04 सितंबर, 2021 को हैदराबाद से श्री शारदादेवी नेत्र अस्पताल और अनुसंधान केंद्र में एक नए ब्लॉक का उद्घाटन तथा श्री रामकृष्ण सेवाश्रम के रजत जयंती समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा वर्चुअली दिया गया भाषण

हैदराबाद | सितम्बर 4, 2021

“बहनों और भाइयों,
मुझे श्री रामकृष्ण सेवाश्रम, पावागड़ा के रजत जयंती समारोह में भाग लेकर और श्री शारदादेवी नेत्र अस्पताल और अनुसंधान केंद्र के नए ब्लॉक का उद्घाटन करते हुए अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि यह नया अस्पताल परिसर केवल आंखों की देखभाल तक ही सीमित नहीं होगा अपितु कैंसर का पता लगाने/उपचार शिविर और ईएनटी उपचार शिविर भी प्रारंभ करके अपनी सेवा के दायरे को विस्तृत करेगा।
श्री रामकृष्ण सेवाश्रम के संस्थापक और अध्यक्ष स्वामी जपानंदाजी पिछले चार दशकों से समाज के सबसे गरीब और उपेक्षित वर्गों के लिए गुणवत्तापरक स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत रहे हैं। वर्षों से, उनके और उनकी टीम द्वारा की गई निस्वार्थ सेवा समुदाय में तपेदिक और कुष्ठ रोग को कम करने में सहायक रही है।
मुझे बताया गया है कि शारदा देवी नेत्र अस्पताल ने वर्ष 2000 में अपनी स्थापना के बाद से अब तक 32,000 से अधिक नेत्र शल्य चिकित्सा की है। यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है और स्वामी जपानंदजी और उनकी टीम की प्रतिबद्धता, समर्पण और कड़ी मेहनत का एक प्रमाण है।
मुझे यह जानकर भी काफी प्रसन्नता हो रही है कि श्री रामकृष्ण सेवाश्रम समुदाय की भलाई के लिए कई अन्य कार्यक्रम चला रहा है। इनमें से एक श्री शारदा देवी विजन मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट द्वारा दृष्टिबाधित बच्चों को 'डे-केयर' शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान किया जाना है।
मुझे यह भी बताया गया है कि "वात्सल्य सुधा" के तहत लगभग 100 गरीब बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक नाश्ता खिलाया जाता है और उन्हें संस्कृति, विरासत और देशभक्ति पर स्वस्थ विचारों से अवगत कराया जा रहा है। मैं स्वामी जी को राष्ट्र के लिए उनकी असाधारण और निस्वार्थ सेवा के लिए बधाई देना चाहता हूं।
मैंने अक्सर इस बात पर बल दिया है कि निजी क्षेत्र, सहकारी क्षेत्र, नागरिक समाज संगठनों और गैर सरकारी संगठनों को भी हर क्षेत्र में सरकार के प्रयासों में सहयोग करना चाहिए। यही हमारे राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की कुंजी है। हम सभी को टीम इंडिया के रूप में मिलकर काम करना चाहिए और भारत के लिए और अधिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
प्रिय बहनों और भाइयों,
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनिया भर में कम से कम 2.2 बिलियन लोगों को निकट या दूर दृष्टि दोष है, जिनमें से लगभग 1 बिलियन दृष्टि दोष के मामलों को रोका जा सकता था या उनका उपचार किया जाना शेष है। यह देखा गया कि हालांकि, दृष्टि दोष सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन दृष्टि दोष और अंधेपन से ग्रसित अधिकांश लोग 50 वर्ष से अधिक आयु के हैं।
भारत में, लगभग 68 लाख लोग कम से कम एक आंख में 'कॉर्नियल ब्लाइंडनेस' से पीड़ित हैं; इनमें से 10 लाख लोग दोनों आंखों से अंधेपन का शिकार हैं। 'नेशनल ब्लाइंडनेस एंड विजुअल इम्पेयरमेंट सर्वे, 2019' में यह उल्लेख किया गया है कि 'कॉर्नियल ब्लाइंडनेस' भारत में 50 वर्ष से कम आयु के रोगियों में अंधेपन का प्रमुख कारण है, जो 37.5 प्रतिशत मामलों के लिए उत्तरदायी होने के साथ ही 50 वर्ष से अधिक आयु के रोगियों में अंधेपन का दूसरा प्रमुख कारण है।
वैश्विक स्तर पर, दृष्टि दोष के मुख्य कारण अपवर्तक त्रुटियां, मोतियाबिंद, उम्र से संबंधित मैकुलर डिजेनरेशन, ग्लूकोमा, मधुमेह रेटिनोपैथी, कॉर्नियल ओपेसिटी और ट्रेकोमा हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की दृष्टि संबंधी विश्व रिपोर्ट के अनुसार, वृद्ध होती जनसंख्या, बदलती हुई जीवन-शैली और आंखों की देखभाल तक सीमित पहुंच दृष्टिबाधित लोगों की संख्या में वृद्धि के कुछ मुख्य कारण हैं।
प्रिय बहनों और भाइयों,
परिहार्य अंधेपन को रोकने की सख्त जरूरत है। हमें नेत्र स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैलाने और कम कीमत पर ऐसे नेत्र देखभाल समाधान विकसित करने की आवश्यकता है, जो हमारी ग्रामीण आबादी के लिए भी सुलभ हो। ऐसा करने में निजी क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों में विश्व स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं विकसित करने में बड़ा योगदान दे सकता है।
हम सभी डिजिटल दौर में रह रहे हैं और असंख्य सूचनाएं ऑनलाइन उपलब्ध है। जबकि प्रौद्योगिकी दुनिया भर में लोगों को अभूतपूर्व तौर पर लाभान्वित कर रही है, हालांकि, हर चीज की तरह इसके अपने फायदे और नुकसान भी हैं। जब हम बच्चों की बात करते हैं, तो उनके लिए बहुत कुछ बदल गया है, अब उन्हें प्रत्येक चीज, चाहे वह किताबें हों, खेल हों, गतिविधियां हों या दोस्तों से जुड़ना हो, एक क्लिक करने पर सुलभ होती है।
वर्तमान विश्व-व्यापी महामारी के दौरान, ये डिजिटल उपकरण छात्रों के लिए निर्बाध तौर पर अपनी शिक्षा जारी रखने में सहायक रहे हैं। इसका दूसरा और प्रतिकूल पहलू यह है कि बच्चों में गैजेट की लत बढ़ रही है और इस मुद्दे का समाधान माता-पिता और शिक्षकों द्वारा किए जाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही ऐसा माना जा रहा है कि स्क्रीन टाइम बढ़ने की वजह से बच्चों में आंखों की थकान, आंखों का सूखापन और जलन जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। इसलिए, प्रौद्योगिकी का उपयोग करते समय, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या प्रौद्योगिकी पर अत्यधिक निर्भरता को बढ़ावा न मिले। इसलिए, हमें डिजिटल उपकरणों के उपयोग को विनियमित करने और बच्चों के मामले में इस तथ्य के प्रति विशेष रूप से सचेत रहने की आवश्यकता है।
आगे चलकर अधिकांश चीजें डिजिटल हो जाएंगी, इसलिए यह जरूरी है कि हम अपने स्वास्थ्य पर डिजिटलीकरण के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के तरीके खोजें।
प्रिय बहनों और भाइयों,
हमारे दृष्टिबाधित मित्रों को जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और हम सभी को उनकी कठिनाइयों को कम करने और चुनौतियों से उबरने तथा जीवन को सुकर बनाने में उनकी सहायता करने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए।
मैं सरकार और निजी क्षेत्र से भी दिव्यांगजन अनुकूल बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की अपील करता हूं क्योंकि इससे उन्हे बड़े पैमाने पर लाभ होगा। प्रत्येक सार्वजनिक भवन और जनोपयोगी सेवा स्थलो को दिव्यांगजन सुविधाओं से सुसज्जित किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, नेत्रहीनों को आसानी से आवागमन करने में मदद करने के लिए सार्वजनिक और आवासीय भवनों में स्पर्शनीय फ़र्श स्थापित किया जाना चाहिए।
सरकारी क्षेत्र की तरह, निजी क्षेत्र को भी आरक्षण को लागू करके दृष्टिबाधित और अन्य दिव्यांगजनों को सक्रिय तौर पर रोजगार प्रदान करना चाहिए।
प्रिय बहनों और भाइयों,
किसी को दृष्टि का उपहार देना सबसे नेक कार्यों में से एक है। कई लोग विभिन्न कारणों से आगे आकर अपनी अपने नेत्र करने से हिचकिचाते हैं। कॉर्निया डोनेशन को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि देश में 'कॉर्नियल डोनर' की मांग बहुत अधिक है। मैं सभी से आगे आने और मृत्यु के बाद अपने नेत्र दान करने का संकल्प लेने का आह्वान करना चाहता हूं।
मैं एक बार पुन: स्वामी जपानंदाजी को उनके द्वारा वंचितों के लिए किए जा रहे अद्भुत कार्य के लिए बधाई देना चाहता हूं। उन्हें और उनके प्रतिष्ठान को मेरी शुभकामनाएं।
जय हिन्द!”