06 मार्च, 2020 को नई दिल्ली में हिंदू बिजनेसलाइन चेंज मेकर अवार्ड्स 2020 समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | मार्च 6, 2020
"बहनों और भाइयों, आज हिंदू बिजनेसलाइन चेंजमेकर अवार्ड्स समारोह में आप लोगों के बीच उपस्थित होकर बड़ी खुशी हो रही है। हम यहां उन लोगों और संस्थानों की सराहना करने के लिए एकत्र हुए हैं जो समाजिक भलाई और सार्वजनिक भलाई के लिए बदलाव के उत्प्रेरक रहे हैं। मैं सभी विजेताओं को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई देता हूं। आपका काम मुझे याद दिलाता है कि हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने एक बार क्या कहा था - "विनम्र तरीके से, आप दुनिया को हिला सकते हैं।" प्रिय मित्रों, मानव सभ्यता आदि काल से विकसित होती रही है। हम बैलगाड़ियों के युग से बुलेट ट्रेन के युग में पहुंच चुके हैं। परिवर्तन एक अनवरत प्रक्रिया है। यह चारों ओर ... हर जगह हो रहा है। लेकिन इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए आप जैसे 'चेंजमेकर्स' की भूमिका जरूरी है। यह सुनिश्चित करना होगा कि इस परिवर्तन का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और गरीबों दलितों के जीवन का उत्थान हो। अंग्रेजी का 'चेंज' शब्द अपनी व्याख्या आप ही करता है। हम इसे इसके घटकों में विभाजित कर सकते हैं- सी स्पष्टता के लिए है। परिकल्पना की स्पष्टता। एच हृदय के लिए है। परियोजना में हृदय और आत्मा को स्थापित करना। ए - अनुकूलता के लिए है- स्थानीय परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए नवाचार की क्षमता। एन कभी न हार मानने वाले दृष्टिकोण के लिए है। जी मानवता की भलाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए है। ई- उत्कृष्टता के लिए है । एक बड़ी आबादी के लिए महत्व की कोई चीज बनाना। जब ये सभी विशेषताएँ एक साथ आती हैं, तो वे सकारात्मक चेंज लाती हैं। और सभी चेंजमेकर्स विशेषताएं मौजूद होती है। भारत में, हमारे पास चेंजमेकर्स के प्रेरणादायक उदाहरणों की कोई कमी नहीं है। कई विचारकों, दार्शनिकों, खिलाड़ियों, नवप्रवर्तकों, वैज्ञानिकों, संगीतकारों और कलाकारों ने दुनिया को देखने के हमारे दृष्टिकोण और जीवन जीने के तौर-तरीकों को बदल दिया है। चाणक्य ने भारतीय उपमहाद्वीप में अब तक के सबसे बड़े साम्राज्य की नींव डालकर इतिहास के क्रम को बदल दिया। भगवान बुद्ध, आदि शंकराचार्य, बसावेवरा, नारायण गुरु, स्वामी विवेकानंद और गुरु नानक जैसे सुधारक समाज में सांस्कृतिक पुनर्जागरण लाए। आधुनिक समय में, राष्ट्र के पिता, महात्मा गांधी, शायद सबसे महान चेंजमेकर थे, जो औपनिवेशिक उत्पीड़न के दमनकारी शासन से जूझ रहे राष्ट्र को दुनिया के सबसे जीवंत लोकतंत्र में बदल दिया। इसी प्रकार, लौह पुरुष - सरदार वल्लभभाई पटेल ने पांच सौ से अधिक रियासतों को एकजुट करके देश की नियति बदल दी। चाहे वह भारत की 'श्वेत क्रांति' के जनक डा. वर्गीज कुरियन हों, या आज के युवा स्टार्ट-अप उद्यमी हों, जो अपने नवोन्मेष और उद्यम के माध्यम से अरबों-डॉलर की कंपनियां बना चुके हैं, ये ऐसे व्यक्ति हैं जो अपने विचारों की शक्ति से अपने आसपास के समाज को बदलने में कामयाब रहे हैं। वे सभी अपने आप में चेंजमेकर हैं। एक तरह से सरकार भी एक चेंजमेकर है: वास्तव में, यह शायद सबसे प्रभावशाली चेंजमेकर है, जिसमें कुछ पैमाने पर बदलाव लाने की क्षमता है जो कुछ एजेंसियां उम्मीद कर सकती हैं। जब एक ग्रामीण क्षेत्र की गरीब महिला को रसोई गैस की सुविधा मिलती है, तो उसका जीवन बदल जाता है और उसे धुँआदार चूल्हे से खाना पकाने के अस्वास्थ्यकर प्रभावों से छुटकारा मिल जाता है। इसका जरा महिलाओं के जीवन पर प्रभाव की कल्पना करें। इसी तरह, जब किसी गांव के घर में शौचालय की सुविधा मिलती है, तो वह खुले में शौच की प्रथाओं और इसके परिणामस्वरूप होने वाली बीमारियों से मुक्त हो जाता है। सरकार के प्रमुख कार्यक्रम 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत अब तक दस करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए हैं। मुझे खुशी है कि इस साल के चेंजमेकर अवार्ड्स में श्री अरुणाचलम मुरूगनंदम - 'पैडमैन' शामिल हैं, जिन्होंने महिला स्वच्छता के प्रति समाज के नजरिये को बदल दिया। जब श्री अरुणाचलम ने महसूस किया कि उच्च लागत के कारण गरीब महिलाएँ सैनिटरी नैपकिन नहीं खरीद पा रही थी, तो उन्होंने एक साधारण मशीन का आविष्कार करके ग्रामीण महिलाओं के लिए मासिक धर्म के स्वास्थ्य में क्रांति ला दी, जिसका उपयोग वे सस्ते सैनिटरी पैड बनाने के लिए कर सकती हैं। मुझे बताया गया है कि श्री अरुणाचलम को इस कार्य में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उसने एक ऐसे विषय पर शोध करते हुए, जिसे समाज में वर्जित कार्य माना जाता था, लगभग अपना परिवार, अपना पैसा और समाज में से अपना स्थान खो दिया था। लेकिन उसकी अदम्य भावना ने मासिक धर्म संबंधी खराब स्वच्छता के कारण होने वाली प्रजनन संबंधी बीमारियों से बचाया है। मैं उनकी भावना और प्रतिबद्धता की प्रशंसा करता हूं। युवा चेंजमेकर्स प्रदीप मेवाड़ा ने गांवों में खुले में शौच को रोकने के लिए अभिनव तरीकों का इस्तेमाल किया है। वह बच्चों के एक समूह के साथ स्वच्छता की समस्या के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं। इन बच्चों द्वारा किए गए प्रयास सराहनीय हैं। मैं जेनरोबोटिक्स के युवा चेंजमेकर्स रशीद, निखिल, अरुण और विमल की भी हाथ से मैला ढोने की प्रथा को बदलने के लिए एक सस्ते रोबोट का आविष्कार करने के लिए सराहना करता हूं। युवा पेशेवरों के रूप में, सामाजिक भलाई के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की आपकी प्रतिबद्धता दूसरों के लिए अनुकरणीय है। डिजिटल प्रौद्योगिकियों में लोगों के जीवन में बेहतरी पाने की जबरदस्त संभावना है। मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि सरकार के ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) को डिजिटल परिवर्तन श्रेणी के तहत सुस्वीकृत किया गया है। जीईएम ने कारोबार करने में आसानी बढ़ाई है और भ्रष्टाचार को खत्म करके सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई है। इसी तरह, मैं वित्तीय बदलाव श्रेणी में अवॉर्ड जीतने पर इंडियास्टैक की तारीफ करता हूं। आपके काम के माध्यम से, आपने यूपीआई भीम ऐप और आधार जैसे परिवर्तनकारी विचारों की आधारशिला रखी है। बहनों और भाइयों, जब भारत अनुमानित रूप से 5-ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा, तो यह हर एक भारतीय के जीवन स्तर को उँचा ले जाएगा। ऐसे प्रत्येक मामले में, यह सरकार है जो उन परिवर्तनों को उत्प्रेरित करती है जो इन उद्देश्यों को प्राप्त कर सकते हैं। यह बदलाव के लिए बदलाव नहीं है। यह बदलाव जनता की भलाई के लिए एक ताकत है। आज दुनिया के देशों के सामने कई चुनौतियां हैं। उनमें से कुछ साझा चिंताएं हैं: जलवायु परिवर्तन - जो शायद एकमात्र परिवर्तन है जो हम नहीं चाहते हैं - जिसमें पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र, अर्थव्यवस्थाओं और आजीविका को भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता है। हाल ही में, कोरोना वायरस - जो दुनिया भर में तेजी से फैल रहा है - सभी देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। इन सभी चुनौतियों से निपटने के लिए हर जगह वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के सामूहिक ज्ञान की आवश्यकता होगी। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत में कुछ तीव्र बुद्धि वाले मस्तिष्क मानवता के समक्ष मौजूद समस्याओं के स्थायी समाधान खोजने में लगे हुए हैं। शायद उनमें से कई भविष्य में हिंदू बिजनेसलाइन चेंजमेकर पुरस्कार विजेता के रूप में उभरेंगे। यह एक विडंबना है कि हमारे कई चेंजमेकर्स गुमनाम नायक के रूप में रह रहे हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है। यदि आप हाल के वर्षों में पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची देखें, तो ऐसे कई गुमनाम नायकों को मान्यता दी गई है और उन्हें वह सम्मान दिया गया है जिसके वे हकदार हैं। आज हमने इनेबल इंडिया की श्रीमती शांति राघवन को सम्मानित किया है। यह जानना प्रेरणादायक है कि उनके संगठन ने हजारों दिव्यांग को कारपोरेट क्षेत्र में नौकरियां दिलवायी है। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि श्रीमती शांति का संगठन 'इनेबल इंडिया' व्यापक विकास और लोगों के कौशल पर ध्यान केंद्रित करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दिव्यांगजन उम्मीदवार कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम की चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी तरह समर्थ हों। दिव्यांगों के लिए कौशल, रोजगार और उद्यमिता के पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मैं इन गुमनाम नायकों को पहचाने और उनके सम्मान के लिए द हिंदू बिजनेसलाइन अवार्ड्स की निर्णायक समिति की सराहना करता हूं। ये गुमनाम नायक अपनी परिकल्पना, पहल और अभियान के साथ न केवल लोगों के जीवन को बदल रहे हैं, बल्कि इस प्रक्रिया में दुनिया को एक बेहतर स्थान भी बना रहे हैं। मैं अशोक फाउंडेशन और डेलॉयट के विशेषज्ञों के साथ-साथ इन पुरस्कारों के लिए सबसे योग्य उम्मीदवारों के चयन और सत्यापन में द हिंदू बिजनेसलाइन की सहायता करने के लिए नीति द्वारा दिए गए परामर्श की भी सराहना करता हूं। मुझे खुशी है कि द हिंदू बिजनेस लाइन आर्थिक और व्यावसायिक पत्रकारिता के क्षेत्र में एक मजबूत और विश्वसनीय आवाज बनकर उभरी है। अपनी बात समाप्त करने से पहले, मैं प्रतिष्ठित महिला एथलीट सुश्री दुती चंद को आज का चेंजमेकर ऑफ द ईयर पुरस्कार प्राप्त करने पर बधाई देता हूं। वह 100 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक और 2018 एशियाई खेलों में डबल रजत पदक विजेता हैं। 2019 में, वह विश्व विश्वविद्यालय के खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। प्रिय मित्रों, मैं जहां भी जाता हूं, मैं हमेशा युवाओं से खेल या योग करके शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए कहता हूं। वास्तव में, खेल हमारे स्कूल के पाठ्यक्रम का एक अभिन्न हिस्सा बनना चाहिए। सरकार ने इस दिशा में 'फिट इंडिया' आंदोलन भी शुरू किया है। मुझे उम्मीद है कि सुश्री दुती चंद जैसी हमारे खेल जगत की हस्तियां इस आंदोलन को आगे ले जाएंगी और लोगों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करेंगी। दूसरा 'चेंजमेकर ऑफ द ईयर' इसरो है। वास्तव में वर्ष 2019 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए सबसे अच्छे वर्षों में से एक था। इसरो ने न केवल चंद्रयान 2 के साथ अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी, बल्कि उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के साथ भी दिलचस्प संबंध स्थापित किया। इसरो ने वर्ष 2019 के दौरान 13 मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया और वाणिज्यिक आधार पर 50 विदेशी उपग्रहों का भी प्रक्षेपण किया। हमें मानवता के सामूहिक लाभ के लिए अंतरिक्ष का लाभ उठाना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि भारतीय समाज के हर वर्ग के लाभ के लिए इसरो इस तरह की कई और तकनीकों का विकास करता रहेगा। आप सभी को एक बार फिर से मेरी तरफ से भविष्य के प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएँ। धन्यवाद।

जय हिन्द!"