05 सितंबर, 2021 को हैदराबाद में एएनबीएआई द्वारा आयोजित 11वें वार्षिक चिकित्सा शिक्षक दिवस पुरस्कार समारोह के अवसर पर सभा में भारत माननीय के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

हैदराबाद | सितम्बर 5, 2021

“सर्वप्रथम, मैं पूर्व राष्ट्रपति और राजनेता-दार्शनिक स्वर्गीय श्री सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती, जिसे हम प्रत्येक वर्ष काफी उपयुक्त रूप से शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं, पर विनीत श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं । इस अवसर पर मैं सभी शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।
इस अवसर पर मैं आज सम्मानित किए जाने वाले सभी शिक्षक पुरस्कार विजेताओं को हार्दिक बधाई देता हूं!
प्रिय बहनों और भाइयों,
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हमारी संस्कृति में गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अपने गुरुओं को श्रद्धा सुमन अर्पित करने की सदियों पुरानी परंपरा रही है। गुरु वह होता है जो नेकी का मार्ग दिखाता है, चरित्र को आकार देता है, ज्ञान और जागृति लाता है, संस्कृति की रक्षा करता है और हमारे भविष्य को बदल देता है। प्राचीन काल से ही गुरु पूर्णिमा हमारी संस्कृति में गुरुओं की भूमिका और उनके प्रति श्रद्वा का प्रतीक है।
इसी प्रकार, शिक्षक दिवस पर हम शिक्षकों के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं और उनका आदर-सत्कार करते हैं और छात्रों के जीवन और करियर को आकार देने में उनके द्वारा निभाई गई परिवर्तनकारी भूमिका के लिए उन्हें सम्मानित करते हैं।
आज, हम यहां शिक्षकों को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में और इससे भी बढ़कर हजारों छात्रों के पेशेवर जीवन को ढालने में उनके योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान करने के लिए एकत्र हुए हैं। । जैसा कि आप सभी भली-भांति जानते हैं, चिकित्सा छात्रों और स्नातकोत्तर चिकित्सकों को सुयोग्य, पेशेवर चिकित्सकों के रूप में तैयार करने के लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा आवश्यक है। तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में, चिकित्सा महाविद्यालयों द्वारा प्रदान की जाने वाली शिक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उनके यहां से उत्तीर्ण होने वाले लोग नवीनतम नैदानिक और उपचार प्रणालियों से अवगत रहें। सार्स-कोव-2 के कारण उत्पन्न हुई विश्वव्यापी महामारी के मद्देनजर यह और अधिक अनिवार्य हो गया है क्योंकि नोवल कोरोना वायरस वैज्ञानिकों से लेकर चिकित्सकों तक सभी के लिए एक नया अनुभव है।
इसके साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि चिकित्सा छात्र उच्च नैतिक और आचार मानकों को आत्मसात करें और उनका अभ्यास करें। उन्हें सदैव नेक कार्य के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए और अपने पेशे और मरीजों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।
मित्रों,
चिकित्सा पेशा मानव जाति के इतिहास में सबसे महान व्यवसायों में से एक है। यह उन प्रमुख सेवाओं में से एक है जो सीधे तौर पर मानव की पीड़ा को कम करती है और लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। अपने सभी कार्यों में 'मानवता के लिए करुणा' के प्रमुख मूल्य को याद रखें। दुविधा में होने पर इसे अपना नैतिक मार्गदर्शक बनाएं और सदैव उच्चतम स्तर की नैतिकता का पालन करें। यदि आप निस्वार्थ समर्पण भावना से सेवा करते हैं, तो आपको असीम और वास्तविक प्रसन्नता मिलती है।
मुझे सूचित किया गया है कि भारत के कई अग्रणी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों का एक शीर्ष संगठन, एसोसिएशन ऑफ नेशनल बोर्ड एक्रेडिटेड इंस्टीट्यूशन (एएनबीएआई) स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने में सरकार के साथ भागीदारी कर रहा है। मैंने पाया है कि एक अतिरिक्त विशेषता यह है कि एएनबीएआई से जुड़े अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई), जो एक स्वायत्त संगठन है और प्रतिष्ठित डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड (डीएनबी) और फेलो नेशनल बोर्ड (एफएनबी) कार्यक्रम आयोजित करता है, द्वारा प्रत्यायित किया जाता है ।
यह वास्तव में सराहनीय है कि निजी अस्पताल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने में सरकार के साथ भागीदारी कर रहे हैं।
हाल ही में, सरकारी जिला अस्पतालों को भी यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉक्टर-रोगी अनुपात में अंतर को दूर करने और देश में विशेषज्ञों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से यह एक बहुत बड़ा प्रयास है। मुझे बताया गया है कि देश में डॉक्टर-मरीज का अनुपात 1:1,456 है, जबकि डब्ल्यूएचओ के मानदंड 1:1000 हैं। इसके अलावा, चिकित्सकों का शहरी-ग्रामीण क्षेत्र अनुपात अत्यधिक विषम है क्योंकि अधिक संख्या में चिकित्सा पेशेवर शहरी क्षेत्रों में कार्य करना चाहते हैं। समय की मांग है कि चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या बढ़ाई जाए और इस संदर्भ में मुझे यह जानकर खुशी है कि सरकार का इरादा प्रत्येक जिले में कम से कम एक चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित करने का है।
अधिक संख्या में चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित करने के अलावा, देश भर में विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अत्याधुनिक बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे का निर्माण करना भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। कोविड-19 विश्वव्यापी महामारी ने बेहतर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया है और मैं राज्य सरकारों से इस पहलू पर विशेष ध्यान देने का आह्वान करता हूं।
प्रिय बहनों और भाइयों
चिकित्सा शिक्षा और उपचार दोनों ही सस्ते और आम आदमी की पहुंच में होने चाहिए। मुझे बताया गया है कि प्रत्येक वर्ष लगभग एक लाख एमबीबीएस स्नातक उत्तीर्ण होते हैं। हालांकि, वे सभी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाएंगे। मुझे सूचित किया गया है कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, राष्ट्रीय बोर्ड ने छात्रों को निजी अस्पतालों में प्रशिक्षण प्राप्त करने की अनुमति देकर एक अवसर प्रदान किया है। मुझे यह जानकर खुशी है कि राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, जो प्रत्येक अस्पताल की आवधिक लेखा-परीक्षा का आयोजन करता है, निजी अस्पतालों में दिए जाने वाले प्रशिक्षण की कड़ी निगरानी करता है।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि एनबीई और एएनबीएआई देश में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा से संबंधित विभिन्न मुद्दों, जैसे एनबीई अस्पतालों में परीक्षकों और निरीक्षकों की संख्या बढ़ाना और मान्यता की वैधता को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष करना, पर मिलकर कार्य कर रहे हैं। सरकारी नियामक और उसके द्वारा नियंत्रित गैर-सरकारी निकायों के बीच टकराव की संभावना सदैव बनी रहती है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि एनबीई और एएनबीएआई के बीच सहभागिता की विशेषता देश में स्वास्थ्य क्षेत्र के व्यापक हित के लिए सहयोग और सम्मिलित रूप से कार्य करना है।
अधिक से अधिक अस्पतालों को शिक्षण कार्य के लिए एनबीई में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करके सरकारी जिला अस्पतालों और टियर- II शहरों में विशिष्ट चिकित्सा देखभाल में सुधार के और अधिक अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
मुझे सूचित किया गया है कि एएनबीएआई ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से एनएमसी और एनबीई द्वारा अभिशासित निजी क्षेत्र के शिक्षकों की मान्यता के लिए एक शिक्षक प्रत्यायन समिति की स्थापना की सिफारिश की है। इससे इन संस्थानों में शिक्षण और अधिगम की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में दीर्घकालिक लाभ होगा।
मुझे यह जानकर भी खुशी हुई कि एएनबीएआई को स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में बायोएथिक्स शिक्षण पर एनबीई-यूनेस्को संचालन समिति में शामिल किया गया है।
मुझे बताया गया है कि एएनबीएआई ने मेडिकल जर्नल्स को कम लागत पर उपलब्ध कराने के लिए समान अधिगम संसाधन (यूएलआर) परियोजना प्रारंभ की है। यह एक स्वागत योग्य पहल है और संपूर्ण चिकित्सा जगत को लाभ पहुंचाने के लिए इसके अखिल भारतीय स्तर पर कार्यान्वयन हेतु इसे नीति आयोग के समक्ष उठाने की योजना सराहनीय है।
जबकि एएनबीएआई देश में डीएनबी सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार से संपर्क कर रहा है, यह नोट करना भी महत्वपूर्ण है कि एनबीई छोटे अस्पतालों में डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू कर रहा है। यह टियर-II और टियर-III शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्तियों को भरने की दिशा में एक दीर्घकालिक उपाय होगा।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि एएनबीएआई और एनबीई इन पुरस्कारों के माध्यम से देश भर के कुछ सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों और संस्थानों के अथक प्रयासों को मान्यता प्रदान करने के लिए एक साथ आगे आए हैं। यह एक अत्यधिक नेक कार्य है। प्रतिष्ठित शिक्षकों और नर्सों के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, एएनबीएआई वार्षिक व्याख्यान और अन्य पुरस्कार अधिक संख्या में लोगों को अकादमिक कार्य के लिए समय समर्पित करने और शिक्षण को अनुसंधान के साथ जोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
मैं एक बार फिर सभी पुरस्कार विजेताओं को हार्दिक बधाई देता हूं। मुझे विश्वास है कि यह सम्मान आप सभी को भारत में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के स्तरों में सुधार के लिए निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित करेगा।

जय हिन्द!”