06 अक्टूबर, 2019 को कटक, ओडिशा में उड़िया दैनिक दि समाज के शताब्दी समारोह के अवसर पर सभा में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

कटक, ओडिशा | अक्टूबर 6, 2019

मैं प्रमुख ओड़िया दैनिक, 'द समाज' के शतवार्षिकी समारोह में आप सभी के साथ यहाँ उपस्थित हो कर बहुत खुश हूँ।

सबसे पहले, मैं इस महत्वपूर्ण अवसर पर 'समाज' परिवार को हार्दिक बधाई देता हूँ।

किसी एक संगठन की यात्रा में 100 वर्ष पूरे करना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह पत्रकारिता की उत्कृष्टता के प्रति आपकी प्रतिबद्धता, वस्तुपरक रिपोर्टिंग के प्रति आपके समर्पण और सबसे बढ़कर, ओडिशा के लोगों के बीच आपकी लोकप्रियता का प्रमाण है।

मुझे बताया गया कि 'समाज' का जन्म वर्ष 1919 में पुरी जिले में सत्यावादी से एक साप्ताहिक समाचारपत्र के रूप में ओडिशा के लोगों को सूचित, शिक्षित और सशक्त बनाने के लक्ष्य के साथ और राज्य तथा राष्ट्र के विकास को सुसाध्य करने के लिए हुआ था।

मुझे यह जानकार खुशी हुई कि 'समाज' एक शताब्दी पहले अपनी स्थापना के समय से ही ओडिशा में पत्रकारिता, बौद्धिक कार्य और समाज सेवा का केंद्र बना हुआ है।

मेरा मानना है कि 'समाज' को ओड़िया भाषा का स्वर्ण मानक भी माना जाता है और यह राज्य के साहित्यकारों को सच्ची खुशी देता है, इतनी कि ओडिशा के बुजुर्ग अपने बच्चों को ओड़िया भाषा पर पकड़ बनाने के लिए 'समाज' को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

मैं अपने पत्रकारिता के अधिदेश से आगे बढ़कर काम करने और गरीबों और वंचित वर्गो की सेवा में संलग्न होने के लिए भी समाज की सराहना करता हूं। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि इसके राजस्व के एक बड़े भाग उपयोग आपदाओं से प्रभावित लोगों के कल्याण के लिए किया जाता है। यह वास्तव में एक अनुकरणीय उदाहरण है।

'समाज' के प्रसिद्ध संस्थापक, उत्कलमणि पंडित गोपबंधु दास, एक महान शिक्षक, एक नवजागरण कवि, एक सफल लेखक, एक अनुभवी पत्रकार, एक नि:स्वार्थ सामाजिक कार्यकर्ता, एक विद्वान विधायक, एक अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी और निश्चित रूप से गांधीवादी विचारधाराओं और नैतिक मूल्यों के महान समर्थक थे।

वे एक समर्पित शिक्षाविद भी थे। वे सभी नागरिकों द्वारा अपने 'मौलिक कर्तव्यों' को पूरा किए जाने की आवश्यकता की बात लगातार करते थे। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि उनका प्राचीन भारत के आदर्श 'वसुधैव कुटुम्बकम्' पर भी दृढ़ विश्वास था और उन्होंने अपना जीवन अपने देशवासियों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था।

मुझे आज डॉ सुभाष चन्द्र मिश्रा द्वारा गोपबंधु दास पर लिखित पुस्तक का विमोचन करके भी हर्ष हो रहा है। मुझे आशा है कि यह पुस्तक इस महान व्यक्तित्व की जीवन गाथा को युवा पीढ़ी तक ले जाएगी और एक प्रेरणा के रूप में कार्य करेगी।

मैं अपने दूरदर्शी संस्थापक द्वारा रखी गई नैतिकता, मूल्यों और आचार-नीति की मजबूत नींव पर उत्कृष्ट पत्रकारिता की एक विशाल इमारत बनाने के लिए 'समाज' की सराहना करता हूं।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

वर्ष 1780 में जेम्स ऑगस्टस हिक्की द्वारा भारत के पहले समाचार पत्र 'बंगाल गजट' के प्रकाशन से लेकर अब तक भारत में प्रेस का एक लंबा और शानदार इतिहास रहा है।

प्रेस ने उस समय लोगों को प्रेरित करने और उनकी आकांक्षाओं को एक आवाज़ देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब अंग्रेजों से स्वतंत्रता प्राप्त करने का संघर्ष ज़ोर पकड़ रहा था। इसने विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को स्वतंत्रता के महान उद्देश्य के लिए लड़ने हेतु एक जुट करके एक महान एकीकरणकर्ता की भूमिका निभाई।

प्रेस अंग्रेजों द्वारा लगाए गए कठोर प्रतिबंधों से अविचलित रहा। आपातकाल के अंधकारपूर्ण समय के दौरान एक अस्थायी विचलन को छोड़ दें तो यही दृढ़ भावना, स्वतंत्रता के बाद से ही भारतीय मीडिया की पहचान बनी हुई है।

आज, भारतीय जोशपूर्ण मीडिया का परिदृश्य हजारों पत्रिकाओं और समाचारपत्रों, सैकड़ों टीवी चैनल और अनेकों रेडियो स्टेशन से सुसज्जित है। नि:संदेह, आपके पास सोशल मीडिया भी है जो डिजिटल युग में सूचना के प्रचार-प्रसार का एक प्रमुख माध्यम बन गया है।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

लोकतंत्र लोगों की, लोगों के लिए और लोगों के द्वारा बनाई गई सरकार है। यह सभी नागरिकों को राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने और एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए समान मौका देता है और लोगों को कुछ अविच्छेदय अधिकारों और स्वतंत्रता की गारंटी देता है।

लोकतांत्रिक प्रणाली तभी सफल हो पायेगी जब शासन प्रक्रिया में इसके नागरिकों की व्यापक भागीदारी होगी।

यह भागीदारी तभी सार्थक होगी जब नागरिक जानकार और सुशिक्षित हों। लोकतांत्रिक समाज के लिए सूचना तक पहुंच आवश्यक है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि नागरिक अज्ञानतावश या गलत सूचना से प्रभावित होकर कार्य करने के बजाय जिम्मेदार, सूचित विकल्प अपनाएं।

इस प्रकार सूचना के विश्वसनीय स्रोत लोकतांत्रिक समाज के महत्वपूर्ण घटक हैं।

यहीं पर मीडिया की भूमिका और महत्व निहित है।

मीडिया को लोगों को सूचित, शिक्षित और प्रबुद्ध करना चाहिए। जनमत के निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मीडिया को नागरिकों को सशक्त बनाना होगा और शासकीय प्रणाली में अधिक पारदर्शिता तथा जवाबदेही लाने में मदद करनी होगी। मीडिया को नागरिकों की आवाज को बुलंद करना होगा और विधि निर्माताओं तक उनकी राय पहुंचानी होगी।

लोकतंत्र में सुशासन सुनिश्चित करने में भी मीडिया एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मीडिया के समर्थन से शासन की गतिविधियों के सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं, विशेष रूप से उन गतिविधियों के संबंध में जो विकेंद्रीकरण, भ्रष्टाचार-विरोधी और नीतिगत प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी से संबंधित हैं।

पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से किए गए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए एक मीडिया क्षेत्र की आवश्यकता होती है जो उम्मीदवारों को समान पहुंच प्रदान करता है, और प्रासंगिक मुद्दों की समयबद्ध, निष्पक्ष रिपोटिंग करता है।

मीडिया को लोकतांत्रिक प्रणाली में खामियों को भी उजागर करना होगा, जो अंततः सरकार को रिक्तता और कमियों को पूरा करने में मदद करता है, जिससे प्रणाली अधिक जवाबदेह, उत्तरदायी और नागरिक-अनुकूल बन जाती है।

बिना मीडिया के लोकतंत्र बिना पहिये की एक गाड़ी के समान है।

स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया एक स्वस्थ लोकतंत्र का एक हिस्सा मात्र नहीं बल्कि उसके लिए एक अनिवार्य शर्त भी है। मीडिया को लोकतांत्रिक प्रणाली का चतुर्थ स्तंभ माना गया है--एक स्तंभ जो लोकतंत्र का समर्थन, पालन तथा पोषण करता है और आवश्यकता होने पर सही राह दिखाने में सहायता करता है।

यद्यपि हमारे संविधान में प्रेस की स्वतन्त्रता को एक मौलिक अधिकार के रूप में स्पष्ट रूप से मान्यता नहीं दी गई गई--संविधान सभा की व्यापक वाद-विवादों का अवलोकन यह स्पष्ट करता है कि मीडिया की स्वतंत्रता को अभिव्यक्ति की मौलिक स्वतंत्रता के एक विस्तार के रूप में मानने पर व्यापक सहमति थी।

उसके बाद, उच्चतम न्यायालय के कई निर्णयों ने इस मान्यता को वैधता प्रदान कर दी। महात्मा गांधी ने एक बार कहा था कि "प्रेस की स्वतन्त्रता एक बहुमूल्य विशेषाधिकार है जिसका कोई देश परित्याग नहीं कर सकता।"

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

मीडिया एक राष्ट्रीय संसाधन है जिसका पत्रकार लोक हित में प्रयोग करते हैं।

महात्मा गांधी ने एक बार कहा था कि यह पत्रकार का कर्तव्य है कि वह देश के जनमत को समझे और उसको निडर होकर एक मुखर अभिव्यक्ति प्रदान करे।

इस भारी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए मीडिया को ईमानदार और सत्यप्रिय रहना होगा और, आम आदमी के कल्याण और राष्ट्र की प्रगति को अपनी सभी गतिविधियों के केंद्र में रखते हुए बड़े संयम, जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।

महात्मा गांधी ने यह भी कहा था कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल समाज सेवा होना चाहिए।

पत्रकारिता एक मिशन है।

हालांकि टीआरपी, संचलन के आंकड़े और निवल लाभ, महत्वपूर्ण हैं फिर भी आप उनके अनुसार बिलकुल नहीं चलें। मीडिया को तथ्यों को सनसनीखेज बनाने की प्रवृत्ति को खत्म करना होगा और तथ्यों को निष्पक्ष रूप से तथा दृढ़तापूर्वक एवं तत्परता से प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान देना होगा तथा समाचारों तथा विचारों को आपस में मिलाने से बचना होगा।

मीडिया को स्थापित पूर्वाग्रहों से छुटकारा पाना होगा और युवाओं, महिलाओं, किसानों तथा उद्यमियों की अपेक्षाओं को एक आवाज़ देना होगा। मीडिया को नैतिक दिग्दर्शक और समाज की अंतरात्मा की रूप में कार्य करना होगा तथा सभी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए आक्रामक अभियान चलाने होंगे। आपको मूक की आवाज बनना होगा और असहायों की सहायता करनी होगी।

मीडिया को यथास्थिति में बदलाव लाने के लिए एक माध्यम बनना होगा। इसे सकारात्मक परिवर्तनों को प्रेरित करने के लिए सकारात्मक कहानियों और श्रेष्ठ प्रथाओं पर प्रकाश डालना होगा ताकि उन्हें कहीं और भी दोहराया जा सकता है।

मीडिया को गरीबी से लेकर बीमारी से लेकर जलवायु परिवर्तन तक हमारे समय की ज्वलंत समस्याओं को हल करने में रचनात्मक भूमिका निभानी होगी। स्वच्छ भारत आंदोलन को सफल बनाने में भारतीय मीडिया की उत्कृष्ट भूमिका दुनिया पहले ही देख चुकी है।

प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने 02 अक्तूबर को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर घोषणा की है भारत खुले में शौच मुक्त हो गया है और इस उपलब्धि का काफी श्रेय मीडिया को जाता है।

अब इसे राष्ट्र हित में, 'फिट इंडिया' जैसे और ऐसे मिशन अपनाने होंगे और उन्हें जन आंदोलनों में बदलना होगा। मीडिया को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भाषाओं की रक्षा, संरक्षण और संवर्धन के मामले में भी हाथ बंटाना होगा।

हम तेज़ी से फैल रही सोशल मीडिया के युग में रहते हैं, जिसका एक उप-उत्पाद झूठी खबरें हैं। झूठी खबर के व्यापक खतरे से अब मीडिया की विश्वसनीयता नष्ट होने की आशंका है।

ऐसी परिस्थितियों में, आपको वृत्तांत को अपने नियंत्रण में रखकर झूठी खबरों से प्रभावी ढंग से निपटने और उन्हें असत्य सिद्ध करने के लिए तैयार रहना होगा। आपको झूठी खबरों को नियंत्रित करने के लिए रचनात्मक समाधान निकालने होंगे। आपको उसी जोश के साथ पेड न्यूज से भी निपटना होगा।

मेरे प्यारी बहनों और भाइयों

बेशक हम इलेक्ट्रोनिक और डिजिटल मीडिया के युग में रह रहें हों, प्रिंट मीडिया खासकर भारत में अब भी महत्वपूर्ण है। आंकलनों के अनुसार 2018 में प्रिंट मीडिया का राजस्व 5.6 प्रतिशत बढ़ा है। आने वाले वर्षो के लिए भी विकास का परिदृश्य सकारात्मक ही है।

मैं आशा करता हूं कि भारत में अधिक से अधिक देशी समाचार पत्र शुरू होंगे जो क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देंगे और ग्रामीण क्षेत्रों को समृद्ध बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।

क्षेत्रीय समाचार पत्र न केवल स्थानीय आकांक्षाओं को दर्शाते हैं, ये जनता के ज्यादा करीब भी हैं। आप अपनी विवेकपूर्ण, शीघ्र और सच्ची रिपोर्टिंग के द्वारा सही मायने में भारत के ग्रामीण परिदृश्य को बदल सकते हैं।

मैं आपसे स्थानीय समुदायों से सकारात्मक कहानियों को लेकर उन्हें श्रोताओं/दर्शकों के और बड़े समूह तक पहुंचाने का आग्रह करता हूं। सामुदायिक स्तर पर आप जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कृषि और नवोन्मेष पर सकारात्मक कहानियाँ दे सकते हैं।

आपके प्रयासों से जनता का विश्वास, सामुदायिक चेतना बढ़ेगी और समावेशी और सतत विकास होगा। मुझे विश्वास है कि 'समाज' ओडिशा के लिए एक धरोहर है और यह आने वाले समय में और भी अधिक ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

मैं एक बार फिर से आपको आपके शतवार्षिकी समारोह के अवसर पर बधाई देता हूं।

मैं आपके भविष्य के प्रयासों के लिए आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!

जय हिन्द