06 अक्टूबर, 2019 को भुवनेश्वर, ओडिशा में 39वें विश्व कवि कांग्रेस के समापन सत्र में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

भुवनेश्वर, ओड़िशा | अक्टूबर 6, 2019

मैं आज यहाँ विश्व> कांग्रेस के समापन समारोह में विभिन्न देशों और भारत के सभी भागों से आए प्रतिभा-सम्पन्न और उत्साही कवियों के बीच उपस्थित होकर प्रसन्न हूँ ।

मैं कलिंग औद्योगिक प्रौद्योगिकी संस्थान (केआईआईटी) और कलिंग सामाजिक विज्ञान संस्थान (केआईएसएस) में आकर प्रसन्न हूँ। पूरे देश और विदेश के 27000 से अधिक विद्यार्थियों वाला यह संस्थान उत्तरोत्तर प्रगति कर रहा है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए इस अनेक अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कार और सराहना मिली है।

संस्थान के आदिवासी समुदाय के बच्चों को शिक्षित करने के समर्पित प्रयास भी वास्तव में उल्लेखनीय हैं।

मैं केआईआईटी को सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के प्रति अपने समर्पण के लिए 'स्टेटस ऑफ एमिनेंस' सम्मान प्राप्त करने के लिए बधाई देता हूँ। मैं इस अवसर पर केआईआईटी के प्रगतिशील संस्थापक श्री अच्युत सामंत को भी बधाई देता हूँ और उनकी सराहना करता हूँ। लाखों आदिवासी लोगों के जीवन को सुधारने और उसमें बदलाव लाने के लिए उनके अथक प्रयास वास्तव में सराहनीय हैं।

मैं भाईचारे और शांति को बढ़ावा देने के सर्वोतम माध्यम के रूप में कविता की परिकल्पना करने के लिए भी उनकी सराहना करता हूँ। उनके इस दृष्टिकोण के कारण ही हम यहाँ एकसाथ मिलकर विचारों,शब्दों, भाषाओं, लय और अर्थ का जश्न मना रहे हैं।

यह हमारे लिए अत्यंत गौरव की बात है कि इस वर्ष यह कांग्रेस भारत के सुदंर और ऐतिहासिक राज्य ओडिशा में हो रही है।

इस सम्मेलन की विषय वस्तुह "कविता के माध्यम से करुणा" ने मेरे हृदय को छू लिया है।

मेरा विश्वास है कि करुणा हम सभी की जन्म्जात भावना है, हमें केवल इसे महसूस करना है और चैतन्यस रूप से तब तक इसका अभ्यास करना चाहिए जब तक कि यह हमारी आदत न बन जाए और हमारे सारे कार्यों में अवचेतन रूप से करुणा, दया और सकारात्मकता न परिलक्षित हो । करुणा कविता की मूल भावना है।

आदि-काव्य, रामायण का पहला श्लोक 'मा निषाद' से शुरू होता है जो ऋषि वाल्मीकि का बहेलिये से पक्षी को जीवनदान देने का करुणापूर्ण आग्रह है। यह अमूल्य जीवन की हानि के प्रति उनका 'शोक' या उनकी निराशा ही है जो 'श्लोक' या कविता बन गई।

करुणा से करुणा उत्पउन्नी होती है।

यह अति महत्वपूर्ण विचार जब कविता के शक्तिशाली माध्यम द्वारा प्रसारित होता है तब वह विश्व में परिवर्तन लाने की क्षमता प्राप्त कर लेता है।

मैं उन सभी कवियों का स्वागत करता हूँ जो दुनियाभर से ओडिशा आए हैं। मुझे विश्वास है कि आप इस कांग्रेस और भारत में अपने अनुभवों की अद्भुत यादें लेकर जाएंगे।

मेरे प्रिय बहनों और भाइयों,

कविता मानवीय भावनाओं की बेहतरीन अभिव्यक्तियों में से एक है। यह सबसे गहरी अंतर्दृष्टि, भावनाओं की एक व्याीपक श्रृंखला को व्य्क्तं करती है और मानवीय अनुभव को चेतना के उच्चतम स्तर तक पहुंचाती है। तथापि कविता के मानवीय भावनाओं के आंतरिक ताने-बाने पर प्रभाव को पहचानना महत्वपूर्ण है । हम कैसे अनुभव करते हैं, हम कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और हम कैसे व्यवहार करते हैं- यह सब कुछ बहुत सीमा तक साहित्य और ललित कलाओं पर निर्भर करता है। साहित्यिक विधाओं में, कविता का विशेष रूप से गहरा प्रभाव पड़ता है।

कविता केवल अभिव्यक्ति नहीं है; यह ऐसी अभिव्यक्ति है जिसमें सौंदर्य है। कवि न केवल शब्दों से अपनी भावनाएँ अभिव्यक्त करते हैं बल्कि वे अपने शब्दों द्वारा छवियाँ बनाते हैं। वे तुकबंदी, लय-ताल और स्वर-माधुर्य से शब्दों में जीवन भरते हैं।

कविता गहन भावनाओं को अभिव्यक्त करती है, अद्भुत छवियाँ और सुंदर गीतात्मकता उत्पन्न करती है तथा सत्य और सौंदर्य को मिलाती है।

कविता के साथ भारत का संबंध इसकी सभ्यता जितना पुराना है। प्राचीन भारत में कविता का बहुत विकास हुआ है।

महान भारतीय महाकाव्यों रामायण और महाभारत को अब तक लिखे गए काव्य के बेहतरीन नमूनों में से एक माना जाता है।

वे अपने विषयों की भव्यता, असाधारण साहित्यिक ऊंचाइयों और संदेशों की गहराई के लिए न केवल भारत में, अपितु समूचे विश्व में विख्या त हैं।

इन महाकाव्यों को भारतीय परंपरा के भंडार और नीति, धर्म, राजनीति और नैतिक मूल्यों का ज्ञानकोश माना जाता है।

भारत की एक लंबी और शानदार काव्य परंपरा रही है और इसमें कालिदास, मीरा बाई, तुलसी दास, अमीर खुसरो, कबीर दास, सरोजिनी नायडु, सुब्रमनिया भारती, मिर्ज़ा गालिब और श्री रबीन्द्रनाथ टैगोर जैसे विद्वान शामिल हैं जिन्होंने अपनी अद्भुत काव्य प्रतिभा से सभी को मंत्रमुग्ध किया।

मैं स्मरण दिलाता हूँ कि मार्क ट्वेन ने भारत के बारे में कहा था कि -"भारत मानव जाति का पालना है, मानव संवाद की जन्मभूमि है, इतिहास की माता है, किवदंती की दादी है और परंपरा की पड़दादी है।

मेरे प्रिय बहनों और भाइयों,

मेरा विश्वास है कि एक प्रबुद्ध और स्वस्थ समाज का निर्माण करने के लिए कला और संस्कृति को बढ़ावा देना अति महत्वपूर्ण है।

कला समाज में रचनात्मकता का पोषण करती है। सृजनशील आवाज के बिना समाज निष्क्रिय हो जाएगा।

जीवविज्ञानियों ने तर्क दिया था कि मानव विकास में सृजनात्मकता का विकास सबसे महत्वपूर्ण कदम है और सृजनशील लोगों के बिना समाज आगे नहीं बढ़ सकता।

कलाकार जीवन को जीवंत बनाते हैं। कुछ कलाकार हमारे जीवन में बदलाव लाते हैं। वे हमारे दृष्टिकोण और विश्व के प्रति हमारी धारणा को बदल देते हैं ।

कलाकार प्राय: समाज की चेतना के पालक होते हैं। वे सतत रूप से बेतुकी और अतार्किक बातों पर सवाल उठाते हैं और समाज में सकारात्मक मूल्य भरने में सहायता करते हैं।

सामान्य सांस्कृतिक सूत्रों को साझा करने के द्वारा, कला हृदयों को एकजुट करती है। यह सुषुप्तर चारित्रिक विशेषताओं को सामने लाती है।

कविता मूल्योंि एवं ज्ञान का अंतर-पीढ़ीगत हस्तांततरण करने का एक शक्तिशाली माध्याम है। गीत और कविता पारंपरिक ज्ञान और नैतिक मूल्यों की सीख तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी मूल्यों को हस्तांतरित करने के लिए प्रयोग किए जाते रहे हैं। भारतीय परंपरा ने ज्ञान और यहां तक कि वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसारण के लिए कविता पर भरोसा किया है।

कविता में व्यवहार, मानसिकता और सामाजिक मान्यताएँ बदलने की सर्वाधिक क्षमता है। यदि हमें और अधिक सहानुभूतिपूर्ण विश्व चाहिए तो कविता इसका सबसे शक्तिशाली माध्यम हो सकती है।

प्रिय बहनों और भाइयों,

मैं इतने सारे कवियों के बीच आकार बहुत प्रसन्न हूँ। आप में से हर एक में प्रभाव डालने और विचारधारा का निर्माण करने की क्षमता है।

आप में विचारों, भावनाओं और प्रवृत्तियों को आकार देने की अनूठी क्षमता है। मुझे विश्वास है कि आप अपनी इस शक्ति का उपयोग बेहतर विश्‍व का निर्माण करने के लिए करेंगे।

कविता को शांति को बढ़ावा देना चाहिए, लोगों को सार्वभौमिक भाईचारा, सामाजिक सद्भाव और सहिष्णुता बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। कविता सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक शक्तिशाली उत्प्रेरक के रूप में काम कर सकती है।

मैं स्कूलों से कविता पाठ और उसकी सराहना करने को पाठ्यक्रम का अनिवार्य अंग बनाने का आग्रह करता हूँ ।

मैं विश्वविद्यालयों से भी साहित्य, कला और मानविकी शिक्षा को प्रोत्साहित करने का आग्रह करता हूँ। हमें कवियों और लेखकों तथा कलाकारों और गायकों की भी उतनी ही आवश्यकता है जितनी हमें डॉक्टरों, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की आवश्यकता है।

साहित्यट का प्रोत्सािहन भाषाओं को संरक्षित करने और उन्हेंश बढ़ावा देने का भी एक प्रभावशाली माध्य म है और यह कार्य मेरे हृदय के बहुत निकट है।

किसी भी भाषा के संरक्षण या प्रोत्सारहन का सर्वश्रेष्ठट तरीका यह है कि इसे व्याापक रूप से दैनिक जीवन में उपयोग में लाया जाए। अधिक से अधिक लोगों को उनकी अपनी भाषाओं में कविता, कहानी, उपन्याकस या नाटक लिखने के लिए प्रोत्सा हित किया जाना चाहिए।

मैं आशा व्यक्त करता हूँ कि विश्व कवि कांग्रेस जैसे आयोजन आपकी उत्कृष्ट काव्य कृतियों को दुनिया के साथ साझा करने के लिए मंच प्रदान करेगी। साथ ही मुझे पूरा विश्वास है कि ये कार्यक्रम नवोदित कवियों को अन्य कवियों से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित करेगा ।

अंत में, मैं प्रसिद्ध भारतीय कवि मम्मट के कथन से अपने शब्दों को विराम दूंगा। जब उनसे पूछा गया की वे कविता क्यों लिखते हैं तो उन्होंने कहा कि "मैं अपना नाम कमाने और प्रसिद्ध होने के लिए लिखता हूँ। मैं आजीविका अर्जन के लिए लिखता हूँ। लेकिन इन सबसे ऊपर मैं इसलिए लिखता हूँ क्योंकि मेरा विश्वास है कि मैं नकारात्मकता और मानवता के लिए जो कुछ भी अच्छा नहीं है उसे कम करके संसार में बदलाव ला सकता हूँ।"

मैं भी आशा करता हूँ कि व्या पक लोकहित अंतर्निहित, अनदेखे लेकिन सतत प्रेरणास्रोत के रूप में काम करेगा जब आप सभी कविता के रेशमी धागों को बुनना और दुनिया भर के लोगों का ज्ञानवर्धन करना जारी रखेंगे। आप सभी को मेरी शुभकामनाएँ।

धन्यवाद

जय हिन्द