04 मार्च, 2021 को तिरुपति में आईआईटी तिरुपति के संस्थान दिवस के अवसर पर इसके छात्रों और कर्मचारियों को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया संबोधन

तिरुपति | मार्च 4, 2021

“बहनों और भाइयों,
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुपति के छठे संस्थान दिवस के अवसर पर आप सभी के बीच आकर मुझे अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है।
लगभग छह वर्ष पूर्व मुझे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुपति; भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, तिरुपति और आईआईआईटी, श्री सिटी के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला था। इन संस्थाओं द्वारा की गई अत्यधिक प्रगति को देखकर मुझे प्रसन्नता हो रही है।
भगवान वेंकटेश्वर के निवास स्थान तिरुपति के पवित्र शहर का मेरे मन में सदैव एक विशेष स्थान रहा है। यह शहर पवित्रता, समर्पण और आंतरिक शांति की अनुभूति कराता है। इस दैवीय स्थान पर अब मुझे और भी अधिक सुखद अहसास होता है क्योंकि यहां पर अवस्थित विभिन्न संस्थानों के साथ-साथ इस संस्थान के द्वारा 'ज्ञान यज्ञ' अर्थात् ज्ञान का सृजन और प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
प्रिय मित्रो,
यह आपका सौभाग्य है कि हम एक ऐसे स्थान पर हैं जहां आप आधुनिक और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का अध्ययन करते हुए स्वयं को भारत की प्राचीन संस्कृति से जोड़े रख सकते हैं। मैं चाहता हूं कि आप यहाँ न केवल 'क्वांटम फिजिक्स' और ‘आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस’ का अध्ययन करें, अपितु हमारी समृद्ध विरासत की जानकारी भी प्राप्त करें।
हमारा अतीत बहुत ही शानदार रहा है। एक दौर में भारत को ‘विश्व गुरु’ कहा जाता था। हमारे यहां नालंदा, तक्षशिला और पुष्पगिरी जैसे महान संस्थान थे, जिनमें समग्र एशिया से विद्यार्थी आते थे। हमें उस प्राचीन वैभव को पुन: प्राप्त करना होगा। हमें एक बार पुन: भारत को ज्ञान और शिक्षा का केन्द्र बनाना होगा।
यह वर्तमान दौर की चुनौती है। यह एक ऐसी चुनौती है जिसके लिए हमें कड़ी मेहनत और चुस्त तरीके से कार्य करना होगा। इस चुनौती से पार पाने के लिए हमें अपनी क्षमताओं का दोहन करना होगा। सतत अभ्यास से और विश्व में जो भी सर्वश्रेष्ठ है, उनसे सीखकर उनका अपने अनुकूल परिष्करण करना होगा।
इसी कारण सरकर विश्व-स्तरीय शैक्षिक संस्थानों की स्थापना पर ध्यान केन्द्रित कर रही है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि गत छह वर्षों में, छह नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, सात नए भारतीय प्रबंध संस्थानों और 16 नए भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों की स्थापना की गई है।
परंतु, किसी संस्थान की स्थापना करना केवल एक शुरुआत है। वह रातों-रात विश्व स्तरीय संस्थान नहीं बन सकता। इसके लिए संकाय के तौर पर सेवारत शीर्ष अकादमिक नेतृत्व द्वारा बेहतरीन योजना बनाया जाना और उनका ईमानदारी से कार्यान्वयन किया जाना आवश्यक है। उसके लिए विद्यार्थियों हेतु अध्ययन, अन्वेषण और प्रयोग के लिए अनुकूल परिवेश निर्मित किया जाना आवश्यक है।
आपको यहाँ पर प्रारंभ में ही बेहतर स्थिति प्राप्त हो जाती है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों ने गत कुछ दशकों के दौरान 'ब्रांड नेम' हासिल कर लिया है और सभी इसे गुणवत्तापरक शिक्षा के संस्थान के तौर पर गिनते हैं। हालांकि, इससे आप सभी का उत्तरदायित्व भी अत्यधिक बढ़ जाता है, क्योंकि आपको अन्य भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों द्वारा प्रस्थापित उच्च मानकों को बनाए रखना होगा।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुपति सहित तीसरी पीढ़ी के अन्य भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों का विकास तीव्र गति से हो रहा है। मुझे यह जानकर भी प्रसन्नता है कि आप अधुनातन अवसंरचना का सृजन करते हुए नवोन्मेषी परियोजनाएं प्रारंभ कर रहे हैं। यह वास्तव में प्रसन्नता का विषय है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुपति की 'ट्रांजिट कैम्पस' परियोजना को टिकाऊ निर्माण सामग्रियों और प्रौद्योगिकियों का प्रयोग करके पर्यावरण-अनुकूल परिसरों की अभिकल्पना एवं निर्माण के लिए 'गृह' और 'हुडको' पुरस्कार जैसे संधारणीय स्थापत्य के दो प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। यह प्रसन्नता का विषय है कि 2500 विद्यार्थियों, 250 संकाय सदस्यों और 275 कर्मचारियों के लिए वर्ष 2024 तक विश्व-स्तरीय अवसंरचना वाले स्थायी परिसर के निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
मुझे सूचित किया गया है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में से सबसे नया संस्थान होते हुए भी इसने कोविड-19 महामारी के विरुद्ध राष्ट्र के युद्ध में भाग लिया है और इसने 'थर्मल एयर स्टरलाइजर, एन-95 के समतुल्य पुन: उपयोग में लाये जाने वाले रेस्पीरेटर्स, चेस्ट एक्स-रे इमेजिंग का प्रयोग करके सामान्य, न्यूमोनिया और कोविड-19 रोगियों के वर्गीकरण करने हेतु लर्निंग की प्रक्रिया पर आधारित एक गहन प्रविधि तथा मास्क, सेनिटाइजर्स और सामाजिक दूरी इत्यादि के बारे में जागरूकता बढ़ाने वाले 'सर्वाइव कोविड-19' नामक एक शैक्षणिक गेम का सफलतापूर्वक विकास किया है।
मुझे प्रसन्नता है कि आप लोगों ने राष्ट्रीय आवश्यकताओं और स्थानीय प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता के विभिन्न क्षेत्रों का अभिनिर्धारण किया है। 'नेशनल मिशन ऑफ साइबर फिजिकल सिस्टम्स' के अंतर्गत ‘टेक्नॉलोजी इनोवेशन हब’ के तौर पर नामित होने पर मैं आप सभी की सराहना करता हूं।
मेरा विश्वास है कि आप भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, तिरुपति के सहयोग से खाद्य प्रौद्योगिकी, परिशुद्ध कृषि, ऊर्जा भंडारण और एटॉमिक मॉलीक्यूलर एंड आप्टिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में शीघ्र ही उत्कृष्ट केन्द्रों के तौर पर उभरकर सामने आएंगे। तिरुपति भारत का एकमात्र ऐसा शहर है, जहां एक ही शहर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर), दोनों अवस्थित हैं। इससे उनके लिए परस्पर सहयोग से कार्य और सहक्रियाशील प्रगति कर पाना संभव होगा।
प्रत्येक वर्ष हमारे देश में 15 लाख इंजीनियर बनते हैं, किन्तु एक सर्वेक्षण से पता चला है कि उनमें से केवल 7 प्रतिशत व्यक्ति ही मूलत: इंजीनियरिंग से जुड़े रोजगार के योग्य पाए जाते हैं। हमें उन्हें अधिक से अधिक संख्या में रोजगार के योग्य बनाना होगा और इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें रोजगार के लिए अपेक्षित कौशल प्रदान किए जाएं।
हमें शिक्षा और उद्योग जगत के बीच सुदृढ़ सम्पर्क स्थापित करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
प्रिय बहनों और भाइयों,
आज भारत, विश्व का सबसे युवा देश है और इसकी 62 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या कार्यरत आयु समूह (15-59 वर्ष) में है। हमारी जनसंख्या की औसत आयु 30 वर्ष से कम है। इस युवा ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र निर्माण के लिए सकारात्मक तौर पर किए जाने की आवश्यकता है। युवा तभी परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकेंगे, जब उन्हें समुचित कौशल, प्रेरक माहौल और उचित अवसर प्रदान किए जाएं।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान एक नए उभरते हुए और महत्वाकांक्षी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह नया भारत लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए नए अवसरों की खोज कर रहा है। यह नया भारत आत्म-निर्भर बनने के लिए अपनी मुख्य क्षमताओं का दोहन कर रहा है। यह नया भारत राष्ट्रों के समूह में अपना समुचित स्थान पुन: प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह सपना हमारी शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाकर ही पूरा हो सकता है। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में नई शैक्षिक संरचना के लिए एक सुविचारित रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
हमें शीघ्र ही इस नीति को कार्यान्वित करने की जरूरत है। इस परिप्रेक्ष्य में हमें प्रस्तावित मौलिक परिवर्तनों को समझना चाहिए। इसमें लचीलेपन, अंतर-विषयक दृष्टिकोण, अधिगम, अनुसंधान, मूल्यांकन और प्रत्यायन पर अधिक बल दिया गया है। इन सबसे बढ़कर, नई शिक्षा नीति में उत्कृष्टता के स्तर को उत्तरोत्तर बढ़ाने पर सर्वाधिक बल दिया गया है।
सरकार द्वारा पलक्कड़, जम्मू, भिलाई, गोवा और धारवाड़ में पांच नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों सहित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुपति की स्थापना शिक्षा की सुलभता बढ़ाने और एक ऐसा परितंत्र विकसित करने के लिए की गई थी, जो भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ा सके।
वास्तव में, यह हमारे उन नेताओं की दूरदर्शिता थी, जिन्होंने सत्तर वर्ष पूर्व भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के प्रथम समूह की स्थापना की थी।
यह अब गर्व का विषय है कि 5 भारतीय प्रौद्यागिकी संस्थानों को विश्व के 500 शीर्ष रैकिंग वाले संस्थानों में स्थान दिया गया है।
आज के विश्व में प्रौद्योगिकीय उन्नति किसी देश की विकास संरचना में एक निर्णायक कारक बन गया है।
हमें सतत तौर पर और तीव्र गति से प्रौद्योगिकी उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ना होगा। इसके साथ ही, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से हमारे लोगों के जीवन-स्तर की गुणवत्ता में सुधार आए।
हालांकि, प्रौद्योगिकी प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखते हुए हमें जीवन को प्रभावित करने वाले पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को लेकर भी सतर्क रहना होगा।
भारतीय प्रौद्यागिकी संस्थान, तिरुपति एक गति-निर्धारक संस्थान की भूमिका में कार्य करते हुए सक्रिय नेटवर्किंग के माध्यम से अकादमिक अनुसंधान और नवोन्मेषी नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुपति में प्रारंभ से ही बी.टेक. पाठ्यक्रम में सभी आईआईटी की तुलना में सर्वाधिक (18 प्रतिशत) छात्राओं का नामांकन होता रहा है।
प्रिय विद्यार्थियों,
मुझे विश्वास है कि यहां से प्राप्त ज्ञान और कौशलों से न केवल स्वयं की नियति का निर्धारण करेंगे, अपितु राष्ट्र के उत्थान के लिए आवश्यक परिवर्तन में भी अपना योगदान देंगे। परंतु, भावनात्मक और सामाजिक कौशलों का भी अपना महत्व है, जो आपको तेजी से बदलते हुए विश्व में स्वयं को ढालने की योग्यता प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, आपको अपने ज्ञान को सामयिक तौर पर प्रासंगिक भी बनाते रहना होगा।
कृपया स्वामी विवेकानन्द की कही हुई बातों को याद रखिएगा,
“"स्वतंत्र होने का साहस करो, जहां तक तुम्हारे विचार ले जाते हैं वहां तक जाने का साहस करो और उन विचारों को अपने जीवन में उतारने का साहस करो।""
मैं अब तक की आपकी उपलब्धियों के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुपति के निदेशक, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को बधाई देता हूं और मेरा विश्वास है कि आप आगामी वर्षों में राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान जारी रखेंगे।

जय हिन्द.”