06 जुलाई, 2019 को नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव, श्री बी.के. अग्रवाल द्वारा लिखित लैंड रजिस्ट्रेशन, ग्लोबल प्रैक्टिस एंड लेसन्ज़ ऑफ इंडिया नामक पुस्तक का विमोचन करने के बाद सभा में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा द

नई दिल्ली | जुलाई 6, 2019

"सर्वप्रथम मैं श्री बी.के. अग्रवाल को भारतीय संदर्भ में भू-पंजीकरण प्रणाली पर उनके गहन दृष्टि वाले कार्य के लिए बधाई देना चाहता हूँ।

पुस्तक का शीर्षक "लैंड रजिस्ट्रेशन ग्लोबल प्रैक्टिसेज़ एंड लेशन्स फॉर इंडिया'' स्वयं-स्पष्टकारी है और इस विषय के महत्व को दर्शाता है। यह पुस्तक आम आदमी, विधि निर्माताओं और नीति-निर्माताओं - सभी के लिए समान महत्व की है।

यद्यपि भू-पंजीकरण प्रणालियों की दो मुख्य श्रेणियां हैं- विलेख पंजीकरण और स्वत्वाधिकार पंजीकरण, इस पुस्तक में भू- पंजीकरण प्रणालियों से संबंधित मुद्दों के सभी पहलुओं का उल्लेख किया गया है और इसमें हमारे देश तथा छह विकसित देशों - जर्मनी, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, फ्रांस और नीदरलैंड में प्रचलित प्रणालियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है।

हम सभी जानते हैं कि देश में किसान वर्ग के लोग अधिक हैं और भूमि विवाद विभिन्न स्तरों पर टकराव का एक आम कारण है। इस पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि भारतीय न्यायालयों में लंबित एक तिहाई मामले संपत्ति विवाद से संबंधित हैं।

हमारे देश में भूमि संबंधी कानून और पद्धतियां बहुत महत्वपूर्ण हैं। प्राचीन समय से, 'हाकिम' संस्कृति हमारी ग्रामीण आबादी के मानस पर हावी है। ऐसा मुख्य रूप से देश में प्रचलित कानूनों और पद्धतियों के बारे में जागरूकता की कमी के कारण है।

विशेष रूप से भूमि और राजस्व मामलों संबंधी कानून सदियों पुराने हैं और हमारे देश की मौजूदा स्थिति के अनुरूप इनमे समय-समय पर अपेक्षित संशोधनों की आवश्यकता रही है। इसके अलावा, तेजी से हो रहे शहरीकरण और भावी पीढ़ियों के लिए अधिक से अधिक भूमि हड़पने की लालसा अत्यधिक चिंता का विषय है और समय पर सुधारात्मक उपाय करके इसका समाधान करने की आवश्यकता है।

इस संदर्भ में, यह पुस्तक वास्तव में उपयोगी है और यह हमारे देश में भू-पंजीकरण और स्वत्वाधिकार अभिलेखों के अनुरक्षण के क्षेत्र में शोध की मौजूदा कमी को दूर करेगी।

भारत सरकार ने ऐसे अप्रचलित कानूनों को समाप्त करने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं जिनकी वर्तमान संदर्भ में कोई प्रासंगिकता नहीं है। स्वत्वाधिकार पंजीकरण के मुद्दे पर भी काफी विचार किया गया है।

जैसा कि लेखक ने उल्लेख किया है, भारत सरकार ने देश में निर्णायक स्वत्वाधिकार प्रणाली को अपनाने के लिए एक नीतिगत निर्णय लिया है, लेकिन राज्य विधिक प्रणाली में इतने बड़े बदलाव के लिए बहुत विश्वस्त नहीं है। परिणामस्वरूप, यद्यपि इस मुद्दे का विशेषज्ञों के प्रतिवेदनों और सरकार की नीतियों में प्राय: उल्लेख किया जाता है, वास्तव में कुछ नहीं हो रहा है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्यों को भू-अभिलेखों और भूमि सौदों से संबंधित प्रशासनिक और विधिक व्यवस्था में बड़े पैमाने पर बदलाव करने होंगे।

मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ नौकरशाह श्री बी.के. अग्रवाल, जो वर्तमान में हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत हैं, के इस विश्लेषणात्मक शोध कार्य को संकलित करने के कार्य की सराहना करता हूँ। उन्होंने देश में भूमि पंजीकरण प्रणाली में सुधार के लिए कुछ सिफारिशें भी की हैं।

लेखक ने, यह उल्लेख करते हुए कि भारतीय विलेख पंजीकरण प्रणाली में अधिकारों के अभिलेखन के साथ-साथ कई बेहतर बिंदु हैं, कहा है कि यदि रजिस्ट्रार को प्राथमिक तौर पर अंतरणकर्ता के स्वामित्व को सत्यापित करने की अनुमति दी जाती है, तो इसे अधिक विश्वसनीय बनाया जा सकता है।

श्री अग्रवाल को, उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट स्तर से लेकर केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव तक नौकरशाह के रूप में उनके व्यापक अनुभव के कारण, भूमि विवादों और प्रचलित पद्धतियों के बारे में व्यावहारिक ज्ञान है।

मेरा मानना है कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए पंजीकरण सहित भूमि मुद्दों से संबंधित कार्य करने वाले अधिकारियों और लोगों के बीच संपर्क को न्यूनतम होना चाहिए। सभी राज्यों और केंद्र को प्रक्रियाओं को सरल और पूरी तरह से पारदर्शी बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

मुझे पूरा यकीन है कि यह पुस्तक वास्तव में भूमि और संपत्ति से संबंधित विधि वृत्तिकों, भू-अभिलेख सुधारों हेतु प्रयासरत नीति-निर्माताओं और विधि के विद्यार्थियों, जिनका उद्देश्य भारतीय भू-पंजीकरण प्रणाली को समझना है, के लिए अत्यधिक सहायक होगी।

मैं पुस्तक प्रकाशित करने के लिए श्री अग्रवाल को एक बार पुन: बधाई देता हूं और पुस्तक की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद! जय हिन्द!"