07 दिसंबर, 2019 को हैदराबाद में हृदय फाउंडेशन द्वारा सुविधा से वंचित बच्चों की 5000 हृदय शल्य चिकित्सा पूरा करने का जश्न मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

हैदराबाद | दिसम्बर 7, 2019

"प्रिय भाइयों और बहनों,

आज हृदय फाउंडेशन द्वारा गरीब बच्चों की 5000 हृदय सर्जरी पूरी होने के महत्वपूर्ण अवसर पर आप सबके बीच आकर मुझे प्रसन्नता हो रही है।

बच्चे हमारे देश के भविष्य हैं। वे हर दृष्टिकोण से स्वस्थ और परिपूर्ण बचपन के हकदार हैं।

मैं डॉ. गोपीचंद मन्नम और उनकी टीम की सराहना करता हूँ जिन्होंने हृदय रोगों के साथ जन्मे गरीब बच्चों को उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की महान पहल की है।

मित्रों,

जब हृदय रोगों की बात आती है तो भारत में इसकी स्थिति बहुत चिंताजनक है।

भारत में विश्व के लगभग 40 प्रतिशत हृदय रोगी हैं।

भारत में होने वाली सभी मौतों में से एक चौथाई मौतें हृदय रोगों के कारण होती हैं।

विगत तीन दशकों में हृदय रोगों से प्रभावित लोगों की संख्या लगभग दुगुनी हो गई है।

अध्ययनों से पता चला है कि 1990 में, भारत में होने वाली मौतों में से लगभग 15 प्रतिशत हृदय रोग के कारण हुई; वर्ष 2016 में यह संख्या बढ़कर 28 प्रतिशत हो गई।

मित्रों,

यदि हम समग्र रोगों की समस्या पर ध्यान दें तो भारत में संचारी रोगों से गैर-संचारी रोगों में चिंतनीय परिवर्तन हो रहा है।

जहां 1990 में संचारी, मातृत्व नवजात शिशु और पोषण संबंधी रोगों से होने वाली मृत्यु अधिक (53.6 प्रतिशत) थी, वहीं वर्ष 2016 में भारत में होने वाली ज्यादा मृत्यु (61.8 प्रतिशत) गैर-संचारी रोगों के कारण थी।

और सच्चाई यह है कि भारत में किसी अन्य गैर-संचारी रोग की तुलना में हृदय रोगों से अधिक लोगों की मृत्यु होती है।

एक अन्य चिंताजनक आंकड़ा यह है कि ग्रामीण भारत में हृदय रोगों से होने वाली मृत्यु शहरी भारत से अधिक हो गई है।

लैसेंट द्वारा किया गया अध्ययन दर्शाता है कि इस शताब्दी की शुरूआत में शहरी लोगों में कोरोनरी हृदय रोगों और हृदयाघातों से होने वाली मृत्यु ज्यादा आम बात थी। परंतु उसके बाद से स्थिति विपरीत हो गई है।

राज्यवार भी, 2016 में कार्डियो वैस्क्यूलर रोग का प्रसार केरल, पंजाब और तमिलनाडु में अधिक था अर्थात प्रति 100,000 में 5000 से अधिक था।

यह दर्शाता है कि भारत में संपन्न और अधिक शहरी राज्यों में हृदय रोग का खतरा अधिक है। हमें इन रोगों को और अधिक फैलने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।

प्रिय मित्रों,

भारत में बढ़ते गैर-संचारी रोगों के फैलने में योगदान देने वाले प्रमुख कारकों में से एक कारण बदलती जीवनशैली है।

आज, हममें से अधिकतर लोग कम शारीरिक गतिविधि और निष्क्रिय जीवनशैली वाला जीवन जी रहे हैं।

युवा पेशेवर क्यूबिकलों में लंबे समय तक बिना आराम के काम करते हैं।..........

वे शायद ही कभी धूप, ओस या सुबह की ताजी हवा महसूस कर पाते हों।

हम स्वयं को प्रकृति से दूर कर रहे हैं....... अपने शरीर और स्वास्थ्य को हानि पहुंचा रहे हैं।

इसलिए मेरे प्रिय मित्रों,

हमें प्रकृति के सान्निध्य में वापस जाना पड़ेगा। हमें ऐसी जीवन शैली अपनानी चाहिए जो स्वस्थ और संतुलित हो।

आपको स्वयं को फिट रखने के लिए कोई स्वस्थ शौक या खेल अपनाना चाहिए।

योगा भी एक उत्तम पद्धति है जो हमें पूर्वजों से समग्र शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए विरासत में मिली है।

मित्रों,

खानपान की भी प्रमुख भूमिका होती है। फास्ट फूड, जंक फूड और उच्च कॉलेस्ट्रॉल वाले भोजन का हमारे शरीर पर कुप्रभाव पड़ता है। हमें पुन: अपने पारंपरिक खानपान की पद्धति जो एक लंबे समय में विकसित हुई है और जो हमारी शारीरिक और जलवायु संबंधी आवश्यकताओं के अनुकूल हैं, को अपनाना होगा।

धूम्रपान एक अन्य बुराई है। तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए लगातार प्रयास करने की आवश्यकता है।

मित्रों,

हमें हमारे स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समग्र रूप से विचार करने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री ने 'फिट इंडिया' अभियान शुरू किया है। मैं इस अभियान को आगे ले जाने और अपने अस्पताल, विद्यालय, समाज और समुदाय में संदेश फैलाने के लिए सभी का आह्वान करता हूं।

सरकार भी स्वास्थ्य देखभाल को सभी की पहुंच में और किफायती बनाने के लिए अनेक कदम उठा रही है। इस दिशा में 'आयुष्मान भारत' विश्व की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है।

इस योजना के अंतर्गत 12.5 करोड़ से अधिक परिवार लाभान्वित हुए हैं।

यह खुशी की बात है कि आयुष्मान भारत के अंतर्गत की गई 10 सबसे उच्चस्तरीय तृतीयक उपचार प्रक्रियाओं में सबसे अधिक धनराशि स्टेंट सर्जरी पर व्यय हुई है - अब तक अस्पतालों में कुल 46.899 रोगी भर्ती हुए हैं।

इसके अलावा, सबसे उच्चस्तरीय 10 तृतीयक उपचार प्रक्रियाओं (व्यय की गई धनराशि के संदर्भ में) में से पांच विभिन्न हृदय रोगों से संबंधित है।

इस प्रकार, आयुष्मान भारत विभिन्न रोगों का उपचार कराने में लोगों की मदद करके देश को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जो पहले अधिक कीमतों के कारण उनकी पहुंच से बाहर था।

प्रधानमंत्री जन औषधि योजना रोगों के उपचार को किफायती बनाने के लिए एक अन्य प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य सभी, विशेषकर गरीबों को गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयाँ किफायती कीमतों पर उपलब्ध कराना है। देशभर में पांच हजार प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना केन्द्र संचालित हैं।

इस योजना के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने की बहुत आवश्यकता है। मैं चिकित्सा जगत और चिकित्सकों से आग्रह करता हूँ कि वे सस्ती जेनेरिक दवाइयां लिखें और उन्हें बढ़ावा दें। इससे गरीबों को बहुत राहत मिलेगी जिसकी उन्हें बहुत आवश्यकता है।

मित्रों,

सरकार के प्रयासों के अलावा, यह हम सबका कर्तव्य है कि हम जरूरतमंद लोगों की स्वस्थ रहने में मदद करें।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था:-

"स्वयं को पाने का सबसे उत्तम तरीका यह है कि स्वयं को दूसरों की सेवा में लगा दें।"

यह दु:खद है कि प्रतिवर्ष भारत में जन्म लेने वाले लगभग दो लाख बच्चे जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित होते हैं। इनमें से अधिकतर गरीब परिवारों में जन्म लेते हैं और 80 प्रतिशत बच्चे किसी भी तरह के चिकित्सीय उपचार के अभाव में मर जाते हैं।

मैं हृदय फाउंडेशन की सराहना करता हूं जो जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) से पीड़ित लोगों के जीवन में प्रकाश स्तंभ की तरह हैं।

मैं पुन: डॉ. गोपीचंद मन्नम और उनकी टीम की हृदय रोगों से बचाव और इलाज के लिए उनकी असाधारण प्रतिबद्धता और समर्पण के लिए सराहना करता हूँ।

मैं एक तरह के विचार रखने वाले अन्य उद्यमियों, पेशेवरों, उद्योगपतियों से आग्रह करता हूं कि वे इस प्रकार की पहलों को बढ़ावा दें और प्रत्येक बालक को खुशहाल जीवन जीने में सहायता प्रदान करें।

धन्यवाद।

जय हिन्द!"