कमी महसूस करते हैं। एक नए व्यवसाय के परिचालन के महत्वपूर्ण प्रारंभिक वर्षों में मार्गदर्शकों द्वारा दिया जाने वाला प्रोत्साकहन और अनुवर्ती सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सहायता बहुधा ही निरी विफलता और चमत्कारिक सफलता के बीच का अंतर होती है।

भारतीय युवा शक्ति न्यास (बीवाईएसटी) ने इसी स्तर पर पिरामिड के सबसे निचले पायदान' के उद्यमियों का मार्गदर्शन करने के अपने प्रमाणित मॉडल में श्रेष्ठता प्राप्त की है और उद्यमी सहायता प्रणाली की संपूर्ण श्रृंखला में एक अत्यावश्यक कड़ी उपलब्ध कराई है। अत: आज के शिखर सम्मेलन का विषय समुचित रूप से 'समावेशी प्रगति के लिए युवा ग्राम-उद्यमियों को मार्गदर्शन दिया जाना' रखा गया है। 

इस तरह की प्रणाली को आगे और विकसित करने के लिए निजी व सरकारी दोनों ही क्षेत्रों को एक उत्प्रेरक की भूमिका निभानी हागी। मैं सफल उद्यमियों के सृजन हेतु विशिष्ट मार्गदर्शक प्रयास को सहायता प्रदान करने के लिए नैगमिक सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत वित्तपोषण के व्यापक कार्य क्षेत्र और संभावित हस्तक्षेप की संकल्पना कर सकता हूँ।

अंत में, मैं मार्गदर्शन और अवलंबी सहायता के माध्यम से युवा उद्यमिता विकास की सेवा में 25 वर्ष पूर्ण करने के लिए बीवाईएसटी को बधाई देता हूँ। मैं कामना करता हूँ कि यह संगठन ग्रामीण उद्यमियों की एक नई पीढ़ी के सृजन हेतु अधिक से अधिक वर्षों तक अपना उत्कृष्ट कार्य जारी रख सके।

धन्यवाद। जय हिंद!